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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
कसावा (टैपिओका)खरीफ़तने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Sree Padmanabha

ICAR-CTCRI की पहली कसावा मोज़ेक-रोधी किस्म, 2006 में जारी। ऊँचा, देर से शाखा देने वाला पौधा, 9-10 महीने, केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के लिए। बुलेटिन सिर्फ़ 29-30 टन/हेक्टेयर देता है और वेब पन्ना 38 टन/हेक्टेयर।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)
अपेक्षित उपज29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
तने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)
अपेक्षित उपज
29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
2006 में जारी · ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम (CTCRI बुलेटिन, तालिका 3)

इस किस्म के बारे में

श्री पद्मनाभ 2006 में ICAR-CTCRI की जारी कसावा किस्म है। CTCRI का बुलेटिन ऊँचा, देर से शाखा देने वाला पौधा बताता है, जिसका तना सलेटी-हरा और नई पत्तियाँ हल्की हरी हैं, और सूखे में पत्तियाँ मुड़ जाती हैं। यह 9-10 महीने लेती है, 25-26% स्टार्च के साथ 29-30 टन/हेक्टेयर देती है और कसावा मोज़ेक रोग की प्रतिरोधी है। इसे केरल के बारानी इलाक़ों और तमिलनाडु के सिंचित मैदानों के लिए सुझाया गया है। CTCRI का पुराना वेब पन्ना इसे टैपिओका की पहली कसावा मोज़ेक-रोधी किस्म कहता है, 270-300 दिन और औसत उपज 38 टन/हेक्टेयर के साथ।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

मोज़ेक रोग आपकी समस्या हो और आप 2006 से किसानों की उगाई पुरानी CTCRI प्रतिरोधी किस्म चाहते हों, केरल की बारानी या तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के लिए, तो श्री पद्मनाभ चुनिए। CTCRI का वेब पन्ना इसे टैपिओका की पहली मोज़ेक-रोधी किस्म कहता है। यह ऊँची और देर से शाखा देने वाली है, और सूखे में पत्तियाँ मुड़ जाती हैं। उपज पर स्रोत अलग होते हैं: बुलेटिन 29-30 टन/हेक्टेयर कहता है और वेब पन्ना 38 टन/हेक्टेयर, और स्टार्च 9-10 महीने पर 25-26% है (वेब पन्ना 270-300 दिन कहता है)। इसके सामने नई श्री शक्ति, श्री सुवर्णा और श्री रेक्षा 35-45 टन/हेक्टेयर पर पूरी तरह प्रतिरोधी गिनाई गई हैं। पद्मनाभ वहाँ विकल्प है जहाँ इसकी रोपण-सामग्री आसानी से मिले।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारतने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)
    अवधि9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)
    उपज क्षमता29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)
    रोग-प्रतिरोधकसावा मोज़ेक रोग की प्रतिरोधी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ मई-जून, या उत्तर-पूर्व मानसून के साथ सितंबर-अक्टूबर; सिंचाई हो तो दिसंबर-जनवरी (CTCRI)।
  • दूरीशाखादार किस्मों के लिए: केरल और आंध्र प्रदेश में 90 x 90 सेमी, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में 90 x 75 सेमी (CTCRI तालिका 7)। 90 x 90 सेमी पर लगभग 2,500 तने प्रति हेक्टेयर।
  • बुवाई विधिपरिपक्व, स्वस्थ, 2-3 सेमी मोटे तनों से लगभग पाँच आँखों वाली 15-20 सेमी की कलमें काटिए, ऊपर का एक-तिहाई फेंक दीजिए, और उन्हें 5 सेमी गहरा खड़ा लगाइए, एक कलम एक टीले पर (CTCRI)। अच्छी कलम के कटे सिरे पर दूध (लेटेक्स) दिखता है।
  • उर्वरकCTCRI: 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और 100:50:100 किग्रा N:P2O5:K2O। सारा फ़ॉस्फ़ोरस और आधा नाइट्रोजन और पोटाश रोपाई पर दीजिए, और बाक़ी 45-60 दिन पर निराई के साथ।
  • कटाईसूचीबद्ध अवधि पर कटाई कीजिए, 9-10 महीने।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली दोमट; खारी, क्षारीय और ख़राब निकासी वाली मिट्टी ठीक नहीं, और कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती (CTCRI)

उपज और अवधि

पकने की अवधि

9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)

अपेक्षित उपज

29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • सिर्फ़ साफ़ कलमें लीजिए: CTCRI आधार बीज में 0.10% और प्रमाणित बीज में 0.50% मोज़ेक वाले पौधे मानता है, इसलिए बिना मोज़ेक वाली फ़सल से कलमें लीजिए और रोगी पौधा जल्दी उखाड़ दीजिए।
  • हर पौधे पर दो अंकुर रखिए: अंकुर फूटने के 10-15 दिन बाद फ़ालतू अंकुर तोड़ दीजिए और आमने-सामने के दो रखिए, जिससे प्रति पौधा कंद ज़्यादा बनते हैं (CTCRI)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • कसावा मोज़ेक रोग की प्रतिरोधी, इस तरह बताई गई CTCRI की पहली किस्म।
  • केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित दोनों ज़मीन के लिए ठीक।
  • 2006 से किसानों के खेतों में कई साल का इस्तेमाल।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बुलेटिन की उपज 29-30 टन/हेक्टेयर CTCRI की 20 किस्मों में सबसे कम में से है, जबकि वेब पन्ना 38 टन/हेक्टेयर देता है।
  • स्टार्च 25-26%, कारख़ाने के ख़रीदार के लिए कम।
  • सूखे में पत्तियाँ मुड़ जाती हैं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • केरल
  • तमिलनाडु

पहली मोज़ेक-रोधी किस्म, नई किस्मों के साथ पढ़िए

श्री पद्मनाभ (2006) ने CTCRI की मोज़ेक-रोधी कसावा की कड़ी शुरू की। श्री शक्ति (2018), श्री सुवर्णा (2018) और श्री रेक्षा (2017) पूरी तरह प्रतिरोधी सूचीबद्ध हैं, और श्री कावेरी (2023) प्रतिरोधी। पद्मनाभ सिर्फ़ प्रतिरोधी लिखी है। CTCRI की नई तालिका में उपज के दायरे शक्ति और रेक्षा के 40-45 टन/हेक्टेयर, सुवर्णा के 35-40 और कावेरी के 40-50 हैं, जबकि उसी तालिका में पद्मनाभ का 29-30।

इसलिए काग़ज़ पर नई किस्में 10 या ज़्यादा टन अधिक देती हैं और प्रतिरोधकता का दावा भी मज़बूत है। वेब पन्ने का पद्मनाभ के लिए 38 टन/हेक्टेयर उस अंतर का ज़्यादातर हिस्सा पाट देगा, और दोनों CTCRI स्रोत एकमत नहीं हैं। आपके इलाक़े में पद्मनाभ पहले से उगती हो और साफ़ कलमें सस्ती हों, तो एक मौसम श्री रेक्षा या श्री शक्ति की पट्टी साथ-साथ लगाइए; वह दोनों तालिकाओं से ज़्यादा बताएगी।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

कसावा बीज से नहीं, तने की कलमों से लगती है। कम अवधि की किस्म के लिए 6-7 महीने और लंबी अवधि की किस्म के लिए 9-10 महीने की स्वस्थ फ़सल से कलमें लीजिए। उन्हें छाया में खड़ा रखिए, और ढुलाई में आँखें न टूटने दीजिए। ख़राब पौधों की कलमें बार-बार लगाने से वही किस्म कमज़ोर होती है, इसलिए बीच-बीच में साफ़ स्रोत से नई रोपण-सामग्री लीजिए।

दूसरी किस्मों से तुलना

कसावा (टैपिओका) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
H-165तमिलनाडु, 8 महीने की औद्योगिक8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल)33-38 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-226स्टार्च और साबूदाना, तमिलनाडु10 महीने (CTCRI और ISTI पोर्टल)30-35 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-97चार दक्षिणी राज्यों के सूखी ज़मीन के खेत जो कारख़ाने को बेचने के लिए सूखा सहने वाली, ऊँचे स्टार्च की, लंबे समय से परखी किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Apoorvaतमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जो स्थिर, ऊँचे निकलने वाले स्टार्च की त्रिगुणित किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 37.60 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Athulyaज़्यादा स्टार्च की ट्रिप्लॉइड, सिंचित मैदान10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); 39.00 टन/हेक्टेयर (ISTI पोर्टल)तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश
Sree Harshaकेरल और तमिलनाडु के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जिन्हें स्टार्च के प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Jayaसबसे अच्छी पकने वाली छह महीने की फसल6-7 महीने26-30 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Kaveriतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के औद्योगिक कसावा किसान जो मोज़ेक प्रतिरोध और ऊँची उपज चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 10 महीने (Indian Horticulture 2025)40-50 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Padmanabhaयही पेजमोज़ेक वाले इलाक़ों के केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के खेत जो परखी हुई, पुरानी प्रतिरोधी किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु
Sree Pavithraकम पोटाश वाली मिट्टी, पकाने के लिए9-10 महीने35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); एक समीक्षा-तालिका में 35-45 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Prabhaचार राज्यों के मिले-जुले उपयोग वाले खेत जो नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए मध्यम ऊँचाई की किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Prakashकेरल की नीची ज़मीन और धान-फेर-बदल वाले खेत जो 7 महीने में निपटने वाली कसावा चाहते हैं7 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)30-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)केरल
Sree Rekhaमिली-जुली ऊँची और नीची ज़मीन8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-1035-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
Sree Rekshaकेरल और तमिलनाडु के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और मोज़ेक प्रतिरोध और कटाई के बाद लंबी टिकाऊपन चाहते हैं8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Sahyaकई राज्यों के सूखे या मिले-जुले हालात के खेत जो ऊँचा स्टार्च और भरोसेमंद, पुरानी किस्म चाहते हैं10-11 महीने (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश
Sree Sakthiतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के औद्योगिक कसावा खेत जहाँ मोज़ेक रोग गंभीर है9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल
Sree Suvarnaवे खेत जो ताज़ा खाने के लिए छोटी, मोज़ेक-रोधी, कम साइनोजन वाली कसावा चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
Sree Swarnaकेरल के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और पीले गूदे वाली, जल्दी कंद बनाने वाली किस्म चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन); 7 महीने में जल्दी कंद बनना (CTCRI वेब पन्ना)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 40 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल
Sree Vijayaधान के बाद छह महीने की फसल6 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); CTCRI के दूसरे दस्तावेज़ों में 6-7 या 7 महीने25-28 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Visakhamकई राज्यों के, असम और उत्तर-पूर्व समेत, वे खेत जो पुरानी, बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली, पीले गूदे की कसावा चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कसावा (टैपिओका) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

कसावा (टैपिओका) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्री पद्मनाभ क्या है?

2006 में ICAR-CTCRI की जारी कसावा किस्म, जिसे CTCRI का वेब पन्ना टैपिओका की पहली मोज़ेक-रोधी किस्म कहता है। यह ऊँची और देर से शाखा देने वाली है और 9-10 महीने लेती है।

CTCRI के स्रोत 29-30 और 38 टन/हेक्टेयर क्यों देते हैं?

हम नहीं बता सके। बुलेटिन की तालिका 29-30 टन/हेक्टेयर और 9-10 महीने देती है; पुराना वेब पन्ना औसत 38 टन/हेक्टेयर और 270-300 दिन देता है। अलग परीक्षण या साल कारण हो सकते हैं। निचले आँकड़े पर योजना बनाइए।

श्री पद्मनाभ कहाँ उगती है?

CTCRI इसे केरल के बारानी इलाक़ों और तमिलनाडु के सिंचित मैदानों के लिए सुझाता है। सूखे में इसकी पत्तियाँ मुड़ती हैं, इसलिए जहाँ बारिश कम हो वहाँ सिंचाई रखिए।

श्री पद्मनाभ के लिए कौन-सी दूरी रखूँ?

यह देर से शाखा देती है, इसलिए शाखादार वाली दूरी रखिए: केरल में 90 x 90 सेमी और तमिलनाडु में 90 x 75 सेमी (CTCRI तालिका 7)।

स्रोत: Cassava (variety descriptions, Table 3; spacing, Table 7; planting stakes and seed standards) — ICAR-CTCRI, Cassava varieties developed by CTCRI — ICAR-CTCRI variety page, archived. संपादकीय नीति.