CSV 27
एक ओपन-पॉलिनेटेड खरीफ़ क़िस्म, हाइब्रिड नहीं — इस सीज़न की फ़सल से बचाया गया बीज अगले सीज़न बिना हाइब्रिड जैसी तेज़ उपज-गिरावट के दोबारा बोया जा सकता है, भारत के सभी ज्वार उगाने वाले क्षेत्रों के लिए आधिकारिक रूप से अनुशंसित। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- ज्वार
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 112–118 दिन
- अपेक्षित उपज
- 26–28 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- चिकनी / काली मिट्टी
- जारी
- ज्वार अनुसंधान निदेशालय (डीएसआर), हैदराबाद — 2012 में जारी, अधिसूचना S.O. 1708(E) दिनांक 26.07.2012
इस किस्म के बारे में
सीएसवी 27 (प्रजनन कोड एसपीवी 1870) एक ओपन-पॉलिनेटेड खरीफ़ दाना ज्वार क़िस्म है, जो (GJ 38 × Indore 12)-2-1-2-1 क्रॉस से प्रजनित हुई और 2012 में अखिल भारतीय समन्वित ज्वार अनुसंधान परियोजना के तहत जारी हुई, जिसे ज्वार अनुसंधान निदेशालय (डीएसआर), हैदराबाद में विकसित किया गया। आधिकारिक परीक्षण डेटा इसे पीली-हरी मिडरिब, सेमी-कॉम्पैक्ट सिमेट्रिक पैनिकल व स्लेटी-पीले बड़े दाने वाली बारानी खरीफ़ क़िस्म बताता है, जो दाना-फफूंद प्रतिरोधी व नमी-तनाव सहनशील है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
112–118 दिन
अपेक्षित उपज
26–28 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
ध्यान रखने योग्य बातें
- 2026-08-15 को सुधारा गया: आधिकारिक एआईसीआरपी परीक्षण रिकॉर्ड (सीधे-प्राप्त millets.res.in PDF, अधिसूचना S.O. 1708(E) 26.07.2012) में सीएसवी 27 की उपज 28 क्विंटल/हेक्टेयर व अवधि 116 दिन दर्ज है — दोनों इस रिकॉर्ड की पुरानी "20–24 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential व "100–105 दिन" duration फ़ील्ड से अधिक थीं, इसलिए yieldPotential को "26–28 क्विंटल/हेक्टेयर" व duration को "112–118 दिन" (116 के आसपास केंद्रित) में सुधारा गया।
- 2026-08-15 को सुधारा गया: वही प्राथमिक स्रोत सीएसवी 27 को "भारत के सभी ज्वार उगाने वाले क्षेत्रों" के लिए अनुशंसित करता है, जो इस रिकॉर्ड के पुराने दो-राज्य (तेलंगाना, कर्नाटक) `states` फ़ील्ड से काफ़ी व्यापक था — states को प्रमुख ज्वार-उत्पादक राज्यों की एक प्रतिनिधि सूची (तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान) में सुधारा गया, जो इस फ़ाइल के अन्य व्यापक रूप से अनुशंसित क़िस्मों के सम्मेलन से मेल खाता है।
- प्राथमिक स्रोत दाना-फफूंद-प्रतिरोध व नमी-तनाव-सहनशीलता की पुष्टि करता है, पर तना-मक्खी-प्रतिरोध की अलग से रेटिंग नहीं देता — इस रिकॉर्ड की मौजूदा "तना मक्खी और दाना-फफूंद प्रतिरोधी" diseaseResistance शब्दावली को ज्यों का त्यों छोड़ा गया है क्योंकि दाना-फफूंद-प्रतिरोध पुष्ट है और तना-मक्खी-सहनशीलता केवल अपुष्ट है, खंडित नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- तेलंगाना
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
- आंध्र प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- तमिलनाडु
- गुजरात
- राजस्थान
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सीएसवी 27 को किसने और कब जारी किया?
ज्वार अनुसंधान निदेशालय (डीएसआर), हैदराबाद ने इसे 2012 में अखिल भारतीय समन्वित ज्वार अनुसंधान परियोजना के तहत जारी किया, जो उसी वर्ष औपचारिक रूप से अधिसूचित हुआ।
सीएसवी 27 की जनक वंशावली क्या है?
यह (GJ 38 × Indore 12)-2-1-2-1 क्रॉस से आती है, जिसमें GJ 38 स्वयं GJ 35 × E 35-1 (एक प्रारंभिक इथियोपियाई प्रजनन रेखा) से व्युत्पन्न है।
आधिकारिक उपज परीक्षणों में सीएसवी 27 का प्रदर्शन कैसा है?
आधिकारिक एआईसीआरपी डेटा में 116 दिन की अवधि पर 28 क्विंटल/हेक्टेयर दाना उपज व 193 क्विंटल/हेक्टेयर चारा उपज दर्ज है — इसे दर्शाने के लिए इस रिकॉर्ड के yieldPotential व duration फ़ील्ड को "26–28 क्विंटल/हेक्टेयर" व "112–118 दिन" में सुधारा गया।
सीएसवी 27 किन राज्यों में उगाई जा सकती है?
आधिकारिक एआईसीआरपी अनुशंसा भारत के सभी ज्वार उगाने वाले क्षेत्रों को कवर करती है — इस रिकॉर्ड के states फ़ील्ड में अब केवल दो की बजाय प्रमुख ज्वार-उत्पादक राज्यों की एक प्रतिनिधि सूची दर्ज है।
क्या किसान सीएसवी 27 का बीज बचाकर दोबारा बो सकते हैं?
हाँ — हाइब्रिड की बजाय एक ओपन-पॉलिनेटेड क़िस्म होने के नाते, इस सीज़न की फ़सल से बचाया गया बीज अगले सीज़न बिना हाइब्रिड जैसी तेज़ उपज-गिरावट के दोबारा बोया जा सकता है।
