Gola
सूखे इलाक़े की पुरानी बेर किस्म जो जल्दी पकती है। यह हरियाणा के Bawal में फरवरी से और गुजरात के Sardarkrushinagar में दिसंबर के आख़िरी हफ़्ते से पकी। Bawal में चार किस्मों में इसकी मिठास सबसे ज़्यादा रही, पर फल Kaithli से कम दिया।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- फल कब से
- कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं
- अपेक्षित उपज
- सूखी ज़मीन के ट्रायल में लगभग 41 से 69 किग्रा प्रति पेड़
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- रोग-प्रतिरोध
- रोग-प्रतिरोध की अलग से जानकारी नहीं
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
Gola उत्तर-पश्चिम भारत की पुरानी नाम वाली बेर किस्मों में से है, जो Seb, Umran, Kaithli और Banarasi Karaka के साथ उगाई जाती है। यह जल्दी पकती है। हरियाणा के Bawal में यह 2 फरवरी से 17 मार्च तक पकी, और गुजरात के Sardarkrushinagar में दिसंबर के आख़िरी हफ़्ते में आई। Bawal में जाँची गई चारों किस्मों में इसकी मिठास सबसे ज़्यादा रही, 19.4% और 17.6% TSS, और खटास भी सबसे ज़्यादा। वहाँ उपज में यह Kaithli से पीछे रही, 69.1 और 42.7 किग्रा प्रति पेड़ बनाम 119.9 और 88.3 किग्रा। TNAU अपनी उगाने लायक बेर किस्मों में Gola को गिनता है। पकने की तारीख़ें जगह के साथ बदलती हैं, इसलिए स्थानीय तारीख़ें अपने KVK से पूछिए।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
जल्दी पकने वाला और अच्छी मिठास का बेर चाहिए तो Gola चुनिए। हरियाणा के Bawal के ट्रायल में (साल में 300 मिमी बारिश, 13 साल के पेड़) Gola सबसे पहले पका, 2 फरवरी से 17 मार्च तक। चारों किस्मों में इसकी मिठास सबसे ज़्यादा रही, दोनों साल में 19.4% और 17.6% TSS। उपज 69.1 और 42.7 किग्रा प्रति पेड़ रही, जबकि Kaithli की 119.9 और 88.3 किग्रा। इसलिए ज़्यादा फल चाहिए तो Kaithli लीजिए, और जल्दी की मंडी और मिठास चाहिए तो Gola। देर की फसल के लिए इसे मत चुनिए। Umran, Gola के हफ़्तों बाद पकता है।
बुवाई और खेती
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जल्दी पकती है: Bawal में तुड़ाई का चरम दिन 22 फरवरी रहा, Umran से 26 दिन पहले।
- Bawal के ट्रायल में चारों किस्मों में सबसे ज़्यादा मिठास, 19.4% और 17.6% TSS।
ध्यान रखने योग्य बातें
- Bawal में Kaithli की उपज का लगभग आधा दिया: 69.1 और 42.7 किग्रा प्रति पेड़, जबकि Kaithli ने 119.9 और 88.3 किग्रा।
- Bawal में चारों किस्मों में सबसे ज़्यादा खटास, यानी फल मीठा है पर थोड़ी तेज़ खटास के साथ।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- राजस्थान
- हरियाणा
- पंजाब
जल्दी के बेर का हिसाब: 26 दिन पहले, फसल लगभग आधी
Gola की ताक़त उसका समय है। हरियाणा के Bawal में इसकी तुड़ाई का चरम दिन 22 फरवरी था और Umran का 20 मार्च, यानी 26 दिन का फ़ासला। Kaithli का मौसम 1 से 25 मार्च तक चला। फरवरी में बेचने वाले को मार्च के दूसरे पखवाड़े में बेचने वाले से कम बेचने वाले मिलते हैं।
इस समय की क़ीमत मात्रा में चुकानी पड़ती है। पहले साल Gola ने 69.1 किग्रा प्रति पेड़ दिया, जबकि Kaithli ने 119.9 किग्रा, यानी आधे से थोड़ा ज़्यादा। दूसरे साल Gola ने 42.7 किग्रा दिया और Kaithli ने 88.3 किग्रा, आधे से कम। पेपर दूसरे साल की कम उपज का कारण मिट्टी की कम नमी बताता है, और 300 मिमी बारिश वाली रेतीली बारानी ज़मीन किसी भी किस्म के साथ ऐसा कर देगी।
इसलिए आपके अपने खेत के लिए सवाल सीधा है। पिछले साल फरवरी के आख़िर और मार्च के आख़िर में मंडी में बेर का भाव देखिए। फरवरी के भाव को लगभग 40 से 70 किग्रा से गुणा कीजिए और मार्च के भाव को Kaithli के 88 से 120 किग्रा के दायरे से। जल्दी का भाव दोगुने के आसपास नहीं है तो Kaithli ज़्यादा कमाएगा। है तो Gola जीतता है। पेपरों में भाव नहीं हैं, इसलिए यह एक संख्या आपकी मंडी से ही आएगी।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह मूलवृंत पर चढ़ाई गई (बडिंग से बनी) किस्म है, बीज से उगाई गई नहीं। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
बेर (इंडियन जुजुब) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Banarasi Karaka | पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मैदानों के उन किसानों के लिए जो बड़े फल का बेर चाहते हैं और पास में दूसरी किस्म भी लगाएँगे | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | तीन ट्रायल में 25.5 से 130 किग्रा प्रति पेड़ (कानपुर, पश्चिम बंगाल, हरियाणा) | उत्तर प्रदेश |
| Golaयही पेज | राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के उन किसानों के लिए जो जल्दी पकने वाला मीठा बेर चाहते हैं और Kaithli से कम उपज सह सकते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | सूखी ज़मीन के ट्रायल में लगभग 41 से 69 किग्रा प्रति पेड़ | राजस्थान, हरियाणा, पंजाब |
| Kaithli | राजस्थान और मध्य प्रदेश की सूखी, बारानी रेतीली ज़मीन के उन किसानों के लिए जो पेड़ से ज़्यादा से ज़्यादा फल लेना चाहते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | सूखी ज़मीन के ट्रायल में लगभग 41 से 120 किग्रा प्रति पेड़ | राजस्थान, मध्य प्रदेश |
| Seb (Apple Ber) | उन किसानों के लिए जो ताज़े फल के ख़रीदारों को बेचते हैं, जो गोल, सेब जैसे बेर के पैसे देते हैं, और जल्दी की फसल चाहते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | अच्छी; बड़े फल के लिए कद्र की जाती है | राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश |
| Thar Bhubhraj | राजस्थान के सूखे इलाक़े के उन किसानों के लिए जो जल्दी का, बहुत मीठा ताज़ा बेर बेचते हैं और मध्यम उपज सह लेते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | 6 साल पर लगभग 35 किग्रा प्रति पेड़ (ICAR-CIAH) | राजस्थान |
| Thar Malti | सूखे इलाक़े के उन किसानों के लिए जो ताज़ा बिक्री या प्रोसेसिंग के लिए ज़्यादा फल देने वाली देर की बेर चाहते हैं। और जो पहले कुछ पेड़ों पर उसका पाला सहना परख लेंगे | देर से पकने वाली: फल लगने के 145–150 दिन बाद पकता है (ICAR-CIAH) | 65–70 किग्रा प्रति पौधा (ICAR-CIAH; पौधे की उम्र नहीं बताई) | राजस्थान |
| Thar Sevika | राजस्थान के सूखे इलाक़े के उन किसानों के लिए जो बेर की जल्दी की फसल चाहते हैं और प्रति पेड़ मध्यम उपज से संतुष्ट हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं; जल्दी पकने वाली किस्म | 6 साल पर लगभग 34 किग्रा प्रति पेड़ (ICAR-CIAH) | राजस्थान |
| Umran | उन किसानों के लिए जो पेड़ों को सिंचाई और खाद दे सकते हैं और देर की फसल के लिए बड़ा, गूदेदार फल चाहते हैं | कलम लगे पौधे में 2–3वें साल से फल आने लगते हैं | अक्सर 150 से 200 किग्रा प्रति पेड़ बताया जाता है; ट्रायल में 37 से 48 किग्रा आया | राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और बेर (इंडियन जुजुब) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके बेर (इंडियन जुजुब) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर बेर (इंडियन जुजुब) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरबेर (इंडियन जुजुब) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में बेर (इंडियन जुजुब) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में बेर (इंडियन जुजुब) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
बेर (इंडियन जुजुब) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Gola, Kaithli और Umran के मुक़ाबले कब पकता है?
हरियाणा के Bawal में Gola 2 फरवरी से 17 मार्च तक पका और 22 फरवरी को सबसे ज़्यादा फल उतरे। Kaithli 1 से 25 मार्च तक और Umran 5 से 28 मार्च तक पका, Umran का चरम 20 मार्च रहा। गुजरात के Sardarkrushinagar में Gola सबसे जल्दी पकने वालों में था, दिसंबर के आख़िरी हफ़्ते में, जबकि Kaithli और Umran जनवरी के तीसरे और चौथे हफ़्ते में आए। तारीख़ें जगह और साल के साथ बदलती हैं, इसलिए अपने नज़दीकी KVK से स्थानीय तारीख़ें पूछिए।
Gola का एक पेड़ कितना फल देता है?
Bawal में पेड़ों ने 1990-91 में 69.1 किग्रा और 1991-92 में 42.7 किग्रा दिया। पेपर के अनुसार दूसरे साल उपज कम रही क्योंकि मिट्टी में नमी कम थी। Sardarkrushinagar में 6 x 6 मी पर लगे Gola ने तीन साल का औसत 41.29 किग्रा प्रति पेड़ दिया, Gola Gurgaon (66.92 किग्रा) और Banarsi Pewandi (53.92 किग्रा) से पीछे। सूखी ज़मीन पर लगभग 40 से 70 किग्रा मानकर चलिए, और TNAU का बेर के लिए सामान्य आँकड़ा 70 से 80 किग्रा अच्छे पानी वाले बाग की ऊपरी हद समझिए।
क्या Gola, Kaithli और Umran से ज़्यादा मीठा है?
Bawal के ट्रायल में हाँ। Gola में दोनों साल TSS 19.4% और 17.6% रहा, Umran में 17.0% और 16.8%, और Kaithli में 15.2% और 15.3%। इसी पेपर में सबसे ज़्यादा खटास भी Gola में मिली, यानी फल मीठा है पर थोड़ी तेज़ खटास के साथ, फीका नहीं। TSS घुले हुए ठोस का हिस्सा है, ज़्यादातर चीनी, इसलिए बड़ा आँकड़ा यानी ज़्यादा मीठा फल।
Gola के बाग में फल मक्खी से कैसे बचाऊँ?
TNAU के बेर वाले पन्ने के अनुसार हर संक्रमित फल नष्ट कीजिए और पेड़ के नीचे की मिट्टी खोदिए ताकि प्यूपा बाहर आ जाएँ। प्रति हेक्टेयर 50 मछली-चूरा जाल लगाइए और चूरा हर 20 दिन में बदलिए। जाल पहला फल रंग पकड़ने से पहले लगा दीजिए, क्योंकि जल्दी वाली किस्म का फल मक्खी के मौसम में पहले पहुँचता है। पन्ने पर रासायनिक छिड़काव भी लिखे हैं। ऐसे पन्नों की कुछ पुरानी दवाएँ अब अनुमत नहीं हैं, इसलिए छिड़कने से पहले अपने KVK से पूछिए।
Gola जैसे बेर के लिए TNAU कौन-सी दूरी और रोपाई का महीना बताता है?
TNAU कलमी (बडेड) पौधे जुलाई और अगस्त में 7 x 7 मी पर, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में लगाने को कहता है। यह लगभग 204 पेड़ प्रति हेक्टेयर बैठता है। अलग दूरी TNAU सिर्फ़ Kaithali (8 x 3 मी) और Banarasi (8 x 4 मी) के लिए देता है, Gola के लिए नहीं, इसलिए 7 x 7 मी सुरक्षित शुरुआत है। गुजरात के ट्रायल में 6 x 6 मी लगाया गया था। नए पेड़ों को जमने तक पानी दीजिए और पहली भारी फसल से पहले उन्हें टिकने दीजिए।
नम इलाक़े के ट्रायल में Gola का प्रदर्शन कैसा रहा?
पश्चिम बंगाल के नए जलोढ़ क्षेत्र के Mondouri में (5 साल के पेड़, 5 x 5 मी, 2013-14) Gola ने 16.9 ग्राम के फल और 0.4% खटास के साथ 29.4 किग्रा प्रति पेड़ दिया। यह 12 किस्मों के बीच में है: Madhavpur ने 50.8 किग्रा और Umran ने 47.6 किग्रा दिया, और Kaithali ने सिर्फ़ 14.6 किग्रा। सूखे Bawal और Sardarkrushinagar ट्रायल में Gola की उपज 41 से 69 किग्रा रही, इसलिए नम जगह पर कम मिला।
स्रोत: Ber (Ziziphus mauritiana) — TNAU Agritech Portal, Horticulture, Saini et al., Performance of selected ber cultivars under rainfed conditions, Annals of Arid Zone 33(4), 1994, Chovatia et al., Performance of ber cultivars under arid conditions, Annals of Arid Zone 32(4), 1993, Shiva Kumar et al., Performance of ber in the new alluvial zone of West Bengal, Journal of Crop and Weed 13(1), 2017. संपादकीय नीति.
