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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
मूलीरबीखुली-परागितअपडेट किया गया 6 सितंबर 2026

Pusa Desi

एक IARI एशियाई किस्म, लंबी सफ़ेद जड़ें एक नोक तक पतली होती, हरा कंधा व तेज़ तीखापन, भारी पत्तीदार शीर्षों के साथ जो साग के रूप में इस्तेमाल होते — मैदानों में अगस्त–अक्टूबर बोई।

सीज़नरबी
पकने की अवधि50–55 दिन
अपेक्षित उपज25–30 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
मूली
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
50–55 दिन
अपेक्षित उपज
25–30 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा जारी

इस किस्म के बारे में

पूसा देसी ICAR-IARI, नई दिल्ली की एक एशियाई मूली है, लंबी सफ़ेद जड़ों के साथ जो एक नोक तक पतली होतीं, एक हरा कंधा रखतीं, और पारंपरिक भारतीय मूली का तेज़ तीखापन रखतीं। यह भारी पत्तीदार शीर्ष भी पैदा करती जो मूली-का-साग के रूप में खाए और जानवरों को खिलाए जाते। यह मैदानों में अगस्त से अक्टूबर बोई जाती और खुली-परागित है, इसलिए किसान अपना बीज बचा सकते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि50–55 दिन
    उपज क्षमता25–30 टन/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधकोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं
    मिट्टीदोमट
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयमैदानों में अगस्त से अक्टूबर

उपज व अवधि

पकने की अवधि

50–55 दिन

अपेक्षित उपज

25–30 टन/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • कोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पारंपरिक बाज़ार मूली का तेज़ तीखापन व लंबी सफ़ेद जड़
  • मूली-का-साग व चारे को भारी पत्तीदार शीर्ष
  • खुली-परागित — बीज बचाया जा सकता

ध्यान रखने योग्य बातें

  • एक तीखा प्रकार — हल्की-मूली या सलाद बाज़ार को नहीं
  • कोई विशेष रोग प्रतिरोध नहीं — अल्टरनेरिया व सफ़ेद रतुआ पर नज़र

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पंजाब
  • हरियाणा