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लीचीसभी सीज़नएयर-लेयर (क्लोनल किस्म)अपडेट किया गया 6 सितंबर 2026

Dehradun

एक अगेती, भारी व नियमित फलने वाली किस्म आकर्षक फल-रंग के साथ, हालाँकि धूप-झुलसा व फटान के प्रति संवेदनशील; फल आमतौर पर जून के दूसरे हफ़्ते में पकता।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिअगेती, जून के दूसरे हफ़्ते पकती
अपेक्षित उपजपूर्ण फलन पर 80–120 किग्रा/पेड़/वर्ष
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
लीची
प्रकार
एयर-लेयर (क्लोनल किस्म)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
अगेती, जून के दूसरे हफ़्ते पकती
अपेक्षित उपज
पूर्ण फलन पर 80–120 किग्रा/पेड़/वर्ष
उपयुक्त मिट्टी
दोमट

इस किस्म के बारे में

देहरादून एक अगेती-सीज़न लीची किस्म है, भारी, नियमित फलन व आकर्षक फल-रंग को मूल्यवान, आमतौर पर जून के दूसरे हफ़्ते में पकती। इसकी मुख्य कमज़ोरी उजागर फल पर धूप-झुलसा व फल-फटान दोनों को एक सच्ची संवेदनशीलता है, जो इसे एक ऐसी किस्म बनाती जहाँ कटाई-पूर्व आख़िरी हफ़्तों भर सावधान नमी-प्रबंधन सामान्य से भी ज़्यादा मायने रखता — देहरादून चुनते किसानों को फटान से बचाने वाले एक-समान-नमी चलनों पर ख़ासतौर पर ध्यान देना चाहिए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारएयर-लेयर (क्लोनल किस्म)
    अवधिअगेती, जून के दूसरे हफ़्ते पकती
    उपज क्षमतापूर्ण फलन पर 80–120 किग्रा/पेड़/वर्ष
    रोग-प्रतिरोधधूप-झुलसा व फल-फटान के प्रति संवेदनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

अगेती, जून के दूसरे हफ़्ते पकती

अपेक्षित उपज

पूर्ण फलन पर 80–120 किग्रा/पेड़/वर्ष

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • धूप-झुलसा व फल-फटान के प्रति संवेदनशील

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • आकर्षक फल-रंग के साथ भारी, नियमित फलन
  • अगेता पकाव (जून का दूसरा हफ़्ता)

ध्यान रखने योग्य बातें

  • उजागर फल पर धूप-झुलसा के प्रति सच में संवेदनशील
  • फल-फटान से बचने को ख़ासतौर पर सावधान, एक-समान नमी-प्रबंधन चाहिए

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तराखंड