भाऊसाहेब फुंडकर फळबाग लागवड योजना
आम, काजू, अमरूद या 16 स्वीकृत फल फसलों में से किसी का बाग लगाने पर तय लागत का 100% — फसल व दूरी के हिसाब से करीब ₹43,600 से ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर तक — 3 साल में 50:30:20 अनुपात में जारी।
संचालक: कृषि विभाग, महाराष्ट्र सरकार
- सब्सिडी दर
- तय लागत मानक का 100%
- प्रति-हेक्टेयर सीमा
- ≈ ₹43,600 से ₹2,02,090 (फसल व दूरी अनुसार)
- फल फसल
- 16 स्वीकृत बहुवर्षीय प्रजाति
- भुगतान अनुपात
- 3 साल में 50 : 30 : 20
- जीवितता ज़रूरी
- साल 1 बाद 80%, साल 2 बाद 90%
- शासन निर्णय
- 6 जुलाई 2018 (खरीफ 2018-19 से)
- खेत आकार
- 0.20–6.00 हे. (कोंकण में 0.10–10.00 हे.)
परिचय
महाराष्ट्र में फल-बाग रोपण योजना 1990 से चल रही है, पर वह मनरेगा से जुड़ी थी और सब्सिडी सिर्फ़ जॉब कार्ड वाले किसान — लघु व सीमांत तथा SC/ST किसान, 2 हेक्टेयर तक — ले सकते थे। राज्य के करीब 80% किसान लघु या सीमांत हैं, फिर भी कई के पास जॉब कार्ड नहीं, तो वे बाहर रह जाते थे। भाऊसाहेब फुंडकर फळबाग लागवड योजना इन्हीं किसानों को कवर करने के लिए बनी, 100% राज्य वित्त-पोषण के साथ।
यह राज्य के कृषि व बागवानी मंत्री पांडुरंग "भाऊसाहेब" फुंडकर के नाम पर है, जिनका पद पर रहते हुए 31 मई 2018 को निधन हुआ। योजना 6 जुलाई 2018 के शासन निर्णय (GR) से मंज़ूर हुई और खरीफ 2018-19 से चल रही है।
सब्सिडी नया बाग लगाने का पूरा काम सरकार के तय लागत मानक पर वहन करती है: गड्ढे खोदना, कलम (या नारियल के पौधे), पौध संरक्षण, मरे पौधों की जगह भराई, और अनिवार्य ड्रिप-सिंचाई सेट। यह एक तय रकम नहीं है — हर फल फसल की तय दूरी पर अपनी प्रति-हेक्टेयर सीमा है, 10×10 मी. पर कटहल के करीब ₹43,596 प्रति हेक्टेयर से लेकर 3×2 मी. पर सघन अमरूद के ₹2,02,090 तक। मसलन, मानक 10×10 मी. दूरी पर आम की सीमा ₹53,561 प्रति हेक्टेयर बैठती है।
रकम जानबूझकर तीन वार्षिक किस्तों में जारी होती है — पहले साल 50%, दूसरे साल 30%, तीसरे साल 20% — और बाद की किस्तें तभी मिलती हैं जब किसान पहले साल के अंत तक कम से कम 80% और दूसरे साल के अंत तक 90% पौधे जीवित रखे। इससे नीचे गिरने पर किसान शेष रकम खो देता है और पहले दी गई रकम ब्याज सहित लौटानी पड़ सकती है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- बाग स्थापना पर 100% सब्सिडी — गड्ढा खोदना, कलम, पौध संरक्षण, जगह भराई व अनिवार्य ड्रिप सेट — तय लागत मानक पर।
- 16 स्वीकृत फल फसल कवर: आम, काजू, अमरूद, अनार, संतरा, मोसंबी, कागज़ी नींबू, नारियल, सीताफल, आँवला, इमली, जामुन, कोकम, कटहल, अंजीर और चीकू।
- महाराष्ट्र के करीब 80% लघु/सीमांत किसानों तक पहुँचती है, जिनके पास मनरेगा जॉब कार्ड नहीं और जो पुरानी बाग योजना से बाहर थे।
- एकमुश्त नहीं — तीन साल में 50:30:20 और पौधों की जीवितता से जुड़ा भुगतान।
- ड्रिप सिंचाई पूरी तरह वित्त-पोषित — पहले PMKSY / अन्य केंद्र-राज्य निधि से, बाक़ी इस योजना से।
- महाराष्ट्र की अन्य कृषि सब्सिडी की तरह MahaDBT पोर्टल पर आवेदन व ट्रैकिंग।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- महाराष्ट्र का व्यक्तिगत किसान, जिसकी खेती योग्य ज़मीन 7/12 उतारे पर अपने नाम हो (संस्थाएँ पात्र नहीं)
- 0.20 से 6.00 हेक्टेयर का खेत — कोंकण विभाग में 0.10 से 10.00 हेक्टेयर
- MahaDBT किसान पोर्टल पर पंजीकृत व आवेदन कर रहा हो
- मनरेगा जॉब कार्ड धारक पहले 2 हेक्टेयर मनरेगा से लें और खेत के बाक़ी हिस्से के लिए यह योजना
- प्राथमिकता उन परिवारों को जिनकी आजीविका सिर्फ़ खेती पर है, फिर SC/ST, लघु/सीमांत, महिला व दिव्यांग किसान; लक्ष्य का 30% महिलाओं के लिए आरक्षित; वनपट्टा धारक पात्र
शामिल नहीं
- संस्थागत आवेदक और आवेदक के अपने नाम न होने वाली ज़मीन
- वही खेत जो पहले से किसी अन्य बागवानी-रोपण सब्सिडी में कवर हो — वह क्षेत्र पात्र सीमा से घटा दिया जाता है
- बिना कलम की रोपण सामग्री (नारियल छोड़कर, जहाँ पौधे मान्य हैं)
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- 7/12 और 8-अ भूमि उतारे
- आधार कार्ड
- आधार-लिंक राष्ट्रीयकृत बैंक पासबुक (पहला पन्ना)
- SC/ST किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र
- 7/12 संयुक्त होने पर सभी सह-धारकों का सहमति पत्र
- सादे कागज़ पर हमी पत्र (वचन पत्र)
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
अप्रैल के विज्ञापन के बाद MahaDBT पर आवेदन करें
विभाग हर साल करीब अप्रैल में विज्ञापन देता है। mahadbt.maharashtra.gov.in पर भाऊसाहेब फुंडकर फळबाग लागवड योजना के तहत बाग रोपण आवेदन 21 दिन के भीतर जमा करें।
- 2
लॉटरी, पूर्व-स्वीकृति और रोपण
तालुका लक्ष्य से ज़्यादा आवेदन आने पर लाभार्थी लॉटरी व प्राथमिकता सूची से चुने जाते हैं। पूर्व-सम्मति के बाद 75 दिन में, 1 मई – 30 नवंबर की खिड़की में, सभी घटकों सहित रोपण पूरा करना होता है।
- 3
हर साल सत्यापन और किस्तें
क्षेत्रीय अधिकारी हर जून पौधों की जीवितता जाँचता है। 50% पहली किस्त रोपण के बाद; 30% व 20% किस्तें तभी जब पहले साल बाद जीवितता कम से कम 80% और दूसरे साल बाद 90% हो।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- लॉटरी में नाम न आना, किस्त में देरी, या नर्सरी से घटिया कलम — पहले तालुका कृषि अधिकारी और फिर उप-विभागीय कृषि अधिकारी के पास जाएँ, जो योजना के तहत नर्सरी गुणवत्ता नियंत्रण भी देखते हैं।
- फिर भी हल न हो तो महाराष्ट्र के आपले सरकार शिकायत पोर्टल grievances.maharashtra.gov.in पर, या राज्य हेल्पलाइन 1800 120 8040 (सुबह 8 से रात 8) पर दर्ज करें, जहाँ शिकायतें 21 कार्य दिवसों में निपटाई जानी होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूरी सब्सिडी पहले ही मिल जाती है?
नहीं। यह पहले साल 50%, दूसरे साल 30% और तीसरे साल 20% जारी होती है, और दूसरे-तीसरे साल की किस्तें तभी जब आप पहले साल बाद कम से कम 80% और दूसरे साल बाद 90% पौधे जीवित रखें।
कौन-सी फल फसल कवर हैं?
सोलह बहुवर्षीय फल फसल: आम, काजू, अमरूद, अनार, संतरा, मोसंबी, कागज़ी नींबू, नारियल, सीताफल, आँवला, इमली, जामुन, कोकम, कटहल, अंजीर और चीकू। हर एक की तय रोपण दूरी है।
रकम ठीक-ठीक कितनी है?
यह फसलवार लागत मानक का 100% है, तय रकम नहीं। तय दूरी पर प्रति हेक्टेयर उदाहरण: आम 10×10 मी. ₹53,561; काजू 7×7 मी. ₹55,578; अनार 4.5×3 मी. ₹1,09,487; सीताफल 5×5 मी. ₹72,531; कटहल 10×10 मी. ₹43,596; सघन अमरूद 3×2 मी. ₹2,02,090।
मेरे पास मनरेगा जॉब कार्ड नहीं — क्या फिर भी आवेदन कर सकता हूँ?
हाँ। यह योजना उन्हीं लघु व सीमांत किसानों के लिए बनी है जिनके पास जॉब कार्ड नहीं और जो पुरानी मनरेगा-लिंक बाग योजना का लाभ नहीं ले सकते थे। जॉब कार्ड वाले पहले 2 हेक्टेयर मनरेगा से और बाक़ी यह योजना से लें।
कितना बड़ा खेत लगा सकता हूँ?
महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्से में 0.20 से 6.00 हेक्टेयर, और कोंकण विभाग में 0.10 से 10.00 हेक्टेयर। किसी अन्य सब्सिडी में पहले से लगा क्षेत्र आपकी सीमा से घटा दिया जाता है।
क्या ड्रिप सिंचाई अनिवार्य है?
हाँ। बाग के लिए ड्रिप सेट लगाना और कम से कम सात साल रखना ज़रूरी है। यह पूरी तरह सब्सिडी वाला है — पहले PMKSY या अन्य केंद्र-राज्य योजनाओं से, फिर बाक़ी इस योजना की निधि से।
क्या संतरा या मोसंबी जैसे खट्टे फल लगा सकता हूँ?
हाँ, पर खट्टे फल (संतरा, मोसंबी, कागज़ी नींबू) लगाने से पहले मिट्टी परीक्षण अनिवार्य है, और उसका ख़र्च किसान वहन करता है।
भाऊसाहेब फुंडकर कौन थे?
पांडुरंग "भाऊसाहेब" फुंडकर महाराष्ट्र के कृषि व बागवानी मंत्री और अकोला से तीन बार सांसद थे। पद पर रहते हुए 31 मई 2018 को उनका निधन हुआ, और उसी जुलाई उनकी स्मृति में यह योजना शुरू हुई।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को krishi.maharashtra.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
