Japanese White
एक व्यापक रूप से उगाई एशियाई-प्रकार (डाइकॉन) किस्म, पूरी सफ़ेद, चिकनी, बेलनाकार जड़ें 30–45 सेमी लंबी व हल्का गूदा — मैदानों में अक्टूबर–दिसंबर और पहाड़ों में जुलाई–सितंबर बोई।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- मूली
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 55–60 दिन
- अपेक्षित उपज
- 30–35 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- एक व्यापक रूप से कारोबार होने वाला आयातित खुली-परागित डाइकॉन प्रकार; कोई एकल-संस्थान भारतीय रिलीज़ नहीं
इस किस्म के बारे में
जापानी व्हाइट एक व्यापक रूप से उगाई एशियाई-प्रकार (डाइकॉन) मूली है, पूरी सफ़ेद, चिकनी, बेलनाकार जड़ों 30–45 सेमी लंबी व हल्के, नरम गूदे के साथ। यह मैदानों व पहाड़ों भर सबसे लोकप्रिय मुख्य-सीज़न सफ़ेद मूलियों में से एक है, मैदानों में अक्टूबर–दिसंबर और पहाड़ों में जुलाई–सितंबर बोई। यह खुली-परागित है, इसलिए किसान अपना बीज बचा सकते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयमैदानों में अक्टूबर–दिसंबर; पहाड़ों में जुलाई–सितंबर
उपज व अवधि
पकने की अवधि
55–60 दिन
अपेक्षित उपज
30–35 टन/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- कोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- मुख्य सर्दी बाज़ार को लंबी, पूरी सफ़ेद, चिकनी, हल्की जड़ें
- लोकप्रिय व सुपरिचित — भरोसेमंद ख़रीदार माँग
- खुली-परागित — बीज बचाया जा सकता
ध्यान रखने योग्य बातें
- ठंडे महीनों में बेहतर — बहुत गरम में बोया जाए तो बोल्ट कर सकता
- कोई विशेष रोग प्रतिरोध नहीं — अल्टरनेरिया व सफ़ेद रतुआ पर नज़र
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- हिमाचल प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
