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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
कसावा (टैपिओका)खरीफ़तने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

H-97

1971 की CTCRI संकर किस्म, सूची की तीन सबसे पुरानी में से एक, 27-31% स्टार्च और सूखा सहने के साथ। CTCRI की तालिका में यह ऊँचे साइनोजन वाला सिरा है, 180-200 ppm। 10 महीने में 25-35 टन/हेक्टेयर, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लिए।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
अपेक्षित उपज25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
तने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
अपेक्षित उपज
25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
1971 में जारी · ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम, संकर (CTCRI बुलेटिन, तालिका 3)

इस किस्म के बारे में

H-97 1971 में ICAR-CTCRI की जारी संकर कसावा किस्म है। CTCRI का बुलेटिन सीधा, शाखादार पौधा बताता है। इसका परिपक्व तना गहरा सलेटी, नई पत्ती हल्की सीपिया और डंठल गहरा हरा है, और बेलनाकार कंद, हल्का भूरा छिलका, क्रीम परत और सफ़ेद गूदा। यह 10 महीने लेती है, 27-31% स्टार्च के साथ 25-35 टन/हेक्टेयर देती है, सूखा सहने वाली और सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बे, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की मध्यम प्रतिरोधी है। इसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लिए सुझाया गया है। Indian Horticulture (2025) इसका साइनोजन 180-200 ppm दर्ज करता है और पकाने की गुणवत्ता अच्छी कहता है। पुराना वेब पन्ना 1.5-2 मी के मध्यम ऊँचे पौधे बताता है और कसावा मोज़ेक रोग की सहनशीलता जोड़ता है, जो बुलेटिन की तालिका नहीं गिनाती।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक या आंध्र प्रदेश की सूखी ज़मीन पर कारख़ाने के लिए कसावा उगाते हों और सूखा सहने वाली, लंबे समय से परखी संकर किस्म चाहते हों, तो H-97 चुनिए। CTCRI ने इसे 1971 में जारी किया: 10 महीने, 25-35 टन/हेक्टेयर, 27-31% स्टार्च, सीधी और शाखादार, सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बे, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की मध्यम प्रतिरोधी। इसकी उपज का दायरा, 25-35 टन/हेक्टेयर, CTCRI की सूची में सबसे कम में से है। और 180-200 ppm का साइनोजन तालिका का सबसे ऊँचा आँकड़ा है। इसलिए यह पहले औद्योगिक किस्म है और इसे सावधानी से पकाना चाहिए। ताज़ा खाने के लिए श्री रेक्षा (35.01 ppm) देखिए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारतने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)
    अवधि10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
    उपज क्षमता25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)
    रोग-प्रतिरोधसूखा सहने वाली; सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बे, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की मध्यम प्रतिरोधी; वेब पन्ना कसावा मोज़ेक रोग की सहनशीलता भी कहता है
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ मई-जून, या उत्तर-पूर्व मानसून के साथ सितंबर-अक्टूबर; सिंचाई हो तो दिसंबर-जनवरी (CTCRI)।
  • दूरीशाखादार किस्मों के लिए: केरल और आंध्र प्रदेश में 90 x 90 सेमी, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में 90 x 75 सेमी (CTCRI तालिका 7)। 90 x 90 सेमी पर लगभग 2,500 तने प्रति हेक्टेयर।
  • बुवाई विधिपरिपक्व, स्वस्थ, 2-3 सेमी मोटे तनों से लगभग पाँच आँखों वाली 15-20 सेमी की कलमें काटिए, ऊपर का एक-तिहाई फेंक दीजिए, और उन्हें 5 सेमी गहरा खड़ा लगाइए, एक कलम एक टीले पर (CTCRI)। अच्छी कलम के कटे सिरे पर दूध (लेटेक्स) दिखता है।
  • उर्वरकCTCRI: 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और 100:50:100 किग्रा N:P2O5:K2O। सारा फ़ॉस्फ़ोरस और आधा नाइट्रोजन और पोटाश रोपाई पर दीजिए, और बाक़ी 45-60 दिन पर निराई के साथ।
  • कटाईसूचीबद्ध अवधि पर कटाई कीजिए, 10 महीने।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली दोमट; खारी, क्षारीय और ख़राब निकासी वाली मिट्टी ठीक नहीं, और कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती (CTCRI)

उपज और अवधि

पकने की अवधि

10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)

अपेक्षित उपज

25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • सिर्फ़ साफ़ कलमें लीजिए: CTCRI आधार बीज में 0.10% और प्रमाणित बीज में 0.50% मोज़ेक वाले पौधे मानता है, इसलिए बिना मोज़ेक वाली फ़सल से कलमें लीजिए और रोगी पौधा जल्दी उखाड़ दीजिए।
  • हर पौधे पर दो अंकुर रखिए: अंकुर फूटने के 10-15 दिन बाद फ़ालतू अंकुर तोड़ दीजिए और आमने-सामने के दो रखिए, जिससे प्रति पौधा कंद ज़्यादा बनते हैं (CTCRI)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • सूखा सहने वाली, 27-31% स्टार्च के साथ।
  • सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बे, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की मध्यम प्रतिरोधी।
  • दक्षिणी खेतों में पचास साल से ज़्यादा का इस्तेमाल।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कम उपज का दायरा, 25-35 टन/हेक्टेयर, CTCRI की सूची में सबसे कम में से।
  • तालिका का सबसे ऊँचा साइनोजन का आँकड़ा, 180-200 ppm।
  • वेब पन्ना और बुलेटिन मोज़ेक सहनशीलता पर अलग हैं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • केरल
  • तमिलनाडु
  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश

साइनोजन की सीढ़ी: H-97 नई किस्मों के सामने

Indian Horticulture (2025) CTCRI की चार कसावा के साइनोजन के मान देता है। श्री रेक्षा (2017) 35.01 ppm। श्री हर्ष (1996) 40-55 ppm। श्री सह्या (1977) 75-85 ppm। H-97 (1971) 180-200 ppm। लेख इन सबको कम साइनोजन और खाना पकाने की अच्छी गुणवत्ता वाली कहता है। यह तुलना जंगली कड़वी कसावा से है। इस बात की गारंटी नहीं कि H-97 कच्ची खाने के लिए सुरक्षित है।

सीढ़ी बताती है कि कौन-सी खानी है और कौन-सी बेचनी। H-97 में श्री रेक्षा से लगभग पाँच गुना साइनोजन है। मेज़ के लिए निचली पायदानें चुनिए, छीलिए और अच्छी तरह पकाइए, और कारख़ाने के लिए H-97 ठीक है क्योंकि प्रसंस्करण साइनोजन हटा देता है। H-97 दोनों के लिए उगाएँ तो ताज़ा लॉट पर साफ़ लेबल लगाइए और कच्चे उपयोग के लिए मत बेचिए। CTCRI का बुलेटिन कहता है कि लकड़ी की राख और मिट्टी की जाँच पर दिया ज़िंक कंद का साइनोजन घटाते हैं। इसलिए कुछ हिस्सा ताज़ा बेचना हो तो फ़सल को उसी हिसाब से खाद दीजिए।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

कसावा बीज से नहीं, तने की कलमों से लगती है। कम अवधि की किस्म के लिए 6-7 महीने और लंबी अवधि की किस्म के लिए 9-10 महीने की स्वस्थ फ़सल से कलमें लीजिए। उन्हें छाया में खड़ा रखिए, और ढुलाई में आँखें न टूटने दीजिए। ख़राब पौधों की कलमें बार-बार लगाने से वही किस्म कमज़ोर होती है, इसलिए बीच-बीच में साफ़ स्रोत से नई रोपण-सामग्री लीजिए।

दूसरी किस्मों से तुलना

कसावा (टैपिओका) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
H-165तमिलनाडु, 8 महीने की औद्योगिक8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल)33-38 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-226स्टार्च और साबूदाना, तमिलनाडु10 महीने (CTCRI और ISTI पोर्टल)30-35 टन/हेक्टेयरतमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
H-97यही पेजचार दक्षिणी राज्यों के सूखी ज़मीन के खेत जो कारख़ाने को बेचने के लिए सूखा सहने वाली, ऊँचे स्टार्च की, लंबे समय से परखी किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Apoorvaतमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जो स्थिर, ऊँचे निकलने वाले स्टार्च की त्रिगुणित किस्म चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 37.60 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Athulyaज़्यादा स्टार्च की ट्रिप्लॉइड, सिंचित मैदान10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); 39.00 टन/हेक्टेयर (ISTI पोर्टल)तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश
Sree Harshaकेरल और तमिलनाडु के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जिन्हें स्टार्च के प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Jayaसबसे अच्छी पकने वाली छह महीने की फसल6-7 महीने26-30 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Kaveriतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के औद्योगिक कसावा किसान जो मोज़ेक प्रतिरोध और ऊँची उपज चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 10 महीने (Indian Horticulture 2025)40-50 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल
Sree Padmanabhaमोज़ेक वाले इलाक़ों के केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के खेत जो परखी हुई, पुरानी प्रतिरोधी किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना)29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु
Sree Pavithraकम पोटाश वाली मिट्टी, पकाने के लिए9-10 महीने35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); एक समीक्षा-तालिका में 35-45 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Prabhaचार राज्यों के मिले-जुले उपयोग वाले खेत जो नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए मध्यम ऊँचाई की किस्म चाहते हैं9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
Sree Prakashकेरल की नीची ज़मीन और धान-फेर-बदल वाले खेत जो 7 महीने में निपटने वाली कसावा चाहते हैं7 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)30-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)केरल
Sree Rekhaमिली-जुली ऊँची और नीची ज़मीन8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-1035-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
Sree Rekshaकेरल और तमिलनाडु के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और मोज़ेक प्रतिरोध और कटाई के बाद लंबी टिकाऊपन चाहते हैं8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु
Sree Sahyaकई राज्यों के सूखे या मिले-जुले हालात के खेत जो ऊँचा स्टार्च और भरोसेमंद, पुरानी किस्म चाहते हैं10-11 महीने (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश
Sree Sakthiतमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के औद्योगिक कसावा खेत जहाँ मोज़ेक रोग गंभीर है9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन)40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल
Sree Suvarnaवे खेत जो ताज़ा खाने के लिए छोटी, मोज़ेक-रोधी, कम साइनोजन वाली कसावा चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन)केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
Sree Swarnaकेरल के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और पीले गूदे वाली, जल्दी कंद बनाने वाली किस्म चाहते हैं7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन); 7 महीने में जल्दी कंद बनना (CTCRI वेब पन्ना)35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 40 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल
Sree Vijayaधान के बाद छह महीने की फसल6 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); CTCRI के दूसरे दस्तावेज़ों में 6-7 या 7 महीने25-28 टन/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
Sree Visakhamकई राज्यों के, असम और उत्तर-पूर्व समेत, वे खेत जो पुरानी, बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली, पीले गूदे की कसावा चाहते हैं10 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना)35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना)केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कसावा (टैपिओका) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

कसावा (टैपिओका) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

H-97 क्या है?

1971 में ICAR-CTCRI की जारी संकर कसावा किस्म। यह 10 महीने लेती है, 27-31% स्टार्च के साथ 25-35 टन/हेक्टेयर देती है और सूखा सहने वाली है।

क्या H-97 खाने के लिए सुरक्षित है?

आम कसावा की तरह अच्छी तरह पकाने पर हाँ। पर इसका साइनोजन, 180-200 ppm, CTCRI की तालिका में सबसे ऊँचा है, इसलिए छीलिए, अच्छी तरह पकाइए और कच्ची मत खाइए। ताज़ा बिक्री के लिए 35.01 ppm वाली श्री रेक्षा ज़्यादा सुरक्षित चुनाव है।

क्या H-97 कसावा मोज़ेक रोग सह लेती है?

CTCRI का पुराना वेब पन्ना कहता है सहनशील। बुलेटिन की तालिका और Indian Horticulture सिर्फ़ सूखा सहना और पत्ती धब्बे, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की मध्यम प्रतिरोधकता गिनाते हैं। मोज़ेक प्रतिरोध पर भरोसा मत कीजिए; साफ़ कलमें लीजिए।

H-97, H-165 या H-226?

तीनों 1971 में जारी हुईं। H-97: 10 महीने, 25-35 टन/हेक्टेयर, 27-31% स्टार्च, सूखा सहने वाली। H-165: 8 महीने, 33-38 टन/हेक्टेयर, 24% स्टार्च। H-226: 10 महीने, 30-35 टन/हेक्टेयर, 28-30% स्टार्च, तमिलनाडु की सबसे लोकप्रिय औद्योगिक किस्म। H-97 की उपज का दायरा सबसे कम दिखता है पर सूखे के लिए वही पसंद है।

स्रोत: Cassava (variety descriptions, Table 3; spacing, Table 7; planting stakes and seed standards) — ICAR-CTCRI, Cassava varieties developed by CTCRI — ICAR-CTCRI variety page, archived, Climate-resilient and biofortified tuber crop varieties — Chandra and others, Indian Horticulture, November-December 2025. संपादकीय नीति.