Sree Harsha
ICAR-CTCRI की पहली त्रिगुणित कसावा, 1996 में जारी, CTCRI की सूची में सबसे ज़्यादा स्टार्च, 38-41%, के साथ। ऊँची और शाखादार, 10 महीने, 35-40 टन/हेक्टेयर, कम साइनोजन (40-55 ppm), केरल और तमिलनाडु के औद्योगिक इलाक़ों के लिए।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- तने की कलम (क्लोनल रोपण-सामग्री)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
- अपेक्षित उपज
- 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1996 में जारी · ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम (CTCRI बुलेटिन, तालिका 3)
इस किस्म के बारे में
श्री हर्ष 1996 में ICAR-CTCRI की जारी त्रिगुणित कसावा किस्म है, जिसे पहली त्रिगुणित किस्म कहा गया है। CTCRI का बुलेटिन ऊँचा, सीधा, शाखादार पौधा बताता है, जिसका तना मोटा, फूलना कम, परिपक्व तना सलेटी, नई पत्ती हल्की बैंगनी और परिपक्व पत्तियाँ मोटी, चौड़ी और नुकीली नोक वाली हैं। यह 10 महीने लेती है, 38-41% स्टार्च के साथ 35-40 टन/हेक्टेयर देती है, और केरल और तमिलनाडु के औद्योगिक इलाक़ों के लिए सुझाई गई है। Indian Horticulture (2025) इसे सूखा सहने वाली, कम साइनोजन (40-55 ppm), खाना पकाने की अच्छी गुणवत्ता और सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की प्रतिरोधी दर्ज करता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
आपका ख़रीदार केरल या तमिलनाडु का स्टार्च कारख़ाना हो जो स्टार्च के प्रतिशत पर पैसे देता है, तो श्री हर्ष चुनिए। CTCRI की सूची में इसका स्टार्च सबसे ज़्यादा, 38-41%, है, जबकि ज़्यादातर बाक़ी का 27-32%, और CTCRI इसे पहली त्रिगुणित किस्म कहता है। यह ऊँची, सीधी और शाखादार है, 10 महीने लेती है और 35-40 टन/हेक्टेयर देती है। Indian Horticulture कम साइनोजन (40-55 ppm), खाना पकाने की अच्छी गुणवत्ता और सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की प्रतिरोधकता, और सूखा सहना जोड़ता है। यह 1996 की किस्म है, इसलिए मोज़ेक-रोधी सूचीबद्ध नहीं। मोज़ेक आपकी मुख्य समस्या हो तो श्री शक्ति या श्री रेक्षा देखिए। CTCRI हर्ष को सिर्फ़ केरल और तमिलनाडु के औद्योगिक इलाक़ों के लिए सुझाता है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ मई-जून, या उत्तर-पूर्व मानसून के साथ सितंबर-अक्टूबर; सिंचाई हो तो दिसंबर-जनवरी (CTCRI)।
- दूरीशाखादार किस्मों के लिए: केरल और आंध्र प्रदेश में 90 x 90 सेमी, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में 90 x 75 सेमी (CTCRI तालिका 7)। 90 x 90 सेमी पर लगभग 2,500 तने प्रति हेक्टेयर।
- बुवाई विधिपरिपक्व, स्वस्थ, 2-3 सेमी मोटे तनों से लगभग पाँच आँखों वाली 15-20 सेमी की कलमें काटिए, ऊपर का एक-तिहाई फेंक दीजिए, और उन्हें 5 सेमी गहरा खड़ा लगाइए, एक कलम एक टीले पर (CTCRI)। अच्छी कलम के कटे सिरे पर दूध (लेटेक्स) दिखता है।
- उर्वरकCTCRI: 12.5 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और 100:50:100 किग्रा N:P2O5:K2O। सारा फ़ॉस्फ़ोरस और आधा नाइट्रोजन और पोटाश रोपाई पर दीजिए, और बाक़ी 45-60 दिन पर निराई के साथ।
- कटाईसूचीबद्ध अवधि पर कटाई कीजिए, 10 महीने।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी निकासी वाली दोमट; खारी, क्षारीय और ख़राब निकासी वाली मिट्टी ठीक नहीं, और कसावा जलभराव वाली मिट्टी में नहीं पनपती (CTCRI)
उपज और अवधि
पकने की अवधि
10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
अपेक्षित उपज
35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- कसावा मोज़ेक रोग (CMD), जो सफ़ेद मक्खी और संक्रमित कलमों से फैलता है
- सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा
- जलभराव वाली मिट्टी में कंद सड़न
मुख्य कीट
प्रबंधन सुझाव
- सिर्फ़ साफ़ कलमें लीजिए: CTCRI आधार बीज में 0.10% और प्रमाणित बीज में 0.50% मोज़ेक वाले पौधे मानता है, इसलिए बिना मोज़ेक वाली फ़सल से कलमें लीजिए और रोगी पौधा जल्दी उखाड़ दीजिए।
- हर पौधे पर दो अंकुर रखिए: अंकुर फूटने के 10-15 दिन बाद फ़ालतू अंकुर तोड़ दीजिए और आमने-सामने के दो रखिए, जिससे प्रति पौधा कंद ज़्यादा बनते हैं (CTCRI)।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- CTCRI की सूची में सबसे ज़्यादा स्टार्च, 38-41%, पहली त्रिगुणित किस्म से।
- कम साइनोजन (40-55 ppm) और पत्ती धब्बा, मकड़ी-कुटकी और शल्क कीट की प्रतिरोधकता।
- सूखा सहने वाली।
ध्यान रखने योग्य बातें
- कसावा मोज़ेक रोग की प्रतिरोधी सूचीबद्ध नहीं।
- 10 महीने की लंबी फ़सल और कम फूलना, इसलिए यह सिर्फ़ तने की कलमों से बढ़ाई जाती है।
- सिर्फ़ केरल और तमिलनाडु के औद्योगिक इलाक़ों के लिए सुझाई गई।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- केरल
- तमिलनाडु
पहली त्रिगुणित किस्म: 38 से 41% स्टार्च आपसे क्या माँगता है
श्री हर्ष का स्टार्च का आँकड़ा CTCRI की बाक़ी सूची से कहीं ऊपर है: H-165 के 24%, श्री विशाखम के 25-27% और नई औद्योगिक किस्मों के 27-32% के मुक़ाबले 38-41%। जो कारख़ाना स्टार्च प्रतिशत पर पैसे देता है, वहाँ यह मायने रखता है। इसकी त्रिगुणित बनावट ही वजह है कि CTCRI इसे ऊँचे निकलने वाले स्टार्च वाली कहता है, और यह कम फूलती है। त्रिगुणित पौधा शायद ही बीज बनाता है, इसलिए इसे सिर्फ़ तने की कलमों से लगाया जाता है।
इसलिए कलमों की आपूर्ति पर नज़र रखनी है। चूँकि आप फ़सल सिर्फ़ तनों से बढ़ाएँगे, हर कलम माँ-पौधे की नक़ल है, इसलिए माँ-पौधे का रोग साथ जाता है। 9-10 महीने की मोज़ेक-मुक्त फ़सल से कलमें लीजिए, उन्हें छाया में खड़ा रखिए और 15-20 सेमी की, पाँच आँखों वाली, कटे सिरे पर दूध वाली कलम इस्तेमाल कीजिए। कुछ एकड़ से ज़्यादा लगाने से पहले अपने पहले लॉट पर कारख़ाने से उसकी अपनी स्टार्च जाँच माँगिए, क्योंकि 38-41% केंद्र का दायरा है।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
कसावा बीज से नहीं, तने की कलमों से लगती है। कम अवधि की किस्म के लिए 6-7 महीने और लंबी अवधि की किस्म के लिए 9-10 महीने की स्वस्थ फ़सल से कलमें लीजिए। उन्हें छाया में खड़ा रखिए, और ढुलाई में आँखें न टूटने दीजिए। ख़राब पौधों की कलमें बार-बार लगाने से वही किस्म कमज़ोर होती है, इसलिए बीच-बीच में साफ़ स्रोत से नई रोपण-सामग्री लीजिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
कसावा (टैपिओका) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| H-165 | तमिलनाडु, 8 महीने की औद्योगिक | 8 महीने (CTCRI); 8-9 महीने (ISTI पोर्टल) | 33-38 टन/हेक्टेयर | तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| H-226 | स्टार्च और साबूदाना, तमिलनाडु | 10 महीने (CTCRI और ISTI पोर्टल) | 30-35 टन/हेक्टेयर | तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| H-97 | चार दक्षिणी राज्यों के सूखी ज़मीन के खेत जो कारख़ाने को बेचने के लिए सूखा सहने वाली, ऊँचे स्टार्च की, लंबे समय से परखी किस्म चाहते हैं | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | 25-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
| Sree Apoorva | तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जो स्थिर, ऊँचे निकलने वाले स्टार्च की त्रिगुणित किस्म चाहते हैं | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 37.60 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल |
| Sree Athulya | ज़्यादा स्टार्च की ट्रिप्लॉइड, सिंचित मैदान | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); 39.00 टन/हेक्टेयर (ISTI पोर्टल) | तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश |
| Sree Harshaयही पेज | केरल और तमिलनाडु के स्टार्च-कारख़ाने वाले खेत जिन्हें स्टार्च के प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Jaya | सबसे अच्छी पकने वाली छह महीने की फसल | 6-7 महीने | 26-30 टन/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Kaveri | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के औद्योगिक कसावा किसान जो मोज़ेक प्रतिरोध और ऊँची उपज चाहते हैं | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 10 महीने (Indian Horticulture 2025) | 40-50 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल |
| Sree Padmanabha | मोज़ेक वाले इलाक़ों के केरल की बारानी और तमिलनाडु की सिंचित ज़मीन के खेत जो परखी हुई, पुरानी प्रतिरोधी किस्म चाहते हैं | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन); 270-300 दिन (CTCRI वेब पन्ना) | 29-30 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Pavithra | कम पोटाश वाली मिट्टी, पकाने के लिए | 9-10 महीने | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI); एक समीक्षा-तालिका में 35-45 टन/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Prabha | चार राज्यों के मिले-जुले उपयोग वाले खेत जो नीची और ऊँची दोनों ज़मीन के लिए मध्यम ऊँचाई की किस्म चाहते हैं | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
| Sree Prakash | केरल की नीची ज़मीन और धान-फेर-बदल वाले खेत जो 7 महीने में निपटने वाली कसावा चाहते हैं | 7 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना) | 30-35 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना) | केरल |
| Sree Rekha | मिली-जुली ऊँची और नीची ज़मीन | 8-10 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); बुलेटिन में 9-10 | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-48 टन/हेक्टेयर (CTCRI का किस्म-पन्ना, समीक्षा-तालिका और ISTI पोर्टल) | केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| Sree Reksha | केरल और तमिलनाडु के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और मोज़ेक प्रतिरोध और कटाई के बाद लंबी टिकाऊपन चाहते हैं | 8-9 महीने (CTCRI बुलेटिन और Indian Horticulture 2025) | 40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 45-50 टन/हेक्टेयर (Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Sahya | कई राज्यों के सूखे या मिले-जुले हालात के खेत जो ऊँचा स्टार्च और भरोसेमंद, पुरानी किस्म चाहते हैं | 10-11 महीने (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन, वेब पन्ना और Indian Horticulture 2025) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश |
| Sree Sakthi | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के औद्योगिक कसावा खेत जहाँ मोज़ेक रोग गंभीर है | 9-10 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 40-45 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल |
| Sree Suvarna | वे खेत जो ताज़ा खाने के लिए छोटी, मोज़ेक-रोधी, कम साइनोजन वाली कसावा चाहते हैं | 7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन) | केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश |
| Sree Swarna | केरल के वे खेत जो खाने के लिए कसावा बेचते हैं और पीले गूदे वाली, जल्दी कंद बनाने वाली किस्म चाहते हैं | 7-8 महीने (CTCRI बुलेटिन); 7 महीने में जल्दी कंद बनना (CTCRI वेब पन्ना) | 35-40 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 40 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | केरल |
| Sree Vijaya | धान के बाद छह महीने की फसल | 6 महीने (CTCRI का किस्म-पन्ना); CTCRI के दूसरे दस्तावेज़ों में 6-7 या 7 महीने | 25-28 टन/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| Sree Visakham | कई राज्यों के, असम और उत्तर-पूर्व समेत, वे खेत जो पुरानी, बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली, पीले गूदे की कसावा चाहते हैं | 10 महीने (CTCRI बुलेटिन और वेब पन्ना) | 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI बुलेटिन); 35-38 टन/हेक्टेयर (CTCRI वेब पन्ना) | केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कसावा (टैपिओका) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके कसावा (टैपिओका) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर कसावा (टैपिओका) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरकसावा (टैपिओका) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में कसावा (टैपिओका) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
कसावा (टैपिओका) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्री हर्ष क्या है?
ICAR-CTCRI की पहली त्रिगुणित कसावा, 1996 में जारी। यह ऊँची और शाखादार है, 10 महीने लेती है, 38-41% स्टार्च के साथ 35-40 टन/हेक्टेयर देती है और केरल और तमिलनाडु के औद्योगिक इलाक़ों के लिए है।
क्या श्री हर्ष खाई जा सकती है?
Indian Horticulture (2025) खाना पकाने की अच्छी गुणवत्ता और 40-55 ppm कम साइनोजन गिनाता है। CTCRI का इसका मुख्य मक़सद औद्योगिक है। ताज़ा बेचने से पहले छोटा लॉट चखिए और अच्छी तरह पकाइए।
श्री हर्ष के लिए कौन-सी दूरी रखूँ?
यह ऊँची, सीधी और शाखादार है, इसलिए शाखादार वाली दूरी रखिए: केरल में 90 x 90 सेमी और तमिलनाडु में 90 x 75 सेमी (CTCRI तालिका 7)।
श्री हर्ष या श्री शक्ति?
हर्ष में स्टार्च बहुत ज़्यादा है (27-32% के मुक़ाबले 38-41%) पर मोज़ेक प्रतिरोध नहीं और 10 महीने की फ़सल। शक्ति मोज़ेक की पूरी तरह प्रतिरोधी है, 9-10 महीने में 40-45 टन/हेक्टेयर देती है और चार राज्यों के लिए सूचीबद्ध है। साफ़ ज़मीन पर स्टार्च के ऊँचे भाव के लिए हर्ष, मोज़ेक वाली जगह शक्ति।
स्रोत: Cassava (variety descriptions, Table 3; spacing, Table 7; planting stakes and seed standards) — ICAR-CTCRI, Cassava varieties developed by CTCRI — ICAR-CTCRI variety page, archived, Climate-resilient and biofortified tuber crop varieties — Chandra and others, Indian Horticulture, November-December 2025. संपादकीय नीति.
