CISH J-37
ICAR-CISH लखनऊ की चुनी हुई किस्म। ICAR-CSSRI करनाल के दो साल के सोडिक-मिट्टी परीक्षण में चार किस्मों में अकेली यही सहनशील (अंक 0.76) आँकी गई। गोधरा में इसके पेड़ सबसे बड़े बढ़े और पैदावार में गोमा प्रियंका के बाद दूसरे नंबर पर रही।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- फल कब से
- कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)
- अपेक्षित उपज
- प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार दूसरे नंबर पर
- उपयुक्त मिट्टी
- लवणीय / कमज़ोर
- रोग-प्रतिरोध
- करनाल के परीक्षण में सोडिक मिट्टी के प्रति सहनशील (अंक 0.76) आँकी गई; बाक़ी तीन किस्में सिर्फ़ मध्यम सहनशील थीं
- जारी
- ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), लखनऊ, उत्तर प्रदेश
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
CISH J-37 ICAR-CISH, लखनऊ की जामुन की चुनी हुई किस्म है। दो शोध-पत्र इसकी तुलना गोमा प्रियंका, कोंकण बहादोली और CISH J-42 से करते हैं। ICAR-CSSRI करनाल में कलमी छोटे पौधे दो साल सोडिक मिट्टी (pH 8.45–9.11, ESP 18–40%) में खड़े रहे। CISH J-37 अकेली सहनशील आँकी गई, अंक 0.76, जबकि बाक़ी का अंक 0.36–0.45 रहा। इसके तने का क्षेत्रफल 18% घटा, जबकि बाक़ी में 22–33%। CHES गोधरा में, बारिश के भरोसे, नौ साल के J-37 पेड़ सबसे ऊँचे और सबसे ज़्यादा फैले बढ़े। प्रति पेड़ पैदावार में ये गोमा प्रियंका के बाद दूसरे नंबर पर रहे। फल और गूदे का वज़न गोमा प्रियंका जितना रहा और TSS दूसरा सबसे ऊँचा। अम्लता चारों में सबसे ज़्यादा, 0.44%, रही। किसी भी शोध-पत्र में J-37 के लिए प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा नहीं है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
आपकी ज़मीन सोडिक या क्षारीय है तो CISH J-37 चुनिए। करनाल के परीक्षण में चार किस्मों में अकेली यही सहनशील आँकी गई। गोधरा में इसके फल और गूदे का वज़न गोमा प्रियंका जितना रहा और पैदावार गोमा के बाद दूसरे नंबर पर। साधारण ज़मीन पर छोटे पेड़ से सबसे ज़्यादा पैदावार चाहिए तो गोमा प्रियंका लीजिए। पैदावार या मिट्टी सहने से ज़्यादा गूदे का हिस्सा (92% से ऊपर) मायने रखता है तो ही CISH J-42 लीजिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयवसंत (फरवरी–मार्च) या मानसून (जुलाई–अगस्त)। मानसून बेहतर है (TNAU)।
- दूरी10 × 10 मीटर (TNAU)। गोधरा के परीक्षण में ये किस्में 5 × 5 मीटर पर लगाई गई थीं।
- बुवाई विधिकलमी या चश्मा चढ़ा पौधा लगाइए, बीज से उगा जामुन नहीं, 1 × 1 × 1 मीटर के गड्ढे में, जिसमें 75% ऊपरी मिट्टी और 25% सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट भरी हो (TNAU)।
- सिंचाईछोटे पेड़ों को साल में 8 से 10 सिंचाई चाहिए। पूरे बढ़े पेड़ को इसकी लगभग आधी, जो मई और जून में फल पकते समय दी जाती है। पतझड़ और सर्दी में सिर्फ़ तब सींचिए जब मिट्टी सूखी हो (TNAU)।
- कटाईजून–जुलाई में हाथ से तोड़िए। पका फल पेड़ पर टिकता नहीं, इसलिए पकते ही तोड़िए (TNAU)।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी उपज मिलती है। पेड़ खारापन और जलभराव सह लेता है। बहुत भारी या बहुत हल्की बलुई मिट्टी में खेती फ़ायदे की नहीं (TNAU)।
जलवायु
- जलवायु
- उष्ण और उपोष्ण, निचले हिमालय में 1,300 मीटर तक। फूल आने और फल लगने के समय सूखा मौसम चाहिए, और जल्दी की बारिश पकने में मदद करती है (TNAU)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- सोडिक मिट्टी के प्रति सहनशील आँकी गई (अंक 0.76), करनाल में परखी चार किस्मों में सबसे अच्छी
- गोधरा में फल और गूदे का वज़न गोमा प्रियंका के बराबर
- गोधरा में चारों में पैदावार और TSS, दोनों में दूसरे नंबर पर
ध्यान रखने योग्य बातें
- गोधरा में पेड़ सबसे ऊँचे और सबसे चौड़े बढ़े, इसलिए गोमा प्रियंका से ज़्यादा जगह दीजिए, जो मध्यम ऊँचाई की रहती है।
- चारों में अम्लता सबसे ज़्यादा थी (0.44%)।
- प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं है, और गोधरा में गोमा प्रियंका की पैदावार ज़्यादा रही।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
सोडिक-मिट्टी का परीक्षण क्या बताता है, और क्या नहीं
यह परीक्षण 2018 से 2020 तक ICAR-CSSRI, करनाल में चला। एक साल के कलमी पौधे सोडिक मिट्टी में खड़े थे, जिसका pH ऊपर के एक मीटर में 8.45–9.11 और ESP (विनिमेय सोडियम प्रतिशत) 18–40% था। समस्या-रहित मिट्टी का ESP 8–17% था।
CISH J-37 का अंक 0.76 रहा और उसे सहनशील आँका गया। गोमा प्रियंका (0.45), कोंकण बहादोली (0.42) और CISH J-42 (0.36) मध्यम सहनशील रहीं। पौधे छोटे थे, और लेखक कहते हैं कि सोडिक ज़मीन पर उन्होंने फल की पैदावार या गुणवत्ता नहीं नापी।
इसलिए पहले अपनी मिट्टी जँचवाइए। मिट्टी जाँच प्रयोगशाला से 0–30, 30–60 और 60–100 सेंटीमीटर पर pH और ESP निकलवाइए। आपके आँकड़े परीक्षण के क़रीब हैं तो J-37 सबसे ज़्यादा प्रमाण वाली पसंद है। बहुत ख़राब हैं तो वहाँ किसी ने इसे परखा नहीं है, इसलिए कुछ ही पौधों से शुरू कीजिए।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| CISH J-37यही पेज | सोडिक या क्षारीय ज़मीन पर जामुन, जहाँ बाक़ी किस्मों की बढ़वार ज़्यादा घटती है | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार दूसरे नंबर पर | उत्तर प्रदेश |
| CISH J-42 (seedless type) | ताज़ा बिक्री या गूदे के लिए बिना गुठली का जामुन, साधारण गैर-सोडिक ज़मीन पर | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार सबसे कम | उत्तर प्रदेश |
| Goma Priyanka | साधारण मिट्टी पर घनी रोपाई के लिए अच्छी पैदावार वाला छोटा जामुन का पेड़ | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में; ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है | 10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किग्रा (ICAR) | गुजरात, महाराष्ट्र |
| Konkan Bahadoli | ऐसा जामुन जिसमें कलम कम मरती है, नर्सरी और पहली बार लगाने वालों के लिए | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में पैदावार में गोमा प्रियंका और CISH J-37 से कम | महाराष्ट्र, कर्नाटक |
| Narendra Jamun-6 | पूर्वी उत्तर प्रदेश की जामुन, जिसे फल देते हुए देखने के बाद ही लगाइए | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | उत्तर प्रदेश |
| Rajendra Jamun-1 | बिहार की जामुन, जिसे वह पेड़ देखकर और फल-गूदे की जाँच करके ही लगाइए | कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है) | अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | बिहार |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरजामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 'सहनशील' का मतलब है कि CISH J-37 हर सोडिक मिट्टी में सुरक्षित है?
नहीं। यह सबसे कम प्रभावित हुई, बिना प्रभाव के नहीं। करनाल में इसके तने का क्षेत्रफल फिर भी 18% घटा, शुद्ध प्रकाश-संश्लेषण लगभग 18% गिरा, और पत्तियों में सोडियम 86% बढ़ा। लेखक कहते हैं कि कोई भी किस्म ऊँचे दर्जे की सहनशील नहीं थी। उन्होंने सोडिक मिट्टी में फल की पैदावार भी नहीं नापी।
पैदावार में CISH J-37 और गोमा प्रियंका की तुलना कैसी है?
गोधरा में सिर्फ़ बारिश के भरोसे, गोमा प्रियंका ने दोनों साल प्रति पेड़ सबसे ज़्यादा पैदावार दी। CISH J-37 दूसरे नंबर पर रही और CISH J-42 सबसे पीछे। शोध-पत्र के सार में प्रति पेड़ किलो के आँकड़े नहीं हैं। फल और गूदे का वज़न दोनों का लगभग बराबर रहा।
CISH J-37 को कितनी जगह चाहिए?
गोमा प्रियंका से ज़्यादा। गोधरा में J-37 के पेड़ चारों में सबसे ऊँचे और सबसे ज़्यादा फैले थे। TNAU आम तौर पर जामुन के लिए 10 × 10 मीटर बताता है, और गोधरा के परीक्षण में 5 × 5 मीटर रखा गया था। J-37 के लिए अलग दूरी कोई स्रोत नहीं देता, इसलिए देखते रहिए कि आपके पेड़ कितने चौड़े होते हैं।
क्या CISH J-37 बिना गुठली का जामुन है?
कोई स्रोत इसे बिना गुठली का नहीं कहता। उसी संस्थान की बिना गुठली वाली किस्म CISH J-42 है, जिसमें गोधरा में 92% से ऊपर गूदा था। J-37 गूदे के वज़न में गोमा प्रियंका के बराबर रही, और हमारे पास उसके गूदे के हिस्से का कोई आँकड़ा नहीं है।
कलमी CISH J-37 पौधा कब फल देना शुरू करता है?
TNAU के अनुसार कलमी या चश्मा चढ़ा जामुन 6–7 साल में फल देता है और रोपाई के 8–10 साल बाद व्यावसायिक फल शुरू होता है। J-37 के लिए अलग उम्र कोई स्रोत नहीं देता। गोधरा का परीक्षण नौ साल के पेड़ों पर था, इसलिए लंबे इंतज़ार का हिसाब रखिए।
स्रोत: Jamun — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Impact of systematic improvement in jamun cultivars on yield and quality of fruits — Indian Journal of Arid Horticulture (ICAR e-Pubs), Physiological traits underlying sodicity tolerance in jamun cultivars — PeerJ / PMC, Effect of grafting on success and survivability of jamun varieties — Journal of Horticultural Sciences (ICAR-IIHR). संपादकीय नीति.
