Arkel
सबसे जल्दी तैयार होने वाला आम मटर — बाज़ार में सबसे पहले पहुँचती है, इसीलिए शुरुआती सीज़न का भाव मिलता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- मटर
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 60–65 दिन
- अपेक्षित उपज
- 80–100 क्विंटल/हेक्टेयर (हरी फली)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- इंग्लैंड से लाई गई और आईएआरआई, नई दिल्ली के ज़रिए व्यावसायिक खेती के लिए जारी की गई, बताया गया है कि 1970 के दशक में — इस चरण में किसी सीधे फ़ेच किए गए प्राथमिक दस्तावेज़ से सटीक अधिसूचना वर्ष पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
अर्कल भारत में सबसे पुरानी व सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली अगेती गार्डन मटर किस्मों में से एक है, इंग्लैंड से लाई गई और आईएआरआई, नई दिल्ली के ज़रिए व्यावसायिक खेती के लिए मूल्यांकित/जारी की गई — यह 1970 के दशक का आगमन कई स्वतंत्र वेबसर्च सारांशों में पुष्ट होता है, हालाँकि इस चरण में किसी सीधे फ़ेच किए गए प्राथमिक आईएआरआई/आईसीएआर दस्तावेज़ ने सटीक अधिसूचना वर्ष तय नहीं किया। यह लगभग 45–60 सेमी ऊँचा बौना पौधा है, जिसमें हँसिया-आकार की, भरी हुई फलियाँ लगती हैं, हर फली में 7–9 मीठे बीज होते हैं जो पकने पर सिकुड़ जाते हैं, पहली तुड़ाई लगभग 60 दिन में होती है — यह इस रिकॉर्ड के अपने 60–65 दिन के दायरे से क़रीब से मेल खाता है। एक सीधे फ़ेच किए गए इंडिया इनपुट्स किस्म-सूची से स्वतंत्र रूप से 55–60 दिन की परिपक्वता की पुष्टि होती है और फलियों को मध्यम (8–10 सेमी), कोमल व मीठे स्वाद वाली बताया गया है। अर्कल, बॉनविल व भारत में विकसित रचना के साथ, उन गिनी-चुनी विदेशी-मूल मटर किस्मों में से एक बनी हुई है जो दशकों बाद भी व्यापक रूप से उगाई जाती हैं, जबकि 1970 के दशक की ज़्यादातर अन्य विदेशी किस्में नई किस्मों से विस्थापित हो चुकी हैं।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
60–65 दिन
अपेक्षित उपज
80–100 क्विंटल/हेक्टेयर (हरी फली)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- आम गार्डन मटर किस्मों में सबसे पहले बाज़ार पहुँचने वाली, इस रिकॉर्ड के अपने नोट से मेल खाता है — इसीलिए यह वह शुरुआती सीज़न प्रीमियम भाव दिलाती है जिसके लिए किसान इसे बोते हैं।
- इसकी सिकुड़े-बीज परिपक्वता व लगभग 60 दिन की पहली-तुड़ाई खिड़की दो स्रोतों में पुष्ट होती है — एक वेबसर्च-पुष्ट कृषि सारांश व एक सीधे फ़ेच किया गया इंडिया इनपुट्स सूची — दोनों इस रिकॉर्ड के अपने 60–65 दिन के दायरे के क़रीब बैठते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- इस चरण में किसी सीधे फ़ेच किए गए प्राथमिक आईएआरआई या आईसीएआर दस्तावेज़ से सटीक रिलीज़/अधिसूचना वर्ष तय नहीं हो सका — वेबसर्च सारांश लगातार 1970 के दशक में इंग्लैंड से भारत आगमन बताते हैं, पर चूँकि यह आँकड़ा किसी सीधे पढ़े गए दस्तावेज़ से नहीं है, इसे यहाँ सटीक की बजाय अनुमानित बताया गया है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- बिहार
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नई भारतीय किस्मों के होते हुए भी अर्कल को दशकों बाद भी क्यों उगाया जाता है?
स्रोत इसे उन गिनी-चुनी विदेशी-मूल मटर किस्मों में से एक बताते हैं — बॉनविल व बाद में भारत-निर्मित रचना के साथ — जिन्हें किसान लगातार उगाते आए हैं क्योंकि इसके बाद अगेतेपन व बाज़ार-समय के संयोजन में कोई इसे पीछे नहीं छोड़ सका; 1970 के दशक की ज़्यादातर अन्य विदेशी किस्में तब से विस्थापित हो चुकी हैं।
विभिन्न स्रोतों में अर्कल की अवधि की तुलना कैसी है?
एक सीधे फ़ेच किए गए इंडिया इनपुट्स सूची में 55–60 दिन बताए गए हैं और एक अलग वेबसर्च-पुष्ट कृषि सारांश में "60 दिन में पहली तुड़ाई" बताई गई है — दोनों इस रिकॉर्ड के अपने 60–65 दिन के दायरे पर या उससे थोड़ा नीचे बैठते हैं।
स्रोत: Top 10 Famous Pea Varieties in India — India Inputs. संपादकीय नीति.
