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बिहार की मुज़फ़्फ़रपुर पट्टी में शाही के साथ आमतौर पर उगाई एक मध्य-से-देर-सीज़न किस्म, एक भरोसेमंद पूरक किस्म को मूल्यवान जो कटाई-खिड़की को शाही से थोड़ा आगे बढ़ाती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- लीची
- प्रकार
- एयर-लेयर (क्लोनल किस्म)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- मध्य-से-देर सीज़न
- अपेक्षित उपज
- पूर्ण फलन पर 80–130 किग्रा/पेड़/वर्ष
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
इस किस्म के बारे में
चाइना बिहार की मुज़फ़्फ़रपुर पट्टी में शाही के साथ आमतौर पर उगाई एक मध्य-से-देर-सीज़न लीची किस्म है। यह शाही की GI स्थिति या उसकी विशिष्ट सुगंध नहीं रखती, पर थोड़ा बाद पकती, जो दोनों किस्में लगाते बाग़ों को कटाई-खिड़की बढ़ाने व मज़दूरी, बाज़ार-आपूर्ति व दाम-जोखिम को सँकरे शाही-केवल सीज़न से आगे फैलाने देती है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
मध्य-से-देर सीज़न
अपेक्षित उपज
पूर्ण फलन पर 80–130 किग्रा/पेड़/वर्ष
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- कोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- शाही की मध्य-सीज़न चोटी से कटाई-खिड़की थोड़ा आगे बढ़ाती
- उसी बाग़ में शाही के साथ एक भरोसेमंद पूरक किस्म
ध्यान रखने योग्य बातें
- शाही की GI स्थिति, सुगंध या श्रेष्ठ बाज़ार स्थिति नहीं रखती
- कोई विशेष रोग प्रतिरोध दावा नहीं
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- बिहार
