Kashi Hans
ऊँचे-तापमान सहनशीलता को विकसित एक ICAR-IIVR (वाराणसी) उष्ण सफ़ेद किस्म, लंबी जड़ें 30–40 सेमी, और गरम महीनों सहित पूर्वी व उत्तरी मैदानों भर व्यापक अनुकूलन।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- मूली
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 45–50 दिन
- अपेक्षित उपज
- 28–34 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- ICAR-भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी द्वारा जारी
इस किस्म के बारे में
काशी हंस ICAR-IIVR, वाराणसी की एक उष्ण सफ़ेद मूली है, ख़ासतौर पर ऊँचे-तापमान सहनशीलता को विकसित ताकि यह मूली सीज़न को पूर्वी व उत्तरी मैदानों के गरम महीनों में बढ़ा सके। जड़ें लंबी, 30–40 सेमी, सफ़ेद व हल्की तीखी, लगभग 45–50 दिन में तैयार। यह आम पत्ती-रोगों को उपयोगी खेत-सहनशीलता रखती और खुली-परागित है, इसलिए किसान अपना बीज बचा सकते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयसीज़न को पूर्वी व उत्तरी मैदानों के गरम महीनों में बढ़ाती
उपज व अवधि
पकने की अवधि
45–50 दिन
अपेक्षित उपज
28–34 टन/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- पत्ती-रोगों को अच्छी खेत-सहनशीलता
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- ऊँचे-तापमान सहनशीलता को विकसित — मूली सीज़न बढ़ाती
- लगभग 45–50 दिन में तैयार लंबी सफ़ेद जड़ें; पत्ती-रोगों को खेत-सहनशीलता
- पूर्वी व उत्तरी मैदानों में व्यापक अनुकूल; खुली-परागित
ध्यान रखने योग्य बातें
- सहनशीलता प्रतिरक्षा नहीं — नम दौरों में फिर भी अल्टरनेरिया व सफ़ेद रतुआ पर नज़र
- सीधी जड़ों को एक गहरी, पत्थर-रहित बीज-क्यारी व सिर्फ़ अच्छी सड़ी खाद चाहिए
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
