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मूंगफलीखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

ICGV 91114

इक्रीसैट से जारी — मौसम के बीच सूखे के दौर में भी फली उपज बचाए रखने के लिए ख़ास तौर पर बनाई गई, जो बारानी मूंगफली की ज़मीन का सबसे बड़ा जोखिम है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि100–105 दिन
अपेक्षित उपज22–26 क्विंटल/हेक्टेयर (फली सहित)
उपयुक्त मिट्टीबलुई / हल्की मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
मूंगफली
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
100–105 दिन
अपेक्षित उपज
22–26 क्विंटल/हेक्टेयर (फली सहित)
उपयुक्त मिट्टी
बलुई / हल्की मिट्टी
जारी
2006 में इक्रीसैट द्वारा जारी, आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में किसान-सहभागी चयन से पहचानी गई; 2007 से ओडिशा में 'देवी' नाम से अधिसूचित

इस किस्म के बारे में

आईसीजीवी 91114 — ओडिशा में 'देवी' नाम से बेची जाती है — इक्रीसैट में आईसीजीवी 86055 × आईसीजीवी 86533 के संकरण से बल्क-पेडिग्री विधि द्वारा विकसित एक अगेती, सूखा-सहनशील स्पैनिश-बंच मूंगफली किस्म है। इसे आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में किसान-सहभागी किस्म चयन के ज़रिए पहचाना गया, 2006 में खेती के लिए जारी किया गया, और बाद में 2007 से ओडिशा के सूखा-प्रवण पश्चिमी ज़िलों में अधिसूचित व लोकप्रिय बनाया गया। दर्ज खेत परीक्षणों में इसने मौसम के बीच सूखे के दौर में भी पुरानी चेक किस्म टीएमवी-2 से बेहतर फली उपज बनाए रखी — जो बारानी मूंगफली की ज़मीन का सबसे बड़ा जोख़िम है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि100–105 दिन
    उपज क्षमता22–26 क्विंटल/हेक्टेयर (फली सहित)
    रोग-प्रतिरोधअच्छी सूखा सहनशीलता
    मिट्टीबलुई / हल्की मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

100–105 दिन

अपेक्षित उपज

22–26 क्विंटल/हेक्टेयर (फली सहित)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • अच्छी सूखा सहनशीलता

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • अनंतपुर ज़िले के खेत परीक्षणों में तीन मौसमों — जिसमें एक सूखे का साल भी शामिल — में पुरानी चेक किस्म टीएमवी-2 से लगातार बेहतर प्रदर्शन दर्ज
  • अगेती अवधि (100–105 दिन) कम व अनिश्चित वर्षा वाले इलाक़ों के लिए उपयुक्त, जहाँ लंबी अवधि की किस्म में फली भरने से पहले मिट्टी की नमी ख़त्म होने का जोख़िम रहता है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बाद के मार्कर-सहायता प्राप्त प्रजनन कार्य से पहले यह रतुआ व पछेती पत्ती धब्बा रोग के प्रति संवेदनशील दर्ज की गई थी — भारी पत्ती-रोग दबाव वाले मौसम में सुरक्षात्मक छिड़काव ज़रूरी

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • गुजरात
  • आंध्र प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ओडिशा में आईसीजीवी 91114 को 'देवी' क्यों कहा जाता है?

इक्रीसैट ने इसे 2006 में खेती के लिए जारी किया; ओडिशा ने बाद में 2007 से इसी किस्म को स्थानीय नाम 'देवी' से अधिसूचित व लोकप्रिय बनाया, इसलिए दोनों नाम एक ही मूंगफली किस्म को दर्शाते हैं।

आईसीजीवी 91114 कम वर्षा वाले इलाक़ों के लिए किस वजह से उपयुक्त है?

इसकी अगेती अवधि व दर्ज सूखा-सहनशीलता — बहु-वर्षीय खेत परीक्षणों में इसने मौसम के बीच सूखे के दौर में भी पुरानी चेक किस्म टीएमवी-2 से बेहतर फली उपज बनाए रखी, यही वजह है कि यह आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में तेज़ी से फैली और फिर ओडिशा के सूखा-प्रवण इलाक़ों में भी पहुँची।

स्रोत: Marker-assisted introgression of a QTL region to improve rust resistance in three elite and popular varieties of peanut — PMC, A promising groundnut variety ICGV 91114 for low rainfall areas — LEISA India, Groundnut variety tolerant to drought and foliar fungal disease with superior haulm quality released in Odisha, India — CGIAR. संपादकीय नीति.