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आंवलासभी सीज़नग्राफ़्टेड पौधा (पारंपरिक किस्म)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Chakaiya

सबसे पुरानी आँवला किस्मों में से एक और NA-6 व कंचन की मूल किस्म। यह मुख्य किस्मों में सबसे बाद में पकती है (गोधरा में दिसंबर का पहला हफ़्ता) और इसका फल छोटे फलों में है (30–33 ग्राम)। रेशे का आँकड़ा हर परीक्षण में अलग मिलता है, इसलिए ख़रीदार से नमूना जँचवा लीजिए।

सीज़नसभी सीज़न
फल कब सेकलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में दिसंबर के पहले हफ़्ते में पका (फल बँधने से 245 दिन), चार किस्मों में सबसे बाद में।
अपेक्षित उपजबीकानेर में 52 किलो प्रति पेड़ (1996 में 8 × 8 मीटर पर लगा बाग़, 2002–03 का औसत)। वहाँ फल 33.4 ग्राम का था, गुजरात के बारानी परीक्षण में 30.66 ग्राम।
उपयुक्त मिट्टीसभी मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
ग्राफ़्टेड पौधा (पारंपरिक किस्म)
सीज़न
सभी सीज़न
फल कब से
कलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में दिसंबर के पहले हफ़्ते में पका (फल बँधने से 245 दिन), चार किस्मों में सबसे बाद में।
बीज दर
कलमी पौधे से लगाई जाती है। व्यावसायिक बाग के लिए बीज से नहीं बोई जाती।
अपेक्षित उपज
बीकानेर में 52 किलो प्रति पेड़ (1996 में 8 × 8 मीटर पर लगा बाग़, 2002–03 का औसत)। वहाँ फल 33.4 ग्राम का था, गुजरात के बारानी परीक्षण में 30.66 ग्राम।
उपयुक्त मिट्टी
सभी मिट्टी
रोग-प्रतिरोध
कोई ख़ास रोग-प्रतिरोध दर्ज नहीं

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

चकैया भारत में उगाई जाने वाली सबसे पुरानी आँवला किस्मों में से है, और NA-6 व कंचन की मूल किस्म। इसका फल छोटी तरफ़ है, बीकानेर में 33.4 ग्राम और गुजरात के बारानी परीक्षण में 30.66 ग्राम। गोधरा, गुजरात में यह चार किस्मों में सबसे बाद में, दिसंबर के पहले हफ़्ते में, फल बँधने के 245 दिन बाद पकी। बीकानेर (8 × 8 मीटर, 1996 में रोपाई) में इसने 52 किलो प्रति पेड़ दिया। इसका विटामिन C अच्छा रहा, बीकानेर में 594 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम और परभणी में 607.48 मिलीग्राम। रेशे पर रिपोर्टें अलग-अलग हैं: इसे रेशेदार किस्म कहा जाता है, पर परभणी के परीक्षण में चकैया में रेशा सबसे कम, 0.66%, और गूदा सबसे ज़्यादा, 96.74%, दर्ज हुआ। आँकड़ा जगह और तरीक़े के साथ बदलता है, इसलिए ख़रीदार से नमूना जँचवा लीजिए।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

सीज़न की आख़िरी तुड़ाई चाहिए, गोधरा में दिसंबर के पहले हफ़्ते की, और अच्छे विटामिन C वाला फल (बीकानेर में 594 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम), तो चकैया चुनिए। बड़े फल (बीकानेर में 33.4 ग्राम) या रस के लिए इसे मत चुनिए: गुजरात के परीक्षण में इसमें रस सबसे कम, 40%, था। पैदावार के लिए NA-7 लीजिए, जिसने बीकानेर में 105 किलो प्रति पेड़ दिया, जबकि चकैया ने 52 किलो। सबसे बड़े फल के लिए कृष्णा लीजिए (बीकानेर में 48.3 ग्राम)।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयजुलाई–अगस्त में रोपाई कीजिए (TNAU)।
  • बीज दरकलमी पौधे से लगाई जाती है। व्यावसायिक बाग के लिए बीज से नहीं बोई जाती।
  • दूरी6 × 6 मीटर, 1 × 1 मीटर या 1.25 × 1.25 मीटर के गड्ढों में (TNAU)। बीकानेर के परीक्षण में 8 × 8 मीटर पर रोपाई हुई थी।
  • बुवाई विधिTNAU बीज वाले पौधे, कलम और आँख-बंधन (बडिंग) तीनों को रोपण सामग्री बताता है। नामी किस्म के लिए कलम या बडिंग वाला पौधा लगाइए, क्योंकि बीज वाला पौधा किस्म जैसा नहीं निकलता।
  • सिंचाईछोटे पौधों को जमने तक पानी दीजिए। बरसात और सर्दी में सिंचाई की ज़रूरत नहीं। आँवले में ड्रिप ठीक बैठती है और 40–45% पानी बचा सकती है (TNAU)।
  • उर्वरकफल देने वाले हर पेड़ को साल में: 10 किलो गोबर की खाद, 200 ग्राम N, 500 ग्राम P और 200 ग्राम K। यह छँटाई के तुरंत बाद दीजिए (TNAU)।
  • कटाईTNAU फसल के लिए साल में लगभग 100 किलो प्रति पेड़ बताता है। मार्च–अप्रैल में छँटाई कीजिए और घनी टहनियाँ पतली कीजिए। पके फल की गुठली का रंग मलाई जैसे सफ़ेद से भूरा हो जाता है और गुठली के खोल पर रेशे दिखते हैं (CHES वेजलपुर)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
आँवला मज़बूत पेड़ है और कई तरह की मिट्टी में उगता है। यह खारापन और क्षारीयता सह लेता है (TNAU)।

जलवायु

जलवायु
उपोष्णकटिबंधीय पौधा, जिसे सूखा मौसम पसंद है (TNAU)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • सबसे बाद में पकती है (गोधरा में दिसंबर का पहला हफ़्ता), इसलिए पहले वाली किस्मों के बाद आपकी तुड़ाई का समय फैल जाता है।
  • विटामिन C अच्छा: बीकानेर में 594 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम, परभणी में 607.48 मिलीग्राम।
  • पुरानी, खूब उगाई जाने वाली किस्म और NA-6 व कंचन की मूल किस्म, इसलिए नर्सरी वाले इसे जानते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कृष्णा, NA-6 और बनारसी से छोटा फल (बीकानेर में 33.4 ग्राम, गुजरात में 30.66 ग्राम)।
  • गुजरात के परीक्षण में इसमें रस सबसे कम, 40%, और कसैलापन ज़्यादा था।
  • रेशे के आँकड़े परीक्षणों में अलग हैं, इसलिए ख़रीदार रेशे पर सख़्त हो तो नमूना जँचवाइए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश

सीज़न की आख़िरी तुड़ाई की योजना

चकैया वह किस्म है जो बाक़ी किस्मों के ख़त्म होने के बाद भी आपकी तुड़ाई चलाए रखती है। गोधरा, गुजरात में NA-7 अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में पकी, कृष्णा नवंबर के दूसरे हफ़्ते में और कंचन नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में। चकैया दिसंबर के पहले हफ़्ते में पकी, फल बँधने के 245 दिन बाद।

यही देर का समय इसे लगाने की वजह है। NA-7, कृष्णा, कंचन और चकैया वाला मिला-जुला बाग़ पाँच-छह हफ़्तों में पका फल देता है, इसलिए आपके तोड़ने वाले, सुखाने का आँगन और ख़रीदार सब एक ही हफ़्ते में नहीं चाहिए होते।

इसे बाज़ार के इंतज़ार में पेड़ पर मत छोड़िए। गुठली देखिए: जब वह मलाई जैसे सफ़ेद से भूरी हो जाए और गुठली के खोल पर रेशे दिखें, फल पक गया है। देर की फसल पर पहली ठंडी रातों का भी जोखिम रहता है, इसलिए नवंबर के अंत से तोड़ने वालों की टोली पक्की रखिए।

रोपाई सामग्री कहाँ से आती है

यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।

दूसरी किस्मों से तुलना

आंवला की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Banarasiबड़े फल वाली जल्दी की आँवला, जो ताज़े इस्तेमाल और गूदे के लिए लगाई जाती है, फल के आकार और अक्टूबर की तुड़ाई के लिए, सबसे भारी फसल के लिए नहींकलमी पेड़। गुजरात के बारानी परीक्षण में फल अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में पका (फल बँधने से 215 दिन)।बनारसी के लिए प्रति पेड़ किलो में कोई आँकड़ा नहीं मिला। गुजरात के बारानी परीक्षण में फल 33.90 ग्राम का था।उत्तर प्रदेश
BSR-1 (Bhavanisagar)तमिलनाडु की आँवला: TNAU की जारी किस्म, जिसका बताया हुआ 155 किलो प्रति पेड़ है, दक्षिण में पैदावार और रस की गुणवत्ता के लिए लगाई जाती हैकलमी पेड़। TNAU BSR-1 के पकने का महीना नहीं बताता।साल में 155 किलो फल प्रति पेड़ (TNAU)तमिलनाडु
Chakaiyaयही पेजदेर से पकने वाली पुरानी भरोसेमंद किस्म, जो अच्छे विटामिन C के साथ मौसम को दिसंबर तक खींचने के लिए लगाई जाती है, बड़े फल या रस के लिए नहींकलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में दिसंबर के पहले हफ़्ते में पका (फल बँधने से 245 दिन), चार किस्मों में सबसे बाद में।बीकानेर में 52 किलो प्रति पेड़ (1996 में 8 × 8 मीटर पर लगा बाग़, 2002–03 का औसत)। वहाँ फल 33.4 ग्राम का था, गुजरात के बारानी परीक्षण में 30.66 ग्राम।उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
Kanchanछोटे फल वाली, विटामिन C से भरपूर आँवला है। यह अचार और प्रसंस्करण के लिए महाराष्ट्र जैसी जगहों पर लगाई जाती है। वहाँ इसकी पैदावार सबसे अच्छी रही। शुष्क बंजर ज़मीन के लिए नहींकलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में और वेजलपुर में 15–22 नवंबर को पका।परभणी में 99.79 किलो प्रति पेड़ (3,459 फल); बीकानेर में 35 किलो (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। पैदावार जगह पर बहुत निर्भर है।उत्तर प्रदेश
Krishnaनवंबर के बीच में पकने वाली बड़े फल की आँवला है। यह उस जगह ताज़ा बिक्री के लिए लगाई जाती है जहाँ आकार का दाम मिलता है। सबसे ज़्यादा पैदावार या विटामिन C के लिए नहींकलमी पेड़। वेजलपुर में 15–22 नवंबर को और गोधरा, गुजरात में नवंबर के दूसरे हफ़्ते में पका (फल बँधने से 213–225 दिन)।बीकानेर में 45 किलो प्रति पेड़ (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। भुवनेश्वर में दूसरे नंबर की पैदावार। फल बीकानेर में 48.3 ग्राम, गुजरात के बारानी परीक्षण में 33.56 ग्राम।उत्तर प्रदेश
NA-6बड़े फल और ज़्यादा मिठास वाली आँवला, जो बीकानेर में पैदावार में दूसरे नंबर पर रही, उन किसानों के लिए जिन्हें अच्छी फसल के साथ आकार और मिठास चाहिएकलमी पेड़। बीकानेर में दिसंबर में तुड़ाई। हमें मिले गुजरात के परीक्षणों में NA-6 के पकने की तारीख़ें नहीं हैं।बीकानेर में 67 किलो प्रति पेड़ (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। वहाँ फल 40.8 ग्राम का था।उत्तर प्रदेश
NA-7पैदावार के लिए हर तरह से चुनी जाने वाली किस्म है। जिस भी परीक्षण में शामिल थी उसमें सबसे ज़्यादा फसल देने वाली आँवला है। यह मिले-जुले बाग़ की रीढ़ बनकर लगाई जाती हैकलमी पेड़। वेजलपुर में 23–31 अक्टूबर को और गोधरा, गुजरात में अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में पका (फल बँधने से 208–215 दिन), वहाँ मुख्य किस्मों में सबसे जल्दी।बीकानेर में 105 किलो प्रति पेड़ (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03); भुवनेश्वर में 42.34 किलो प्रति पेड़। फल बीकानेर में 36.52 ग्राम, गुजरात में 33.76 ग्राम और परभणी में 42.44 ग्राम।उत्तर प्रदेश

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और आंवला का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

आंवला के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चकैया दूसरी आँवला किस्मों की तुलना में कब पकती है?

यह सबसे बाद में पकती है। गोधरा, गुजरात में NA-7 अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में पकी। कृष्णा नवंबर के दूसरे हफ़्ते में पकी। कंचन नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में पकी। और चकैया दिसंबर के पहले हफ़्ते में (फल बँधने से 245 दिन)। गुजरात के दूसरे परीक्षण (वेजलपुर) में यह 8–14 नवंबर को पकी। आपकी तारीख़ें इलाक़े के साथ खिसकेंगी।

क्या चकैया रेशेदार है?

इसे रेशेदार, पुराने ढंग की आँवला कहा जाता है, पर परीक्षण एकमत नहीं हैं। परभणी के परीक्षण में चकैया में रेशा सबसे कम, 0.66%, और गूदा सबसे ज़्यादा, 96.74%, दर्ज हुआ। हमें ऐसा कोई परीक्षण नहीं मिला जिसने एक ही जगह सभी मुख्य किस्मों का रेशा नापा हो। ख़रीदार के लिए रेशा मायने रखता है तो नाम पर भरोसा करने की जगह अपने फल का नमूना जँचवाइए।

चकैया का पेड़ कितना फल देता है?

बीकानेर में, 1996 में 8 × 8 मीटर पर लगे बाग़ में, चकैया ने 52 किलो प्रति पेड़ दिया (2002 और 2003 का औसत)। वहाँ NA-7 ने 105 किलो और NA-6 ने 67 किलो दिया। बहुत पुराने पेड़ों पर 300–400 किलो का आँकड़ा कभी-कभी बताया जाता है, पर इसके पक्ष में कोई परीक्षण-आँकड़ा हमें नहीं मिला। परीक्षण वाले आँकड़े पर चलिए, और उम्र को उसमें जोड़ने दीजिए।

क्या चकैया नर्सरी के पौधे बनाने के लिए अच्छी मूल किस्म है?

यह दो बाद की किस्मों, NA-6 और कंचन, की मूल किस्म है, जिन्हें इसी से छाँटा गया। इसलिए नर्सरी के लिए कलम चढ़ाने की यह जानी-पहचानी, सुरक्षित किस्म है। कलमी पौधे मान्यता प्राप्त नर्सरी से लीजिए और पूछिए कि कलम किस पेड़ से ली गई। इसके फल के बीज से उगा पौधा चकैया जैसा नहीं निकलेगा।

क्या चकैया सूखी, बारानी ज़मीन पर चलती है?

आँवला आम तौर पर मज़बूत पेड़ है और सूखा मौसम पसंद करता है (TNAU), तथा खारी और क्षारीय मिट्टी सह लेता है। गुजरात के बारानी परीक्षण (वेजलपुर) में चकैया नौ में सबसे छोटा पेड़ था, 3.78 मीटर। गर्म शुष्क इलाक़े बीकानेर में इसने 52 किलो प्रति पेड़ दिया और यह उन चार किस्मों में थी जिन्हें लेखकों ने आशाजनक कहा।

स्रोत: Amla — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Standardization of maturity indices in aonla under semi-arid Western India — Annals of Arid Zone 47(2), 2008, Characterization of aonla varieties under zero irrigation semi-arid conditions — Indian J. Agric. Sci. 85(10), 2015 (CHES Vejalpur), Evaluation of aonla germplasm in hot arid ecosystem — Indian J. Hort. 67 (Special Issue), 2010, Comparative performance of aonla cultivars under Parbhani conditions — Int. J. Bio-resource & Stress Management. संपादकीय नीति.