Sree Reksha
2017 की CTCRI कसावा जिसका साइनोजन कम (35.01 ppm), शर्करा कम (1.1%), कसावा मोज़ेक की प्रतिरोधकता और कटाई के बाद की ख़राबी की सहनशीलता है। ऊँची और बिना शाखा वाली, 8-9 महीने, केरल और तमिलनाडु के लिए। यह श्री रेखा नहीं है।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- तने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
- अपेक्षित उपज
- 40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 2017 में जारी · ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम (CTCRI बुलेटिन, तालिका 3)
इस किस्म के बारे में
श्री रेक्षा 2017 में ICAR-CTCRI की जारी कसावा किस्म है। CTCRI का बुलेटिन ऊँचा (275-325 सेमी), बिना शाखा वाला पौधा बताता है, जिसका तना भूरा, डंठल गहरा बैंगनी और नई पत्ती हल्की भूरी है। कंदों का छिलका भूरा, परत क्रीम और गूदा सफ़ेद है। यह 8-9 महीने लेती है। यह 27-31% स्टार्च के साथ 40-45 टन/हेक्टेयर देती है। यह कसावा मोज़ेक रोग की पूरी तरह प्रतिरोधी, कटाई के बाद की शारीरिक ख़राबी और सूखे के प्रति सह सकने वाली है। इसमें शर्करा कम (1.1%) है। और जैविक खेती में उपज स्थिर रहती है। Indian Horticulture (2025) साइनोजन 35.01 ppm, खाना पकाने की अच्छी गुणवत्ता, 27-32% स्टार्च और 45-50 टन/हेक्टेयर जोड़ता है। CTCRI इसे केरल और तमिलनाडु के लिए सुझाता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
केरल या तमिलनाडु में खाने के लिए कसावा बेचते हों और मोज़ेक प्रतिरोध, सूखा सहना और खुदाई के बाद बेहतर टिकने वाले कंद चाहते हों, तो श्री रेक्षा चुनिए। CTCRI ने इसे 2017 में 8-9 महीने की अवधि पर जारी किया। वह इसे कसावा मोज़ेक के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी बताता है। साथ ही वह इसे कटाई के बाद की शारीरिक ख़राबी सह सकने वाली भी बताता है। यह ख़राबी नीली-काली धारियों के रूप में दिखती है, जो खुदे कंद को कुछ दिन में बिगाड़ देती हैं। Indian Horticulture कम साइनोजन, 35.01 ppm, और कम शर्करा, 1.10%, देता है। उपज CTCRI के बुलेटिन में 40-45 टन/हेक्टेयर और 2025 की तालिका में 45-50 टन/हेक्टेयर है। पौधा ऊँचा (275-325 सेमी) और बिना शाखा वाला है, इसलिए 75 x 75 सेमी पर लगाइए। इसे श्री रेखा से मत मिलाइए, जो पुरानी किस्म है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ मई-जून, या उत्तर-पूर्व मानसून के साथ सितंबर-अक्टूबर; सिंचाई हो तो दिसंबर-जनवरी (CTCRI)।
- दूरीबिना शाखा वाली किस्मों के लिए: हर राज्य में 75 x 75 सेमी (CTCRI तालिका 7)। लगभग 3,600 तने प्रति हेक्टेयर।
- बुवाई विधिपरिपक्व, स्वस्थ, 2-3 सेमी मोटे तनों से लगभग पाँच आँखों वाली 15-20 सेमी की कलमें काटिए, ऊपर का एक-तिहाई फेंक दीजिए, और उन्हें 5 सेमी गहरा खड़ा लगाइए, एक कलम एक टीले पर (CTCRI)। अच्छी कलम के कटे सिरे पर दूध (लेटेक्स) दिखता है।
- उर्वरकCTCRI: 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और 100:50:100 किग्रा N:P2O5:K2O। सारा फ़ॉस्फ़ोरस और आधा नाइट्रोजन और पोटाश रोपाई पर दीजिए, और बाक़ी 45-60 दिन पर निराई के साथ।
- कटाईसूचीबद्ध अवधि पर कटाई कीजिए, 8-9 महीने।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी निकासी वाली दोमट; खारी, क्षारीय और ख़राब निकासी वाली मिट्टी ठीक नहीं, और कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती (CTCRI)
उपज और अवधि
पकने की अवधि
8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
अपेक्षित उपज
40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- कसावा मोज़ेक रोग (CMD), जो सफ़ेद मक्खी और संक्रमित कलमों से फैलता है
- सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा
- जलभराव वाली मिट्टी में कंद सड़न
मुख्य कीट
प्रबंधन सुझाव
- सिर्फ़ साफ़ कलमें लीजिए: CTCRI आधार बीज में 0.10% और प्रमाणित बीज में 0.50% मोज़ेक वाले पौधे मानता है, इसलिए बिना मोज़ेक वाली फ़सल से कलमें लीजिए और रोगी पौधा जल्दी उखाड़ दीजिए।
- हर पौधे पर दो अंकुर रखिए: अंकुर फूटने के 10-15 दिन बाद फ़ालतू अंकुर तोड़ दीजिए और आमने-सामने के दो रखिए, जिससे प्रति पौधा कंद ज़्यादा बनते हैं (CTCRI)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- कटाई के बाद की शारीरिक ख़राबी के प्रति सहनशील, इसलिए खुदे कंद ज़्यादा टिकते हैं।
- कम साइनोजन (35.01 ppm) और कम शर्करा (1.1%)।
- जैविक खेती में स्थिर उपज (CTCRI)।
ध्यान रखने योग्य बातें
- दोनों स्रोत अलग उपज देते हैं: 40-45 और 45-50 टन/हेक्टेयर; निचले दायरे पर योजना बनाइए।
- ऊँची (275-325 सेमी), इसलिए हवा में गिर सकती है; आड़ वाली ज़मीन चुनिए।
- सिर्फ़ केरल और तमिलनाडु के लिए सूचीबद्ध।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- केरल
- तमिलनाडु
रेक्षा या रेखा: दो नाम, दो किस्में
श्री रेक्षा और श्री रेखा में एक अक्षर का फ़र्क है और नर्सरी में आसानी से बदल जाती हैं। ये अलग किस्में हैं। श्री रेखा (2000) टॉप-क्रॉस संकर है, सीधी और ऊपर से शाखादार, 9-10 महीने, 28-30% स्टार्च, ऊँची और नीची दोनों ज़मीन के लिए। श्री रेक्षा (2017) ऊँची और बिना शाखा वाली है, 8-9 महीने, 27-31% स्टार्च, कसावा मोज़ेक की पूरी तरह प्रतिरोधी, कम साइनोजन और कटाई के बाद की ख़राबी की सहनशीलता के साथ।
बनावट के साथ दूरी बदलती है, इसलिए गड़बड़ी का ख़र्च आपको उठाना पड़ता है। शाखादार श्री रेखा केरल में 90 x 90 सेमी पर लगती है, जबकि बिना शाखा वाली श्री रेक्षा 75 x 75 सेमी पर। नर्सरी से बिल पर जारी होने का साल और तने और पत्ती का वर्णन माँगिए, और देखिए कि कलमों के नमूने में भूरा तना और गहरे बैंगनी डंठल हैं।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
कसावा बीज से नहीं, तने की कलमों से लगती है। कम अवधि की किस्म के लिए 6-7 महीने और लंबी अवधि की किस्म के लिए 9-10 महीने की स्वस्थ फ़सल से कलमें लीजिए। उन्हें छाया में खड़ा रखिए। और ढुलाई में आँखें न टूटने दीजिए। ख़राब पौधों की कलमें बार-बार लगाने से वही किस्म कमज़ोर होती है, इसलिए बीच-बीच में साफ़ स्रोत से नई रोपण-सामग्री लीजिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
कसावा (टैपिओका) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| H-165 | तमिलनाडु, 8 महीने की औद्योगिक | 8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल) | 33-38 टन/हेक्टेयर | तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| H-226 | स्टार्च और साबूदाना, तमिलनाडु | 10 महीने (CTCRI और ISTI पोर्टल) | 30-35 टन/हेक्टेयर | तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| H-97 | चार दक्षिणी राज्यों के सूखी ज़मीन के खेत जो कारख़ाने को बेचने के लिए सूखा सहने वाली, ऊँचे स्टार्च की, लंबे समय से परखी किस्म चाहते हैं | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | 25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
| Sree Apoorva | तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जो स्थिर, ऊँचे निकलने वाले स्टार्च की त्रिगुणित किस्म चाहते हैं | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 37.60 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल |
| Sree Athulya | ज़्यादा स्टार्च की ट्रिप्लॉइड, सिंचित मैदान | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); 39.00 टन/हेक्टेयर (ISTI पोर्टल) | तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश |
| Sree Harsha | केरल और तमिलनाडु के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जिन्हें स्टार्च के प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Jaya | सबसे अच्छी पकने वाली छह महीने की फसल | 6-7 महीने | 26-30 टन/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Kaveri | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के औद्योगिक कसावा किसान जो मोज़ेक प्रतिरोध और ऊँची उपज चाहते हैं | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 10 महीने (Indian Horticulture 2025) | 40-50 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल |
| Sree Padmanabha | मोज़ेक वाले इलाक़ों के केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के खेत जो परखी हुई, पुरानी प्रतिरोधी किस्म चाहते हैं | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना) | 29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Pavithra | कम पोटाश वाली मिट्टी, पकाने के लिए | 9-10 महीने | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); एक समीक्षा-तालिका में 35-45 टन/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Prabha | चार राज्यों के मिले-जुले उपयोग वाले खेत जो नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए मध्यम ऊँचाई की किस्म चाहते हैं | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
| Sree Prakash | केरल की नीची ज़मीन और धान-फेर-बदल वाले खेत जो 7 महीने में निपटने वाली कसावा चाहते हैं | 7 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना) | 30-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना) | केरल |
| Sree Rekha | मिली-जुली ऊँची और नीची ज़मीन | 8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-10 | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल) | केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| Sree Rekshaयही पेज | केरल और तमिलनाडु के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और मोज़ेक प्रतिरोध और कटाई के बाद लंबी टिकाऊपन चाहते हैं | 8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | 40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Sahya | कई राज्यों के सूखे या मिले-जुले हालात के खेत जो ऊँचा स्टार्च और भरोसेमंद, पुरानी किस्म चाहते हैं | 10-11 महीने (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश |
| Sree Sakthi | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के औद्योगिक कसावा खेत जहाँ मोज़ेक रोग गंभीर है | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल |
| Sree Suvarna | वे खेत जो ताज़ा खाने के लिए छोटी, मोज़ेक-रोधी, कम साइनोजन वाली कसावा चाहते हैं | 7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन) | केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश |
| Sree Swarna | केरल के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और पीले गूदे वाली, जल्दी कंद बनाने वाली किस्म चाहते हैं | 7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन); 7 महीने में जल्दी कंद बनना (CTCRI वेब पन्ना) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 40 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | केरल |
| Sree Vijaya | धान के बाद छह महीने की फसल | 6 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); CTCRI के दूसरे दस्तावेज़ों में 6-7 या 7 महीने | 25-28 टन/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Visakham | कई राज्यों के, असम और उत्तर-पूर्व समेत, वे खेत जो पुरानी, बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली, पीले गूदे की कसावा चाहते हैं | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना) | 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कसावा (टैपिओका) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके कसावा (टैपिओका) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर कसावा (टैपिओका) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरकसावा (टैपिओका) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में कसावा (टैपिओका) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
कसावा (टैपिओका) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्री रेक्षा क्या है?
2017 में ICAR-CTCRI की जारी कसावा किस्म। यह ऊँची और बिना शाखा वाली है, 8-9 महीने लेती है, 40-45 टन/हेक्टेयर देती है और कसावा मोज़ेक रोग की पूरी तरह प्रतिरोधी और कटाई के बाद की शारीरिक ख़राबी की सहनशील है।
कटाई के बाद की शारीरिक ख़राबी क्या है?
यह खुदे कसावा के कंदों का जल्दी भूरा पड़ना और धारियाँ आना है, जिससे कुछ दिन में वे बिकने लायक नहीं रहते। CTCRI श्री रेक्षा को इसकी सहनशील बताता है, पर दिनों की संख्या नहीं देता, इसलिए खुदे कंद फिर भी जल्दी बेचिए या प्रसंस्कृत कीजिए।
श्री रेक्षा से कितनी उपज मानकर चलूँ?
CTCRI का बुलेटिन 40-45 टन/हेक्टेयर और Indian Horticulture (2025) 45-50 टन/हेक्टेयर देता है। योजना के लिए निचला दायरा लीजिए। दोनों केंद्र-स्तर के आँकड़े हैं, और खेत का औसत आम तौर पर कम होता है।
क्या श्री रेक्षा जैविक खेतों के लिए अच्छी है?
CTCRI कहता है कि जैविक प्रबंधन में इसकी उपज स्थिर रहती है। बुलेटिन में यह एक पंक्ति है, परीक्षण का ब्योरा नहीं, इसलिए पहले अपने जैविक आदानों के साथ छोटा खंड आज़माइए।
स्रोत: Cassava (variety descriptions, Table 3; spacing, Table 7; planting stakes and seed standards) — ICAR-CTCRI, Climate-resilient and biofortified tuber crop varieties — Chandra and others, Indian Horticulture, November-December 2025. संपादकीय नीति.
