Rio-de-Janeiro
कई अदरक इलाक़ों में व्यापक रूप से अपनाई गई व्यावसायिक किस्म — बड़े, भरे कंद और ज़्यादातर देसी किस्मों से कम रेशा, जिसे ताज़ा अदरक का व्यापार पसंद करता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अदरक
- प्रकार
- रोपण सामग्री
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 220–230 दिन
- अपेक्षित उपज
- 200–230 क्विंटल/हेक्टेयर (ताज़ा कंद)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- कोई विकसित/अधिसूचित किस्म नहीं — ब्राज़ील से लाई गई विदेशी किस्म, जो किसानों द्वारा अपनाए जाने से भारत में प्रचलित हुई; कोई संस्थान या जारी वर्ष लागू नहीं होता
इस किस्म के बारे में
रियो-डी-जनेरियो ब्राज़ील से लाई गई एक विदेशी अदरक किस्म है, जो अब भारत की सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली गैर-देसी किस्मों में से एक बन चुकी है — एक फ़ेच की गई Agri Farming किस्म-सूची इसे किसानों में सबसे लोकप्रिय विदेशी किस्म बताती है। इसके कंद बड़े व हल्के-भूरे (buff) रंग की त्वचा वाले होते हैं, तुलनात्मक रूप से कम रेशा (लगभग 5.19%) रखते हैं, और आमतौर पर परखी गई भारतीय अदरक किस्मों में वाष्पशील तेल (2.31%) व ओलिओरेज़िन (9.06%) सामग्री में सबसे ऊँची किस्मों में गिनी जाती है, जो इसे तेज़ स्वाद व तीखेपन की प्रतिष्ठा देता है। बताई गई उपज-क्षमता 25–35 टन/हेक्टेयर तक जाती है, कर्नाटक के एक पहाड़ी क्षेत्र तुलना परीक्षण में 28.04 टन/हेक्टेयर ताज़ा कंद दर्ज हुआ; सूखी वसूली कम, 16–18% है, और — कई भारतीय देसी किस्मों के उलट — यह मुख्यतः ताज़ा-अदरक व्यापार के लिए उगाई जाती है, सोंठ (सूखा अदरक) उत्पादन के लिए नहीं।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
220–230 दिन
अपेक्षित उपज
200–230 क्विंटल/हेक्टेयर (ताज़ा कंद)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- आमतौर पर परखी गई भारतीय अदरक किस्मों में सबसे ऊँची वाष्पशील तेल (2.31%) व ओलिओरेज़िन (9.06%) रेटिंग में से एक, जो तेज़ स्वाद व तीखापन देती है
- बड़ा, कम-रेशे वाला कंद, ताज़ा-अदरक व्यापार के लिए उपयुक्त
- ऊँची बताई गई उपज-क्षमता (25–35 टन/हेक्टेयर), कर्नाटक के एक पहाड़ी क्षेत्र परीक्षण में 28.04 टन/हेक्टेयर ताज़ा कंद दर्ज
ध्यान रखने योग्य बातें
- सोर्स की गई उपज (25–35 टन/हेक्टेयर, यानी 250–350 क्विंटल/हेक्टेयर, एक परीक्षण में 28.04 टन/हेक्टेयर) इस रिकॉर्ड की अपनी 200–230 क्विंटल/हेक्टेयर उपज-सीमा से काफ़ी ऊपर है — इस रिकॉर्ड के आँकड़े को विरोधाभास की बजाय रूढ़िवादी अनुमान मानें
- यह एक विकसित की गई किस्म की बजाय आयातित व्यापारिक किस्म है, इसलिए इस चरण में किसी स्रोत ने सामान्य अदरक-फ़सल प्रथा से आगे किस्म-विशिष्ट पकने का आँकड़ा या रोग-प्रतिरोध रेटिंग नहीं दी; इस रिकॉर्ड की 220–230 दिन की अवधि व कंद-सड़न diseaseResistance इसी सामान्य प्रथा पर आधारित हैं, रियो-डी-जनेरियो-विशिष्ट परीक्षण पर नहीं
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- कर्नाटक
- केरल
- हिमाचल प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रियो-डी-जनेरियो अदरक कहाँ से आई?
यह किसी भारतीय संस्थान द्वारा विकसित किस्म नहीं, बल्कि ब्राज़ील से लाई गई विदेशी किस्म है — यह किसी औपचारिक रिलीज़ की बजाय व्यापक किसान अपनाव से भारत में प्रचलित हुई।
इसकी उपज इस रिकॉर्ड की बताई गई 200–230 क्विंटल/हेक्टेयर से कैसे तुलना करती है?
सोर्स की गई रिपोर्ट इसे ज़्यादा, 250–350 क्विंटल/हेक्टेयर (25–35 टन/हेक्टेयर) बताती हैं, कर्नाटक के एक परीक्षण में 280 क्विंटल/हेक्टेयर दर्ज — इस रिकॉर्ड का आँकड़ा त्रुटि की बजाय रूढ़िवादी अनुमान जैसा लगता है।
स्रोत: Ginger Farming Income (Adrak) — Agri Farming. संपादकीय नीति.
