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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
अनानाससभी सीज़नसकर / स्लिप (क्लोनल किस्म)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Kew (Giant Kew)

NHB के अनुसार भारत की मुख्य व्यावसायिक अनानास: देर से पकने वाली किस्म, 2–3 किग्रा का लंबोतरा फल। इसका गूदा हल्का पीला, लगभग बिना रेशे का और रसीला है, जो कैनिंग के लिए ठीक माना जाता है। पश्चिम बंगाल के परीक्षण में इसने सबसे ज़्यादा फल दिया, पर मिठास मॉरीशस और क्वीन से कम रही।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिलगाने से तुड़ाई तक लगभग 15–24 महीने
अपेक्षित उपजपश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर; TNAU के अनुसार अच्छे बाग में 50 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीअच्छी निकासी वाली बलुई दोमट या लैटेराइट मिट्टी, काफ़ी अम्लीय (pH 5.0–6.0)

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
सकर / स्लिप (क्लोनल किस्म)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15–24 महीने
अपेक्षित उपज
पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर; TNAU के अनुसार अच्छे बाग में 50 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट या लैटेराइट मिट्टी, काफ़ी अम्लीय (pH 5.0–6.0)
रोग-प्रतिरोध
कैयेन समूह: KAU के अनुसार फाइटोफ्थोरा सहने वाली, पर मीलीबग विल्ट, फ्यूज़ेरियोसिस और फल-सड़न के प्रति संवेदनशील
जारी
स्मूद कैयेन समूह की किस्म (KAU); भारत में जारी होने की कोई सूचना नहीं मिली

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

क्यू, जिसे जायंट क्यू भी कहते हैं, वह अनानास है जिसके इर्द-गिर्द देश की ज़्यादातर कैनरी और जूस इकाइयाँ बनी हैं। NHB इसे देर से पकने वाली किस्म बताता है: फल 2-3 किग्रा का, लंबोतरा और ताज की ओर थोड़ा पतला, चौड़ी उथली आँखें। गूदा हल्का पीला और लगभग बिना रेशे का है, अम्लता 0.6 से 1.2% और TSS 12 से 16 डिग्री ब्रिक्स। केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) इसे स्मूद कैयेन वर्ग में रखता है और बताता है कि यह सकर और स्लिप कम बनाती है। केरल के वाझाकुलम में 1950 के दशक में क्यू पहली व्यावसायिक फसल थी, जो जैम और स्क्वैश बनाने वालों के लिए उगाई जाती थी। बाद में कई किसान ज़्यादा मीठी मॉरीशस पर चले गए। KAU क्यू को असम और पूर्वोत्तर, केरल और, जायंट क्यू के नाम से, पश्चिम बंगाल की मुख्य किस्मों में गिनता है। TNAU इसे तमिलनाडु की व्यावसायिक किस्म बताता है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

अगर आपका ख़रीदार कैनरी या वज़न के हिसाब से दाम देने वाला थोक व्यापारी है, और आप पहले फल के लिए ज़्यादा इंतज़ार कर सकते हैं, तो क्यू चुनिए। NHB इसे भारत की मुख्य व्यावसायिक किस्म बताता है और कैनिंग के लिए अच्छा मानता है: 2-3 किग्रा का फल, चौड़ी उथली आँखें और हल्का पीला, लगभग बिना रेशे का गूदा। 2014-16 के कूच बिहार परीक्षण में क्यू ने बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर दिया, जबकि मॉरीशस ने 57.54 और क्वीन ने 54.96 टन/हेक्टेयर; फल का वज़न 1,877 ग्राम रहा, जबकि बाकी दोनों में लगभग 1,110 और 1,197 ग्राम। इसकी क़ीमत है समय और मिठास: क्यू मॉरीशस से देर से तुड़ाई पर पहुँची, और इसका TSS 15.29 डिग्री ब्रिक्स रहा, जबकि मॉरीशस का 18.10 और क्वीन का 18.00। अगर आप मीठा फल टेबल बाज़ार में बेचते हैं, तो पहले मॉरीशस देखिए।

बुवाई और खेती

  • दूरीदोहरी कतारें: पौधे से पौधा 30 सेमी, कतार से कतार 60 सेमी, दो दोहरी कतारों के बीच 90 सेमी (KAU की तालिका में लगभग 43,500 पौधे/हेक्टेयर; TNAU भी यही नाप देता है)

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • बड़ा फल: कूच बिहार परीक्षण में 1,877 ग्राम, जबकि क्वीन और मॉरीशस में लगभग 1,110 से 1,200 ग्राम।
  • उस परीक्षण की आठ किस्मों में सबसे ज़्यादा उपज: बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर।
  • चौड़ी उथली आँखें और लगभग बिना रेशे का गूदा, इसीलिए NHB इसे कैनिंग के लिए ठीक मानता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • परीक्षण में मिठास मॉरीशस और क्वीन से कम: TSS 15.29, जबकि 18.10 और 18.00 डिग्री ब्रिक्स।
  • देर से पकती है और रोपण सामग्री कम बनती है: KAU के अनुसार क्यू सकर और स्लिप कम बनाती है। कई ताज वाले फल, जिन्हें कैनरी नहीं लेती, कैयेन समूह में आम हैं।
  • KAU इस समूह की समस्याओं में मीलीबग विल्ट, फ्यूज़ेरियोसिस, फलिका कोर-सड़न और बट-सड़न गिनता है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • असम
  • पश्चिम बंगाल
  • केरल
  • तमिलनाडु

लगाने से फल तक के महीने गिनिए

कूच बिहार परीक्षण हर किस्म के लिए दो आँकड़े देता है: लगाने से 50% फूल तक के दिन, और फूल से तुड़ाई तक के दिन। क्यू के लिए ये 339.52 और 129.90 दिन थे, यानी कुल लगभग 469 दिन या 15.4 महीने। मॉरीशस में 325.75 और 109.45, लगभग 435 दिन या 14.3 महीने लगे, और क्वीन में 351.29 और 120.77, लगभग 472 दिन या 15.5 महीने। यह जोड़ शोध-पत्र के आँकड़ों पर हमारा हिसाब है, और यह एक परीक्षण में प्राकृतिक फूल आने का है। क्यू के लिए TNAU ज़्यादा सावधान है: वह कहता है कि रोपाई के 18 से 24 महीने बाद फल तोड़े जा सकते हैं।

परीक्षण और TNAU के बीच का अंतर ज़्यादातर रोपाई की तारीख़ और पौधे को मिले पोषण का है। जिस दिन लगाएँ और जिस दिन फूल लाने का उपचार दें, वह तारीख़ लिख लीजिए। TNAU यह उपचार तब देने को कहता है जब फसल 35 से 40 पत्तों की अवस्था में पहुँच जाए, इसलिए महीने नहीं, पत्ते गिनिए। पैसे की योजना लंबे आँकड़े, 18 से 24 महीने, पर बनाइए और 15 महीने को सबसे अच्छी स्थिति मानिए।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह मातृ पौधे से निकले सकर से तैयार होती है, इसलिए इसे आप ख़ुद बढ़ा सकते हैं। स्वस्थ और अच्छी उपज देने वाले झुंड से एक जैसे, मज़बूत सकर चुनिए; जो पौधा रोगी या बौना दिखा हो उससे कभी नहीं — मातृ पौधे की जो बीमारी है, वही नए पौधे में जाती है। साफ़ शुरुआत चाहिए तो पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से रोपाई सामग्री लीजिए।

दूसरी किस्मों से तुलना

अनानास की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Amrithaकेरल के वे किसान जिन्हें छोटे ताज वाला सघन पौधा चाहिए; पहले छोटा खंड परखें13–15 महीने (KAU का विवरण)KAU का उपज आँकड़ा नहीं मिला; पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 33.74 टन/हेक्टेयरकेरल, पश्चिम बंगाल
Jaldhupवे स्थानीय बाज़ार जो इसका स्वाद जानते हैं; क्वीन या क्यू के बग़ल में छोटा परीक्षण खंडजलधूप के लिए प्रकाशित नहींकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींअसम
Kew (Giant Kew)यही पेजकैनिंग, जूस और बड़ा ताज़ा फल; असम, पश्चिम बंगाल, केरललगाने से तुड़ाई तक लगभग 15–24 महीनेपश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर; TNAU के अनुसार अच्छे बाग में 50 टन/हेक्टेयरअसम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु
Lakhatवे स्थानीय बाज़ार जो इसे नाम से बेचते हैं; ख़रीदने से पहले रोपण सामग्री परखेंलाखत के लिए प्रकाशित नहींकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींअसम
Mauritius (Vazhakulam)दूर के बाज़ारों के लिए मीठा टेबल फल; केरल, मेघालय, पश्चिम बंगाल के परीक्षण में सफललगाने के 7–8 महीने बाद फूल; एथेफ़ॉन से लगभग एक साल में पहली तुड़ाई (KAU)43,300–50,000 पौधे/हेक्टेयर पर प्रति वर्ष 50–60 टन/हेक्टेयर, जो साल दर साल घटती है (KAU)केरल, मेघालय, पश्चिम बंगाल
MD-2 (Super Sweet)प्रीमियम और निर्यात फल, जहाँ लंबी शेल्फ़ लाइफ़ का दाम मिलता है; पहले परीक्षण खंड लगाएँपश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15 महीने; KAU के अनुसार 12वें महीने तक तोड़ी जा सकती हैपश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 36.45 टन/हेक्टेयर; भारत में व्यावसायिक उपज का आँकड़ा नहीं मिलाकेरल, पश्चिम बंगाल
Queenछोटे आकार का मीठा, खुशबूदार ताज़ा फल; असम, पश्चिम बंगाल, केरलपश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15–16 महीनेपश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 54.96 टन/हेक्टेयरअसम, पश्चिम बंगाल, केरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और अनानास का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

अनानास के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैनरी मॉरीशस की जगह क्यू को क्यों पसंद करती हैं?

NHB क्यू को ख़ास तौर पर उसकी कैनिंग गुणवत्ता के लिए क़ीमती बताता है: 2-3 किग्रा का लंबोतरा फल, चौड़ी उथली आँखें और हल्का पीला, लगभग बिना रेशे का रसीला गूदा। KAU मॉरीशस को केवल टेबल अनानास बताता है, जिसका फल 1.36 से 2.25 किग्रा का होता है और जो ताज़ा बिकता है और जूस में जाता है। बड़ा फल और उथली आँखें यानी छिलाई और कोर निकालने की लाइन में कम बर्बादी। एक बात देखते रहिए: KAU के अनुसार कई ताज वाले फल, जो कैनिंग के लिए बेकार हैं, उसी कैयेन समूह में आम हैं जिसमें क्यू आती है।

क्यू से प्रति हेक्टेयर कितने टन की उम्मीद करें?

योजना के लिए TNAU का 50 टन/हेक्टेयर लीजिए, जो वह अच्छी देखभाल वाले बाग की औसत उपज बताता है। कूच बिहार परीक्षण में क्यू की उपज बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर नापी गई, पर वह शोध-प्लॉट का एक परीक्षण था, और उसी शोध-पत्र की तालिका में मॉरीशस 57.54 और क्वीन 54.96 पर है। KAU की मॉरीशस गाइड दिखाती है कि घनत्व से उपज कैसे बदलती है: 20,000 से 25,000 पौधे/हेक्टेयर पर 25 से 35 टन और 43,300 से 50,000 पर 50 से 60 टन। केरल का राज्य औसत, सारे अनानास का, 8.2 टन/हेक्टेयर है, इसलिए सर्वोत्तम तरीक़े और औसत के बीच भारी अंतर आम बात है।

क्यू के सकर, स्लिप या ताज में से क्या लगाऊँ?

सकर और स्लिप। KAU के अनुसार ये ताज से जल्दी फल पर आते हैं और बड़ा फल देते हैं। TNAU क्यू के लिए 300 से 350 ग्राम के सकर और स्लिप माँगता है, आधार पर तिरछा कट लगाकर और मैन्कोज़ेब 0.3% या कार्बेन्डाज़िम 0.1% के घोल में डुबोकर। KAU की मॉरीशस गाइड जोड़ती है कि रोपण सामग्री को वज़न से छाँटिए: 500 ग्राम से कम, 500 से 750 ग्राम और 750 ग्राम से ऊपर। अलग-अलग खंडों में लगाइए ताकि पौधे साथ फूलें। लगाने से पहले 8 से 10 दिन छाया में सुखाइए। क्यू सकर और स्लिप कम बनाती है, इसलिए रोपण सामग्री पहले से बुक कर लीजिए।

क्यू के पौधों को एक साथ कैसे फुलाऊँ?

TNAU 35 से 40 पत्तों की अवस्था के लिए दो विकल्प देता है। पहला, NAA 10 पीपीएम के साथ 2% यूरिया। दूसरा, 2% यूरिया के साथ 0.04% सोडियम कार्बोनेट और 20 पीपीएम एथेफ़ॉन। दोनों में हर पौधे के ताज में 50 मिली डालना। फल बनने के बाद NAA 200 से 300 पीपीएम का छिड़काव फल का आकार बढ़ाने के लिए बताया गया है। KAU जोड़ता है कि उसके एथेफ़ॉन कार्यक्रम में अगर 36 घंटे के भीतर बारिश हो जाए तो घोल दोबारा डालना चाहिए। पूरा खंड उपचारित करने से पहले मात्रा और पत्तों की गिनती अपने नज़दीकी KVK से जाँच लीजिए।

क्या क्यू के खेत को रैटून फसलों के लिए रखा जा सकता है?

हाँ। TNAU के अनुसार ज़्यादातर किस्मों में एक पौध-फसल और दो रैटून फसलें ली जाती हैं। पौध-फसल के बाद KAU हर मातृ पौधे पर सिर्फ़ एक या दो सकर रखने की सलाह देता है। बाक़ी सकर और सारी स्लिप हटाइए। आसान काम के लिए मातृ पौधे की बग़ल की पत्तियाँ काटिए और मिट्टी चढ़ाइए। KAU की मॉरीशस गाइड में उपज पहले साल से तीसरे साल तक लगातार घटती है। क्यू सकर कम बनाती है, इसलिए कुछ मातृ पौधों पर रखने लायक सकर कम हो सकते हैं; फ़ैसले से पहले खेत की गिनती कर लीजिए।

स्रोत: NHB — Pineapple varieties (Kew, Queen, Mauritius, Jaldhup, Lakhat), Morphological characterization and performance of pineapple varieties in northern West Bengal — Indian Journal of Agricultural Sciences 92(5), 2022 (Uttar Banga Krishi Viswavidyalaya), Pineapple — TNAU Agritech Portal, Pineapple varieties — Pineapple Research Station, Kerala Agricultural University, Production technology for Vazhakulam Pineapple (Mauritius) — Pineapple Research Station, Kerala Agricultural University (Joy, 2010), Vazhakulam pineapple — history and GI, Pineapple Research Station, Kerala Agricultural University. संपादकीय नीति.