Rose Scented
मुज़फ़्फ़रपुर इलाक़े की खाने की लीची, जो अपनी अलग गुलाब जैसी ख़ुशबू के लिए मशहूर है (NHB)। जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू, प्रति पेड़ 80–90 किलो, गहरे गुलाबी फल और TSS 20%।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- लीची
- प्रकार
- एयर-लेयर (क्लोनल किस्म)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- फल कब से
- मध्य-मौसम, जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू (NHB)
- अपेक्षित उपज
- पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- कोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
रोज़ सेंटेड बिहार में मुज़फ़्फ़रपुर के आसपास खाने के लिए उगाई जाती है। NHB के अनुसार ऊँची फल-गुणवत्ता के अलावा यह अपनी अलग गुलाब जैसी ख़ुशबू के लिए मशहूर है, और नाम वहीं से आया है। यह मध्य-मौसम की किस्म है, जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू करती है। फल मध्यम से बड़े, ज़्यादातर अंडाकार या दिल जैसे और गहरे गुलाबी होते हैं। गूदा भूरापन लिए सफ़ेद, मुलायम और कुछ रसीला है, TSS 20%। पेड़ औसतन 80–90 किलो देता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
ख़रीदार गुलाब जैसी ख़ुशबू और ऊँची मिठास (20% TSS) चाहते हैं, और आप पहले से शाही जैसी कोई मुख्य किस्म उगाते हैं, तो रोज़ सेंटेड चुनिए। यह प्रति पेड़ 80–90 किलो देती है, शाही (90–100 किलो) से कम, और जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू करती है, शाही और चाइना के बाद। भारी फ़सल और GI नाम चाहिए तो शाही लीजिए। मिठास के साथ सबसे अगेती जगह चाहिए तो अर्ली बेदाना लीजिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयअगस्त–सितंबर में, मानसून आने के बाद रोपाई करें (NHB)।
- दूरी8 × 8 मीटर वर्गाकार। जहाँ पेड़ का फैलाव ज़्यादा हो वहाँ 10 मीटर की दूरी रखें (NHB)।
- बुवाई विधि6–9 महीने का गूटी (एयर-लेयर) वाला पौधा 1 घन मीटर के गड्ढे में लगाएँ, जिसमें ऊपरी मिट्टी, 20–25 किलो गोबर की खाद, 2 किलो हड्डी का चूरा और 400 ग्राम सल्फ़ेट ऑफ़ पोटाश भरा हो। रोपाई के तुरंत बाद पानी दें (NHB)।
- सिंचाईछोटे पौधों को थाले में बार-बार पानी दें। फूल आने से चार महीने पहले सिंचाई बंद कर दें। सबसे ज़रूरी समय जनवरी के आख़िर से मानसून की शुरुआत तक है, जब फल बढ़ता है। इसमें चूक होने पर फल झड़ते और फटते हैं (NHB)।
- उर्वरकप्रति पेड़ (NHB): रोपाई के साल 10–20 किलो गोबर की खाद, फिर हर साल 4 किलो बढ़ाते हुए पूरे फलन वाले पेड़ पर 60 किलो तक। पूरे फलन वाले पेड़ को 2.2 किलो अमोनियम सल्फ़ेट, 1.2 किलो सुपरफॉस्फेट और 1.2 किलो पोटैशियम सल्फ़ेट भी दें। गोबर की खाद, सुपरफॉस्फेट और पोटाश सितंबर में दें, और नाइट्रोजन दो बार में: फरवरी के बीच में और फल तोड़ने के बाद।
- कटाईपूरी तरह पके फल तोड़ें: लाल रंग, कम से कम 25 मिलीमीटर चौड़ाई, छिलके के उभार कुछ चपटे और छिलका चिकना। पूरा गुच्छा थोड़ी टहनी और कुछ पत्तियों के साथ काटें। दूर की मंडी के लिए थोड़ा पहले तोड़ें, जब रंग बदलना शुरू ही हुआ हो (NHB)।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छे जल-निकास वाली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक पदार्थ भरपूर हो। बलुई दोमट और चिकनी दोमट भी चलती है (NHB)।
- pH
- 5.5–7
- सिंचाई
- भूजल स्तर ज़मीन से कम से कम 1.5–2 मीटर नीचे (NHB)।
जलवायु
- तापमान
- About 21°C (February) to 38°C (June) maximum in litchi tracts
- बारिश
- >125 cm, well spread through the year
- जलवायु
- सर्दी का पाला और गर्मी की सूखी गर्मी पौधे को नुकसान पहुँचाती है और फल फटते हैं। फूल आने के समय लगातार बारिश से परागण में रुकावट आती है। लीची 800 मीटर की ऊँचाई तक हो जाती है, पर नीचे की ऊँचाई पर सबसे अच्छी होती है (NHB)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- अलग गुलाब जैसी ख़ुशबू, जिस गुण पर इस किस्म का नाम पड़ा
- TSS 20%, इन सातों किस्मों के लिए NHB का सबसे ऊँचा आँकड़ा
- गहरे गुलाबी, मध्यम से बड़े फल
ध्यान रखने योग्य बातें
- उपज प्रति पेड़ 80–90 किलो है, शाही के 90–100 किलो से कम।
- गूदा मुलायम और कुछ ही रसीला है (NHB)।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- Bihar (Muzaffarpur belt)
शाही के बगल में रोज़ सेंटेड का छोटा खंड
रोज़ सेंटेड प्रति पेड़ 80–90 किलो देती है, शाही के 90–100 किलो के मुक़ाबले। यह शाही से ज़्यादा तभी कमाती है जब ख़रीदार ख़ुशबू और मिठास के ज़्यादा पैसे दें।
अंदाज़ा मत लगाइए। एक छोटा खंड लगाइए, जून के पहले हफ़्ते में अपने मौजूदा ख़रीदारों को बेचिए, और प्रति किलो भाव अपनी शाही के भाव के बगल में लिखिए। दो-तीन मौसम में पता चल जाएगा कि ख़ुशबू का पैसा मिलता है या नहीं।
NHB की तारीख़ों में यह शाही के लगभग दस दिन से दो हफ़्ते बाद आती है, इसलिए तुड़ाई की दूसरी खिड़की भी मिलती है। तारीख़ें साल के साथ बदलती हैं, इसलिए अपना रिकॉर्ड रखिए।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह गूटी (लेयरिंग) से तैयार होती है — पेड़ पर लगी हुई टहनी में ही जड़ें बनवाई जाती हैं, फिर उसे काटकर लगाया जाता है। इसके फल के बीज से यही किस्म वापस नहीं मिलती। गूटी इसी किस्म के किसी जाने-पहचाने मातृ पेड़ से लीजिए, या पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
लीची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Bombai | मई के पहले आधे में ताज़ा बिक्री के लिए पश्चिम बंगाल की अगेती खाने की लीची | अगेती, मई के पहले-दूसरे हफ़्ते में पकती है (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष | पश्चिम बंगाल |
| Calcuttia | गर्म उत्तरी इलाक़ों के लिए देर की, बहुत मीठी खाने की लीची, अगर हवा से बचाव और पानी दे सकें | देर की किस्म, जून के आख़िरी हफ़्ते में पकती है (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्ष | Northern India, Hotter areas with wind protection and irrigation |
| China | मुज़फ़्फ़रपुर पट्टी के उन बाग़ों के लिए बौनी-सी लीची, जहाँ हर साल माइट की जाँच दिनचर्या में शामिल हो | मई के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB, मुज़फ़्फ़रपुर) | पूर्ण फलन पर 80–100 किग्रा/पेड़/वर्ष | बिहार |
| Dehradun | उन किसानों के लिए देर की गुलाबी लीची, जो फल बढ़ने के दौरान मिट्टी की नमी एक-सी रख सकते हैं | देर की किस्म, जून के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष | उत्तर प्रदेश, पंजाब |
| Early Bedana (Early Seedless) | सबसे अगेती लीची, खाने या प्रसंस्करण के लिए, जब सबसे बड़ी फ़सल से ज़्यादा नियमित फ़सल मायने रखती हो | सबसे अगेती किस्म (NHB तारीख़ नहीं देता) | पूर्ण फलन पर 50–60 किग्रा/पेड़/वर्ष | उत्तर प्रदेश, पंजाब |
| Rose Scentedयही पेज | ख़ुशबू माँगने वाले ख़रीदारों के लिए शाही के साथ उगाने लायक़ मीठी, गुलाब जैसी महक वाली खाने की लीची | मध्य-मौसम, जून के पहले हफ़्ते से पकना शुरू (NHB) | पूर्ण फलन पर 80–90 किग्रा/पेड़/वर्ष | Bihar (Muzaffarpur belt) |
| Shahi | मुज़फ़्फ़रपुर पट्टी की भारी फलने वाली खाने की लीची, जो 2018 के GI नाम 'शाही लीची ऑफ़ बिहार' से बिकती है | मई के तीसरे हफ़्ते से पकती है (NHB, मुज़फ़्फ़रपुर) | पूर्ण फलन पर 90–100 किग्रा/पेड़/वर्ष | Bihar (Muzaffarpur belt) |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और लीची का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके लीची के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर लीची किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरलीची की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में लीची का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
लीची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इसे रोज़ सेंटेड क्यों कहते हैं?
NHB के अनुसार ऊँची फल-गुणवत्ता के अलावा यह किस्म अपनी अलग गुलाब जैसी ख़ुशबू के लिए मशहूर है, इसीलिए इसे रोज़ सेंटेड कहते हैं। NHB ख़ुशबू का कोई अंक या माप नहीं देता, इसलिए अपने फल सूँघकर और ख़रीदारों की बात सुनकर परखिए।
क्या रोज़ सेंटेड और देहरा-रोज़ एक ही हैं?
नहीं। NHB के अनुसार देहरा-रोज़ देहरा दून का बिहार वाला नाम है, जो जून के तीसरे हफ़्ते से शुरू होने वाली देर की लीची है और TSS 17% है। रोज़ सेंटेड जून के पहले हफ़्ते से शुरू होने वाली मध्य-मौसम की लीची है, TSS 20%। दोनों नाम मिलते-जुलते हैं, इसलिए बिल पर किस्म जाँच लीजिए।
मिठास में रोज़ सेंटेड कैसी है?
NHB रोज़ सेंटेड का TSS 20%, अर्ली बेदाना का 19.8%, कलकतिया का 18.17%, और बॉम्बई और देहरा दून दोनों का 17% बताता है। शाही या चाइना का TSS का कोई आँकड़ा वह नहीं देता। इसलिए काग़ज़ पर आँकड़े वाली किस्मों में रोज़ सेंटेड सबसे मीठी है।
क्या गुलाब जैसी ख़ुशबू मुज़फ़्फ़रपुर के बाहर भी रहती है?
NHB रोज़ सेंटेड को मुज़फ़्फ़रपुर इलाक़े में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली बताता है। दूसरी जगहों का कोई नतीजा वह नहीं देता। इसलिए यह कहीं प्रकाशित नहीं है कि ख़ुशबू बाहर भी वैसी रहती है। पहले कुछ पेड़ लगाकर देखिए, और अपने कृषि विज्ञान केंद्र से पूछिए कि आपके पास किसी ने उगाई है या नहीं।
रोज़ सेंटेड का फल तोड़ने लायक़ कब होता है?
NHB के लीची के आम संकेत इस्तेमाल कीजिए: लाल रंग, कम से कम 25 मिलीमीटर चौड़ाई, चपटे उभार और चिकना छिलका। लीची तोड़ने के बाद नहीं पकती, इसलिए पका फल तोड़िए। थोड़ी टहनी और कुछ पत्तियों के साथ पूरा गुच्छा काटिए, क्योंकि अकेला फल डंडी की तरफ़ से फट जाता है और जल्दी सड़ता है।
स्रोत: Varieties — NHB, Litchi, Planting — NHB, Litchi, Soil and climate — NHB, Litchi, Irrigation — NHB, Litchi, Manuring and fertilization — NHB, Litchi, Harvesting — NHB, Litchi. संपादकीय नीति.
