Pusa Nayanjyoti
IARI की हाइब्रिड, जिसे भारत में सरकारी संस्थान की पहली नारंगी रंग की ठंडे इलाके की गाजर हाइब्रिड बताया गया है। जड़ें अंदर-बाहर एक रंग की हैं, बीच का सख़्त हिस्सा नहीं है, बीटा कैरोटीन भरपूर है, और सूची में दिल्ली-NCR और हिमाचल प्रदेश के लिए 35–45 टन/हेक्टेयर दिया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- गाजर
- प्रकार
- हाइब्रिड
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- अलग से आँकड़ा प्रकाशित नहीं
- अपेक्षित उपज
- 35–45 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, भुरभुरी, बिना पत्थर वाली बलुई दोमट से दोमट मिट्टी
- रोग-प्रतिरोध
- किसी खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं
- जारी
- ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पूसा नयनज्योति नई दिल्ली के ICAR-IARI की हाइब्रिड गाजर है। राष्ट्रीय सूची इसे भारत में सरकारी संस्थान की पहली नारंगी रंग की, ठंडे इलाके की गाजर हाइब्रिड बताती है। जड़ें अंदर-बाहर एक रंग की हैं, बीच का सख़्त हिस्सा नहीं है और बीटा कैरोटीन भरपूर है (7.55 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम)। सूची में बुवाई पहाड़ों में अप्रैल से अगस्त तक और उत्तर भारत के मैदानों में नवंबर से दिसंबर तक दी है। औसत उपज 35–45 टन/हेक्टेयर है। इसे दिल्ली-NCR और हिमाचल प्रदेश के लिए सुझाया गया है। हाइब्रिड होने से हर मौसम नया बीज ख़रीदना पड़ता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
इस फसल में सूची की सबसे ऊँची उपज (35–45 टन/हेक्टेयर) वाली नारंगी, बिना सख़्त हिस्से की गाजर चाहिए और हर मौसम हाइब्रिड बीज ख़रीदना मंज़ूर है तो पूसा नयनज्योति चुनिए। इसे पहाड़ों में अप्रैल से अगस्त और मैदानों में नवंबर से दिसंबर में बोया जा सकता है। खुले परागण का बीज जो खुद रखा जा सके और गहरी लाल जड़ चाहिए तो पूसा केसर या पूसा रुधिर लीजिए। छोटी, मीठी नारंगी जड़ें चाहिए और ठंडे मौसम में बुवाई है तो नैंट्स लीजिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयपहाड़ों में अप्रैल से अगस्त; उत्तर भारत के मैदानों में नवंबर से दिसंबर
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- बीच का सख़्त हिस्सा नहीं, नारंगी जड़ें, और बीटा कैरोटीन ज़्यादा, 7.55 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम।
- सूची में ऊँची उपज, 35–45 टन/हेक्टेयर।
- पहाड़ों (अप्रैल से अगस्त की बुवाई) और उत्तर भारत के मैदानों (नवंबर से दिसंबर की बुवाई), दोनों के लिए दर्ज।
ध्यान रखने योग्य बातें
- यह हाइब्रिड है, इसलिए आपकी फसल का बीज वैसा नहीं निकलेगा और हर मौसम नया बीज ख़रीदना पड़ेगा।
- सूची में इसे दिल्ली-NCR और हिमाचल प्रदेश के लिए सुझाया गया है। दूसरी जगह पहले छोटी पट्टी आज़माइए।
- खास रोग-प्रतिरोध नहीं है, इसलिए अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा पर नज़र रखनी होगी।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- दिल्ली
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
- हिमाचल प्रदेश
दो बुवाई समय, दो अलग फसलें
सूची में दो समय दिए हैं। पहाड़ों में अप्रैल से अगस्त तक बोते हैं और फसल ऊँचाई पर ठंडे महीनों में बढ़ती है। उत्तर भारत के मैदानों में नवंबर से दिसंबर तक बोते हैं और फसल सर्दी में बढ़ती है।
ये दो अलग फसलें हैं, अलग कटाई की तारीख़ों और अलग बाज़ार के साथ। अप्रैल में पहाड़ों में बोई फसल उस समय मैदानों के बाज़ार में आती है जब मैदानों की गाजर नहीं होती। नवंबर में मैदानों में बोई फसल सारी लाल गाजरों के साथ बिकती है।
बीज ख़रीदने से पहले तय कीजिए कि आपका समय कौन-सा है। हाइब्रिड बीज महँगा है, और ग़लत हफ़्ते में बोने से अतिरिक्त पैसा बेकार जाता है।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह हाइब्रिड है, इसलिए अपनी फ़सल से रखा बीज अगली बार वैसा नहीं उगता। पौधों की ऊँचाई, पकने का समय और उपज — सब ऊपर-नीचे हो जाती है। हर सीज़न नया प्रमाणित बीज ख़रीदिए और बोरे का टैग कटाई तक सँभालकर रखिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
गाजर की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Hisar Gairic | CCS HAU की लंबी जड़ों वाली लाल गाजर, जिसका बीच का हिस्सा भी रंगीन है, हरियाणा के लिए | अलग से आँकड़ा प्रकाशित नहीं | लगभग 30 टन/हेक्टेयर | हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश |
| Nantes | सलाद और खाने की छोटी, मीठी, चमकदार नारंगी ठंडे मौसम की गाजर | 90–100 दिन | लगभग 12 टन/हेक्टेयर | हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर, तमिलनाडु |
| Pusa Asita (black carrot) | IARI की काली, एंथोसायनिन से भरपूर गाजर, कांजी, जूस और प्राकृतिक रंग के लिए | 95–100 दिन | लगभग 30 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान |
| Pusa Kesar | IARI की पूरे भारत की मानक लाल गाजर: गहरी लाल, अंदर-बाहर रंगीन, 80–90 दिन | 80–90 दिन | लगभग 30 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान |
| Pusa Nayanjyotiयही पेज | IARI की नारंगी, बिना सख़्त हिस्से वाली गाजर हाइब्रिड, दिल्ली-NCR और हिमाचल प्रदेश के लिए | अलग से आँकड़ा प्रकाशित नहीं | 35–45 टन/हेक्टेयर | दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश |
| Pusa Rudhira | IARI की सुधरी लाल गाजर: 85–90 दिन, देर से बीज पर जाना और लगभग 33 टन/हेक्टेयर | 85–90 दिन | लगभग 33 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, दिल्ली |
| Pusa Vrishti | IARI की गर्मी सहने वाली गाजर जो जुलाई से बोई जा सकती है, जल्दी के बाज़ार के लिए | लगभग 85–90 दिन | लगभग 25 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और गाजर का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके गाजर के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर गाजर किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरगाजर की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में गाजर की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में गाजर का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
गाजर के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूसा नयनज्योति लाल गाजर है?
नहीं। राष्ट्रीय सूची इसे नारंगी रंग की, ठंडे इलाके की गाजर हाइब्रिड बताती है। जड़ें अंदर-बाहर एक रंग की हैं, बीच का सख़्त हिस्सा नहीं है। लाल एशियाई किस्में पूसा केसर और पूसा रुधिर हैं।
पूसा नयनज्योति कब बोऊँ?
सूची में पहाड़ों के लिए अप्रैल से अगस्त और उत्तर भारत के मैदानों के लिए नवंबर से दिसंबर दिया है। मैदानों में गर्म मौसम की शुरुआत में इसे मत बोइए।
पूसा नयनज्योति कितनी उपज देती है?
राष्ट्रीय सूची में औसत 35–45 टन/हेक्टेयर दिया है। यह पूसा केसर की सूची वाली 30 टन/हेक्टेयर से ऊपर है, पर यह हाइब्रिड है, इसलिए हर मौसम बीज पर भी ज़्यादा ख़र्च होता है।
क्या पूसा नयनज्योति का बीज खुद रखा जा सकता है?
नहीं। यह हाइब्रिड है, इसलिए आपकी फसल का बीज वैसी जड़ें नहीं देगा। हर मौसम भरोसेमंद डीलर से नया बीज ख़रीदिए।
पूसा नयनज्योति में बीटा कैरोटीन कितना है?
राष्ट्रीय सूची में 7.55 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम दिया है। जूस और सेहत पर ध्यान देने वाले ख़रीदारों के लिए इसे बिक्री का बिंदु बना सकते हैं, पर आँकड़ा तभी बोलिए जब ख़रीदार पूछे।
स्रोत: Checklist of Commercial Varieties of Vegetables (capsicum, carrot, cucumber, bottle gourd, bitter gourd) — TNAU Agritech national bulletin. संपादकीय नीति.
