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लीचीसभी सीज़नहवाई कलम (क्लोन से बढ़ाई जाने वाली किस्म)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Calcuttia

देर की लीची, जो NHB के अनुसार जून के आख़िरी हफ़्ते में पकती है। NHB इसे उत्तर भारत की सबसे अच्छी खाने की किस्म कहता है। वह बताता है कि हवा से बचाव और भरपूर पानी के साथ यह गर्म इलाक़ों में भी उगाई जा सकती है। प्रति पेड़ 80–100 किलो।

सीज़नसभी सीज़न
फल कब सेदेर की किस्म, जून के आख़िरी हफ़्ते में पकती है (NHB)
अपेक्षित उपजपूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्ष
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
लीची
प्रकार
हवाई कलम (क्लोन से बढ़ाई जाने वाली किस्म)
सीज़न
सभी सीज़न
फल कब से
देर की किस्म, जून के आख़िरी हफ़्ते में पकती है (NHB)
अपेक्षित उपज
पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्ष
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
किसी खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

कलकतिया, जिसे NHB कलकत्ता या कालकतिया लिखता है, देर की खाने की लीची है। NHB इसे उत्तर भारत में उगने वाली सभी किस्मों में खाने के लिए सबसे अच्छी बताता है। फल जून के आख़िरी हफ़्ते में पकते हैं। फल बड़े और लंबोतरे होते हैं, टायरियन गुलाबी रंग (गहरा गुलाबी-लाल) और गहरे उभार के साथ। गूदा मटमैला क्रीम-सफ़ेद, मुलायम, रसीला और बहुत मीठा होता है, TSS 18.17%। पूरे फलन वाला पेड़ 80–100 किलो देता है। पेड़ छोटा-सा है, लगभग 4 मीटर ऊँचा और 6 मीटर चौड़ा। NHB कहता है कि यह गर्म इलाक़ों में भी उग सकती है, बशर्ते तेज़ गर्म हवा से बचाव हो और भरपूर सिंचाई मिले।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

जून के आख़िरी हफ़्ते में तुड़ाई चाहिए, शाही (मई का तीसरा हफ़्ता) के काफ़ी बाद। साथ ही आपका बाग़ उत्तर भारत के गर्म इलाक़े में है जहाँ हवा से बचाव और भरपूर पानी दे सकते हैं, तो कलकतिया चुनिए। NHB इसे उत्तर भारत की किस्मों में खाने के लिए सबसे अच्छी कहता है। थोड़ा पहले, जून में गुलाबी फल की फ़सल चाहिए तो देहरादून लीजिए, पर उसके झुलसने और फटने का जोखिम मानकर चलिए। बिहार में खेती करते हैं और जल्दी, भारी फ़सल चाहिए तो शाही लीजिए।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयअगस्त–सितंबर में, मानसून आने के बाद रोपाई करें (NHB)।
  • दूरी8 × 8 मीटर वर्गाकार। जहाँ पेड़ का फैलाव ज़्यादा हो वहाँ 10 मीटर की दूरी रखें (NHB)।
  • बुवाई विधि6–9 महीने का गूटी (एयर-लेयर) वाला पौधा 1 घन मीटर के गड्ढे में लगाएँ, जिसमें ऊपरी मिट्टी, 20–25 किलो गोबर की खाद, 2 किलो हड्डी का चूरा और 400 ग्राम सल्फ़ेट ऑफ़ पोटाश भरा हो। रोपाई के तुरंत बाद पानी दें (NHB)।
  • सिंचाईछोटे पौधों को थाले में बार-बार पानी दें। फूल आने से चार महीने पहले सिंचाई बंद कर दें। सबसे ज़रूरी समय जनवरी के आख़िर से मानसून की शुरुआत तक है, जब फल बढ़ता है। इसमें चूक होने पर फल झड़ते और फटते हैं (NHB)।
  • उर्वरकप्रति पेड़ (NHB): रोपाई के साल 10–20 किलो गोबर की खाद, फिर हर साल 4 किलो बढ़ाते हुए पूरे फलन वाले पेड़ पर 60 किलो तक। पूरे फलन वाले पेड़ को 2.2 किलो अमोनियम सल्फ़ेट, 1.2 किलो सुपरफॉस्फेट और 1.2 किलो पोटैशियम सल्फ़ेट भी दें। गोबर की खाद, सुपरफॉस्फेट और पोटाश सितंबर में दें, और नाइट्रोजन दो बार में: फरवरी के बीच में और फल तोड़ने के बाद।
  • कटाईपूरी तरह पके फल तोड़ें: लाल रंग, कम से कम 25 मिलीमीटर चौड़ाई, छिलके के उभार कुछ चपटे और छिलका चिकना। पूरा गुच्छा थोड़ी टहनी और कुछ पत्तियों के साथ काटें। दूर की मंडी के लिए थोड़ा पहले तोड़ें, जब रंग बदलना शुरू ही हुआ हो (NHB)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक पदार्थ भरपूर हो। बलुई दोमट और चिकनी दोमट भी चलती है (NHB)।
pH
5.5–7
सिंचाई
भूजल स्तर ज़मीन से कम से कम 1.5–2 मीटर नीचे (NHB)।

जलवायु

तापमान
About 21°C (February) to 38°C (June) maximum in litchi tracts
बारिश
>125 cm, well spread through the year
जलवायु
सर्दी का पाला और गर्मी की सूखी गर्मी पौधे को नुकसान पहुँचाती है और फल फटते हैं। फूल आने के समय लगातार बारिश से परागण में रुकावट आती है। लीची 800 मीटर की ऊँचाई तक हो जाती है, पर नीचे की ऊँचाई पर सबसे अच्छी होती है (NHB)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • देर की तुड़ाई, जून के आख़िरी हफ़्ते में, मई वाली किस्मों के काफ़ी बाद
  • बड़ा, बहुत मीठा फल, TSS 18.17%
  • बॉम्बई से छोटा पेड़: लगभग 4 मीटर ऊँचा और 6 मीटर चौड़ा

ध्यान रखने योग्य बातें

  • गर्म इलाक़ों में इसे तेज़ गर्म हवा से बचाव और भरपूर सिंचाई का पानी चाहिए (NHB)।
  • NHB इसके लिए फटने का कोई प्रतिरोध नहीं बताता, इसलिए फल बढ़ने के दौरान मिट्टी को बराबर नम रखिए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • Northern India
  • Hotter areas with wind protection and irrigation

पहला पौधा लगाने से पहले हवा से बचाव और पानी

NHB के अनुसार कलकतिया गर्म इलाक़ों में भी उग सकती है, पर तेज़ गर्म हवा से बचाव और भरपूर सिंचाई के पानी के साथ ही। दोनों रोपाई से पहले तैयार होने चाहिए।

हवा से बचाव के लिए NHB बाग़ की सीमा पर सिल्वर ओक, सेसबेनिया और सहजन लगाने को कहता है। इन्हें पहले लगाइए, ताकि लीची आने तक ये बढ़ चुके हों।

छोटे लीची पौधे शीतलहर में भी कष्ट पाते हैं। NHB नवंबर के अंत तक उन्हें छप्पर से ढकने को कहता है। जहाँ हवा तेज़ हो वहाँ पौधे को खूँटे से बाँधिए, और रोपाई के तुरंत बाद पानी दीजिए। बहुत सूखे या बहुत गीले मौसम में रोपाई मत कीजिए।

रोपाई सामग्री कहाँ से आती है

यह गूटी (लेयरिंग) से तैयार होती है — पेड़ पर लगी हुई टहनी में ही जड़ें बनवाई जाती हैं, फिर उसे काटकर लगाया जाता है। इसके फल के बीज से यही किस्म वापस नहीं मिलती। गूटी इसी किस्म के किसी जाने-पहचाने मातृ पेड़ से लीजिए, या पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए।

दूसरी किस्मों से तुलना

लीची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Bombaiमई के पहले आधे में ताज़ा बिक्री के लिए पश्चिम बंगाल की अगेती खाने की लीचीअगेती, मई के पहले-दूसरे हफ़्ते में पकती है (NHB)पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्षपश्चिम बंगाल
Calcuttiaयही पेजगर्म उत्तरी इलाक़ों के लिए देर की, बहुत मीठी खाने की लीची, अगर हवा से बचाव और पानी दे सकेंदेर की किस्म, जून के आख़िरी हफ़्ते में पकती है (NHB)पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्षNorthern India, Hotter areas with wind protection and irrigation
Chinaमुज़फ़्फ़रपुर पट्टी के उन बाग़ों के लिए बौनी-सी लीची, जहाँ हर साल माइट की जाँच दिनचर्या में शामिल होमई के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB, मुज़फ़्फ़रपुर)पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्षबिहार
Dehradunउन किसानों के लिए देर की गुलाबी लीची, जो फल बढ़ने के दौरान मिट्टी की नमी एक-सी रख सकते हैंदेर की किस्म, जून के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB)पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्षउत्तर प्रदेश, पंजाब
Early Bedana (Early Seedless)सबसे अगेती लीची, खाने या प्रसंस्करण के लिए, जब सबसे बड़ी फ़सल से ज़्यादा नियमित फ़सल मायने रखती होसबसे अगेती किस्म (NHB तारीख़ नहीं देता)पूर्ण फलन पर 50–60 किग्रा/पेड़/वर्षउत्तर प्रदेश, पंजाब
Rose Scentedख़ुशबू माँगने वाले ख़रीदारों के लिए शाही के साथ उगाने लायक़ मीठी, गुलाब जैसी महक वाली खाने की लीचीमध्य-मौसम, जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू (NHB)पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्षBihar (Muzaffarpur belt)
Shahiमुज़फ़्फ़रपुर पट्टी की भारी फलने वाली खाने की लीची, जो 2018 के GI नाम 'शाही लीची ऑफ़ बिहार' से बिकती हैमई के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB, मुज़फ़्फ़रपुर)पूर्ण फलन पर 90–100 किग्रा/पेड़/वर्षBihar (Muzaffarpur belt)

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और लीची का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

लीची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कलकतिया जितनी देर से और कौन-सी लीचियाँ पकती हैं?

NHB लेट सीडलेस (लेट बेदाना) को जून के तीसरे हफ़्ते में बताता है, प्रति पेड़ 80–100 किलो और TSS 20% के साथ, और गुलाबी को जून के चौथे हफ़्ते में, 90–100 किलो और TSS 18.2% के साथ। देहरा दून तीसरे हफ़्ते में शुरू होती है। जून के आख़िरी हफ़्ते की कलकतिया यहाँ की सातों किस्मों में सबसे देर वाली है।

कलकतिया को कितना और कब पानी चाहिए?

NHB फूल आने से चार महीने पहले सिंचाई बंद करने को कहता है। सबसे ज़रूरी समय जनवरी के आख़िर से मानसून की शुरुआत तक है, जब फल बढ़ता है। तब बाग़ में बार-बार पानी न दिया जाए तो फल झड़ते और फटते हैं। छोटे पेड़ों को थाले में पानी दीजिए। पूरे बढ़े पेड़ को क्यारी-बाढ़ या नाली से सींच सकते हैं। प्रति पेड़ कितने लीटर, यह NHB नहीं बताता।

एक हेक्टेयर में कितने पेड़ आते हैं, और फ़सल कितनी हो सकती है?

NHB की 8 × 8 मीटर की दूरी पर एक हेक्टेयर में लगभग 156 पेड़ आते हैं। पूरे फलन के आँकड़े 80–100 किलो प्रति पेड़ पर यह लगभग 12.5–15.6 टन प्रति हेक्टेयर बैठता है। यह हिसाब सिर्फ़ पूरे बढ़े, अच्छी देखभाल वाले पेड़ों पर चलता है। छोटे पेड़ पहले सालों में बहुत कम देते हैं।

क्या देर की लीची का दाम बेहतर मिलता है?

हमारे पास इसे साबित करने वाला कोई भाव-रिकॉर्ड नहीं है। यह बात आम है, पर अपनी मंडी के लिए जाँच लीजिए। देर के स्लॉट के लिए खंड लगाने से पहले कुछ मौसम की अपनी मंडी के मई और जून के आख़िर के लीची भाव देखिए। और अपेक्षित 80–100 किलो प्रति पेड़ से तुलना कीजिए।

क्या अच्छे फल के बीज से कलकतिया उगा सकते हैं?

माँ-पेड़ जैसा फल चाहिए तो नहीं। लीची गूटी (एयर-लेयरिंग) से बढ़ाई जाती है, जो भारत की सबसे आम विधि है। 6–9 महीने के पौधे अगस्त–सितंबर में 1 घन मीटर के गड्ढों में लगाइए और नर्सरी से बिल पर किस्म का नाम लिखवाइए।

स्रोत: Varieties — NHB, Litchi, Planting — NHB, Litchi, Soil and climate — NHB, Litchi, Irrigation — NHB, Litchi, Manuring and fertilization — NHB, Litchi, Harvesting — NHB, Litchi. संपादकीय नीति.