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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
कसावा (टैपिओका)खरीफ़तने की कलम (क्लोनल चयन)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Sree Rekha

ICAR-CTCRI की 2000 में जारी टॉप-क्रॉस संकर किस्म (TMS.63198 x श्री विशाखम)। ऊँची और नीची दोनों ज़मीन के लिए, 9-10 महीने, स्टार्च 28-30%, पत्ती धब्बा और मकड़ी-कुटकी के प्रति सहनशील। CTCRI के बुलेटिन में उपज 35-40 टन/हेक्टेयर और दूसरी जगह 45-48 टन/हेक्टेयर है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-10
अपेक्षित उपज35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
तने की कलम (क्लोनल चयन)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-10
अपेक्षित उपज
35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
पत्ती धब्बा और मकड़ी-कुटकी के प्रति सहनशील (समीक्षा-तालिका); मोज़ेक के प्रति रोधिता का दावा नहीं
जारी
2000 में जारी · ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम (टॉप क्रॉस: TMS.63198 स्वपरागित x श्री विशाखम)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

श्री रेखा ICAR-CTCRI की टॉप-क्रॉस संकर किस्म है, जो 2000 में जारी हुई, TMS.63198 (स्वपरागित) को श्री विशाखम के परागण से। CTCRI इसे सीधे, ऊपर से शाखादार पौधे के रूप में बताता है, जिसका परिपक्व तना भूरा-सफ़ेद है, और लंबे, शंकु जैसे कंद जिनका छिलका हल्का भूरा, परत क्रीम और गूदा क्रीम है। यह नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए ठीक है, 9-10 महीने लेती है और इसमें 28-30% स्टार्च है। CTCRI का बुलेटिन 35-40 टन/हेक्टेयर देता है, जबकि एक समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल 45-48 टन/हेक्टेयर देते हैं, इसलिए सावधानी के लिए 35-40 टन/हेक्टेयर मानिए। समीक्षा-तालिका पत्ती धब्बा और मकड़ी-कुटकी के प्रति सहनशीलता भी जोड़ती है। CTCRI इसकी सिफ़ारिश केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए करता है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

आपकी ज़मीन ऊँची और नीची का मेल है और दोनों के लिए एक ही किस्म चाहते हैं, 28-30% स्टार्च और 9-10 महीने की फसल के साथ, तो श्री रेखा चुनिए। योजना 35-40 टन/हेक्टेयर पर बनाइए, जो प्रकाशित दो आँकड़ों में कम वाला है। पोटाश की कमी हो या खाद बचाना चाहें तो श्री पवित्रा चुनिए, और 6-7 महीने में फसल चाहिए तो श्री विजया।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ मई-जून, या उत्तर-पूर्व मानसून के साथ सितंबर-अक्टूबर; सिंचाई हो तो दिसंबर-जनवरी (CTCRI)
  • दूरीश्री रेखा जैसी शाखादार किस्मों के लिए 90 x 90 सेमी (CTCRI)
  • बुवाई विधिपरिपक्व, स्वस्थ, 2-3 सेमी मोटे तनों से 10-12 आँखों वाली 15-20 सेमी की कलमें काटिए। लकड़ी जैसा निचला हिस्सा और कोमल सिरा फेंक दीजिए। उन्हें 5 सेमी गहरा खड़ा लगाइए, एक कलम एक टीले या मेड़ पर (CTCRI)।
  • उर्वरकCTCRI: 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और 100:50:100 किग्रा N:P2O5:K2O। सारा फ़ॉस्फ़ोरस और आधा नाइट्रोजन और पोटाश रोपाई पर दीजिए, और बाक़ी 45-60 दिन पर निराई के साथ।
  • कटाईरोपाई के 9-10 महीने बाद (CTCRI)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली दोमट; खारी, क्षारीय और ख़राब निकासी वाली मिट्टी ठीक नहीं, और कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती (CTCRI)
pH
5-7 (CTCRI)

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • ऊँची और नीची दोनों ज़मीन के लिए ठीक, इसलिए मिली-जुली ज़मीन पर एक ही किस्म काम आ सकती है।
  • 9-10 महीने में 28-30% स्टार्च और 35-40 टन/हेक्टेयर या उससे ज़्यादा उपज।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • उपज का आँकड़ा स्रोतों में अलग है (35-40 या 45-48 टन/हेक्टेयर), इसलिए कम वाले पर योजना बनाइए।
  • 9-10 महीने लेती है, और मोज़ेक के प्रति रोधिता का दावा नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • केरल
  • तमिलनाडु
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक

ऊँची और नीची ज़मीन के लिए एक किस्म

CTCRI की ज़्यादातर टेबल किस्में एक ही ज़मीन के प्रकार से बँधी हैं। श्री विजया और श्री जया नीची ज़मीन के फसल-चक्र के लिए हैं, और श्री पवित्रा कम पोटाश वाली मिट्टी के लिए चुनी जाती है। श्री रेखा वह है जिसके बारे में CTCRI और ISTI पोर्टल दोनों कहते हैं कि यह ऊँची और नीची दोनों के लिए ठीक है। इसीलिए दोनों वाली खेती के लिए यह एक सुरक्षित अकेला चुनाव है।

ज़मीन का प्रकार लगाने का तरीक़ा बदल देता है। CTCRI के अनुसार ख़राब निकासी वाली मिट्टी में टीले ठीक हैं। ढलान वाली ज़मीन पर मेड़ें ढलान के आर-पार बनती हैं। समतल रोपण अच्छी निकासी वाली रेतीली या बलुई दोमट मिट्टी के लिए है। टीले 25-30 सेमी ऊँचे बनाए जाते हैं। कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती, इसलिए खेत के नीचे वाले हिस्से में जड़ों को खड़े पानी से बचाने वाली चीज़ किस्म नहीं, टीला या मेड़ है।

श्री रेखा 9-10 महीने लेती है, इसलिए यह उन खेतों के लिए है जो इंतज़ार कर सकते हैं। CTCRI की कसावा पुस्तक और बुलेटिन 35-40 टन/हेक्टेयर देते हैं, जबकि समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल 45-48 टन/हेक्टेयर। सावधान पढ़ाई यह है कि संस्थान 35-40 टन/हेक्टेयर का दावा करता है, और ऊँचा आँकड़ा वह है जहाँ उसके परीक्षण पहुँच सकते हैं। 28-30% स्टार्च के साथ यह स्टार्च में H-226 से टक्कर लेती है, और दोनों तरह की ज़मीन पर चलने का फ़ायदा रखती है।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह बीज से नहीं, कलम से तैयार होती है, इसलिए रोपाई सामग्री आप ख़ुद ले सकते हैं। कलम सिर्फ़ स्वस्थ, अच्छी बढ़त वाले और सही किस्म के पौधों से लीजिए, रोगी पौधे से कभी नहीं — कलम अपने मातृ पौधे को साथ ले जाती है। नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से साफ़ रोपाई सामग्री मिल जाए, तो शुरुआत वहीं से सुरक्षित है।

दूसरी किस्मों से तुलना

कसावा (टैपिओका) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
H-165तमिलनाडु, 8 महीने की औद्योगिक8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल)33-38 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-226स्टार्च और साबूदाना, तमिलनाडु10 महीने (CTCRI और ISTI पोर्टल)30-35 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-97चार दक्षिणी राज्यों के सूखी ज़मीन के खेत जो कारख़ाने को बेचने के लिए सूखा सहने वाली, ऊँचे स्टार्च की, लंबे समय से परखी किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Apoorvaतमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जो स्थिर, ऊँचे निकलने वाले स्टार्च की त्रिगुणित किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 37.60 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Athulyaज़्यादा स्टार्च की ट्रिप्लॉइड, सिंचित मैदान10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); 39.00 टन/हेक्टेयर (ISTI पोर्टल)तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश
Sree Harshaकेरल और तमिलनाडु के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जिन्हें स्टार्च के प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Jayaसबसे अच्छी पकने वाली छह महीने की फसल6-7 महीने26-30 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Kaveriतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के औद्योगिक कसावा किसान जो मोज़ेक प्रतिरोध और ऊँची उपज चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 10 महीने (Indian Horticulture 2025)40-50 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Padmanabhaमोज़ेक वाले इलाक़ों के केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के खेत जो परखी हुई, पुरानी प्रतिरोधी किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु
Sree Pavithraकम पोटाश वाली मिट्टी, पकाने के लिए9-10 महीने35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); एक समीक्षा-तालिका में 35-45 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Prabhaचार राज्यों के मिले-जुले उपयोग वाले खेत जो नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए मध्यम ऊँचाई की किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Prakashकेरल की नीची ज़मीन और धान-फेर-बदल वाले खेत जो 7 महीने में निपटने वाली कसावा चाहते हैं7 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)30-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)केरल
Sree Rekhaयही पेजमिली-जुली ऊँची और नीची ज़मीन8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-1035-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
Sree Rekshaकेरल और तमिलनाडु के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और मोज़ेक प्रतिरोध और कटाई के बाद लंबी टिकाऊपन चाहते हैं8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Sahyaकई राज्यों के सूखे या मिले-जुले हालात के खेत जो ऊँचा स्टार्च और भरोसेमंद, पुरानी किस्म चाहते हैं10-11 महीने (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश
Sree Sakthiतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के औद्योगिक कसावा खेत जहाँ मोज़ेक रोग गंभीर है9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल
Sree Suvarnaवे खेत जो ताज़ा खाने के लिए छोटी, मोज़ेक-रोधी, कम साइनोजन वाली कसावा चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
Sree Swarnaकेरल के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और पीले गूदे वाली, जल्दी कंद बनाने वाली किस्म चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन); 7 महीने में जल्दी कंद बनना (CTCRI वेब पन्ना)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 40 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल
Sree Vijayaधान के बाद छह महीने की फसल6 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); CTCRI के दूसरे दस्तावेज़ों में 6-7 या 7 महीने25-28 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Visakhamकई राज्यों के, असम और उत्तर-पूर्व समेत, वे खेत जो पुरानी, बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली, पीले गूदे की कसावा चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कसावा (टैपिओका) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

कसावा (टैपिओका) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्री रेखा कहाँ से आई है?

ICAR-CTCRI ने इसे 2000 में टॉप-क्रॉस संकर के रूप में जारी किया: TMS.63198 (स्वपरागित) को श्री विशाखम के परागण से। CTCRI इसे सीधे, ऊपर से शाखादार पौधे के रूप में बताता है, जिसका परिपक्व तना भूरा-सफ़ेद है, और लंबे, शंकु जैसे कंद जिनका छिलका हल्का भूरा, परत क्रीम और गूदा क्रीम है।

स्रोतों में श्री रेखा की उपज अलग क्यों है?

CTCRI का बुलेटिन और कसावा पुस्तक 35-40 टन/हेक्टेयर देते हैं। ISTI पोर्टल औसत उपज 45-48 टन/हेक्टेयर देता है, और एक समीक्षा-तालिका भी वही 45-48 टन/हेक्टेयर। स्रोत इस फ़र्क़ की वजह नहीं बताते, इसलिए 35-40 टन/हेक्टेयर पर योजना बनाइए और उससे ऊपर को अच्छा साल मानिए।

श्री रेखा ऊँची ज़मीन के लिए है या नीची के लिए?

दोनों के लिए। CTCRI और ISTI पोर्टल कहते हैं कि यह ऊँची और नीची दोनों ज़मीन के लिए ठीक है। CTCRI इसकी सिफ़ारिश केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए करता है। CTCRI किसी भी कसावा के लिए ख़राब निकासी और जलभराव वाली मिट्टी से बचने की सलाह देता है। इसलिए नीची ज़मीन पर इसे टीलों या मेड़ों पर रखिए और पानी निकलने का रास्ता रखिए।

श्री रेखा कैसे और कब लगाऊँ?

CTCRI मई-जून या सितंबर-अक्टूबर, और सिंचित हो तो दिसंबर-जनवरी बताता है। परिपक्व, स्वस्थ तनों से 10-12 आँखों वाली 15-20 सेमी की कलमें काटिए, और उन्हें खड़ा, 5 सेमी गहरा, शाखादार किस्मों के लिए 90 x 90 सेमी पर लगाइए। अंकुरण के 10-15 दिन बाद फ़ालतू कल्ले हटाइए और विपरीत दिशाओं में दो स्वस्थ कल्ले रखिए।

किन कीटों और रोगों पर नज़र रखूँ?

एक समीक्षा-तालिका श्री रेखा के लिए पत्ती धब्बा और मकड़ी-कुटकी के प्रति सहनशीलता बताती है। मोज़ेक के प्रति रोधिता का दावा नहीं है। सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा के लिए TNAU मैंकोज़ेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से 15 दिन के अंतर पर दो बार देने की सलाह देता है। और कंद सड़न के लिए अच्छी निकासी के साथ गोबर की खाद में मिलाकर ट्राइकोडर्मा विरिडे 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की सलाह देता है। मकड़ी-कुटकी के लिए ताज़ा छिड़काव अपने KVK से पूछिए।

स्रोत: Cassava (variety descriptions) — ICAR-CTCRI, Agrotechniques of Tropical Tuber Crops, Technical Bulletin No. 97 — ICAR-CTCRI, 2023, Cassava-Sree Rekha — India Science, Technology and Innovation portal, Cassava breeding and agronomy in Asia: 50 years of history and future directions (Table 5) — Malik and others, Breeding Science, 2020, Tapioca — TNAU Agritech Portal (leaf spot and tuber rot control), Cassava varieties developed by CTCRI — ICAR-CTCRI variety page, archived. संपादकीय नीति.