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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
ज्वारखरीफ़हाइब्रिडअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

CSH 30

आईसीएआर-आईआईएमआर द्वारा अखिल भारतीय समन्वित ज्वार अनुसंधान परियोजना के तहत जारी एक व्यापक रूप से उगाया जाने वाला खरीफ़ दाना हाइब्रिड। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि105–110 दिन
अपेक्षित उपज40–43 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
ज्वार
प्रकार
हाइब्रिड
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
105–110 दिन
अपेक्षित उपज
40–43 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
ज्वार अनुसंधान निदेशालय (डीएसआर), हैदराबाद — 2012 में जारी, अधिसूचना S.O. 952(E) दिनांक 10.04.2013

इस किस्म के बारे में

सीएसएच 30 (प्रजनन कोड एसपीएच 1655) एकल-क्रॉस खरीफ़ दाना हाइब्रिड है, जो 2012 में अखिल भारतीय समन्वित ज्वार अनुसंधान परियोजना के तहत जारी हुआ और ज्वार अनुसंधान निदेशालय (डीएसआर), हैदराबाद में विकसित किया गया — यही संस्थान 2014 में आईसीएआर-आईआईएमआर के नाम से पुनर्नामित हुआ। इसकी मादा जनक रेखा 415A को दाना-फफूंद-प्रतिरोधी आनुवंशिक स्टॉक (IS 25017) का उपयोग कर प्रजनित किया गया था, और नर जनक रेखा CB 33 में दाना-फफूंद-सहनशील रेखा (GMRP 13) है — जो इस हाइब्रिड को दाना-फफूंद-सहनशीलता केंद्रित प्रजनन पृष्ठभूमि देती है। एआईसीआरपी परीक्षण डेटा इसे लॉजिंग-प्रतिरोधी व नॉन-शैटरिंग दर्ज करता है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारहाइब्रिड
    अवधि105–110 दिन
    उपज क्षमता40–43 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधतना मक्खी और दाना-फफूंद के प्रति मध्यम सहनशीलता
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

105–110 दिन

अपेक्षित उपज

40–43 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • 2026-08-15 को सुधारा गया: आईसीएआर-आईआईएमआर के अपने एआईसीआरपी परीक्षण रिकॉर्ड (सीधे-प्राप्त millets.res.in PDF, अधिसूचना S.O. 952(E) 10.04.2013) में सीएसएच 30 की उपज क्षमता 43 क्विंटल/हेक्टेयर दर्ज है, जो इस रिकॉर्ड की पुरानी "25–30 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential से काफ़ी अधिक थी — yieldPotential को "40–43 क्विंटल/हेक्टेयर" में सुधारा गया।
  • 2026-08-15 को सुधारा गया: वही प्राथमिक परीक्षण रिकॉर्ड आधिकारिक अनुशंसित क्षेत्र महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दक्षिण गुजरात व उत्तर आंध्र प्रदेश (बारानी खरीफ़ खेती के तहत) सूचीबद्ध करता है — states में मध्य प्रदेश व गुजरात जोड़े गए।
  • प्राथमिक एआईसीआरपी स्रोत दाना-फफूंद-सहनशील प्रजनन वंश व लॉजिंग/शैटरिंग-प्रतिरोध दर्ज करता है, पर सीएसएच 30 के लिए विशेष रूप से तना-मक्खी सहनशीलता की रेटिंग नहीं देता — इस रिकॉर्ड की मौजूदा "तना मक्खी और दाना-फफूंद के प्रति मध्यम सहनशीलता" diseaseResistance शब्दावली को कार्यशील संदर्भ के रूप में छोड़ा गया है क्योंकि इसका सीधे खंडन नहीं हुआ, केवल आंशिक रूप से अपुष्ट रहा।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • गुजरात

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सीएसएच 30 को किसने और कब जारी किया?

ज्वार अनुसंधान निदेशालय (डीएसआर), हैदराबाद ने इसे 2012 में अखिल भारतीय समन्वित ज्वार अनुसंधान परियोजना के तहत जारी किया, जो औपचारिक रूप से 2013 में अधिसूचित हुआ। डीएसआर का नाम 2014 में आईसीएआर-आईआईएमआर रखा गया, इसलिए दोनों नाम अलग-अलग समय पर उसी संस्थान को दर्शाते हैं।

सीएसएच 30 की जनक वंशावली क्या है?

यह मादा रेखा 415A (जो स्वयं एक दाना-फफूंद-प्रतिरोधी आनुवंशिक स्टॉक से प्रजनित है) और नर रेखा CB 33 (जिसमें दाना-फफूंद-सहनशील प्रजनन रेखा है) के बीच एकल-क्रॉस हाइब्रिड है।

आधिकारिक परीक्षणों में सीएसएच 30 कितनी उपज देता है?

आईसीएआर-आईआईएमआर के अपने एआईसीआरपी परीक्षण डेटा में 43 क्विंटल/हेक्टेयर दाना उपज व 140 क्विंटल/हेक्टेयर चारा उपज दर्ज है — इसे दर्शाने के लिए इस रिकॉर्ड के yieldPotential फ़ील्ड को "40–43 क्विंटल/हेक्टेयर" में सुधारा गया।

सीएसएच 30 किन राज्यों के लिए आधिकारिक रूप से अनुशंसित है?

आईसीएआर-आईआईएमआर के अपने एआईसीआरपी रिकॉर्ड के अनुसार बारानी खरीफ़ खेती के तहत महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दक्षिण गुजरात व उत्तर आंध्र प्रदेश — इस रिकॉर्ड के states फ़ील्ड को सभी पाँचों को शामिल करने के लिए सुधारा गया।

क्या सीएसएच 30 लॉजिंग-प्रतिरोधी है?

हाँ — आधिकारिक एआईसीआरपी परीक्षण रिकॉर्ड इसे लॉजिंग-प्रतिरोधी व नॉन-शैटरिंग बताता है, जो खड़ी फ़सल व कटाई-हानि कम करने के लिए उपयोगी गुण हैं।