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जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी)खरीफ़खुली-परागितअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Narendra Jamun-6

नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फ़ैज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) में की गई चयन, जिसका नाम नरेंद्र जामुन 6 रखा गया। हम जिन स्रोतों तक पहुँचे उनमें इसके लिए फल का वज़न, गूदे का हिस्सा, TSS, पैदावार या सोडिक-मिट्टी का कोई नतीजा प्रकाशित नहीं है।

सीज़नखरीफ़
फल कब सेकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)
अपेक्षित उपजअलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
फल कब से
कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)
अपेक्षित उपज
अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं
जारी
नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

नरेंद्र जामुन-6 नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फ़ैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश की चुनी हुई किस्म है। भारतीय जामुन पर एक लेख के अनुसार विश्वविद्यालय ने अच्छे गुणों वाला एक चयन ढूँढा और उसका नाम नरेंद्र जामुन 6 रखा। हमें इसके लिए नापा हुआ फल का वज़न, गूदे का हिस्सा, TSS या प्रति पेड़ पैदावार नहीं मिली, और सोडिक-मिट्टी का कोई नतीजा भी नहीं। यह गोधरा, करनाल और पंजाब के परीक्षणों की चार किस्मों में नहीं है। इसलिए हम इसे गोमा प्रियंका, कोंकण बहादोली या CISH चयनों के मुक़ाबले क्रम में नहीं रख सकते। हम इतना ज़रूर दे सकते हैं कि पौधा ख़रीदने से पहले उसे कैसे जाँचें।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

नरेंद्र जामुन-6 तभी चुनिए जब उत्तर प्रदेश में खेती करते हों और विश्वविद्यालय या पास के बाग़ में फल देता पेड़ देख चुके हों। साथ ही फल का आकार, गुठली और स्वाद पसंद आया हो। इसके पक्ष में परीक्षण के आँकड़े नहीं हैं। उसी राज्य में प्रमाण वाली फ़सल चाहिए तो लखनऊ की CISH J-37 के पास परीक्षण के आँकड़े हैं (करनाल, गोधरा), और गोधरा के परीक्षण में सबसे ज़्यादा पैदावार गोमा प्रियंका की रही। कलमी पौधे माँगिए, बीज वाले नहीं।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयवसंत (फरवरी–मार्च) या मानसून (जुलाई–अगस्त)। मानसून बेहतर है (TNAU)।
  • दूरी10 × 10 मीटर (TNAU)। गोधरा के परीक्षण में ये किस्में 5 × 5 मीटर पर लगाई गई थीं।
  • बुवाई विधिकलमी या चश्मा चढ़ा पौधा लगाइए, बीज से उगा जामुन नहीं, 1 × 1 × 1 मीटर के गड्ढे में, जिसमें 75% ऊपरी मिट्टी और 25% सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट भरी हो (TNAU)।
  • सिंचाईछोटे पेड़ों को साल में 8 से 10 सिंचाई चाहिए। पूरे बढ़े पेड़ को इसकी लगभग आधी, जो मई और जून में फल पकते समय दी जाती है। पतझड़ और सर्दी में सिर्फ़ तब सींचिए जब मिट्टी सूखी हो (TNAU)।
  • कटाईजून–जुलाई में हाथ से तोड़िए। पका फल पेड़ पर टिकता नहीं, इसलिए पकते ही तोड़िए (TNAU)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी उपज मिलती है। पेड़ खारापन और जलभराव सह लेता है। बहुत भारी या बहुत हल्की बलुई मिट्टी में खेती फ़ायदे की नहीं (TNAU)।

जलवायु

जलवायु
उष्ण और उपोष्ण, निचले हिमालय में 1,300 मीटर तक। फूल आने और फल लगने के समय सूखा मौसम चाहिए, और जल्दी की बारिश पकने में मदद करती है (TNAU)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • उत्तर प्रदेश के एक विश्वविद्यालय की चयन, उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए
  • नाम वाली और नरेंद्र देव विश्वविद्यालय तक खोजी जा सकने वाली, इसलिए स्रोत से फल देते माँ-पेड़ के बारे में पूछ सकते हैं

ध्यान रखने योग्य बातें

  • गोमा प्रियंका और CISH चयनों के उलट, इसका नापा हुआ फल का वज़न, गूदे का हिस्सा, TSS या पैदावार प्रकाशित नहीं है।
  • एक लेख कहता है कि इसे आम तौर पर बीज से बढ़ाया जाता है। TNAU बीज वाले जामुन के ख़िलाफ़ सलाह देता है क्योंकि वह देर से फलता है (8–10 साल, जबकि कलमी 6–7 साल)।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश

पैसे देने से पहले पूछिए कि पौधा कैसे बना

एक लेख कहता है कि नरेंद्र जामुन 6 को आम तौर पर बीज से बढ़ाया जाता है। यह मायने रखता है। TNAU कहता है कि जामुन के लिए बीज ठीक नहीं, क्योंकि फल देर से आता है: बीज वाले पेड़ में 8–10 साल, जबकि कलमी या चश्मा चढ़े में 6–7 साल।

बीज का पौधा माँ-पेड़ से अलग भी निकल सकता है, इसलिए जो फल आपने देखा वही न मिले। नर्सरी से तीन बातें पूछिए: यह पौधा चश्मा चढ़ाकर या कलम से बना है, किस नामी माँ-पेड़ से, और क्या वह पेड़ फल के साथ दिखा सकते हैं।

TNAU की विधि एक साल के 10–14 मिलीमीटर मोटे बीजू पौधे पर चश्मा चढ़ाना है, कम बारिश वाले इलाक़ों में जुलाई–अगस्त में, या जहाँ बारिश जल्दी और तेज़ आती हो वहाँ मई–जून में। बिल पर किस्म, माँ-पेड़ और तारीख़ लिखवाइए।

रोपाई सामग्री कहाँ से आती है

यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।

दूसरी किस्मों से तुलना

जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
CISH J-37सोडिक या क्षारीय ज़मीन पर जामुन, जहाँ बाक़ी किस्मों की बढ़वार ज़्यादा घटती हैकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार दूसरे नंबर परउत्तर प्रदेश
CISH J-42 (seedless type)ताज़ा बिक्री या गूदे के लिए बिना गुठली का जामुन, साधारण गैर-सोडिक ज़मीन परकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में चार किस्मों में पैदावार सबसे कमउत्तर प्रदेश
Goma Priyankaसाधारण मिट्टी पर घनी रोपाई के लिए अच्छी पैदावार वाला छोटा जामुन का पेड़कलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में; ICAR का प्रति पेड़ 50–70 किलो 10वें साल से है10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किग्रा (ICAR)गुजरात, महाराष्ट्र
Konkan Bahadoliऐसा जामुन जिसमें कलम कम मरती है, नर्सरी और पहली बार लगाने वालों के लिएकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; गोधरा में पैदावार में गोमा प्रियंका और CISH J-37 से कममहाराष्ट्र, कर्नाटक
Narendra Jamun-6यही पेजपूर्वी उत्तर प्रदेश की जामुन, जिसे फल देते हुए देखने के बाद ही लगाइएकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींउत्तर प्रदेश
Rajendra Jamun-1बिहार की जामुन, जिसे वह पेड़ देखकर और फल-गूदे की जाँच करके ही लगाइएकलमी पौधा: पहला फल लगभग 4–7 साल में (गाइडों में फ़र्क़ है; TNAU 6–7 साल कहता है)अलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींबिहार

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

जामुन (इंडियन ब्लैकबेरी) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नरेंद्र जामुन-6 कहाँ चुनी गई?

नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फ़ैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश में। भारतीय जामुन पर एक लेख के अनुसार विश्वविद्यालय को अच्छे गुणों वाला एक चयन मिला और उसका नाम नरेंद्र जामुन 6 रखा गया। हमें कोई जारी करने का साल या अधिसूचना नहीं मिली, इसलिए विश्वविद्यालय से उसका अपना रिकॉर्ड माँगिए।

क्या नरेंद्र जामुन-6 की पैदावार या फल-गुणवत्ता का आँकड़ा है?

हम जिन स्रोतों तक पहुँचे उनमें नहीं। हमारे पढ़े किसी शोध-पत्र में इसका फल का वज़न, गूदे का हिस्सा, TSS या प्रति पेड़ किलो नहीं है। तुलना के लिए, गोमा प्रियंका के पास ICAR का 10वें साल से प्रति पेड़ 50–70 किलो और 85–90% गूदा है। आँकड़ों के बिना नरेंद्र जामुन-6 को फल देते पेड़ पर परखिए।

क्या नरेंद्र जामुन-6 को बीज से उगा सकते हैं?

उगा सकते हैं, पर TNAU मना करता है। बीज वाला जामुन 8–10 साल में फलता है, कलमी या चश्मा चढ़ा 6–7 साल में, और बीज के पौधे माँ-पेड़ से अलग निकल सकते हैं। चश्मा चढ़ा या कलमी पौधा ख़रीदिए, बिल पर माँ-पेड़ का नाम लिखवाकर।

नरेंद्र जामुन-6 की तुलना CISH J-37 से कैसे होती है, जो उत्तर प्रदेश की ही है?

J-37 के नतीजे प्रकाशित हैं, नरेंद्र जामुन-6 के नहीं। J-37 करनाल में सोडिक मिट्टी के प्रति सहनशील आँकी गई अकेली किस्म थी (0.76) और गोधरा में पैदावार में दूसरे नंबर पर। नरेंद्र जामुन-6 के पीछे सिर्फ़ विश्वविद्यालय का नाम है। प्रमाण वाली पसंद चाहिए तो J-37 है। स्थानीय चयन चाहिए तो पहले कुछ पेड़ लगाइए।

स्रोत: Jamun — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Impact of systematic improvement in jamun cultivars on yield and quality of fruits — Indian Journal of Arid Horticulture (ICAR e-Pubs), Physiological traits underlying sodicity tolerance in jamun cultivars — PeerJ / PMC, Effect of grafting on success and survivability of jamun varieties — Journal of Horticultural Sciences (ICAR-IIHR). संपादकीय नीति.