Kanchan
NDUAT, फ़ैज़ाबाद की, चकैया से छाँटी गई। परभणी के परीक्षण में इसने सबसे ज़्यादा फल, 99.79 किलो प्रति पेड़, दिया, पर बीकानेर में यह सबसे कम पैदावार वाली थी (35 किलो) और इसका फल छोटा है (25.94–31.25 ग्राम)। विटामिन C ऊँचा है, 427–632 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- आंवला
- प्रकार
- ग्राफ़्टेड पौधा (बीज-चयन)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- फल कब से
- कलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में और वेजलपुर में 15–22 नवंबर को पका।
- अपेक्षित उपज
- परभणी में 99.79 किलो प्रति पेड़ (3,459 फल); बीकानेर में 35 किलो (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। पैदावार जगह पर बहुत निर्भर है।
- उपयुक्त मिट्टी
- कम बारिश वाले और कमज़ोर इलाकों में अच्छी चलती है
- रोग-प्रतिरोध
- कोई खास रोग-प्रतिरोध दर्ज नहीं
- जारी
- फैज़ाबाद के नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NDUAT) ने चकैया के बीज से चुनकर जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
कंचन को फ़ैज़ाबाद के नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NDUAT) ने चकैया से छँटाई करके जारी किया। इसका फल छोटा है, गुजरात के बारानी परीक्षण में 25.94 ग्राम और बीकानेर में 31.25 ग्राम। पैदावार जगह के साथ घटती-बढ़ती है। परभणी, महाराष्ट्र में तुलना की गई किस्मों में इसने सबसे ज़्यादा, 3,459 फलों से 99.79 किलो प्रति पेड़, दिया और लेखकों ने इसे वहाँ की बेहतर किस्म कहा। गर्म शुष्क इलाक़े बीकानेर में इसने 35 किलो दिया, मुख्य किस्मों में सबसे कम। विटामिन C ऊँचा है: बीकानेर में 632 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम और गुजरात में 427.27 मिलीग्राम, वहाँ NA-7 के बाद दूसरे नंबर पर। फल गोधरा में नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में पकता है। पेड़ ऊँचा और अर्ध-फैला हुआ है, गुजरात के परीक्षण में 4.59 मीटर।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
परभणी के आसपास या महाराष्ट्र जैसी परिस्थितियों में खेती करते हैं तो कंचन चुनिए। वहाँ इसने चार किस्मों में सबसे अच्छी पैदावार दी (3,459 फलों से 99.79 किलो प्रति पेड़)। और लेखकों ने इसे बेहतर बताया। अचार या प्रसंस्करण के लिए ऊँचा विटामिन C चाहिए (बीकानेर में 632 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम) तब भी इसे चुनिए। गर्म शुष्क इलाक़े के लिए इसे मत चुनिए: बीकानेर में यह मुख्य किस्मों में सबसे कम (35 किलो प्रति पेड़) रही। हर तरह से सबसे सुरक्षित पैदावार के लिए NA-7 लीजिए (बीकानेर में 105 किलो, भुवनेश्वर में 42.34 किलो)।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयजुलाई–अगस्त में रोपाई कीजिए (TNAU)।
- दूरी6 × 6 मीटर, 1 × 1 मीटर या 1.25 × 1.25 मीटर के गड्ढों में (TNAU)। बीकानेर के परीक्षण में 8 × 8 मीटर पर रोपाई हुई थी।
- बुवाई विधिTNAU बीज वाले पौधे, कलम और आँख-बंधन (बडिंग) तीनों को रोपण सामग्री बताता है। नामी किस्म के लिए कलम या बडिंग वाला पौधा लगाइए, क्योंकि बीज वाला पौधा किस्म जैसा नहीं निकलता।
- सिंचाईछोटे पौधों को जमने तक पानी दीजिए। बरसात और सर्दी में सिंचाई की ज़रूरत नहीं। आँवले में ड्रिप ठीक बैठती है और 40–45% पानी बचा सकती है (TNAU)।
- उर्वरकफल देने वाले हर पेड़ को साल में: 10 किलो गोबर की खाद, 200 ग्राम N, 500 ग्राम P और 200 ग्राम K। यह छँटाई के तुरंत बाद दीजिए (TNAU)।
- कटाईTNAU फसल के लिए साल में लगभग 100 किलो प्रति पेड़ बताता है। मार्च–अप्रैल में छँटाई कीजिए और घनी टहनियाँ पतली कीजिए। पके फल की गुठली का रंग मलाई जैसे सफ़ेद से भूरा हो जाता है और गुठली के खोल पर रेशे दिखते हैं (CHES वेजलपुर)।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- आँवला मज़बूत पेड़ है और कई तरह की मिट्टी में उगता है। यह खारापन और क्षारीयता सह लेता है (TNAU)।
जलवायु
- जलवायु
- उपोष्णकटिबंधीय पौधा, जिसे सूखा मौसम पसंद है (TNAU)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- परभणी में सबसे ज़्यादा पैदावार: 3,459 फलों से 99.79 किलो प्रति पेड़।
- ऊँचा विटामिन C: बीकानेर में 632 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम, गुजरात में 427.27 मिलीग्राम।
- गोधरा में नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में पकती है, कृष्णा के बाद और चकैया से पहले।
ध्यान रखने योग्य बातें
- छोटा फल: गुजरात में 25.94 ग्राम और बीकानेर में 31.25 ग्राम, मुख्य किस्मों में सबसे छोटा।
- पैदावार जगह-जगह असमान: परभणी में 99.79 किलो पर बीकानेर में 35 किलो, वहाँ सबसे कम।
- खटास ऊँची है (बीकानेर में 2.70%), जो ताज़ा खाने से ज़्यादा अचार के लायक़ है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
कंचन कुछ मौसम में चलती है, कुछ में नहीं
परीक्षणों में किसी और आँवला किस्म की पैदावार कंचन जितनी नहीं घटी-बढ़ी। परभणी, महाराष्ट्र में इसने चार किस्मों में सबसे ज़्यादा पैदावार दी: 3,459 फलों से 99.79 किलो प्रति पेड़। गर्म शुष्क इलाक़े बीकानेर में वही किस्म सिर्फ़ 35 किलो दे सकी, मुख्य किस्मों में सबसे कम।
सबक यह है कि देखिए परीक्षण कहाँ हुआ। आपकी ज़मीन परभणी जैसी ज़्यादा नम और नरम मौसम वाली है तो कंचन का एक खंड लगाना ठीक है। राजस्थान के गर्म, सूखे मैदानों में खेती करते हैं तो NA-7 पहले रखिए (बीकानेर में 105 किलो) और कंचन के कुछ ही पेड़ लगाइए।
जिस भी जगह खेती करें, याद रखिए कि कंचन का फल छोटा है, 25.94–31.25 ग्राम। भुगतान किलो का मिलता है, इसलिए गिनिए कि पेड़ कितने फल उठा सकता है, और तोड़ने वालों को वज़न के हिसाब से दीजिए।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
आंवला की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Banarasi | बड़े फल वाली जल्दी की आँवला, जो ताज़े इस्तेमाल और गूदे के लिए लगाई जाती है, फल के आकार और अक्टूबर की तुड़ाई के लिए, सबसे भारी फसल के लिए नहीं | कलमी पेड़। गुजरात के बारानी परीक्षण में फल अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में पका (फल बँधने से 215 दिन)। | बनारसी के लिए प्रति पेड़ किलो में कोई आँकड़ा नहीं मिला। गुजरात के बारानी परीक्षण में फल 33.90 ग्राम का था। | उत्तर प्रदेश |
| BSR-1 (Bhavanisagar) | तमिलनाडु की आँवला: TNAU की जारी किस्म, जिसका बताया हुआ 155 किलो प्रति पेड़ है, दक्षिण में पैदावार और रस की गुणवत्ता के लिए लगाई जाती है | कलमी पेड़। TNAU BSR-1 के पकने का महीना नहीं बताता। | साल में 155 किलो फल प्रति पेड़ (TNAU) | तमिलनाडु |
| Chakaiya | देर से पकने वाली पुरानी भरोसेमंद किस्म, जो अच्छे विटामिन C के साथ मौसम को दिसंबर तक खींचने के लिए लगाई जाती है, बड़े फल या रस के लिए नहीं | कलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में दिसंबर के पहले हफ़्ते में पका (फल बँधने से 245 दिन), चार किस्मों में सबसे बाद में। | बीकानेर में 52 किलो प्रति पेड़ (1996 में 8 × 8 मीटर पर लगा बाग़, 2002–03 का औसत)। वहाँ फल 33.4 ग्राम का था, गुजरात के बारानी परीक्षण में 30.66 ग्राम। | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश |
| Kanchanयही पेज | छोटे फल वाली, विटामिन C से भरपूर आँवला है। यह अचार और प्रसंस्करण के लिए महाराष्ट्र जैसी जगहों पर लगाई जाती है। वहाँ इसकी पैदावार सबसे अच्छी रही। शुष्क बंजर ज़मीन के लिए नहीं | कलमी पेड़। गोधरा, गुजरात में नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में और वेजलपुर में 15–22 नवंबर को पका। | परभणी में 99.79 किलो प्रति पेड़ (3,459 फल); बीकानेर में 35 किलो (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। पैदावार जगह पर बहुत निर्भर है। | उत्तर प्रदेश |
| Krishna | नवंबर के बीच में पकने वाली बड़े फल की आँवला है। यह उस जगह ताज़ा बिक्री के लिए लगाई जाती है जहाँ आकार का दाम मिलता है। सबसे ज़्यादा पैदावार या विटामिन C के लिए नहीं | कलमी पेड़। वेजलपुर में 15–22 नवंबर को और गोधरा, गुजरात में नवंबर के दूसरे हफ़्ते में पका (फल बँधने से 213–225 दिन)। | बीकानेर में 45 किलो प्रति पेड़ (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। भुवनेश्वर में दूसरे नंबर की पैदावार। फल बीकानेर में 48.3 ग्राम, गुजरात के बारानी परीक्षण में 33.56 ग्राम। | उत्तर प्रदेश |
| NA-6 | बड़े फल और ज़्यादा मिठास वाली आँवला, जो बीकानेर में पैदावार में दूसरे नंबर पर रही, उन किसानों के लिए जिन्हें अच्छी फसल के साथ आकार और मिठास चाहिए | कलमी पेड़। बीकानेर में दिसंबर में तुड़ाई। हमें मिले गुजरात के परीक्षणों में NA-6 के पकने की तारीख़ें नहीं हैं। | बीकानेर में 67 किलो प्रति पेड़ (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03)। वहाँ फल 40.8 ग्राम का था। | उत्तर प्रदेश |
| NA-7 | पैदावार के लिए हर तरह से चुनी जाने वाली किस्म है। जिस भी परीक्षण में शामिल थी उसमें सबसे ज़्यादा फसल देने वाली आँवला है। यह मिले-जुले बाग़ की रीढ़ बनकर लगाई जाती है | कलमी पेड़। वेजलपुर में 23–31 अक्टूबर को और गोधरा, गुजरात में अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में पका (फल बँधने से 208–215 दिन), वहाँ मुख्य किस्मों में सबसे जल्दी। | बीकानेर में 105 किलो प्रति पेड़ (8 × 8 मीटर का बाग़, 2002–03); भुवनेश्वर में 42.34 किलो प्रति पेड़। फल बीकानेर में 36.52 ग्राम, गुजरात में 33.76 ग्राम और परभणी में 42.44 ग्राम। | उत्तर प्रदेश |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और आंवला का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके आंवला के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर आंवला किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरआंवला की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में आंवला का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
आंवला के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कंचन की पैदावार के आँकड़ों में इतना फ़र्क़ क्यों है?
परीक्षण अलग-अलग जगहों पर थे, पेड़ों की उम्र और दूरी भी अलग थी। परभणी में इसने 3,459 फलों से 99.79 किलो प्रति पेड़ दिया। बीकानेर में, 1996 के 8 × 8 मीटर वाले बाग़ में, इसने 35 किलो दिया। कंचन महाराष्ट्र की ज़्यादा नमी वाली परिस्थितियों में अच्छी चली और गर्म शुष्क परिस्थितियों में कमज़ोर। अपने जैसे मौसम वाली जगह का आँकड़ा लीजिए।
कंचन का फल कितना बड़ा होता है?
यह छोटा है। गुजरात के बारानी परीक्षण में इसका वज़न 25.94 ग्राम था, नौ किस्मों में सबसे कम, और बीकानेर में 31.25 ग्राम। ख़रीदार बड़े फल के दाम देता है तो कृष्णा (बीकानेर में 48.3 ग्राम) देखिए, कंचन नहीं।
क्या कंचन अचार के लिए अच्छी आँवला है?
इसका विटामिन C और खटास ऊँचे हैं: बीकानेर में 632 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम और 2.70%। परभणी के परीक्षण में भी इसमें सबसे ज़्यादा खटास, 2.13%, और सबसे ज़्यादा TSS, 11.90%, रहा। यह तीखे अचार या प्रसंस्करण वाले फल के लायक़ है। हमें कोई परीक्षण नहीं मिला जिसने अचार की गुणवत्ता सीधे परखी हो, इसलिए छोटा बैच बनाइए और बड़ा करने से पहले ख़रीदार को चखाइए।
कंचन कब पकती है?
गोधरा, गुजरात में कंचन नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में पकी, फल बँधने से 225 दिन, कृष्णा (नवंबर का दूसरा हफ़्ता) के बाद और चकैया (दिसंबर का पहला हफ़्ता) से पहले। वेजलपुर, गुजरात में यह 15–22 नवंबर को पकी। इसलिए तोड़ने वालों का इंतज़ाम नवंबर के दूसरे पखवाड़े के लिए कीजिए।
क्या कंचन से बीज बचा सकते हैं या कलम ले सकते हैं?
इसे बीज से मत उगाइए। कंचन खुद चकैया से छाँटी गई है, और इसके फल के बीज से उगा पौधा इसके जैसा नहीं निकलेगा। इसे रूटस्टॉक पर कलम या बडिंग से बढ़ाया जाता है। मान्यता प्राप्त नर्सरी से कलमी पौधा लीजिए और पूछिए कि कलम की डाली कहाँ से आई।
स्रोत: Amla — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Comparative performance of aonla cultivars under Parbhani conditions — Int. J. Bio-resource & Stress Management, Evaluation of aonla germplasm in hot arid ecosystem — Indian J. Hort. 67 (Special Issue), 2010, Characterization of aonla varieties under zero irrigation semi-arid conditions — Indian J. Agric. Sci. 85(10), 2015 (CHES Vejalpur), Standardization of maturity indices in aonla under semi-arid Western India — Annals of Arid Zone 47(2), 2008. संपादकीय नीति.
