Dehradun
उत्तर प्रदेश और पंजाब में मुख्य रूप से उगाई जाने वाली देर की खाने की लीची, जिसे बिहार में 'देहरा-रोज़' कहते हैं (NHB)। जून के तीसरे हफ़्ते से पकती है, प्रति पेड़ 80–90 किलो, TSS 17%। धूप से झुलसने और फल फटने की बहुत ज़्यादा संभावना।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- लीची
- प्रकार
- हवाई कलम (क्लोन से बढ़ाई जाने वाली किस्म)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- फल कब से
- देर की किस्म, जून के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB)
- अपेक्षित उपज
- पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- NHB के अनुसार धूप से झुलसने और फल फटने की बहुत ज़्यादा संभावना
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
देहरादून (NHB इसे देहरा दून लिखता है) उत्तर प्रदेश और पंजाब में मुख्य रूप से उगाई जाने वाली देर की खाने की लीची है। बिहार में इसे देहरा-रोज़ नाम से उगाते हैं। NHB के अनुसार फल जून के तीसरे हफ़्ते से पकने लगता है। दूसरे लेख इसे पहले बताते हैं, इसलिए अपने पेड़ों को देखकर चलिए। पेड़ मध्यम आकार का है, लगभग 5 मीटर ऊँचा और 7 मीटर चौड़ा। फल मध्यम आकार के, तिरछे दिल से शंक्वाकार, और पकने पर चटक गुलाबी होते हैं। गूदा भूरापन लिए सफ़ेद, मुलायम और कुछ रसीला है, TSS 17%। पेड़ 80–90 किलो देता है। NHB साफ़ कहता है कि देहरादून में धूप से झुलसने और फल फटने की संभावना बहुत ज़्यादा है। इसलिए इसमें ज़्यादातर मेहनत तोड़ाई से पहले के हफ़्तों में फल को बचाने की है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
देहरादून तभी चुनिए जब जनवरी के आख़िर से मानसून तक बाग़ को लगातार पानी दे सकें। NHB के अनुसार इसमें धूप से झुलसने और फटने की संभावना बहुत ज़्यादा है, और फटा फल बिक नहीं सकता। बदले में जून के तीसरे हफ़्ते से गुलाबी फल मिलता है, प्रति पेड़ 80–90 किलो। उस NHB चेतावनी के बिना देर का ज़्यादा मीठा फल (18.17% TSS) चाहिए तो कलकतिया लीजिए। आपके इलाक़े में जून से पहले गर्मी और सूखा आ जाता है और उससे पहले काम निपटाना है तो बॉम्बई या शाही लीजिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयअगस्त–सितंबर में, मानसून आने के बाद रोपाई करें (NHB)।
- दूरी8 × 8 मीटर वर्गाकार। जहाँ पेड़ का फैलाव ज़्यादा हो वहाँ 10 मीटर की दूरी रखें (NHB)।
- बुवाई विधि6–9 महीने का गूटी (एयर-लेयर) वाला पौधा 1 घन मीटर के गड्ढे में लगाएँ, जिसमें ऊपरी मिट्टी, 20–25 किलो गोबर की खाद, 2 किलो हड्डी का चूरा और 400 ग्राम सल्फ़ेट ऑफ़ पोटाश भरा हो। रोपाई के तुरंत बाद पानी दें (NHB)।
- सिंचाईछोटे पौधों को थाले में बार-बार पानी दें। फूल आने से चार महीने पहले सिंचाई बंद कर दें। सबसे ज़रूरी समय जनवरी के आख़िर से मानसून की शुरुआत तक है, जब फल बढ़ता है। इसमें चूक होने पर फल झड़ते और फटते हैं (NHB)।
- उर्वरकप्रति पेड़ (NHB): रोपाई के साल 10–20 किलो गोबर की खाद, फिर हर साल 4 किलो बढ़ाते हुए पूरे फलन वाले पेड़ पर 60 किलो तक। पूरे फलन वाले पेड़ को 2.2 किलो अमोनियम सल्फ़ेट, 1.2 किलो सुपरफॉस्फेट और 1.2 किलो पोटैशियम सल्फ़ेट भी दें। गोबर की खाद, सुपरफॉस्फेट और पोटाश सितंबर में दें, और नाइट्रोजन दो बार में: फरवरी के बीच में और फल तोड़ने के बाद।
- कटाईपूरी तरह पके फल तोड़ें: लाल रंग, कम से कम 25 मिलीमीटर चौड़ाई, छिलके के उभार कुछ चपटे और छिलका चिकना। पूरा गुच्छा थोड़ी टहनी और कुछ पत्तियों के साथ काटें। दूर की मंडी के लिए थोड़ा पहले तोड़ें, जब रंग बदलना शुरू ही हुआ हो (NHB)।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक पदार्थ भरपूर हो। बलुई दोमट और चिकनी दोमट भी चलती है (NHB)।
- pH
- 5.5–7
- सिंचाई
- भूजल स्तर ज़मीन से कम से कम 1.5–2 मीटर नीचे (NHB)।
जलवायु
- तापमान
- About 21°C (February) to 38°C (June) maximum in litchi tracts
- बारिश
- >125 cm, well spread through the year
- जलवायु
- सर्दी का पाला और गर्मी की सूखी गर्मी पौधे को नुकसान पहुँचाती है और फल फटते हैं। फूल आने के समय लगातार बारिश से परागण में रुकावट आती है। लीची 800 मीटर की ऊँचाई तक हो जाती है, पर नीचे की ऊँचाई पर सबसे अच्छी होती है (NHB)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- मध्यम पेड़ पर चटक गुलाबी फल, पेड़ लगभग 5 मीटर ऊँचा और 7 मीटर चौड़ा
- पूरे फलन पर प्रति पेड़ 80–90 किलो
- जून के तीसरे हफ़्ते में तुड़ाई, मई वाली किस्मों के ख़त्म होने के बाद
ध्यान रखने योग्य बातें
- NHB के अनुसार धूप से झुलसने और फल फटने की बहुत ज़्यादा संभावना। फटा फल बिक नहीं सकता।
- TSS 17% है, जो रोज़ सेंटेड (20%) और अर्ली बेदाना (19.8%) से कम है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
फल फटने से बचाने की पानी की योजना
NHB धूप से झुलसने और फल फटने को बढ़ते फल की गंभीर समस्या मानता है, और देहरा दून को इसके प्रति बहुत संवेदनशील बताता है। फटा फल बिक नहीं सकता।
कारण हैं फल बढ़ने के दौरान ऊँचा तापमान, कम नमी और मिट्टी में कम पानी, और सूखे दौर के बाद भारी सिंचाई। NHB के अनुसार सिंचाई का सबसे ज़रूरी समय जनवरी के आख़िर से मानसून की शुरुआत तक है। इसमें चूक से फल झड़ते और फटते हैं।
इसलिए जनवरी से पहले योजना लिख लीजिए: कौन-सी सिंचाई किस दिन, कितनी, और कौन करेगा। मिट्टी को बराबर नम रखिए और सूखने के बाद एक बार में भारी सिंचाई मत कीजिए। NHB फटना घटाने वाले वृद्धि-नियामक छिड़काव भी बताता है। कोई भी इस्तेमाल करने से पहले मौजूदा सलाह और मात्रा अपने कृषि विज्ञान केंद्र से पूछिए।
तोड़ाई पर फटे या झुलसे फल पैक करने से पहले अलग कर दीजिए।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह गूटी (लेयरिंग) से तैयार होती है — पेड़ पर लगी हुई टहनी में ही जड़ें बनवाई जाती हैं, फिर उसे काटकर लगाया जाता है। इसके फल के बीज से यही किस्म वापस नहीं मिलती। गूटी इसी किस्म के किसी जाने-पहचाने मातृ पेड़ से लीजिए, या पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
लीची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Bombai | मई के पहले आधे में ताज़ा बिक्री के लिए पश्चिम बंगाल की अगेती खाने की लीची | अगेती, मई के पहले-दूसरे हफ़्ते में पकती है (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष | पश्चिम बंगाल |
| Calcuttia | गर्म उत्तरी इलाक़ों के लिए देर की, बहुत मीठी खाने की लीची, अगर हवा से बचाव और पानी दे सकें | देर की किस्म, जून के आख़िरी हफ़्ते में पकती है (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्ष | Northern India, Hotter areas with wind protection and irrigation |
| China | मुज़फ़्फ़रपुर पट्टी के उन बाग़ों के लिए बौनी-सी लीची, जहाँ हर साल माइट की जाँच दिनचर्या में शामिल हो | मई के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB, मुज़फ़्फ़रपुर) | पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्ष | बिहार |
| Dehradunयही पेज | उन किसानों के लिए देर की गुलाबी लीची, जो फल बढ़ने के दौरान मिट्टी की नमी एक-सी रख सकते हैं | देर की किस्म, जून के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष | उत्तर प्रदेश, पंजाब |
| Early Bedana (Early Seedless) | सबसे अगेती लीची, खाने या प्रसंस्करण के लिए, जब सबसे बड़ी फ़सल से ज़्यादा नियमित फ़सल मायने रखती हो | सबसे अगेती किस्म (NHB तारीख़ नहीं देता) | पूर्ण फलन पर 50–60 किग्रा/पेड़/वर्ष | उत्तर प्रदेश, पंजाब |
| Rose Scented | ख़ुशबू माँगने वाले ख़रीदारों के लिए शाही के साथ उगाने लायक़ मीठी, गुलाब जैसी महक वाली खाने की लीची | मध्य-मौसम, जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष | Bihar (Muzaffarpur belt) |
| Shahi | मुज़फ़्फ़रपुर पट्टी की भारी फलने वाली खाने की लीची, जो 2018 के GI नाम 'शाही लीची ऑफ़ बिहार' से बिकती है | मई के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB, मुज़फ़्फ़रपुर) | पूर्ण फलन पर 90–100 किग्रा/पेड़/वर्ष | Bihar (Muzaffarpur belt) |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और लीची का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके लीची के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर लीची किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरलीची की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में लीची का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
लीची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
देहरा-रोज़ क्या है, और क्या यह देहरादून से अलग लीची है?
NHB के अनुसार देहरा दून बिहार में देहरा-रोज़ नाम से उगाई जाती है, यानी यह एक ही किस्म के दो नाम हैं। इसे रोज़ सेंटेड से मत मिलाइए, जो अलग मध्य-मौसम की लीची है और जिसका TSS 20% है। नर्सरी से फल लगा माँ-पेड़ दिखाने को कहिए।
देहरादून का फल क्यों फटता है?
NHB फल बढ़ने के दौरान ऊँचा तापमान, कम नमी और मिट्टी में कम पानी गिनाता है। दिन-रात के तापमान में तेज़ उतार-चढ़ाव और सूखे दौर के बाद भारी सिंचाई इसे और बढ़ाती है। इसलिए इलाज यह है कि फल लगने से तुड़ाई तक एक-सा, मध्यम पानी दीजिए, मिट्टी सूखने के बाद एक बार में बाढ़ जैसा पानी नहीं।
क्या कोई लीची है जो नहीं फटती?
NHB स्वर्ण रूपा को, जो CHES राँची का चयन है, ऊँचे TSS वाली और फल फटने के प्रति प्रतिरोधी बताता है। उसकी उपज या पकने की तारीख़ NHB नहीं देता। कुछ भी बदलने से पहले पौधों और स्थानीय नतीजों के बारे में CHES या अपने कृषि विज्ञान केंद्र से पूछिए।
तुड़ाई पर फटे या झुलसे फल का क्या करें?
पैक करने से पहले उन्हें अलग कर दीजिए। NHB कहता है कि ख़राब, झुलसे और फटे फल छाँट दें और आकार से ग्रेड बनाएँ, हर डिब्बे में एक ग्रेड और एक किस्म। डिब्बे में कुछ फटे फल बाक़ी को ख़राब कर देते हैं और पूरी खेप का दाम गिरा देते हैं।
देहरादून कब पकती है, और लेखों में फ़र्क़ क्यों है?
NHB के अनुसार फल जून के तीसरे हफ़्ते से पकना शुरू होता है। दूसरे लेख इसे पहले बताते हैं। पकना साल, जगह और मौसम पर निर्भर करता है, और व्यापार के नाम भी उलझाते हैं। कुछ मौसम की अपनी तारीख़ें लिखकर रखिए और मज़दूरी का हिसाब उन्हीं पर बाँधिए।
स्रोत: Varieties — NHB, Litchi, Planting — NHB, Litchi, Soil and climate — NHB, Litchi, Irrigation — NHB, Litchi, Manuring and fertilization — NHB, Litchi, Harvesting — NHB, Litchi. संपादकीय नीति.
