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मूलीरबीखुली-परागितअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Pusa Desi

IARI की एशियाई (देसी) किस्म। जड़ें लंबी, सफ़ेद और नुकीली, कंधा हरा और तीखापन तेज़। ऊपर हरी पत्तियाँ खूब आती हैं, जिन्हें साग की तरह खाया जाता है। मैदानों में अगस्त–अक्टूबर में बोई जाती है।

सीज़नरबी
पकने की अवधि50–55 दिन
अपेक्षित उपज25–30 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
मूली
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
50–55 दिन
अपेक्षित उपज
25–30 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
कोई खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं
जारी
ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने जारी की

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

पूसा देसी ICAR-IARI, नई दिल्ली की एशियाई मूली है। इसकी जड़ें लंबी, सफ़ेद और नोक की ओर पतली होती हैं, कंधा हरा होता है और स्वाद में वही तेज़ तीखापन है जो पारंपरिक भारतीय मूली का होता है। ऊपर की पत्तियाँ भी खूब आती हैं, जिन्हें मूली के साग की तरह खाया जाता है और पशुओं को भी खिलाया जाता है। इसे मैदानों में अगस्त से अक्टूबर तक बोया जाता है। यह खुले परागण वाली है, इसलिए किसान अपना बीज रख सकते हैं। सब्ज़ी किस्मों की राष्ट्रीय चेकलिस्ट भी 30–35 सेमी की नुकीली सफ़ेद जड़ें, हरे कंधे और 50–55 दिन बताती है। उपज 300 क्विंटल/हेक्टेयर रखती है। उत्तरी मैदानों में सबसे अच्छी बुवाई मध्य अगस्त से सितंबर तक बताती है। और ऊपर के पत्तों को मध्यम और गहरे हरे कहती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

ख़रीदार तीखी, पारंपरिक देसी मूली चाहते हैं और आप हरे पत्ते भी बेच सकते हैं, तो पूसा देसी चुनिए। NHB शुद्ध सफ़ेद 30–35 सेमी जड़ें बताता है जो हरे डंठल की तरफ़ से नुकीली होती हैं, 50–55 दिन में तैयार, उत्तरी मैदानों में मध्य अगस्त से मध्य अक्टूबर तक बुवाई के लिए। यह खुले परागण वाली है। हल्की या सलाद वाली मंडी के लिए यह बहुत तीखी है। हल्की सर्दी वाली डाइकॉन के लिए जापानी व्हाइट, गरम महीनों के लिए पूसा चेतकी, मीठी, हल्की जड़ के लिए पूसा हिमानी चुनिए।

बुवाई और खेती

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पारंपरिक बाज़ार की मूली जैसा तेज़ तीखापन और लंबी सफ़ेद जड़।
  • मूली के साग और चारे के लिए खूब पत्तियाँ।
  • खुले परागण वाली है। बीज रखा जा सकता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तीखी किस्म है। हल्की मूली या सलाद के बाज़ार के लिए नहीं।
  • कोई खास रोग-प्रतिरोध नहीं। अल्टरनेरिया और सफ़ेद रतुआ पर नज़र रखें।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पंजाब
  • हरियाणा

जड़ के साथ पत्तों की भी योजना बनाइए

पूसा देसी में भारी हरे पत्ते बनते हैं, और कई घरों में पत्ते मूली के साग की तरह पकते हैं। इससे उसी फ़सल से बेचने को दूसरी चीज़ मिलती है।

अपने मंडी के ख़रीदार या पड़ोसियों से पूछिए कि पत्तों के पैसे देते हैं या नहीं, और कैसे चाहिए, जड़ के साथ या गुच्छे में। देते हैं तो ताज़े तोड़कर बाँधिए, क्योंकि पत्ते जल्दी मुरझाते हैं।

बढ़ते पौधों से ज़्यादा पत्ते मत नोचिए, क्योंकि जड़ को बढ़ने के लिए पत्ते चाहिए। पत्ते तुड़ाई के समय या छँटाई से लीजिए, और हरे कंधे वाली लंबी, नुकीली सफ़ेद जड़ें उस ख़रीदार के लिए साफ़ और साबुत रखिए जो पुरानी मूली पहचानता है।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

मूली की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Arka Nishantकटाई में ढील, पिथीपन और बोल्टिंग के प्रति रोधी50–55 दिन25–40 टन/हेक्टेयरकर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र
Japanese Whiteमुख्य सर्दी के बाज़ार के लिए हल्की सफ़ेद डाइकॉन60–65 दिन30–35 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल
Kashi Hansउत्तर प्रदेश के लिए 40–45 दिन की तेज़ मूली, पिथीपन सहनशील40–45 दिन430–450 क्विंटल/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश
Pusa Chetkiगर्मी सहने वाली गरम मौसम की सफ़ेद मूली40–45 दिन25 टन/हेक्टेयरदिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक
Pusa Desiयही पेजतीखी पारंपरिक मूली, साग के लिए हरे पत्तों के साथ50–55 दिन25–30 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा
Pusa Himaniपहाड़ों और ठंडे मैदानों के लिए मीठी, हल्की यूरोपीय मूलीलगभग 55 दिन30–35 टन/हेक्टेयरहिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, Jammu & Kashmir
Pusa Mridulaछोटी लाल सलाद की मूली, लगभग 25 दिन में तैयारलगभग 25 दिन130 क्विंटल/हेक्टेयरDelhi (NCR)

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और मूली का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

मूली के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूसा देसी कब बोएँ?

NHB उत्तरी मैदानों के लिए मध्य अगस्त से मध्य अक्टूबर बताता है। 50–55 दिन के हिसाब से 15 अगस्त की बुवाई लगभग 4–9 अक्टूबर तक और 15 अक्टूबर की लगभग 4–9 दिसंबर तक तैयार होती है।

क्या पत्ते खा या बेच सकते हैं?

हाँ। इस किस्म में भारी हरे पत्ते बनते हैं जो मूली के साग के रूप में पकते हैं और पशुओं को खिलाए जाते हैं। पूरे आकार की जड़ें चाहिए तो पत्ते कुछ ही पौधों से काटिए, क्योंकि बहुत ज़्यादा पत्ते हटाने से जड़ धीमी पड़ती है।

क्या यह सलाद या हल्की मूली के ख़रीदार के लिए ठीक है?

नहीं। इसमें पारंपरिक मूली का तेज़ तीखापन है। हल्की जड़ के लिए जापानी व्हाइट या पूसा हिमानी चुनिए, और पूसा देसी उन ख़रीदारों को बेचिए जो इसे पकाते हैं या तीखापन पसंद करते हैं।

जड़ें कैसी दिखती हैं?

शुद्ध सफ़ेद, लंबी (30–35 सेमी), नुकीली और हरे डंठल वाले सिरे के साथ। पुरानी मूली जानने वाले ख़रीदार यही आकार ढूँढते हैं, इसलिए तुड़ाई में इसे साफ़ और बिना टूटे रखिए।

क्या पूसा देसी का बीज बचा सकते हैं?

हाँ, यह खुले परागण वाली है। बीज के लिए सबसे लंबी, सबसे सफ़ेद, नुकीली जड़ें चुनिए और उन्हें दूसरी मूली से दूर रखिए ताकि वे आपस में न मिलें।

कितनी उपज की उम्मीद रखें?

राष्ट्रीय चेकलिस्ट 300 क्विंटल/हेक्टेयर देती है, जो इसके लिए दिए 25–30 टन/हेक्टेयर दायरे के सबसे ऊपर बैठता है। यह गहरी, पत्थर-रहित, अच्छी खाद वाली क्यारी का परीक्षण आँकड़ा है। इसलिए आम ज़मीन पर 250 क्विंटल/हेक्टेयर के पास की योजना रखिए। और ख़रीदार को भाव बताने से पहले एक तुड़ाई तौल लीजिए।

क्या सच में पत्तों की बड़ी फ़सल मिलेगी?

स्रोत अलग-अलग कहते हैं। NHB और पुराना बाज़ारी विवरण पत्तों को भारी बताते हैं, जबकि राष्ट्रीय चेकलिस्ट उन्हें मध्यम और गहरे हरे कहती है। पत्तों को काम की ऊपरी कमाई मानिए, पहले से बिकी हुई फ़सल नहीं।

स्रोत: NHB — Radish varieties, National Checklist of Commercial Varieties of Vegetables (TNAU Agritech hosting) — radish. संपादकीय नीति.