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जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी)खरीफ़खुली-परागितअंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026

Goma Priyanka

ICAR-CHES गोधरा (गुजरात) की किस्म, जो 2010 में तैयार हुई। गोधरा में चार किस्मों में प्रति पेड़ सबसे ज़्यादा पैदावार और सबसे ऊँचा TSS रहा। ICAR के अनुसार 85–90% गूदा, घनी रोपाई के लिए छोटा पेड़, और 10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किलो।

सीज़नखरीफ़
फल कब सेकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में; ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है
अपेक्षित उपज10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किग्रा (ICAR)
उपयुक्त मिट्टीलवणीय / कमज़ोर

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
फल कब से
कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में; ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है
अपेक्षित उपज
10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किग्रा (ICAR)
उपयुक्त मिट्टी
लवणीय / कमज़ोर
रोग-प्रतिरोध
सोडिक मिट्टी के प्रति मध्यम सहनशील (अंक 0.45); करनाल के परीक्षण में शुद्ध प्रकाश-संश्लेषण 37% गिरा
जारी
ICAR-केंद्रीय बागवानी प्रायोगिक केंद्र (CHES), गोधरा, गुजरात

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

गोमा प्रियंका ICAR-CHES गोधरा, गुजरात में 2010 में तैयार हुई। वहाँ जामुन पर काम 2002 में शुरू हुआ था। ICAR इसे भरपूर और नियमित फलने वाली, तुलनात्मक रूप से छोटे क़द की किस्म बताता है, जो घनी रोपाई के लिए ठीक है। इसमें 85–90% गूदा और हल्का बीज होता है, और 10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किलो फल। गोधरा के परीक्षण (सिर्फ़ बारिश, नौ साल के पेड़, 5 × 5 मीटर) में चार किस्मों में इसकी प्रति पेड़ पैदावार और TSS सबसे ऊँचे रहे। इसके फल और गूदे का वज़न CISH J-37 जितना रहा। करनाल की सोडिक मिट्टी में यह सिर्फ़ मध्यम सहनशील (अंक 0.45) थी। इसका शुद्ध प्रकाश-संश्लेषण 37% गिरा, चारों में सबसे बड़ी गिरावट।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

गोधरा में परखी चार किस्मों में सबसे ज़्यादा प्रति पेड़ पैदावार और सबसे मीठा फल चाहिए, और ज़मीन बहुत सोडिक नहीं है, तो गोमा प्रियंका चुनिए। पेड़ छोटा है, इसलिए घनी रोपाई में बैठता है। ICAR 85–90% गूदा बताता है। मिट्टी सोडिक है तो CISH J-37 लीजिए। कलम की सफलता सबसे ज़रूरी है तो कोंकण बहादोली लीजिए, क्योंकि पंजाब के परीक्षण में उसकी कलम सबसे अच्छी चढ़ी। गूदे का सबसे ऊँचा हिस्सा चाहिए तभी CISH J-42 लीजिए।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयवसंत (फरवरी–मार्च) या मानसून (जुलाई–अगस्त)। मानसून बेहतर है (TNAU)।
  • दूरी10 × 10 मीटर (TNAU)। गोधरा के परीक्षण में ये किस्में 5 × 5 मीटर पर लगाई गई थीं।
  • बुवाई विधिकलमी या चश्मा चढ़ा पौधा लगाइए, बीज से उगा जामुन नहीं, 1 × 1 × 1 मीटर के गड्ढे में, जिसमें 75% ऊपरी मिट्टी और 25% सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट भरी हो (TNAU)।
  • सिंचाईछोटे पेड़ों को साल में 8 से 10 सिंचाई चाहिए। पूरे बढ़े पेड़ को इसकी लगभग आधी, जो मई और जून में फल पकते समय दी जाती है। पतझड़ और सर्दी में सिर्फ़ तब सींचिए जब मिट्टी सूखी हो (TNAU)।
  • कटाईजून–जुलाई में हाथ से तोड़िए। पका फल पेड़ पर टिकता नहीं, इसलिए पकते ही तोड़िए (TNAU)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी उपज मिलती है। पेड़ खारापन और जलभराव सह लेता है। बहुत भारी या बहुत हल्की बलुई मिट्टी में खेती फ़ायदे की नहीं (TNAU)।

जलवायु

जलवायु
उष्ण और उपोष्ण, निचले हिमालय में 1,300 मीटर तक। फूल आने और फल लगने के समय सूखा मौसम चाहिए, और जल्दी की बारिश पकने में मदद करती है (TNAU)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • गोधरा में चार किस्मों में प्रति पेड़ सबसे ज़्यादा पैदावार और सबसे ऊँचा TSS
  • 85–90% गूदा और हल्का बीज (ICAR)
  • तुलनात्मक रूप से छोटा पेड़, घनी रोपाई के लिए ठीक (ICAR)

ध्यान रखने योग्य बातें

  • सोडिक मिट्टी के प्रति सिर्फ़ मध्यम सहनशील (0.45)। करनाल में शुद्ध प्रकाश-संश्लेषण 37% गिरा, इसलिए वहाँ CISH J-37 बेहतर पसंद है।
  • ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है, इसलिए पूरा फलन देर से आता है।
  • ICAR का पन्ना फल का वज़न या पकने का महीना नहीं देता।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • गुजरात
  • महाराष्ट्र

घनी रोपाई: हिसाब क्या कहता है, और क्या छिपाता है

ICAR के अनुसार गोमा प्रियंका छोटे क़द का पेड़ है जो घनी रोपाई के लिए ठीक है। दूरी बदलने से क्या बदलता है, सीधे हिसाब से देखिए।

गोधरा के परीक्षण की तरह 5 × 5 मीटर पर एक हेक्टेयर में 400 पेड़ आते हैं। TNAU की 10 × 10 मीटर पर 100। हर पेड़ ICAR के 50–70 किलो देता तो 5 × 5 मीटर पर 20–28 टन प्रति हेक्टेयर बैठता और 10 × 10 मीटर पर 5–7 टन।

ये हिसाब हैं, प्रकाशित पैदावार नहीं। गोमा प्रियंका के लिए प्रति हेक्टेयर पैदावार कोई स्रोत नहीं देता। जो पेड़ आपस में छूते हैं वे हर एक कम दे सकते हैं, और 50–70 किलो 10वें साल का आँकड़ा है।

घनी रोपाई का मतलब यह भी है कि 100 की जगह 400 पेड़ों की छँटाई, तुड़ाई और फल मक्खी से बचाव करना होगा। चुनने से पहले मज़दूरी और पौधों (100 की जगह 400) का हिसाब जोड़ लीजिए।

रोपाई सामग्री कहाँ से आती है

यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।

दूसरी किस्मों से तुलना

जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
CISH J-37सोडिक या क्षारीय ज़मीन पर जामुन, जहाँ बाक़ी किस्मों की बढ़वार ज़्यादा घटती हैकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार दूसरे नंबर परउत्तर प्रदेश
CISH J-42 (seedless type)ताज़ा बिक्री या गूदे के लिए बिना गुठली का जामुन, साधारण गैर-सोडिक ज़मीन परकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार सबसे कमउत्तर प्रदेश
Goma Priyankaयही पेजसाधारण मिट्टी पर घनी रोपाई के लिए अच्छी पैदावार वाला छोटा जामुन का पेड़कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में; ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किग्रा (ICAR)गुजरात, महाराष्ट्र
Konkan Bahadoliऐसा जामुन जिसमें कलम कम मरती है, नर्सरी और पहली बार लगाने वालों के लिएकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में पैदावार में गोमा प्रियंका और CISH J-37 से कममहाराष्ट्र, कर्नाटक
Narendra Jamun-6पूर्वी उत्तर प्रदेश की जामुन, जिसे फल देते हुए देखने के बाद ही लगाइएकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींउत्तर प्रदेश
Rajendra Jamun-1बिहार की जामुन, जिसे वह पेड़ देखकर और फल-गूदे की जाँच करके ही लगाइएकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींबिहार

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोमा प्रियंका कब पूरी फ़सल देती है?

ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो का आँकड़ा 10वें साल के बाद का है। TNAU के अनुसार कलमी जामुन 6–7 साल में फलता है और व्यावसायिक फल रोपाई के 8–10 साल बाद शुरू होता है। गोधरा के परीक्षण में नौ साल के पेड़ नापे गए थे। इसलिए पूरी फ़सल से पहले कई साल की देखभाल का ख़र्च जोड़कर चलिए।

गोमा प्रियंका के लिए कौन-सी दूरी रखूँ?

ICAR इसे घनी रोपाई के लिए ठीक कहता है पर कोई संख्या नहीं देता। गोधरा के परीक्षण में 5 × 5 मीटर रखा गया था, और TNAU जामुन के लिए आम दूरी 10 × 10 मीटर बताता है। 5 × 5 मीटर से तभी शुरू कीजिए जब घने बाग़ की छँटाई और देखभाल कर सकें, और कम मेहनत वाली खुली रोपाई चाहिए तो 10 × 10 मीटर रखिए।

क्या गोमा प्रियंका सोडिक या खारी ज़मीन के लिए ठीक है?

यह सिर्फ़ मध्यम सहनशील है। करनाल में इसका अंक 0.45 रहा जबकि CISH J-37 का 0.76, और इसका शुद्ध प्रकाश-संश्लेषण 37% गिरा। सोडिक ज़मीन के लिए CISH J-37 चुनिए। साधारण मिट्टी के लिए गोधरा में गोमा प्रियंका की ज़्यादा पैदावार और TSS ज़्यादा मायने रखते हैं।

'85–90% गूदा' का किलो में क्या मतलब है?

100 किलो फल से लगभग 85–90 किलो गूदा मिलता है, बाक़ी छिलका और गुठली। यह कोंकण बहादोली (80%) से ज़्यादा और CISH J-42 (92% से ऊपर) से कम है। ICAR का पन्ना यह सीमा देता है, फल का वज़न नहीं।

क्या गोमा प्रियंका के लिए बताई गई 2.5–3.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की आमदनी भरोसे लायक़ है?

इसे संकेत मानिए, वादा नहीं। ICAR की ख़बर यह आँकड़ा पूरे बढ़े पेड़ों के लिए देती है, पर उसके पीछे का भाव, प्रति हेक्टेयर पैदावार या लागत नहीं बताती। इसके भरोसे योजना बनाने से पहले मंडी भाव टूल और अपने 50–70 किलो प्रति पेड़ के अनुमान से हिसाब लगाइए, और अपनी लागत घटाइए।

स्रोत: Jamun — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Impact of systematic improvement in jamun cultivars on yield and quality of fruits — Indian Journal of Arid Horticulture (ICAR e-Pubs), Physiological traits underlying sodicity tolerance in jamun cultivars — PeerJ / PMC, Effect of grafting on success and survivability of jamun varieties — Journal of Horticultural Sciences (ICAR-IIHR). संपादकीय नीति.