Ganesh
जड़ वाली कलमों से तैयार, असली बीज से नहीं। पुणे की पुरानी मानक किस्म, जिसे भगवा उसके गहरे छिलके के रंग के कारण पीछे छोड़ रहा है — जहाँ स्थानीय बाज़ार गणेश के नरम बीज का भाव देता हो, वहाँ अब भी उगाई जाती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अनार
- प्रकार
- रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- कलम से बने पौधे में साल 2–3 से फल
- अपेक्षित उपज
- 120–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- जारी
- 1932 में पुणे के गणेशखिंड फ़्रूट एक्सपेरिमेंट स्टेशन में डॉ. जी.एस. चीमा द्वारा आलंदी (जंगली/स्थानीय अनार प्रकार) के उन्मुक्त-परागित अंकुरों में से चुनी गई; 1936 में 'जीबीजी-1' नाम से व्यावसायिक रूप से जारी, 1970 में 'गणेश' नाम दिया गया।
इस किस्म के बारे में
गणेश की जड़ें डॉ. जी.एस. चीमा के पुणे स्थित गणेशखिंड फ़्रूट एक्सपेरिमेंट स्टेशन में हुए प्रजनन-कार्य से जुड़ी हैं — कई स्रोतों में उन्हें 'भारतीय बागवानी के जनक' कहा गया है। 1932 में उन्होंने स्थानीय, जंगली आलंदी अनार प्रकार से उन्मुक्त-परागित (ओपन-पॉलिनेटेड) अंकुरों में से उम्दा पौधे चुने; इनमें से एक, जिसे शुरू में 'जीबीजी-1' नंबर दिया गया था, 1936 में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया और 1970 में इसे ज़्यादा बाज़ार-अनुकूल नाम देने के लिए 'गणेश' नाम दिया गया — यह जानकारी एक सीधे फ़ेच किए गए स्पेशलटी प्रोड्यूस किस्म-प्रोफ़ाइल से मिलती है। एक सीधे फ़ेच की गई कृषि-ब्लॉग किस्म-तालिका (aciagropomegranatecultivation) मध्यम-गोल, चिकने फल के साथ पीले छिलके पर लाल हल्कापन, गुलाबी मुलायम-बीज वाले दाने, मीठा रस, लगभग 16.47% टीएसएस, 0.42% अम्लता और औसत फल-वज़न लगभग 325 ग्राम बताती है। भगवा व अरक्ता के लिए भी इस्तेमाल हुआ वही सीधे फ़ेच किया गया PMC जीवाणु-झुलसा जाँच-अध्ययन गणेश को — भगवा, अरक्ता व मृदुला के साथ — भारत की सबसे लोकप्रिय, सबसे ज़्यादा व्यावसायिक मूल्य वाली अनार किस्मों में गिनता है, पर कहता है कि इनमें से किसी में भी असली झुलसा-प्रतिरोध या सहनशीलता नहीं है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
कलम से बने पौधे में साल 2–3 से फल
अपेक्षित उपज
120–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- इस रिकॉर्ड के अपने नोट के अनुसार मुलायम दाना व गुलाबी रंग आज भी वहाँ पसंद किया जाता है जहाँ स्थानीय बाज़ार भगवा के गहरे छिलके-रंग के बजाय इस नरमी का भाव देता हो
- लंबा व्यावसायिक इतिहास — भगवा के उभरने से दशकों पहले महाराष्ट्र की प्रमुख अनार किस्म, आज भी सार्थक पैमाने पर उगाई जाती है
ध्यान रखने योग्य बातें
- सीधे फ़ेच किए गए PMC जाँच-अध्ययन के अनुसार गणेश में भी, भगवा व अरक्ता की तरह, असली जीवाणु-झुलसा प्रतिरोध नहीं है — भारत की सबसे लोकप्रिय अनार किस्मों में गिना जाता है, जो सभी संवेदनशील हैं
- किसी भी फ़ेच किए जा सकने वाले स्रोत में गणेश का अपना झुलसा-गंभीरता प्रतिशत नहीं मिला, जैसा उसी 149-प्रजाति परीक्षण में भगवा (58.11%) व अरक्ता (44.49%) का अलग-अलग मापा गया
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- महाराष्ट्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
'गणेश' नाम कहाँ से आया?
यह मूल नाम नहीं था। डॉ. जी.एस. चीमा ने 1932 में पुणे के गणेशखिंड फ़्रूट एक्सपेरिमेंट स्टेशन में आलंदी के उन्मुक्त-परागित अंकुरों में से इसे चुना और 1936 में इसे 'जीबीजी-1' कार्यकारी नाम से व्यावसायिक रूप से जारी किया; इसे 'गणेश' — एक ज़्यादा बाज़ार-अनुकूल नाम, और शायद गणेशखिंड स्टेशन को श्रद्धांजलि — केवल 1970 में दिया गया।
क्या गणेश भगवा से ज़्यादा जीवाणु-झुलसा सहनशील है?
किसी भी मिले स्रोत में गणेश का अपना मापा गया झुलसा-गंभीरता आँकड़ा नहीं है, पर जिस 149-प्रजाति आईसीएआर जाँच-अध्ययन ने भगवा (58.11%) व अरक्ता (44.49%) दोनों को मापा, वह गणेश को भी इन दोनों के साथ 'असली प्रतिरोध नहीं' वाले समूह में गिनता है — इसलिए यह मानने का कोई आधार नहीं कि यह उल्लेखनीय रूप से बेहतर करती है।
स्रोत: Ganesh Pomegranates Information and Facts — Specialty Produce, Pomegranate Cultivation in India: Cultivars and Varieties, Differential gene responses in different varieties of pomegranate during the pathogenesis of Xanthomonas axonopodis pv. punicae — PMC. संपादकीय नीति.
