Konkan Bahadoli
कोंकण (महाराष्ट्र) की बहुत उगाई जाने वाली जामुन। पंजाब के कलम-परीक्षण में इसकी कलम सबसे अच्छी चढ़ी (83.7% और 82.8%) और सबसे पहले अंकुर आए। गुठली बड़ी है, गूदा 80%, और गोधरा में चार किस्मों में TSS सबसे कम।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- फल कब से
- कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)
- अपेक्षित उपज
- प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में पैदावार में गोमा प्रियंका और CISH J-37 से कम
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- सोडिक मिट्टी के प्रति मध्यम सहनशील (अंक 0.42); करनाल के परीक्षण में तने का क्षेत्रफल 33% घटा
- जारी
- क्षेत्रीय फल अनुसंधान केंद्र, वेंगुर्ला, महाराष्ट्र
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
कोंकण बहादोली महाराष्ट्र की कोंकण पट्टी की लोकप्रिय नामी जामुन है, और इसकी ताक़त नर्सरी में है। पंजाब के अबोहर में दो साल के कलम-परीक्षण में इसकी कलम सबसे अच्छी चढ़ी (83.7% और 82.8%) और बची (76.6% और 73.9%), और अंकुर सबसे पहले, 16.6 और 15.3 दिन में, आए। वहाँ मार्च में कलम बाँधना सबसे अच्छा रहा। इसका फल बड़ी गुठली वाला है। ICAR-IIHR, बेंगलुरु में 21 जीनोटाइप में इसका फल सबसे बड़ा (13.16 ग्राम) था और गुठली भी सबसे भारी, 3.05 ग्राम। गोधरा में इसमें गूदे का हिस्सा 80% था, जबकि गोमा प्रियंका में 85% से ऊपर, और चार किस्मों में TSS सबसे कम रहा। करनाल के सोडिक-मिट्टी परीक्षण में यह मध्यम सहनशील (अंक 0.42) थी।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
अपने पौधों की कलम बाँधते हैं या नर्सरी से ख़रीदते हैं और कम से कम नाकामी चाहिए तो कोंकण बहादोली चुनिए। पंजाब के परीक्षण में चार किस्मों में इसकी कलम सबसे अच्छी चढ़ी। कोंकण पट्टी की नामी जामुन भी यही है, इसलिए वहाँ स्थानीय सलाह आसानी से मिलती है। बड़ी गुठली, 80% गूदा और गोधरा में चारों में सबसे कम TSS मानकर चलिए। प्रति पेड़ ज़्यादा फल और मिठास के लिए गोमा प्रियंका लीजिए। सोडिक ज़मीन पर CISH J-37 लीजिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयवसंत (फरवरी–मार्च) या मानसून (जुलाई–अगस्त)। मानसून बेहतर है (TNAU)।
- दूरी10 × 10 मीटर (TNAU)। गोधरा के परीक्षण में ये किस्में 5 × 5 मीटर पर लगाई गई थीं।
- बुवाई विधिकलमी या चश्मा चढ़ा पौधा लगाइए, बीज से उगा जामुन नहीं, 1 × 1 × 1 मीटर के गड्ढे में, जिसमें 75% ऊपरी मिट्टी और 25% सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट भरी हो (TNAU)।
- सिंचाईछोटे पेड़ों को साल में 8 से 10 सिंचाई चाहिए। पूरे बढ़े पेड़ को इसकी लगभग आधी, जो मई और जून में फल पकते समय दी जाती है। पतझड़ और सर्दी में सिर्फ़ तब सींचिए जब मिट्टी सूखी हो (TNAU)।
- कटाईजून–जुलाई में हाथ से तोड़िए। पका फल पेड़ पर टिकता नहीं, इसलिए पकते ही तोड़िए (TNAU)।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी उपज मिलती है। पेड़ खारापन और जलभराव सह लेता है। बहुत भारी या बहुत हल्की बलुई मिट्टी में खेती फ़ायदे की नहीं (TNAU)।
जलवायु
- जलवायु
- उष्ण और उपोष्ण, निचले हिमालय में 1,300 मीटर तक। फूल आने और फल लगने के समय सूखा मौसम चाहिए, और जल्दी की बारिश पकने में मदद करती है (TNAU)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- चार किस्मों में कलम की सबसे अच्छी सफलता (83.7% और 82.8%), इसलिए नर्सरी और किसान के कम पौधे मरते हैं
- कलम के बाद सबसे पहले अंकुर, लगभग 16 दिन में
- बड़ा फल: ICAR-IIHR में 21 जीनोटाइप में सबसे बड़ा (13.16 ग्राम)
ध्यान रखने योग्य बातें
- 21 जीनोटाइप में गुठली सबसे भारी (3.05 ग्राम) है और गोधरा में गूदा 80%, यानी गोमा प्रियंका और CISH J-42 से कम।
- गोधरा में चारों किस्मों में TSS सबसे कम था।
- सोडिक मिट्टी के प्रति मध्यम सहनशील (0.42), CISH J-37 (0.76) से काफ़ी पीछे।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
अबोहर के कलम-परीक्षण में क्या मिला
दक्षिण-पश्चिम पंजाब (अबोहर) में दो साल तक चार जामुन किस्मों की कलम बाँधी गई: कोंकण बहादोली, गोमा प्रियंका, CISH J-37 और CISH J-42।
कोंकण बहादोली दोनों साल पहले नंबर पर रही। कलम की सफलता 83.7% और 82.8% रही, और बचाव 76.6% और 73.9%। अंकुर 16.6 और 15.3 दिन में आए, और इसमें सबसे ज़्यादा अंकुर और पत्तियाँ, सबसे ऊँची कलमें और सबसे अच्छा क्लोरोफ़िल सूचकांक मिला। गोमा प्रियंका उसके बाद रही। मार्च में कलम बाँधना सबसे अच्छा रहा।
इसे मार्गदर्शन मानिए, नियम नहीं। यह एक जगह और दो साल का नतीजा है। TNAU दूसरे इलाक़ों के लिए दूसरे मौसम बताता है, कम बारिश वाले इलाक़ों में जुलाई–अगस्त। अपने मौसम में पहले 20 पौधों की कलम बाँधिए, गिनिए कितने चढ़ीं, तब जाकर बढ़ाइए।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| CISH J-37 | सोडिक या क्षारीय ज़मीन पर जामुन, जहाँ बाक़ी किस्मों की बढ़वार ज़्यादा घटती है | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार दूसरे नंबर पर | उत्तर प्रदेश |
| CISH J-42 (seedless type) | ताज़ा बिक्री या गूदे के लिए बिना गुठली का जामुन, साधारण गैर-सोडिक ज़मीन पर | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार सबसे कम | उत्तर प्रदेश |
| Goma Priyanka | साधारण मिट्टी पर घनी रोपाई के लिए अच्छी पैदावार वाला छोटा जामुन का पेड़ | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में; ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है | 10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किग्रा (ICAR) | गुजरात, महाराष्ट्र |
| Konkan Bahadoliयही पेज | ऐसा जामुन जिसमें कलम कम मरती है, नर्सरी और पहली बार लगाने वालों के लिए | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में पैदावार में गोमा प्रियंका और CISH J-37 से कम | महाराष्ट्र, कर्नाटक |
| Narendra Jamun-6 | पूर्वी उत्तर प्रदेश की जामुन, जिसे फल देते हुए देखने के बाद ही लगाइए | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | उत्तर प्रदेश |
| Rajendra Jamun-1 | बिहार की जामुन, जिसे वह पेड़ देखकर और फल-गूदे की जाँच करके ही लगाइए | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | बिहार |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरजामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोंकण बहादोली का फल 25–28 ग्राम का होता है, जैसा कुछ वेबसाइटें कहती हैं?
हमें सिर्फ़ एक नापा हुआ आँकड़ा मिला, 13.16 ग्राम, ICAR-IIHR, बेंगलुरु से (2017 और 2018, 21 जीनोटाइप)। उस अध्ययन में यही सबसे बड़ा था। फल का आकार जगह, खाद-पानी और साल के साथ बदलता है, इसलिए अपने फल ख़ुद तौलिए और किसी वेबसाइट के आँकड़े पर बिक्री मत कीजिए।
क्या गूदे या जूस के लिए कोंकण बहादोली अच्छी है?
सबसे अच्छी नहीं। 21 जीनोटाइप में इसकी गुठली सबसे भारी (3.05 ग्राम) है और गोधरा में गूदा 80%। CISH J-42 में 92% से ऊपर था और गोमा प्रियंका में 85% से ऊपर। हर 100 किलो फल पर कोंकण बहादोली से 5 से 12 किलो कम गूदा मिलता है। यह बड़े फल की ताज़ा बिक्री के लिए ज़्यादा ठीक बैठती है।
कोंकण बहादोली की कलम कब बाँधना सबसे अच्छा है?
यह जगह पर निर्भर है। अबोहर (दक्षिण-पश्चिम पंजाब) के परीक्षण में मार्च सबसे अच्छा रहा। TNAU कम बारिश वाले इलाक़ों में जुलाई–अगस्त में चश्मा चढ़ाने को कहता है, या जहाँ बारिश जल्दी और तेज़ आती हो वहाँ मई–जून में। एक साल का 10–14 मिलीमीटर मोटा बीजू पौधा (रूटस्टॉक) लीजिए, और पहले अपने इलाक़े में छोटी खेप आज़माइए।
सोडिक मिट्टी में कोंकण बहादोली कैसी है?
सिर्फ़ मध्यम सहनशील। करनाल में इसका अंक 0.42 रहा और तने का क्षेत्रफल 33% घटा, चारों में सबसे बड़ा नुक़सान। CISH J-37 का अंक 0.76 था और उसमें 18% घटा। आपकी मिट्टी सोडिक है तो कोंकण बहादोली की अच्छी कलम इसकी भरपाई नहीं करती।
कलमी कोंकण बहादोली पेड़ कब तक फल देता है?
TNAU के अनुसार कलमी जामुन 6–7 साल में फलता है, जबकि बीज वाला 8–10 साल में, और व्यावसायिक फल रोपाई के 8–10 साल बाद शुरू होता है। कोंकण बहादोली के लिए अलग उम्र कोई स्रोत नहीं देता। आम तौर पर तुड़ाई जून–जुलाई में होती है।
स्रोत: Jamun — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Impact of systematic improvement in jamun cultivars on yield and quality of fruits — Indian Journal of Arid Horticulture (ICAR e-Pubs), Physiological traits underlying sodicity tolerance in jamun cultivars — PeerJ / PMC, Effect of grafting on success and survivability of jamun varieties — Journal of Horticultural Sciences (ICAR-IIHR). संपादकीय नीति.
