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खरबूज़ाज़ायद / गर्मीखुली-परागितअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Pusa Sharbati

IARI की पुरानी जानी-मानी किस्म। फल मध्यम, गोल और जालीदार, छिलका कड़ा हरा-सा, और गूदा बहुत मीठा, खुशबूदार और सैल्मन-नारंगी। उत्तर और मध्य भारत में उगाई जाती है। जालीदार छिलका चिकने छिलके वाली किस्मों से बेहतर सफ़र करता है।

सीज़नज़ायद / गर्मी
पकने की अवधिपहली तुड़ाई लगभग 85–90 दिन में
अपेक्षित उपज15–20 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीबलुई / हल्की मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
ज़ायद / गर्मी
पकने की अवधि
पहली तुड़ाई लगभग 85–90 दिन में
अपेक्षित उपज
15–20 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
बलुई / हल्की मिट्टी
रोग-प्रतिरोध
कोई खास रोग-प्रतिरोध नहीं; डाउनी और चूर्णिल फफूँदी पर नज़र रखें
जारी
ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने जारी की

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

पूसा शरबती नई दिल्ली के ICAR-IARI की खुले परागण वाली, लंबे समय से चल रही खरबूज़ा किस्म है। फल मध्यम और गोल होता है, छिलका कड़ा, हरा-सा और अच्छी जाली वाला, और गूदा बहुत मीठा, खुशबूदार और सैल्मन-नारंगी। इसे उत्तर और मध्य भारत में खूब उगाया जाता है। जालीदार छिलके की वजह से हरा मधु जैसी चिकने छिलके वाली मीठी किस्मों से यह सँभाल और ढुलाई बेहतर सहती है। पहली तुड़ाई लगभग 85–90 दिन में आती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

क्लासिक, पुरानी IARI किस्म चाहिए: मध्यम, गोल फल, कड़ा, हरा-सा, अच्छा जालीदार छिलका और बहुत मीठा, ख़ुशबूदार सैल्मन-नारंगी गूदा, तो पूसा शरबती चुनिए। इसे लगभग 85–90 दिन लगते हैं, कार्ड में 15–20 टन/हेक्टेयर है, और यह उत्तर और मध्य भारत में उगती है। जालीदार छिलका चिकने छिलके वाली किस्मों से बेहतर ढुलाई सह लेता है, पर यह एक साथ पकती है और 2–3 दिन में बिक जानी चाहिए। एक-से ग्रेड के लिए पंजाब हाइब्रिड, चूर्णिल फफूँदी बार-बार लगती है तो अर्का राजहंस, और पास की मीठे खरबूज़े की मंडी के लिए हरा मधु चुनिए।

बुवाई और खेती

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • बहुत मीठा, खुशबूदार, सैल्मन-नारंगी गूदा।
  • जालीदार छिलका, जो चिकने छिलके वाली मीठी किस्मों से बेहतर सँभाल और ढुलाई सहता है।
  • उत्तर और मध्य भारत में कई जगह चल जाती है; खुले परागण वाली, इसलिए बीज रखा जा सकता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कोई खास रोग-प्रतिरोध नहीं। नमी या गरम-सूखे दौर में डाउनी और चूर्णिल फफूँदी के लिए छिड़काव का कार्यक्रम चाहिए।
  • सारे फल एक साथ पकते हैं और रखकर नहीं बेच सकते। 2–3 दिन में बेचना होगा।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • दिल्ली
  • राजस्थान
  • पंजाब
  • हरियाणा

छोटी खेपों में तोड़िए, क्योंकि आपके पास 2–3 दिन हैं

पूसा शरबती मीठी और ख़ुशबूदार है, और जालीदार छिलका चिकने छिलके वाले खरबूज़ों से बेहतर सफ़र करता है। पर यह एक साथ पकती है और टिकती नहीं, इसलिए 2–3 दिन में बिकनी चाहिए।

पूरे हिस्से के पकने का इंतज़ार मत कीजिए। हर दूसरे दिन खेत घूमिए और सिर्फ़ पूरी पकावट वाले फल तोड़िए, ताकि हर खेप अपनी सबसे अच्छी अवस्था में बिके। आख़िरी पकी खेप उस ख़रीदार के लिए रखिए जो तुरंत पैसे देता है।

खेत को एक-दो हफ़्ते के अंतर पर दो-तीन खेपों में बोइए। इससे पकावट कुछ हफ़्तों में फैल जाती है, और पूरा खेत धूप में ट्रक के इंतज़ार में नहीं पड़ा रहता।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

खरबूज़ा की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Arka Jeetएक आदमी के हिसाब का छोटा खरबूज़ा, चूर्णिल फफूँदी रोधीपहली तुड़ाई लगभग 80–85 दिन मेंलगभग 17 टन/हेक्टेयरकर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु
Arka Rajhansचूर्णिल फफूँदी रोधी, अच्छा टिकने वाला खरबूज़ापहली तुड़ाई लगभग 90–100 दिन में20–25 टन/हेक्टेयरकर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना
Durgapura Madhuसूखी ज़मीन और नदी के पेटे के लिए मज़बूत खुले परागण वाला खरबूज़ापहली तुड़ाई लगभग 80–90 दिन में15–22 टन/हेक्टेयरराजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश
Hara Madhuसिर्फ़ पास की मंडी के लिए बहुत मीठा खरबूज़ापहली तुड़ाई लगभग 90–100 दिन में15–20 टन/हेक्टेयरपंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान
Punjab Hybridउत्तर-पश्चिम की व्यावसायिक फ़सल के लिए एक-सा F1 खरबूज़ापहली तुड़ाई लगभग 80–90 दिन में22–28 टन/हेक्टेयरपंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान
Punjab Sunehriजालीदार, ढुलाई सह लेने वाला खुले परागण वाला खरबूज़ा, उत्तर-पश्चिम की मुख्य किस्मपहली तुड़ाई लगभग 85–95 दिन में18–22 टन/हेक्टेयरपंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश
Pusa Sharbatiयही पेजउत्तर और मध्य भारत का क्लासिक मीठा, ख़ुशबूदार खरबूज़ापहली तुड़ाई लगभग 85–90 दिन में15–20 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और खरबूज़ा का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

खरबूज़ा के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूसा शरबती को तुड़ाई के बाद कितने दिन रख सकते हैं?

सिर्फ़ 2–3 दिन। यह एक साथ पकती है और टिकती नहीं। उतना ही तोड़िए जितना उस समय में बिक सके, और एक दिन में सब तोड़ने की जगह हर दो-तीन दिन पर छोटे हिस्से तोड़िए।

क्या पूसा शरबती फफूँदी के प्रति रोधी है?

नहीं। इसकी कोई ख़ास रोधकता दर्ज नहीं है, इसलिए नम या सूखी-गरम अवधि में डाउनी और चूर्णिल फफूँदी के लिए छिड़काव योजना चाहिए। मौजूदा योजना अपने KVK से पूछिए और तुड़ाई से पहले का प्रतीक्षा समय रखिए।

कब तोड़ना है, यह कैसे जानें?

पूरी पकावट पर तोड़िए, जब फल मीठा हो, ख़ुशबू दे और डंठल वाला सिरा आसानी से चटककर अलग हो जाए। जल्दी तोड़ा खरबूज़ा तोड़ने के बाद मीठा नहीं होता, इसलिए थोड़ा देर से तोड़कर जल्दी बेचना बेहतर है।

यह पंजाब सुनहरी से कैसे अलग है?

दोनों में जालीदार छिलका, नारंगी गूदा और खुले परागण वाला बीज है। पूसा शरबती पुरानी IARI किस्म है, ख़ुशबूदार गूदा, 85–90 दिन और 15–20 टन/हेक्टेयर। पंजाब सुनहरी PAU की किस्म है, 85–95 दिन और 18–22 टन/हेक्टेयर, और उत्तर-पश्चिम की ज़्यादा मुख्य किस्म है।

क्या पूसा शरबती का बीज बचा सकते हैं?

हाँ, यह खुले परागण वाली है। पूरी पकी, स्वस्थ, किस्म जैसे फल चुनिए, और बीज वाला प्लॉट दूसरे खरबूज़ों से दूर रखिए क्योंकि वे आपस में परागित हो जाते हैं।

स्रोत: TNAU Agritech Portal — Muskmelon. संपादकीय नीति.