Kaithli
मध्य-मौसम की बेर किस्म जिसने हरियाणा के Bawal ट्रायल में चार किस्मों में सबसे बड़ी फसल दी, रेतीली बारानी ज़मीन पर दो साल में 119.9 और 88.3 किग्रा प्रति पेड़। इसकी मिठास Gola और Umran से कम रही।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- फल कब से
- कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं
- अपेक्षित उपज
- सूखी ज़मीन के ट्रायल में लगभग 41 से 120 किग्रा प्रति पेड़
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- रोग-प्रतिरोध
- रोग-प्रतिरोध की अलग से जानकारी नहीं
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
Kaithli सूखे इलाक़े की पुरानी नाम वाली बेर किस्मों में से है, जो Gola, Seb, Umran और Banarasi Karaka के साथ उगाई जाती है। हरियाणा के Bawal ट्रायल में (300 मिमी बारिश, रेतीली मिट्टी, 13 साल के पेड़) इसने दोनों साल चार किस्मों में सबसे ज़्यादा फल दिया, 119.9 और 88.3 किग्रा प्रति पेड़। इसके पेड़ सबसे ऊँचे और चौड़े हुए और तुड़ाई सबसे ज़्यादा बार चाहिए हुई। यह 1 से 25 मार्च तक पकी। गुजरात के Sardarkrushinagar में तीन साल का औसत 40.79 किग्रा प्रति पेड़ रहा और यह जनवरी के तीसरे और चौथे हफ़्ते में पकी। Bawal में इसका TSS 15.2% और 15.3% रहा, Gola और Umran से कम। TNAU इसे Kaithali नाम से गिनता है और 8 x 3 मी दूरी बताता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
सूखी ज़मीन के बेर के बाग से सबसे बड़ी फसल चाहिए तो Kaithli चुनिए। हरियाणा के Bawal के ट्रायल में (300 मिमी बारिश, 13 साल के पेड़) इसने 1990-91 में 119.9 किग्रा और 1991-92 में 88.3 किग्रा प्रति पेड़ दिया, दोनों साल Gola, Umran और Mudia Murhara से ज़्यादा। यह मौसम के बीच में पकता है, 1 से 25 मार्च तक, और तुड़ाई के ज़्यादा चक्र माँगता है। सबसे मीठा फल चाहिए तो इसे मत चुनिए। इसका TSS 15.2% और 15.3% रहा, Gola और Umran से कम। मिठास के लिए Gola लीजिए।
बुवाई और खेती
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- Bawal ट्रायल में चार किस्मों में सबसे बड़ी फसल: 119.9 और 88.3 किग्रा प्रति पेड़।
- Bawal में जाँची गई चारों किस्मों में सबसे कम खटास वालों में, यानी फल की खटास हल्की है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- Bawal में Gola और Umran से कम मिठास: 15.2% और 15.3% TSS।
- बड़े पेड़ जिन्हें हर साल छँटाई चाहिए, और Umran से ज़्यादा तुड़ाई के चक्र।
- नम पश्चिम बंगाल के एक ट्रायल में इसने सिर्फ़ 14.6 किग्रा प्रति पेड़ दिया, 12 किस्मों में सबसे कम, इसलिए यह सूखी ज़मीन की पसंद है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- राजस्थान
- मध्य प्रदेश
बड़ा पेड़ ही बड़ी फसल देता है: Kaithli लगाने से पहले क्या सोचें
Bawal का ट्रायल Kaithli को दो बढ़त देता है। चारों किस्मों में इसके पेड़ सबसे ऊँचे और चौड़े थे, और दोनों साल इसने सबसे बड़ी फसल दी, 119.9 किग्रा और 88.3 किग्रा प्रति पेड़। दोनों बातें जुड़ी हैं। बड़ी छतरी ज़्यादा फल उठाती है, पर उसे ज़्यादा जगह, ज़्यादा खाद और तुड़ाई के लिए ज़्यादा मज़दूर चाहिए।
Kaithali के लिए TNAU की दूरी 8 x 3 मी है, लगभग 416 पेड़ प्रति हेक्टेयर, यानी क़तार में पास-पास। चौड़ी डालियाँ पास की क़तार में तभी चलती हैं जब आप हर फरवरी-मार्च में छँटाई करें और भीड़ वाली डालियाँ हल्की करें। छँटाई के तुरंत बाद दूसरे साल से हर पेड़ को 50 किग्रा गोबर की खाद, 500 ग्राम N, 200 ग्राम P और 500 ग्राम K दें। छँटाई छोड़ दी तो नीचे की डालियाँ एक-दूसरे को छाया में दबा देती हैं।
तुड़ाई दूसरी लागत है। पेपर कहता है कि Kaithli में तुड़ाई सबसे ज़्यादा बार हुई, पर गिनती नहीं देता। बड़ा ब्लॉक लगाने से पहले कुछ पेड़ लगाइए। पहले फल वाले साल में अपनी तुड़ाई गिनिए। और देखिए कि मार्च के छोटे मौसम में आपके मज़दूर बाग में इतनी बार आ सकते हैं या नहीं।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह मूलवृंत पर चढ़ाई गई (बडिंग से बनी) किस्म है, बीज से उगाई गई नहीं। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
बेर (इंडियन जुजुब) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Banarasi Karaka | पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मैदानों के उन किसानों के लिए जो बड़े फल का बेर चाहते हैं और पास में दूसरी किस्म भी लगाएँगे | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | तीन ट्रायल में 25.5 से 130 किग्रा प्रति पेड़ (कानपुर, पश्चिम बंगाल, हरियाणा) | उत्तर प्रदेश |
| Gola | राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के उन किसानों के लिए जो जल्दी पकने वाला मीठा बेर चाहते हैं और Kaithli से कम उपज सह सकते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | सूखी ज़मीन के ट्रायल में लगभग 41 से 69 किग्रा प्रति पेड़ | राजस्थान, हरियाणा, पंजाब |
| Kaithliयही पेज | राजस्थान और मध्य प्रदेश की सूखी, बारानी रेतीली ज़मीन के उन किसानों के लिए जो पेड़ से ज़्यादा से ज़्यादा फल लेना चाहते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | सूखी ज़मीन के ट्रायल में लगभग 41 से 120 किग्रा प्रति पेड़ | राजस्थान, मध्य प्रदेश |
| Seb (Apple Ber) | उन किसानों के लिए जो ताज़े फल के ख़रीदारों को बेचते हैं, जो गोल, सेब जैसे बेर के पैसे देते हैं, और जल्दी की फसल चाहते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | अच्छी; बड़े फल के लिए कद्र की जाती है | राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश |
| Thar Bhubhraj | राजस्थान के सूखे इलाक़े के उन किसानों के लिए जो जल्दी का, बहुत मीठा ताज़ा बेर बेचते हैं और मध्यम उपज सह लेते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | 6 साल पर लगभग 35 किग्रा प्रति पेड़ (ICAR-CIAH) | राजस्थान |
| Thar Malti | सूखे इलाक़े के उन किसानों के लिए जो ताज़ा बिक्री या प्रोसेसिंग के लिए ज़्यादा फल देने वाली देर की बेर चाहते हैं। और जो पहले कुछ पेड़ों पर उसका पाला सहना परख लेंगे | देर से पकने वाली: फल लगने के 145–150 दिन बाद पकता है (ICAR-CIAH) | 65–70 किग्रा प्रति पौधा (ICAR-CIAH; पौधे की उम्र नहीं बताई) | राजस्थान |
| Thar Sevika | राजस्थान के सूखे इलाक़े के उन किसानों के लिए जो बेर की जल्दी की फसल चाहते हैं और प्रति पेड़ मध्यम उपज से संतुष्ट हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं; जल्दी पकने वाली किस्म | 6 साल पर लगभग 34 किग्रा प्रति पेड़ (ICAR-CIAH) | राजस्थान |
| Umran | उन किसानों के लिए जो पेड़ों को सिंचाई और खाद दे सकते हैं और देर की फसल के लिए बड़ा, गूदेदार फल चाहते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | अक्सर 150 से 200 किग्रा प्रति पेड़ बताया जाता है; ट्रायल में 37 से 48 किग्रा आया | राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और बेर (इंडियन जुजुब) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके बेर (इंडियन जुजुब) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर बेर (इंडियन जुजुब) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरबेर (इंडियन जुजुब) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में बेर (इंडियन जुजुब) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में बेर (इंडियन जुजुब) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
बेर (इंडियन जुजुब) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूखी ज़मीन पर Kaithli की उपज कितनी होगी?
Bawal में, लगभग 300 मिमी बारिश वाली रेतीली मिट्टी पर, 13 साल के Kaithli पेड़ों ने दो साल में 119.9 किग्रा और 88.3 किग्रा दिया। दूसरे साल की गिरावट मिट्टी की कम नमी से आई, जिससे दिखता है कि बारिश फसल को कितना तय करती है। गुजरात के Sardarkrushinagar में 6 x 6 मी पर तीन साल का औसत 40.79 किग्रा प्रति पेड़ रहा। इन दोनों जगहों में पेड़ की उम्र और पानी अलग थे, इसलिए 40 से 120 किग्रा को दायरा मानिए, वादा नहीं।
Kaithli कब पकता है और कितनी तुड़ाई चाहिए?
Bawal में यह 1 से 25 मार्च तक पका, जिसे पेपर मध्य-मौसम की किस्म कहता है। गुजरात में यह जनवरी के तीसरे और चौथे हफ़्ते में आया। Bawal के पेपर के अनुसार Kaithli में तुड़ाई सबसे ज़्यादा बार हुई और Umran में सबसे कम, पर गिनती नहीं दी गई। पहले फलने वाले सालों में अपनी तुड़ाई की डायरी रखिए और Umran से ज़्यादा चक्रों के हिसाब से मज़दूर सोचिए।
Kaithli के लिए TNAU कौन-सी दूरी बताता है?
TNAU Kaithali के लिए 8 x 3 मी बताता है, जबकि सामान्य बेर के लिए 7 x 7 मी। यह लगभग 416 पेड़ प्रति हेक्टेयर बैठता है, 7 x 7 मी पर लगभग 204। पास की दूरी तभी चलती है जब हर साल फरवरी-मार्च में कटाई-छँटाई हो। Bawal में चारों किस्मों में Kaithli के पेड़ सबसे ऊँचे और चौड़े हुए, इसलिए भीड़ वाला ब्लॉक जल्दी अपनी छाया में आ जाएगा।
Kaithli के बाग की छँटाई और खाद कैसे करूँ?
TNAU फरवरी और मार्च में छँटाई करने, भीड़ वाली डालियाँ हल्की करने और छँटाई के तुरंत बाद खाद देने को कहता है। दूसरे साल से हर पेड़ को साल में 50 किग्रा गोबर की खाद, 500 ग्राम N, 200 ग्राम P और 500 ग्राम K मिलता है। पहले साल की मात्रा 20 किग्रा गोबर की खाद, 200 ग्राम N, 100 ग्राम P और 200 ग्राम K है। TNAU जनवरी, फरवरी और मार्च में महीने-महीने के अंतर पर 2% पोटैशियम नाइट्रेट का तीन बार छिड़काव भी करता है।
क्या Kaithli नम पूर्वी भारत में अच्छा चलता है?
हमें नम इलाक़े का जो एक ट्रायल मिला वह कहता है कि नहीं। पश्चिम बंगाल के नए जलोढ़ क्षेत्र के Mondouri में (5 साल के पेड़, 5 x 5 मी, 2013-14) Kaithali ने 14.6 किग्रा प्रति पेड़ दिया, 12 किस्मों में सबसे कम, और इसमें खटास सबसे ज़्यादा रही, 1.1%। वहाँ Madhavpur ने 50.8 किग्रा और Umran ने 47.6 किग्रा दिया। Kaithli ने सूखे, बारानी Bawal ट्रायल में सबसे अच्छा किया, इसलिए इसे सूखी ज़मीन की किस्म मानिए और दूसरी जगह पहले कुछ पेड़ आज़माइए।
स्रोत: Ber (Ziziphus mauritiana) — TNAU Agritech Portal, Horticulture, Saini et al., Performance of selected ber cultivars under rainfed conditions, Annals of Arid Zone 33(4), 1994, Chovatia et al., Performance of ber cultivars under arid conditions, Annals of Arid Zone 32(4), 1993, Shiva Kumar et al., Performance of ber in the new alluvial zone of West Bengal, Journal of Crop and Weed 13(1), 2017. संपादकीय नीति.
