Pusa Kesar
एक व्यापक रूप से उगाई गई IARI एशियाई लाल किस्म, लंबी, स्वयं-लाल (छिलका व गूदा) जड़ों, छोटे हरे शीर्ष, और कड़ी ठंड के बिना भरोसेमंद रंग के साथ — उत्तरी मैदानों की मानक व्यावसायिक लाल गाजर।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- गाजर
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 90–110 दिन
- अपेक्षित उपज
- 25–30 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, ढीली, पत्थर-रहित बलुई दोमट से दोमट
- जारी
- ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा जारी
इस किस्म के बारे में
पूसा केसर ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की एक उष्ण (एशियाई) लाल गाजर है, और उत्तरी मैदानों की लंबे समय से चली आ रही व्यावसायिक लाल गाजरों में से एक। इसकी जड़ें लंबी, नोकदार व स्वयं-लाल — छिलके ही नहीं, केंद्र तक रंगी — एक छोटे हरे शीर्ष व अच्छी भंडारण-गुणवत्ता के साथ। यह उस कड़ी ठंड की ज़रूरत के बिना पूरा रंग विकसित करती जो समशीतोष्ण प्रकारों को चाहिए, और सितंबर–नवंबर बुवाई से लगभग 90–110 दिन में पकती।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
90–110 दिन
अपेक्षित उपज
25–30 टन/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- कोई विशेष प्रतिरोध नहीं; सामान्य पत्ती-झुलसा निगरानी
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- स्वयं-लाल जड़ें — छिलके ही नहीं, केंद्र तक रंगी
- मैदानों में उस कड़ी ठंड के बिना भरोसे से रंग लाती जो समशीतोष्ण प्रकारों को चाहिए
- अच्छी भंडारण-गुणवत्ता वाली लंबी, सुडौल जड़ें
- खुली-परागित, इसलिए सर्दी-भर छोड़ी जड़ों से बीज बचाया जा सकता
ध्यान रखने योग्य बातें
- कोई विशेष रोग प्रतिरोध नहीं — अनुकूल मौसम में अल्टरनेरिया पत्ती-झुलसा को फिर भी एक सुरक्षात्मक छिड़काव चाहिए
- जड़-आकार व द्विशाखन से मुक्ति पूरी तरह एक गहरी, ढीली, पत्थर-रहित बीज-क्यारी पर निर्भर, जिसमें ताज़ी खाद न हो
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- दिल्ली
- राजस्थान
