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आमसभी सीज़नरोपण सामग्रीअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Langra

समृद्ध स्वाद वाली उत्तर-भारतीय हरे-छिलके की पछेती-मौसम क्लासिक किस्म। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिपछेती-मौसम
अपेक्षित उपजअधिक
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
आम
प्रकार
रोपण सामग्री
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
पछेती-मौसम
अपेक्षित उपज
अधिक
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
पारंपरिक वाराणसी (बनारस), उत्तर प्रदेश की किस्म, लगभग 250–300 वर्ष पुरानी — एक किसान-चयनित विरासती किस्म; 2022 में "बनारसी लंगड़ा" के रूप में GI-टैग प्राप्त

इस किस्म के बारे में

लंगड़ा, जिसे बनारसी लंगड़ा भी कहा जाता है, एक पारंपरिक आम किस्म है, जिसे लगभग 250–300 साल पहले सबसे पहले बनारस (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में उगाया गया — यह एक किसान-चयनित विरासती किस्म है, कोई संस्थान रिलीज़ नहीं। यह पूरी तरह पकने पर भी हरा छिलका बनाए रखता है, कभी-कभी हल्का पीलापन लिए हुए, पीले, चिकने, न्यूनतम-रेशेदार गूदे व समृद्ध, मीठे, जटिल सुगंध के साथ। यह सामान्यतः मध्य जून से जुलाई के अंत तक तोड़ा जाता है और इसे 2022 में "बनारसी लंगड़ा" के रूप में भौगोलिक संकेत (GI) दर्जा मिला।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररोपण सामग्री
    अवधिपछेती-मौसम
    उपज क्षमताअधिक
    रोग-प्रतिरोधमध्यम
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

पछेती-मौसम

अपेक्षित उपज

अधिक

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • मध्यम

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्रोत सामग्री उत्तर प्रदेश व बिहार के साथ पश्चिम बंगाल को भी एक उगाने वाले राज्य के रूप में नाम लेती है — यह इस रिकॉर्ड के मौजूदा दो-राज्य `states` फ़ील्ड से एक राज्य अधिक है, यदि इस किस्म की पहुँच सटीक रूप से ट्रैक की जा रही हो तो जोड़ने लायक़।
  • इस चरण में स्रोत से मिली मध्य जून से जुलाई के अंत तक की कटाई-विंडो इस रिकॉर्ड की मौजूदा "पछेती-मौसम" duration फ़ील्ड के अनुरूप है व उसका समर्थन करती है — वहाँ कोई विरोधाभास नहीं है।
  • कोई औपचारिक प्रजनन संस्थान या जारी-वर्ष नहीं मिला — लंगड़ा एक विरासती किसान-चयनित किस्म है, जिसकी एक लोक-व्युत्पत्ति नामकरण कहानी है (एक आम-उत्पादक से जुड़ी जो कथित तौर पर लंगड़ाकर चलता था), न कि कोई प्रजनित व जारी की गई किस्म, जैसा इस परियोजना में कहीं और कुछ अंगूर व अमरूद रिकॉर्ड के लिए देखा गया।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लंगड़ा आम पकने पर भी हरा क्यों रहता है?

यह किस्म का एक वास्तविक गुण है, अधपके होने का संकेत नहीं — लंगड़ा पकने के दौरान भी हरा छिलका बनाए रखता है, कभी-कभी हल्का पीलापन लिए हुए, इसलिए पकावट को रंग की बजाय सुगंध व हल्की कोमलता से बेहतर आँका जाता है।

लंगड़ा आम को यह नाम कहाँ से मिला?

लोक परंपरा के अनुसार, इसका नाम बनारस के एक आम-उत्पादक के नाम पर पड़ा जो कथित तौर पर लंगड़ाकर चलता था ("लंगड़ा" का अर्थ है "लूला/अपंग") — यह कहानी किस्म की विरासत का हिस्सा है, कोई दस्तावेज़ीकृत प्रजनन रिकॉर्ड नहीं।

क्या लंगड़ा आम को GI टैग प्राप्त है?

हाँ — इसे 2022 में "बनारसी लंगड़ा" के रूप में भौगोलिक संकेत दर्जा मिला, जो वाराणसी क्षेत्र से इसके संबंध की रक्षा करता है।

लंगड़ा आम का सीज़न कब होता है?

मध्य जून से जुलाई के अंत तक — एक पछेती-मौसम कटाई, जो इस रिकॉर्ड की मौजूदा "पछेती-मौसम" duration फ़ील्ड से मेल खाती है।

लंगड़ा आम किन राज्यों में उगाई जाती है?

मुख्यतः उत्तर प्रदेश, साथ ही बिहार व पश्चिम बंगाल में भी खेती रिपोर्ट की गई है — यह इस रिकॉर्ड के मौजूदा states फ़ील्ड से एक राज्य (पश्चिम बंगाल) अधिक है।