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केलासभी सीज़नरोपण सामग्रीअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Poovan

पिल्लों से लगाई जाती है, असली बीज से नहीं। एक परंपरागत AAB-जीनोम मिठाई केला — ग्रैंड नैन से छोटा गुच्छा, ताज़े फल के बाज़ार में वफ़ादार ख़रीदार के साथ, पर Foc-म्लानि से बचने का सुरक्षित विकल्प नहीं: खेत सर्वेक्षणों में असली संक्रमण मिला है, इसलिए इसे किसी असफल कैवेंडिश ब्लॉक की जगह म्लानि-सहनशील विकल्प मानकर न लगाएँ।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिपहले गुच्छे तक 12–13 महीने
अपेक्षित उपज200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
केला
प्रकार
रोपण सामग्री
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
पहले गुच्छे तक 12–13 महीने
अपेक्षित उपज
200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
दक्षिण भारत की एक परंपरागत मिठाई-केला किस्म (मैसूर/AAB उप-समूह), कोई आईसीएआर/विश्वविद्यालय-विकसित किस्म नहीं — पिल्लों से प्रचारित

इस किस्म के बारे में

पूवन मैसूर उप-समूह की एक AAB-जीनोम मिठाई केला किस्म है, जो तमिलनाडु (सबसे बड़ा उत्पादक), केरल व कर्नाटक में विभिन्न क्षेत्रीय नामों से व्यावसायिक रूप से उगाई जाती है — केरल में पलायनकोडन, आंध्र प्रदेश में कर्पूरा चक्करकेली, पूर्वोत्तर में अलपन — यह एक सीधे फ़ेच किए गए global-agriculture.com किस्म प्रोफ़ाइल से पुष्ट होता है। इसका फल हल्का अम्लीय व मज़बूत होता है, जिसमें विशिष्ट खट्टी-मीठी ख़ुशबू होती है, पकने पर सुनहरा पीला हो जाता है; गुच्छे मध्यम आकार के व सघन रूप से भरे होते हैं, और फल दरार-रोधी होता है व कटाई के बाद अच्छी तरह टिका रहता है — दोनों असली व्यापारिक फ़ायदे हैं। फ्यूज़ेरियम विल्ट (पनामा रोग) के मामले में, भारत भर में Fusarium oxysporum f. sp. cubense के भौगोलिक-वितरण पर एक सीधे फ़ेच किए गए समीक्षित शोध ने पाया कि पूवन पुराने रेस 1 व नए TR4 स्ट्रेन दोनों से संक्रमित मिली, कुछ सर्वेक्षित क्षेत्रों जैसे पश्चिम बंगाल में 45–50% तक की घटना दर के साथ — यह सहनशील की बजाय असल में संवेदनशील के क़रीब है। इसे केला ब्रैक्ट मोज़ेक विषाणु व केला स्ट्रीक विषाणु के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशील बताया गया है, ये दो अलग विषाणु जोख़िम हैं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररोपण सामग्री
    अवधिपहले गुच्छे तक 12–13 महीने
    उपज क्षमता200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधफ्यूज़ेरियम विल्ट के प्रति संवेदनशील — पश्चिम बंगाल में 45–50% खेत-घटना दर दर्ज
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

पहले गुच्छे तक 12–13 महीने

अपेक्षित उपज

200–250 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • विशिष्ट खट्टी-मीठी ख़ुशबू व मज़बूत बनावट इसे ताज़े फल के बाज़ार में वफ़ादार ख़रीदार दिलाती है, ख़ासकर तमिलनाडु में जहाँ यह प्रमुख व्यावसायिक किस्म है
  • अच्छी टिकाऊपन व फल-दरार प्रतिरोध कुछ अन्य मिठाई केलों की तुलना में असली कटाई-बाद के फ़ायदे हैं
  • तीन राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) में स्थानीय पारिस्थितिक प्रकारों के तहत व्यापक रूप से उगाई जाती है, इसलिए किसानों के पास दशकों से स्थानीय रूप से अनुकूलित रोपण सामग्री उपलब्ध है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • भारत में फ्यूज़ेरियम विल्ट के भौगोलिक-वितरण पर एक सीधे फ़ेच किए गए शोध ने पाया कि पूवन Foc रेस 1 व नए TR4 स्ट्रेन दोनों से संक्रमित मिली, पश्चिम बंगाल में 45–50% तक की घटना दर के साथ, और अलग रिपोर्टिंग इसकी पुष्टि करती है कि पूवन के एक संबंधित Foc-संवेदनशील रिश्तेदार (नेय पूवन) की वजह से विल्ट-प्रभावित इलाक़ों के किसानों को सफ़ेद वेलची नामक प्रतिरोधी पारिस्थितिक प्रकार अपनाना पड़ा। यह एक भौगोलिक सर्वेक्षण से मिली खेत-घटना दर है, मानकीकृत प्रयोगशाला प्रतिरोध स्कोर नहीं — इसलिए रिकॉर्ड में कच्ची 45–50% पश्चिम बंगाल आँकड़ा दी गई है, न कि कोई "मध्यम/अत्यधिक संवेदनशील" वर्गीकरण गढ़ा गया है जो किसी स्रोत में नहीं है, और न ही यह दावा किया गया है कि पूवन हर जगह TR4 के प्रति संवेदनशील है — केवल सर्वेक्षित क्षेत्रों में।
  • नेय पूवन के साथ भ्रमित न हों, जो जीनोम की दृष्टि से अलग एक रिश्तेदार है (AB, यह AAB पूवन नहीं) और उसी विल्ट-प्रतिरोध शोध में कहीं-कहीं दिखता है; दोनों नाम का हिस्सा साझा करते हैं पर अलग जीनोटाइप हैं
  • केला ब्रैक्ट मोज़ेक विषाणु व केला स्ट्रीक विषाणु के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशील — विल्ट के अलावा दो और रोग जोख़िम, जिनका ज़िक्र इस रिकॉर्ड के फ़ील्ड में फ़िलहाल नहीं है
  • बताई गई फ़सल अवधि स्रोत के अनुसार काफ़ी बदलती है (एक विवरण में क़रीब 11–12 महीने, दूसरे में 14–15 महीने) — एक किस्म के लिए सामान्य से ज़्यादा भिन्नता, इसलिए यहाँ इसे पक्के आँकड़े की बजाय अनुमानित दायरे के रूप में लिया गया है

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • तमिलनाडु
  • केरल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पूवन पनामा विल्ट के प्रति प्रतिरोधी है?

नहीं। भारत में फ्यूज़ेरियम विल्ट के भौगोलिक-वितरण पर एक शोध ने पाया कि पूवन पुराने रेस 1 व नए TR4 स्ट्रेन दोनों से संक्रमित मिली, पश्चिम बंगाल में 45–50% तक की घटना दर के साथ — यह एक सर्वेक्षण से मिली खेत-घटना दर है, प्रयोगशाला प्रतिरोध स्कोर नहीं, इसलिए इसे सटीक गंभीरता-रेटिंग की बजाय संवेदनशीलता के प्रमाण के रूप में लें।

क्या पूवन व नेय पूवन एक ही हैं?

नहीं — दोनों नाम का हिस्सा साझा करते हैं पर जीनोम की दृष्टि से अलग हैं। पूवन (इस पेज पर बताई गई) एक AAB त्रिगुणित है; नेय पूवन एक AB-जीनोम रिश्तेदार है जिसका अपना Foc-सहनशील पारिस्थितिक प्रकार, सफ़ेद वेलची, है — जिसे कभी-कभी वहाँ विकल्प के रूप में सुझाया जाता है जहाँ पूवन ख़ुद विल्ट का शिकार हो चुकी हो।

स्रोत: Banana Variety Poovan (Mysore AAB) — Global Agriculture, Geographical Distribution, Host Range and Genetic Diversity of Fusarium oxysporum f. sp. cubense Causing Fusarium Wilt of Banana in India — PMC. संपादकीय नीति.