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उत्तर प्रदेशअनुदानसक्रियअपडेट 8 सितंबर 2026

कृषि यंत्र अनुदान योजना (उत्तर प्रदेश)

सामान्य किसानों को 40% और अनुसूचित जाति/जनजाति, लघु, सीमांत व महिला किसानों को 50% अनुदान — ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल जैसे दर्जनों कृषि यंत्रों पर।

संचालक: कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

सामान्य किसान
40% अनुदान
SC/ST, लघु, सीमांत, महिला
50% अनुदान
फार्म मशीनरी बैंक
80% तक, ₹10 लाख सीमा
सालाना बुकिंग विंडो
जुलाई मध्य से अगस्त मध्य

परिचय

उत्तर प्रदेश में कृषि यंत्रों पर अनुदान उसी केंद्रीय ढाँचे से चलता है जिसे ज़्यादातर राज्य इस्तेमाल करते हैं — कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM), फसल अवशेष प्रबंधन और अन्य केंद्रीय योजनाएँ। लेकिन दरें और बुकिंग का पूरा चक्र राज्य अपने कृषि विभाग पोर्टल पर हर साल खुद तय करता है। यही बात इसे केवल केंद्रीय योजना से अलग, राज्य योजना बनाती है — 40%/50% का बँटवारा, ज़िलेवार टोकन व्यवस्था, और सालाना बुकिंग विंडो (2026-27 में 16 जुलाई से 10 अगस्त तक चली) सब उत्तर प्रदेश की अपनी व्यवस्था है।

व्यक्तिगत किसान अनुदान के अलावा यह योजना साझा ढाँचे को भी फंड करती है। कस्टम हायरिंग सेंटर — जहाँ एक समूह यंत्रों का सेट खरीदकर पूरे गाँव को किराए पर देता है — को 40% तक अनुदान मिलता है, और परियोजना लागत उप-योजना के साथ बढ़ती है: SMAM में ₹10 लाख तक, फसल अवशेष प्रबंधन में ₹30 लाख तक, और किसान उत्पादक संगठन (FPO) के लिए ₹1 करोड़ तक। फार्म मशीनरी बैंक, जो मुख्य रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति समूहों के लिए है, ₹10 लाख सीमा पर 80% तक अनुदान पाता है। चालीस से ज़्यादा यंत्र श्रेणियाँ शामिल हैं — ट्रैक्टर, कम्बाइन हार्वेस्टर और ट्रैक-माउंटेड गन्ना हार्वेस्टर से लेकर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर और ज़ीरो टिल सीड कम फर्टिलाइज़र ड्रिल जैसे फसल-अवशेष यंत्र तक, जिनसे किसान पराली जलाए बिना अगली फसल बो सकता है।

2026-27 का चक्र शासनादेश संख्या 36/2026 दिनांक 4 जून 2026 के तहत चलता है, जिसमें यंत्रीकरण मदों में लगभग ₹55.18 करोड़ स्वीकृत हैं (कृषि उन्नति योजना ₹49.27 करोड़, साथ ही NMAM और फसल अवशेष प्रबंधन)। बुकिंग पर यंत्र के अनुदान के अनुपात में एक छोटी वापसी-योग्य टोकन राशि ली जाती है; जहाँ ज़िले में लक्ष्य से ज़्यादा आवेदन हों वहाँ तय तारीख़ पर ई-लॉटरी निकलती है, और चुने गए किसान को तय दिनों में पंजीकृत डीलर से खरीदकर बिल अपलोड करना होता है।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • सामान्य श्रेणी के किसानों को यंत्र की अधिसूचित कीमत पर 40% अनुदान।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति, लघु व सीमांत, और महिला किसानों को उसी यंत्र सूची पर 50% अनुदान।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर को ₹10 लाख तक की परियोजना लागत पर 40% तक अनुदान, ताकि समूह गाँव में दूसरों को यंत्र किराए पर दे सके।
  • फार्म मशीनरी बैंक, मुख्यतः SC/ST समूहों के लिए, ₹10 लाख सीमा पर 80% तक अनुदान।
  • चालीस से ज़्यादा यंत्र श्रेणियाँ — ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, कम्बाइन व गन्ना हार्वेस्टर, और सुपर SMS, मल्चर, श्रेडर, ब्रश कटर व ज़ीरो टिल सीड कम फर्टिलाइज़र ड्रिल जैसे फसल-अवशेष यंत्र।
  • बुकिंग पर ली गई टोकन राशि लॉटरी में नाम न आने पर वापस हो जाती है, या नाम आने पर खरीद में समायोजित हो जाती है।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि रखने वाला किसान, जो कृषि विभाग के किसान पोर्टल पर पंजीकृत हो
  • आधार कार्ड, अनुदान ट्रांसफर वाले बैंक खाते से लिंक
  • खतौनी आवेदक के अपने नाम पर, या संयुक्त स्वामित्व दर्ज हो
  • 50% वाली दर के लिए जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध हो

शामिल नहीं

  • टोकन/बुकिंग स्वीकृत होने से पहले खरीदा गया यंत्र
  • व्यापारी या डीलर जो अपने नाम से किसान की तरह आवेदन करें
  • सालाना बुकिंग विंडो बंद होने के बाद जमा आवेदन

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड (मोबाइल नंबर लिंक)
  • IFSC कोड सहित बैंक पासबुक
  • खतौनी या भूमि स्वामित्व अभिलेख
  • 50% दर का दावा करने पर जाति प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

  1. 1

    कृषि विभाग पोर्टल पर पंजीकरण करें

    बुकिंग विंडो खुलने से पहले agriculture.up.gov.in पर आधार नंबर, मोबाइल नंबर और भूमि विवरण के साथ पंजीकरण करें।

  2. 2

    यंत्र बुक करें और टोकन बनाएँ

    सालाना बुकिंग विंडो के दौरान ज़िले की सूची से यंत्र चुनें और टोकन जनरेट करें। ज़िले के लक्ष्य से ज़्यादा आवेदन आने पर ई-लॉटरी से चयन होता है।

  3. 3

    खरीद करें, बिल अपलोड करें, अनुदान पाएँ

    टोकन पक्का होने के बाद यंत्र खरीदें, पोर्टल पर डीलर का बिल अपलोड करें — भौतिक सत्यापन के बाद अनुदान आपके लिंक्ड बैंक खाते में आ जाता है।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • पक्का टोकन स्वीकृति में न बदले, सत्यापित बिल अपलोड करने के बाद भी अनुदान न आए, या 50% दर ग़लत तरीके से रोकी जाए — तो ज़िला कृषि अधिकारी / उप कृषि निदेशक और फिर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक के पास बात रखें। पोर्टल हेल्पलाइन 0522-2207784 है। अपना टोकन नंबर और अपलोड किया बिल संभालकर रखें।
  • विभाग से आगे, उत्तर प्रदेश की जनसुनवाई (IGRS) का इस्तेमाल करें — पोर्टल jansunwai.up.nic.in या जनसुनवाई-समाधान ऐप — या CM हेल्पलाइन 1076 (टोल-फ्री, 24×7)। दोनों CM कार्यालय के लोक शिकायत विभाग की एक ही व्यवस्था में जाते हैं; ट्रैक व दोबारा खोलने के लिए शिकायत नंबर संभालकर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हर साल बुकिंग विंडो कब खुलती है?

यह हर साल नए सिरे से agriculture.up.gov.in पर घोषित होती है — 2026-27 की विंडो 16 जुलाई से 10 अगस्त तक चली। कोई तय तारीख नहीं है, इसलिए हर सीज़न पोर्टल ज़रूर देखें।

मैं सामान्य वर्ग का छोटा किसान हूँ। मुझे 40% मिलेगा या 50%?

50%। यह ऊँची दर SC/ST के अलावा लघु व सीमांत और महिला किसानों पर भी लागू होती है, चाहे जाति कोई भी हो — यह सिर्फ़ SC/ST आवेदकों तक सीमित नहीं है।

अगर ज़िले के बजट से ज़्यादा किसान आवेदन कर दें तो क्या होगा?

चयन तय तारीख़ पर ऑनलाइन टोकन ड्रॉ या ई-लॉटरी से होता है, इसलिए ज़िले का लक्ष्य पूरा होने के बाद यह पहले-आओ-पहले-पाओ प्रक्रिया नहीं रह जाती।

क्या बुकिंग के लिए जमा राशि लगती है?

हाँ — बुकिंग पर यंत्र के अनुदान के अनुपात में एक छोटी वापसी-योग्य टोकन राशि ली जाती है। लॉटरी में नाम न आने पर वापस, और नाम आने पर खरीद में समायोजित।

चयन के बाद खरीदने के लिए कितना समय मिलता है?

पोर्टल टोकन पक्का होने के बाद तय दिनों का समय देता है — पंजीकृत डीलर से यंत्र खरीदकर बिल अपलोड करने के लिए। यह समय चूकने पर टोकन ख़त्म हो जाता है।

क्या FPO या समूह बड़ी परियोजना ले सकते हैं?

हाँ। कस्टम हायरिंग सेंटर की परियोजना सीमा उप-योजना के साथ बढ़ती है — SMAM में ₹10 लाख तक, फसल अवशेष प्रबंधन में ₹30 लाख तक, और किसान उत्पादक संगठन के लिए ₹1 करोड़ तक।

इस साल का चक्र किस आदेश से चलता है?

2026-27 की बुकिंग शासनादेश संख्या 36/2026 दिनांक 4 जून 2026 के तहत चलती है, जिसमें यंत्रीकरण योजनाओं में लगभग ₹55.18 करोड़ स्वीकृत हैं।

तथ्य 8 सितंबर 2026 को agriculture.up.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.