मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना
आवारा पशु व जंगली जानवर से बचाव के लिए 12 वोल्ट वाली हल्के झटके की सोलर फेंसिंग और सायरन पर 60% अनुदान — लघु-किसान क्लस्टर को 80% — अधिकतम ₹1.43 लाख।
संचालक: कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार
- व्यक्तिगत अनुदान
- लागत का 60% (~2 हेक्टेयर तक)
- क्लस्टर अनुदान
- 80% (लघु/सीमांत, ~10 हेक्टेयर)
- सीमा
- ₹1.43 लाख
- फेंसिंग
- 12 वोल्ट हल्का झटका + सायरन
परिचय
आवारा पशु और नीलगाय का खड़ी फसल चर जाना ग्रामीण उत्तर प्रदेश की सबसे कड़वी शिकायतों में है। 2019 की पशुधन गणना में 2012 से 2019 के बीच आवारा पशुओं में 17.34% की वृद्धि दर्ज हुई — जबकि देश भर में कमी आई — और तब तक राज्य में 11.8 लाख से ज़्यादा आवारा पशु थे। 2022 में यह चुनावी मुद्दा बना, और मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना किसानों को जानवरों को बिना नुकसान पहुँचाए खेत से दूर रखने का ज़रिया देने के वादे से निकली।
बाड़ के तार में सिर्फ़ क़रीब 12 वोल्ट करंट होता है — चौंकाने भर को, चोट के लिए नहीं — और छूने पर सायरन बजता है, ताकि आवारा पशु, नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर बिना नुकसान पीछे हट जाएँ। यह उस कँटीले तार की जगह लेने के लिए है जो कई किसानों ने लगा रखा था और जिसे राज्य हतोत्साहित करता है क्योंकि वह जानवरों को घायल करता है।
अनुदान व्यक्तिगत किसान के लिए लागत का 60% है, क़रीब 2 हेक्टेयर तक के खेत पर, अधिकतम ₹1.43 लाख, जो प्रति-हेक्टेयर लागत के हिसाब से तय होता है। लघु और सीमांत किसान जो क़रीब 10 हेक्टेयर का क्लस्टर बनाकर आते हैं, उन्हें 80% मिलता है। योजना बुंदेलखंड के लिए ₹75 करोड़ की व्यवस्था के रूप में शुरू हुई, जुलाई 2023 में पूरे राज्य में फैलाई गई और बजट बढ़ाकर ₹350 करोड़ किया गया, और इसे चरणों में लागू किया जा रहा है — पहला चरण क़रीब 34 ज़िलों को कवर करता है, बुंदेलखंड और वे वन-सीमांत ज़िले जहाँ जंगली जानवर भी समस्या बढ़ाते हैं। इसे कृषि विभाग चलाता है; आवेदन upagriculture.com से होते हैं।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- व्यक्तिगत किसान को सोलर फेंसिंग लागत का 60%, अधिकतम ₹1.43 लाख।
- लघु और सीमांत किसानों को क़रीब 10 हेक्टेयर की साझा क्लस्टर सीमा पर 80%।
- क़रीब 12 वोल्ट का पल्स झटका और सायरन — आवारा पशु, नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को बिना चोट पहुँचाए दूर रखता है।
- किसान वे फ़सलें फिर बो सकते हैं जो जानवरों के नुकसान की वजह से छोड़ दी थीं — आलू, मक्का, अरहर, मटर, चना।
- राज्य जिस कँटीले तार को हतोत्साहित करता है, उसका मानवीय विकल्प।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- उत्तर प्रदेश में खेती योग्य भूमि रखने वाला किसान, जो मौजूदा चरण में शामिल ज़िले में हो
- ज़मीन पर बार-बार आवारा पशु या जंगली जानवर का नुकसान होता हो
- क़रीब 2 हेक्टेयर तक के खेत के लिए व्यक्तिगत आवेदन — 60% दर
- या क़रीब 10 हेक्टेयर का क्लस्टर बनाने वाला लघु / सीमांत किसान समूह — 80% दर
- विभाग के तकनीकी मानक के अनुसार फेंसिंग लगाने को तैयार
शामिल नहीं
- हाई-वोल्टेज या जानलेवा बिजली फेंसिंग — केवल कम-वोल्टेज (~12 वोल्ट) सोलर मॉडल पर अनुदान
- कँटीले तार की बाड़
- ऐसे ज़िले की ज़मीन जो अभी मौजूदा चरण में शामिल नहीं
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड (खतौनी)
- बैंक पासबुक
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- क्लस्टर के लिए — सदस्य किसानों की सूची और उनके भूमि रिकॉर्ड
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
विभाग पोर्टल पर आवेदन करें
upagriculture.com पर भूमि व बैंक विवरण के साथ आवेदन दें, व्यक्तिगत रूप से या लघु / सीमांत किसानों के क्लस्टर के तौर पर।
- 2
तकनीकी स्वीकृति
विभाग सीमा की योजना व लंबाई को मानक से जाँचता है और आपकी दर — 60% या 80% — पक्की करता है।
- 3
स्थापना
विभाग के मानक अनुसार क़रीब 12 वोल्ट की सोलर फेंसिंग और सायरन लगाएँ।
- 4
सत्यापन और अनुदान
मौके पर फेंसिंग सत्यापित होने के बाद अनुदान लाभार्थी या क्लस्टर के बैंक खाते में जारी होता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- आवेदन पर फ़ैसला न हो, ग़लत दर लगे, या फेंसिंग सत्यापित होने के बाद भी स्वीकृत अनुदान न मिले — तो ज़िला कृषि अधिकारी / उप कृषि निदेशक और फिर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक के पास बात रखें। अपना आवेदन नंबर और सत्यापन रिपोर्ट संभालकर रखें।
- विभाग से आगे, उत्तर प्रदेश की जनसुनवाई (IGRS) का इस्तेमाल करें — पोर्टल jansunwai.up.nic.in या जनसुनवाई-समाधान ऐप — या CM हेल्पलाइन 1076 (टोल-फ्री, 24×7)। दोनों CM कार्यालय के लोक शिकायत विभाग की एक ही व्यवस्था में जाते हैं; ट्रैक व दोबारा खोलने के लिए शिकायत नंबर संभालकर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह बिजली की बाड़ है जो जानवर को नुकसान पहुँचा सकती है?
नहीं। इसमें सिर्फ़ क़रीब 12 वोल्ट होता है — चौंकाने वाला पल्स झटका, साथ में सायरन — जानलेवा हाई-वोल्टेज लाइन नहीं।
अनुदान ठीक-ठीक कितना है?
व्यक्तिगत किसान को क़रीब 2 हेक्टेयर तक की फेंसिंग पर लागत का 60%, अधिकतम ₹1.43 लाख; लघु और सीमांत किसानों को क़रीब 10 हेक्टेयर का क्लस्टर बनाने पर 80%।
क्या पड़ोसी किसान मिलकर आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, और फ़ायदे का है — क़रीब 10 हेक्टेयर का लघु / सीमांत किसान क्लस्टर 80% दर पाता है, जबकि व्यक्तिगत को 60%।
क्या मेरा ज़िला शामिल है?
रोलआउट चरणों में है। पहला चरण क़रीब 34 ज़िलों को कवर करता है — बुंदेलखंड और वन-सीमांत ज़िले — इसलिए आवेदन से पहले अपने ज़िले के लिए मौजूदा सूची upagriculture.com पर देखें।
यह किन जानवरों को रोकता है?
आवारा पशु, नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर — उत्तर प्रदेश में खड़ी फसल का सबसे ज़्यादा नुकसान यही करते हैं।
क्या इसे कँटीले तार की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं?
हाँ। राज्य कँटीले तार को हतोत्साहित करता है क्योंकि वह जानवरों को घायल करता है; यह योजना उसका मानवीय विकल्प है।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को upagriculture.com से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
