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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
कसावा (टैपिओका)खरीफ़तने की कलम (औद्योगिक हाइब्रिड)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

H-165

ICAR-CTCRI की 1971 में जारी संकर किस्म, चादयमंगलम वेल्ला x कालिकालन से। मध्यम ऊँची और बिना शाखा की, लगभग 8 महीने में पकती है और 33-38 टन/हेक्टेयर देती है, स्टार्च 23-25%।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल)
अपेक्षित उपज33-38 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
तने की कलम (औद्योगिक हाइब्रिड)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल)
अपेक्षित उपज
33-38 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट के प्रति सहनशील (समीक्षा-तालिका); मोज़ेक के प्रति रोधिता का दावा नहीं
जारी
1971 में जारी · ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम (चादयमंगलम वेल्ला x कालिकालन)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

H-165 ICAR-CTCRI की 1971 में जारी संकर किस्म है, जो दो स्थानीय किस्मों, चादयमंगलम वेल्ला और कालिकालन, से बनी। CTCRI इसे मध्यम ऊँचे, बिना शाखा के पौधे के रूप में बताता है, जिसके तकले जैसे आकार के कंदों का छिलका सुनहरा भूरा, भीतर की परत क्रीम और गूदा सफ़ेद होता है। यह 8 महीने में जल्दी पकती है और 24% स्टार्च के साथ 33-38 टन/हेक्टेयर देती है। भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (ISTI) पोर्टल इसे लोकप्रिय औद्योगिक किस्म कहता है, 1.5 से 2 मीटर ऊँची और खुदाई में आसान, ताज़े वज़न पर 23-25% स्टार्च और कटाई तक 8-9 महीने। CTCRI इसकी सिफ़ारिश तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए करता है। उसी CTCRI सूची में इसका स्टार्च H-226 (28-30%) से कम है, इसलिए H-165 छोटी फसल के लिए कुछ स्टार्च छोड़ देती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

तमिलनाडु या आंध्र प्रदेश में औद्योगिक कसावा उगाते हैं और 8 महीने में तैयार होने वाली फसल चाहते हैं, H-226 से दो महीने पहले, तो H-165 चुनिए। यह 33-38 टन/हेक्टेयर देती है, पर स्टार्च सिर्फ़ 23-25% है, इसलिए जब आप स्टार्च बेच रहे हों तो H-226 (28-30%) बेहतर है। केरल में 6-7 महीने की टेबल फसल चाहिए तो श्री विजया या श्री जया चुनिए।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयतमिलनाडु: सिंचाई हो तो पूरे साल, और बारानी फसल के लिए अप्रैल (TNAU)। केरल: मई-जून या सितंबर-अक्टूबर (CTCRI)
  • दूरीH-165 जैसी बिना शाखा वाली किस्मों के लिए 75 x 75 सेमी (CTCRI)। TNAU: सिंचित में 75 x 75 या 90 x 90 सेमी, बारानी में 60 x 60 सेमी
  • बुवाई विधिTNAU: मोज़ेक-मुक्त तने के बीच के हिस्से से 8-10 गाँठों वाली 15 सेमी की कलमें काटिए। उन्हें कार्बेन्डाज़िम (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 15 मिनट डुबोइए। फिर मेड़ों और नालियों की ढलान पर आँखें ऊपर करके खड़ा लगाइए।
  • उर्वरकTNAU, सिंचित: 25 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद, फिर बुनियादी खुराक में 45:90:120 किग्रा N:P2O5:K2O और 90 दिन पर 45 किग्रा N के साथ 120 किग्रा K2O। TNAU, बारानी: 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद, बुनियादी खुराक में 50 किग्रा N, 65 किग्रा P और 125 किग्रा K।
  • कटाईलगभग 8 महीने (CTCRI)। TNAU: कंद तब तैयार हैं जब पत्तियाँ पीली पड़ें, लगभग आधी सूखकर झड़ जाएँ, और तने के पास मिट्टी में दरार पड़े।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली दोमट; खारी, क्षारीय और ख़राब निकासी वाली मिट्टी ठीक नहीं, और कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती (CTCRI)
pH
5-7 (CTCRI)

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • लगभग 8 महीने में पकती है, H-226 से दो महीने पहले।
  • खुदाई में आसान, कंद का आकार अच्छा (ISTI पोर्टल)।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्टार्च 23-25% है, जो H-226 (28-30%) से कम और श्री हर्षा (38-41%) से बहुत कम है।
  • मोज़ेक के प्रति रोधिता का दावा नहीं, इसलिए केवल स्वस्थ, मोज़ेक-मुक्त पौधों से कटी कलमें लगाइए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • तमिलनाडु
  • केरल
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक

H-165 और H-226, आमने-सामने

1971 की ये दोनों संकर किस्में अक्सर साथ गिनाई जाती हैं, पर CTCRI की सूची दिखाती है कि ये अलग फसलें हैं। H-165 मध्यम ऊँची और बिना शाखा की है: 8 महीने, 33-38 टन/हेक्टेयर और 24% स्टार्च, 75 x 75 सेमी पर लगाई जाती है। H-226 मध्यम ऊँची, सीधी और शाखादार है: 10 महीने, 30-35 टन/हेक्टेयर और 28-30% स्टार्च, 90 x 90 सेमी पर लगाई जाती है।

उपज को स्टार्च से गुणा करने पर स्टार्च की मोटी उपज निकलती है। H-165 के लिए यह 24% पर 33-38 टन/हेक्टेयर है, यानी प्रति हेक्टेयर लगभग 7.9 से 9.1 टन स्टार्च। H-226 के लिए 28-30% पर 30-35 टन/हेक्टेयर, यानी लगभग 8.4 से 10.5 टन। यह CTCRI के आँकड़ों पर हमारा हिसाब है, कोई प्रकाशित संख्या नहीं, और ख़रीदार जो दाम देगा वह भी मायने रखेगा, पर इससे दिखता है कि फ़र्क़ छोटा है। H-226 ज़मीन को दो महीने ज़्यादा रोकती है।

इसलिए चुनाव ज़्यादातर समय और ज़मीन का है। H-165 उस किसान के लिए ठीक है जो खेत 8 महीने में वापस चाहता है, शायद दूसरी फसल के लिए। H-226 उसके लिए जो ऐसी इकाई को बेचता है जिसे ज़्यादा स्टार्च चाहिए और 10 महीने इंतज़ार कर सकता है। खेत में मोज़ेक रोग हो तो दोनों किस्में मदद नहीं करतीं, और TNAU YTP 2, श्री रेक्षा और श्री कावेरी की ओर इशारा करता है।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह बीज से नहीं, कलम से तैयार होती है, इसलिए रोपाई सामग्री आप ख़ुद ले सकते हैं। कलम सिर्फ़ स्वस्थ, अच्छी बढ़त वाले और सही किस्म के पौधों से लीजिए, रोगी पौधे से कभी नहीं — कलम अपने मातृ पौधे को साथ ले जाती है। नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से साफ़ रोपाई सामग्री मिल जाए, तो शुरुआत वहीं से सुरक्षित है।

दूसरी किस्मों से तुलना

कसावा (टैपिओका) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
H-165यही पेजतमिलनाडु, 8 महीने की औद्योगिक8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल)33-38 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-226स्टार्च और साबूदाना, तमिलनाडु10 महीने (CTCRI और ISTI पोर्टल)30-35 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-97चार दक्षिणी राज्यों के सूखी ज़मीन के खेत जो कारख़ाने को बेचने के लिए सूखा सहने वाली, ऊँचे स्टार्च की, लंबे समय से परखी किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Apoorvaतमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जो स्थिर, ऊँचे निकलने वाले स्टार्च की त्रिगुणित किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 37.60 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Athulyaज़्यादा स्टार्च की ट्रिप्लॉइड, सिंचित मैदान10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); 39.00 टन/हेक्टेयर (ISTI पोर्टल)तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश
Sree Harshaकेरल और तमिलनाडु के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जिन्हें स्टार्च के प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Jayaसबसे अच्छी पकने वाली छह महीने की फसल6-7 महीने26-30 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Kaveriतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के औद्योगिक कसावा किसान जो मोज़ेक प्रतिरोध और ऊँची उपज चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 10 महीने (Indian Horticulture 2025)40-50 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Padmanabhaमोज़ेक वाले इलाक़ों के केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के खेत जो परखी हुई, पुरानी प्रतिरोधी किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु
Sree Pavithraकम पोटाश वाली मिट्टी, पकाने के लिए9-10 महीने35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); एक समीक्षा-तालिका में 35-45 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Prabhaचार राज्यों के मिले-जुले उपयोग वाले खेत जो नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए मध्यम ऊँचाई की किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Prakashकेरल की नीची ज़मीन और धान-फेर-बदल वाले खेत जो 7 महीने में निपटने वाली कसावा चाहते हैं7 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)30-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)केरल
Sree Rekhaमिली-जुली ऊँची और नीची ज़मीन8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-1035-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
Sree Rekshaकेरल और तमिलनाडु के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और मोज़ेक प्रतिरोध और कटाई के बाद लंबी टिकाऊपन चाहते हैं8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Sahyaकई राज्यों के सूखे या मिले-जुले हालात के खेत जो ऊँचा स्टार्च और भरोसेमंद, पुरानी किस्म चाहते हैं10-11 महीने (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश
Sree Sakthiतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के औद्योगिक कसावा खेत जहाँ मोज़ेक रोग गंभीर है9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल
Sree Suvarnaवे खेत जो ताज़ा खाने के लिए छोटी, मोज़ेक-रोधी, कम साइनोजन वाली कसावा चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
Sree Swarnaकेरल के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और पीले गूदे वाली, जल्दी कंद बनाने वाली किस्म चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन); 7 महीने में जल्दी कंद बनना (CTCRI वेब पन्ना)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 40 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल
Sree Vijayaधान के बाद छह महीने की फसल6 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); CTCRI के दूसरे दस्तावेज़ों में 6-7 या 7 महीने25-28 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Visakhamकई राज्यों के, असम और उत्तर-पूर्व समेत, वे खेत जो पुरानी, बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली, पीले गूदे की कसावा चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कसावा (टैपिओका) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

कसावा (टैपिओका) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

H-165 कितने दिन लेती है, और कैसे पता चले कि तैयार है?

CTCRI 8 महीने और ISTI पोर्टल 8-9 महीने बताता है। TNAU के अनुसार आम औद्योगिक कसावा 9.5 से 10 महीने में और टेबल किस्में 8 से 8.5 महीने में तैयार होती हैं। कंद तब तैयार हैं जब पत्तियाँ पीली पड़ें, लगभग आधी सूखकर झड़ जाएँ, और तने के आधार के पास मिट्टी में दरार पड़े।

H-165 में कितना स्टार्च है?

CTCRI 24%, ISTI पोर्टल ताज़े वज़न पर 23-25% और एक समीक्षा-तालिका 25% बताती है। यह H-226 (28-30%) और श्री अतुल्या (30.2%) से कम है, और CTCRI सूची में श्री हर्षा (38-41%) से बहुत कम।

H-165 कितनी दूरी पर लगाऊँ?

CTCRI H-165 जैसी बिना शाखा वाली किस्मों को 75 x 75 सेमी पर रखता है। TNAU सिंचित फसल के लिए 75 x 75 सेमी (प्रति हेक्टेयर 17,777 कलमें) या 90 x 90 सेमी (12,345 कलमें), और बारानी फसल के लिए 60 x 60 सेमी (27,777 कलमें) देता है।

कलमें कैसे तैयार करूँ, और तमिलनाडु में कब लगाऊँ?

TNAU कहता है कि सिंचाई हो तो पूरे साल, और बारानी फसल के लिए अप्रैल में लगाइए। स्वस्थ, मोज़ेक-मुक्त तने के बीच के हिस्से से 8-10 गाँठों वाली 15 सेमी की कलमें लीजिए, उन्हें कार्बेन्डाज़िम (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 15 मिनट डुबोइए, और आँखें ऊपर करके खड़ा लगाइए। एक हेक्टेयर के लिए लगभग 1,250 स्वस्थ तने चाहिए।

H-165 को कौन-सी खाद चाहिए?

TNAU: सिंचित फसल के लिए जुताई पर 25 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद, बुनियादी खुराक में 45:90:120 किग्रा N:P2O5:K2O, और 90 दिन पर मिट्टी चढ़ाते समय 45 किग्रा N के साथ 120 किग्रा K2O। बारानी फसल के लिए 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद, बुनियादी खुराक में 50 किग्रा N, 65 किग्रा P और 125 किग्रा K। 20 दिन के भीतर खाली जगह भरिए और रोपाई के 20 दिन बाद निराई कीजिए, फिर 5 महीने तक महीने में एक बार।

स्रोत: Agrotechniques of Tropical Tuber Crops, Technical Bulletin No. 97 — ICAR-CTCRI, 2023, Cassava (variety descriptions) — ICAR-CTCRI, Cassava H-165 — India Science, Technology and Innovation portal, Tapioca — TNAU Agritech Portal, Cassava breeding and agronomy in Asia: 50 years of history and future directions (Table 5) — Malik and others, Breeding Science, 2020, Cassava varieties developed by CTCRI — ICAR-CTCRI variety page, archived. संपादकीय नीति.