MD-2 (Super Sweet)
विश्व के ताज़े अनानास व्यापार की निर्यात किस्म, हवाई के एक पौधे से, जिसे डेल मोंटे ने अपनाया: कम अम्ल, लगभग 17 डिग्री ब्रिक्स और लगभग 30 दिन की शेल्फ़ लाइफ़ (KAU)। भारतीय किस्म नहीं है; KAU के वाझाकुलम केंद्र पर इसका मूल्यांकन चल रहा था, और पश्चिम बंगाल के परीक्षण में इसने क्यू और मॉरीशस से कम उपज दी।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अनानास
- प्रकार
- सकर / स्लिप (अंतरराष्ट्रीय किस्म)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15 महीने; KAU के अनुसार 12वें महीने तक तोड़ी जा सकती है
- अपेक्षित उपज
- पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 36.45 टन/हेक्टेयर; भारत में व्यावसायिक उपज का आँकड़ा नहीं मिला
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट या लैटेराइट मिट्टी, काफ़ी अम्लीय (pH 5.0–6.0); बहुत अच्छी निकासी ज़रूरी
- रोग-प्रतिरोध
- आंतरिक भूरेपन के प्रति प्रतिरोधी; फलिका कोर-सड़न के प्रति संवेदनशील और फाइटोफ्थोरा के प्रति क्यू से ज़्यादा संवेदनशील (KAU)
- जारी
- हवाई के अनानास अनुसंधान संस्थान की अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक किस्म, जिसे डेल मोंटे ने अपनाया; भारतीय किस्म नहीं
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
MD-2 हवाई के अनानास अनुसंधान संस्थान के प्रजनन कार्यक्रम की संकर अनानास है। KAU का किस्म-पृष्ठ बताता है कि दो मिलते-जुलते पौधे, 73-114 और 73-50, चमकदार सुनहरे, बहुत मीठे, कम अम्ल वाले गूदे और अच्छी शीत-भंडारण क्षमता वाले पाए गए। डेल मोंटे ने 73-114 को लिया, उसे MD-2 नाम दिया, कोस्टा रिका में उगाया और 1996 में बाज़ार में उतारा। उसने 1997 में इसे गोल्ड एक्स्ट्रा स्वीट के नाम से बेचना शुरू किया। KAU के अनुसार MD-2 अब विश्व के ताज़ा अनानास बाज़ार का 50 से 55% और यूरोप के बाज़ार का 70 से 75% हिस्सा रखती है। वह 1.5 से 2.0 किग्रा का बेलनाकार फल बताता है जिसके कंधे चौकोर और कोर छोटा है, लगभग 17 डिग्री ब्रिक्स और 0.4 से 0.45% अम्ल। KAU जोड़ता है कि MD-2 पेटेंट वाली किस्म नहीं है, इसलिए बौद्धिक संपदा के नियम लागू नहीं होते, और रोपण सामग्री कोस्टा रिका, घाना, क्यूबा और फ़्रांस से मँगाई जा सकती है। यह भारतीय किस्म नहीं है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
MD-2 तभी चुनिए जब कोई ख़रीदार शेल्फ़ लाइफ़ और मिठास का अतिरिक्त दाम दे, और आप पहले छोटे खंड पर आज़मा सकें। KAU 1.5 से 2.0 किग्रा का बेलनाकार फल बताता है जिसके कंधे चौकोर, कोर छोटा, लगभग 17 डिग्री ब्रिक्स और अम्लता 0.4 से 0.45% है। इसकी शेल्फ़ लाइफ़ लगभग 30 दिन है, जबकि सामान्य किस्मों की 21 दिन, और वह कहता है कि प्रीमियम दाम ही वजह है कि MD-2 केरल के निर्यात प्रयास के लिए ठीक रहेगी। भारतीय आँकड़े कमज़ोर हैं। 2014-16 के कूच बिहार परीक्षण में MD-2 ने बिना ताज के 36.45 टन/हेक्टेयर दिया, जबकि क्यू ने 89.70 और मॉरीशस ने 57.54, केवल 77.23% पौधे फूले, और TSS 14.82 डिग्री ब्रिक्स रहा। KAU ने कहा कि वाझाकुलम केंद्र पर मूल्यांकन चल रहा है। एक हेक्टेयर लगाने से पहले आज़माइए, और ख़रीदार का नाम पहले से तय रखिए।
बुवाई और खेती
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- लगभग 30 दिन की शेल्फ़ लाइफ़, जबकि सामान्य किस्मों की 21 दिन, और दो हफ़्ते तक शीत-भंडारण (KAU)।
- आंतरिक भूरेपन के प्रति प्रतिरोधी, जो कटे फल को बिगाड़ सकता है।
- मीठी और कम अम्ल वाली: लगभग 17 डिग्री ब्रिक्स और 0.4 से 0.45% अम्ल (KAU)।
ध्यान रखने योग्य बातें
- मिले इकलौते भारतीय परीक्षण में कम उपज: 36.45 टन/हेक्टेयर, जबकि क्यू में 89.70 और मॉरीशस में 57.54, और 77.23% पौधे फूले।
- क्यू से ज़्यादा फाइटोफ्थोरा-संवेदनशील और फलिका कोर-सड़न के प्रति संवेदनशील (KAU); निकासी और भूजल का कम से कम 60 सेमी नीचे होना वैकल्पिक नहीं है।
- रोपण सामग्री मँगानी या भारत में खोजनी पड़ती है, और KAU के अनुसार वाझाकुलम में MD-2 का मूल्यांकन चल रहा था।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- केरल
- पश्चिम बंगाल
अतिरिक्त शेल्फ़ लाइफ़ कहाँ काम आती है
KAU MD-2 की शेल्फ़ लाइफ़ लगभग 30 दिन बताता है, जबकि सामान्य किस्मों की 21 दिन और वाझाकुलम की मॉरीशस की 15 से 20 दिन। यानी सामान्य किस्म से 9 दिन और मॉरीशस से 10 से 15 दिन ज़्यादा। जो फल शीत-भंडार में दो हफ़्ते तक टिक सकता है, वह लंबी शीत-शृंखला की यात्रा के लायक है और फिर भी दुकान तक कुछ दिन बचाकर पहुँचता है। KAU के अनुसार वाझाकुलम की मॉरीशस का बड़ा हिस्सा मुंबई जाता है, जहाँ से कुछ खाड़ी देशों को निर्यात होता है।
ये अतिरिक्त दिन तभी पैसा देते हैं जब आपका ख़रीदार दूर हो या फल भंडारित करता हो। एक-दो दिन में पहुँचने वाले बाज़ार के लिए ये दाम बढ़ाए बिना लागत बढ़ाते हैं, और कूच बिहार परीक्षण की 36.45 टन/हेक्टेयर उपज मॉरीशस के 57.54 से काफ़ी नीचे है। KAU की अपनी गाइड आधे पके फल को 10 से 13 डिग्री C पर लगभग 20 दिन रखने की बात करती है और चेताती है कि 7 डिग्री C से नीचे फल को ठंड की चोट लगती है। MD-2 का बड़ा खंड लगाने से पहले ख़रीदार की ख़रीद की शर्तें लिखित में माँग लीजिए।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह मातृ पौधे से निकले सकर से तैयार होती है, इसलिए इसे आप ख़ुद बढ़ा सकते हैं। स्वस्थ और अच्छी उपज देने वाले झुंड से एक जैसे, मज़बूत सकर चुनिए; जो पौधा रोगी या बौना दिखा हो उससे कभी नहीं — मातृ पौधे की जो बीमारी है, वही नए पौधे में जाती है। साफ़ शुरुआत चाहिए तो पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से रोपाई सामग्री लीजिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
अनानास की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Amritha | केरल के वे किसान जिन्हें छोटे ताज वाला सघन पौधा चाहिए; पहले छोटा खंड परखें | 13–15 महीने (KAU का विवरण) | KAU का उपज आँकड़ा नहीं मिला; पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 33.74 टन/हेक्टेयर | केरल, पश्चिम बंगाल |
| Jaldhup | वे स्थानीय बाज़ार जो इसका स्वाद जानते हैं; क्वीन या क्यू के बग़ल में छोटा परीक्षण खंड | जलधूप के लिए प्रकाशित नहीं | किस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | असम |
| Kew (Giant Kew) | कैनिंग, जूस और बड़ा ताज़ा फल; असम, पश्चिम बंगाल, केरल | लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15–24 महीने | पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 89.70 टन/हेक्टेयर; TNAU के अनुसार अच्छे बाग में 50 टन/हेक्टेयर | असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु |
| Lakhat | वे स्थानीय बाज़ार जो इसे नाम से बेचते हैं; ख़रीदने से पहले रोपण सामग्री परखें | लाखत के लिए प्रकाशित नहीं | किस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | असम |
| Mauritius (Vazhakulam) | दूर के बाज़ारों के लिए मीठा टेबल फल; केरल, मेघालय, पश्चिम बंगाल के परीक्षण में सफल | लगाने के 7–8 महीने बाद फूल; एथेफ़ॉन से लगभग एक साल में पहली तुड़ाई (KAU) | 43,300–50,000 पौधे/हेक्टेयर पर प्रति वर्ष 50–60 टन/हेक्टेयर, जो साल दर साल घटती है (KAU) | केरल, मेघालय, पश्चिम बंगाल |
| MD-2 (Super Sweet)यही पेज | प्रीमियम और निर्यात फल, जहाँ लंबी शेल्फ़ लाइफ़ का दाम मिलता है; पहले परीक्षण खंड लगाएँ | पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15 महीने; KAU के अनुसार 12वें महीने तक तोड़ी जा सकती है | पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 36.45 टन/हेक्टेयर; भारत में व्यावसायिक उपज का आँकड़ा नहीं मिला | केरल, पश्चिम बंगाल |
| Queen | छोटे आकार का मीठा, खुशबूदार ताज़ा फल; असम, पश्चिम बंगाल, केरल | पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में लगाने से तुड़ाई तक लगभग 15–16 महीने | पश्चिम बंगाल के एक परीक्षण में बिना ताज के 54.96 टन/हेक्टेयर | असम, पश्चिम बंगाल, केरल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और अनानास का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके अनानास के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर अनानास किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरअनानास की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में अनानास का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
अनानास के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MD-2 कहाँ से आई और क्या यह नाम संरक्षित है?
KAU के अनुसार MD-2 हवाई के अनानास अनुसंधान संस्थान के प्रजनन कार्यक्रम से आई। इसे 1986 में बंद कर दिया गया। और उसकी संपत्ति डेल मोंटे तथा माउई लैंड एंड पाइनएपल के बीच बँट गई। डेल मोंटे ने पौधा 73-114 लिया, उसे MD-2 नाम दिया, कोस्टा रिका में उगाया और 1996 में उतारा। KAU कहता है कि यह पेटेंट वाली किस्म नहीं है, इसलिए बौद्धिक संपदा के नियम लागू नहीं होते, और रोपण सामग्री कोस्टा रिका, घाना, क्यूबा और फ़्रांस से मँगाई जा सकती है। भारत में पौधों का आयात नियमित है, इसलिए मँगाने से पहले अपने राज्य के बागवानी विभाग से अनुमति के बारे में पूछिए।
क्या भारत में MD-2 की उपज क्यू या मॉरीशस से ज़्यादा है?
हमें मिले इकलौते भारतीय परीक्षण में नहीं। पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में (2014-16) MD-2 ने बिना ताज के 36.45 टन/हेक्टेयर दिया, मॉरीशस ने 57.54 और क्यू ने 89.70। MD-2 के केवल 77.23% पौधे फूले, जबकि मॉरीशस के 98.34%, और इसका TSS 14.82 डिग्री ब्रिक्स रहा, जबकि 18.10। उसी शोध-पत्र में लिखा है कि केरल के एक पुराने अध्ययन में MD-2 और मॉरीशस के फल का वज़न लगभग बराबर था। KAU ने कहा कि वाझाकुलम में MD-2 का मूल्यांकन चल रहा था। एक जगह का एक परीक्षण फ़ैसला नहीं है, पर उपलब्ध इकलौता आँकड़ा यही है।
MD-2 में किन रोगों और विकारों पर नज़र रखूँ?
KAU के अनुसार MD-2 आंतरिक भूरेपन के प्रति प्रतिरोधी है पर फलिका कोर-सड़न के प्रति संवेदनशील, और फाइटोफ्थोरा के प्रति स्मूद कैयेन या क्यू से ज़्यादा संवेदनशील। फाइटोफ्थोरा हार्ट रॉट ख़राब निकासी वाली मिट्टी में फैलती है। और KAU की मॉरीशस गाइड भूजल को सतह से कम से कम 60 सेमी नीचे रखने को कहती है। वह बुरी तरह प्रभावित पौधों को नष्ट करने और बाक़ी पर 0.2% ज़िनेब, मैन्कोज़ेब या ज़िरम की सिंचाई करने को कहती है। गीले खेतों में उठी क्यारियाँ या मेड़ आम उपाय हैं। केरल में मीलीबग विल्ट हर अनानास के लिए ख़तरा है, इसलिए चींटियों और मीलीबग को क़ाबू में रखिए।
MD-2 से कैसा फल मिलेगा और कब तोड़ सकता हूँ?
KAU 1.5 से 2.0 किग्रा का मध्यम फल बताता है, बेलनाकार, चौकोर कंधों और छोटे कोर वाला, पकने पर लगभग 17 डिग्री ब्रिक्स और अम्लता 0.4 से 0.45%। KAU जोड़ता है कि इसे 12वें महीने तक तोड़ा जा सकता है। कूच बिहार परीक्षण में फल का TSS 14.82 डिग्री ब्रिक्स नापा गया, 50% फूल तक 340.15 दिन और फिर तुड़ाई तक 122.15 दिन लगे, कुल लगभग 15 महीने। 17 डिग्री ब्रिक्स को वह स्तर मानिए जो किस्म निर्यात-फ़ार्म के प्रबंधन में छू सकती है, वह नहीं जो हर भारतीय खेत देगा।
स्रोत: Pineapple varieties (Amritha, MD-2, Mauritius) — Pineapple Research Station, Kerala Agricultural University, Morphological characterization and performance of pineapple varieties in northern West Bengal — Indian Journal of Agricultural Sciences 92(5), 2022 (Uttar Banga Krishi Viswavidyalaya), Production technology for Vazhakulam Pineapple (Mauritius) — Pineapple Research Station, Kerala Agricultural University (Joy, 2010), Research and Development Report 2011-12 — Pineapple Research Station, Kerala Agricultural University (tissue culture of MD-2, Mauritius and Amritha). संपादकीय नीति.
