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केलासभी सीज़नरोपण सामग्रीअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Rasthali

क्षेत्रीय टेबल किस्म (सिल्क समूह) जो प्रीमियम स्थानीय बाज़ार को उगाई जाती है। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधि12–15 महीने
अपेक्षित उपजमध्यम
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
केला
प्रकार
रोपण सामग्री
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
12–15 महीने
अपेक्षित उपज
मध्यम
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
एक परंपरागत सिल्क-उपसमूह (AAB) मिठाई किस्म, जिसे क्षेत्रीय रूप से नंजनगुड रसबाले भी कहा जाता है — कोई आईसीएआर-विकसित किस्म नहीं; आईसीएआर-एनआरसीबी तिरुचिरापल्ली ने इससे व्युत्पन्न फ्यूज़ेरियम-विल्ट-प्रतिरोधी उत्परिवर्ती लाइनों पर शोध किया है, पर आधार किस्म एक परंपरागत चयन ही बनी हुई है, पिल्लों या टिश्यू कल्चर से प्रचारित, असली बीज से नहीं

इस किस्म के बारे में

रास्थाली एक AAB-जीनोम मिठाई केला है, जो सिल्क उप-समूह से है, और क्षेत्रीय रूप से सिल्क, मूठेली, मालभोग, मार्तमन, कर्कंडु वाझई, अमृतपाणी व रसाबेल के नाम से जानी जाती है, तथा कर्नाटक में नंजनगुड रसबाले के नाम से — यह एक सीधे फ़ेच किए गए global-agriculture.com किस्म प्रोफ़ाइल से पुष्ट होता है। एक सीधे फ़ेच किए गए TNAU केला किस्म पन्ने के अनुसार, मुख्य उत्पादन तमिलनाडु के इरोड व तिरुचिरापल्ली ज़िलों तथा केरल व कर्नाटक में होता है, जबकि global-agriculture.com अतिरिक्त रूप से आंध्र प्रदेश व बिहार का नाम भी लेता है। TNAU 14–15 महीने का फ़सल-चक्र, 60–80 फलों के साथ 15–20 किलो का गुच्छा, पतला, आसानी से छिलने वाला हाथीदाँत-पीला छिलका, और मीठा, ख़ुशबूदार गूदा दर्ज करता है; दोनों स्रोत स्वतंत्र रूप से इस फल को ताज़ा खाने के लिए क़ीमती पर उगाना वास्तव में कठिन व महँगा बताते हैं — global-agriculture.com विशेष रूप से 'फ्यूज़ेरियम विल्ट के प्रति गंभीर संवेदनशीलता' का ज़िक्र करता है, साथ ही धूप-दरार से बचाव के लिए गुच्छा-आवरण की ज़रूरत व गूदे में सख़्त गाँठें बनने की प्रवृत्ति भी; जबकि TNAU अलग से पनामा विल्ट, फ्यूज़ेरियम विल्ट, सख़्त-गाँठ निर्माण, व गुच्छे से फल गिरने की संवेदनशीलता सूचीबद्ध करता है। भारत भर में फ्यूज़ेरियम विल्ट पर एक सीधे फ़ेच किए गए समीक्षित भौगोलिक अध्ययन ने पक्के आँकड़े जोड़े: रास्थाली ने सर्वेक्षित किसी भी किस्म की सबसे व्यापक घटना-दर सीमा दिखाई, खेत में 0.4% से लेकर 45% तक, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, ओडिशा व असम में पुराने Foc रेस 1 व नए STR4 स्ट्रेन दोनों से संक्रमित मिली, और अध्ययन में किसी भी किस्म के सबसे अधिक अलग Foc वानस्पतिक-अनुकूलता समूहों (10) से जुड़ी थी — रोगजनक के प्रति संकुचित नहीं बल्कि व्यापक संवेदनशीलता का प्रमाण।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररोपण सामग्री
    अवधि12–15 महीने
    उपज क्षमतामध्यम
    रोग-प्रतिरोधपरिवर्तनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

12–15 महीने

अपेक्षित उपज

मध्यम

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • परिवर्तनशील

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पतला, आसानी से छिलने वाला छिलका, मैदा जैसा हाथीदाँत-सफ़ेद गूदा व तेज़ ख़ुशबू इसे दक्षिण भारत भर में वफ़ादार, प्रीमियम ताज़े-फल बाज़ार दिलाती है
  • राष्ट्रीय जर्मप्लाज़्म संग्रहों में अच्छी तरह दर्ज — अकेले आईसीएआर-एनआरसीबी के फ़ील्ड जीन बैंक में सैकड़ों एक्सेशन हैं — इसलिए प्रजनन कार्यक्रम विल्ट-प्रतिरोधी सुधरी लाइनों पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं
  • दक्षिण व पूर्वी भारत के व्यापक क्षेत्र (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बिहार) में उगाई जाती है, जिससे किसानों को क्षेत्रीय रूप से अनुकूलित रोपण सामग्री मिलती है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • दो स्वतंत्र रूप से फ़ेच किए गए स्रोत (global-agriculture.com व TNAU) दोनों वास्तविक रूप से गंभीर फ्यूज़ेरियम/पनामा विल्ट संवेदनशीलता बताते हैं, और एक सीधे फ़ेच किए गए समीक्षित भौगोलिक अध्ययन ने खेत में 45% तक (सीमा 0.4–45%) घटना दर व सर्वेक्षित किसी भी किस्म की सबसे व्यापक Foc स्ट्रेन विविधता पाई — यह इस रिकॉर्ड के मौजूदा diseaseResistance फ़ील्ड 'परिवर्तनशील' के अनुरूप है, पर उससे अधिक विशिष्ट है।
  • फ़सल-चक्र व गुच्छे के आकार के आँकड़े स्रोतों के बीच थोड़े बदलते हैं — TNAU 14–15 महीने व 15–20 किलो/60–80-फल का गुच्छा बताता है, जबकि एक अलग सामान्य प्रोफ़ाइल 80–90 फलों के साथ 15 किलो का गुच्छा बताती है — दोनों इस रिकॉर्ड के मौजूदा 12–15-महीने अवधि फ़ील्ड से मोटे तौर पर मेल खाते हैं, विरोधाभास नहीं।
  • 2026-08-15 को सुधारा गया: states पहले केवल तमिलनाडु, केरल बताता था। TNAU कर्नाटक जोड़ता है, और global-agriculture.com आगे आंध्र प्रदेश व बिहार भी जोड़ता है, इसलिए फ़ील्ड अब सभी पाँच राज्य सूचीबद्ध करता है।
  • धूप-दरार रोकने के लिए गुच्छा-आवरण की ज़रूरत होती है और गूदे में सख़्त गाँठें बनने की प्रवृत्ति होती है — रोग जोख़िम से परे वास्तविक अतिरिक्त उत्पादन लागत, जो अभी इस रिकॉर्ड के फ़ील्ड में प्रतिबिंबित नहीं है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • तमिलनाडु
  • केरल
  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश
  • बिहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रास्थाली फ्यूज़ेरियम विल्ट के प्रति प्रतिरोधी है?

नहीं — यह फ्यूज़ेरियम/पनामा विल्ट के प्रति वास्तव में अधिक संवेदनशील मिठाई केलों में से एक है। एक समीक्षित भौगोलिक अध्ययन ने खेत में 45% तक घटना दर पाई और पुराने रेस 1 व नए TR4-संबंधित STR4 स्ट्रेन दोनों से संक्रमण, सर्वेक्षित किसी भी किस्म की सबसे व्यापक रोगजनक विविधता के साथ।

रास्थाली के और कौन-कौन से नाम हैं?

सिल्क, मूठेली, मालभोग, मार्तमन, कर्कंडु वाझई, अमृतपाणी व रसाबेल — ये सभी एक ही AAB सिल्क-उपसमूह किस्म के क्षेत्रीय नाम हैं; कर्नाटक में इसे अक्सर नंजनगुड रसबाले कहा जाता है।

रास्थाली को गुच्छा-आवरण की ज़रूरत क्यों होती है?

विकास के दौरान फल को धूप-दरार से बचाने के लिए — कई अतिरिक्त उत्पादन लागतों में से एक (गूदे में सख़्त-गाँठ निर्माण व विल्ट प्रबंधन के साथ), जो रास्थाली को एक सामान्य कैवेंडिश प्रकार से उगाना महँगा बनाती है।

रास्थाली किन राज्यों में व्यावसायिक रूप से उगाई जाती है?

मुख्यतः तमिलनाडु (इरोड व तिरुचिरापल्ली ज़िले) व केरल, साथ ही कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व बिहार में भी असली खेती दर्ज की गई है।

क्या रास्थाली के विल्ट-प्रतिरोधी संस्करण विकसित किए जा रहे हैं?

हाँ — तिरुचिरापल्ली स्थित आईसीएआर-एनआरसीबी ने विशेष रूप से रास्थाली पर प्रेरित उत्परिवर्तन का उपयोग करके फ्यूज़ेरियम-विल्ट प्रतिरोध की जाँच की है और शोध परीक्षणों में प्रतिरोधी उत्परिवर्ती लाइनें पहचानी हैं, हालाँकि ये अभी मानक व्यावसायिक रोपण सामग्री नहीं बनी हैं।

स्रोत: Banana Variety Rasthali (Silk AAB) — Global Agriculture, Season & Varieties — Banana Expert System, TNAU Agritech Portal, Geographical Distribution, Host Range and Genetic Diversity of Fusarium oxysporum f. sp. cubense Causing Fusarium Wilt of Banana in India — PMC. संपादकीय नीति.