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अंगूरसभी सीज़नरोपण सामग्रीअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Thompson Seedless

जड़ वाली कलमों से तैयार, असली बीज से नहीं। हरी बिना-बीज वाली किस्म, जिस पर भारत का ज़्यादातर टेबल-अंगूर व किशमिश व्यापार टिका है — भरोसेमंद, पर मानसून आते ही छिड़काव कैलेंडर में देरी नहीं चलती।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिजड़ वाली कलम से बनी बेल में साल 2–3 से फल
अपेक्षित उपज250–300 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
अंगूर
प्रकार
रोपण सामग्री
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
जड़ वाली कलम से बनी बेल में साल 2–3 से फल
अपेक्षित उपज
250–300 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
यह कोई भारत में विकसित की गई किस्म नहीं है — एशिया माइनर मूल की एक आयातित विटिस विनिफ़ेरा किस्म (सुल्ताना/सुल्तानिना), जो महाराष्ट्र में लंबे समय से आधार-स्टॉक के रूप में स्थापित है, जिससे किसानों ने बाद में टास-ए-गणेश (1970), सोनाका (1977) व मणिक चमन (1982) उत्परिवर्तन चुने।

इस किस्म के बारे में

थॉम्पसन सीडलेस, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुल्ताना या सुल्तानिना नाम से जानी जाने वाली बीज-रहित अंगूर किस्म का भारतीय व अमेरिकी नाम है — यह विटिस विनिफ़ेरा कुल का पौधा एशिया माइनर (आज के तुर्की/ईरान) से आया और तुर्क-कालीन व्यापार के ज़रिए क्रीट होते हुए भूमध्य-सागर क्षेत्र भर में फैला — यह जानकारी एक सीधे फ़ेच किए गए विकिपीडिया लेख से मिलती है। अमेरिकी नाम विलियम थॉम्पसन को श्रद्धांजलि है, जो कैलिफ़ोर्निया के शुरुआती उत्पादकों में थे और जिन्हें कभी-कभी वहाँ इस किस्म को लाने का श्रेय दिया जाता है; अमेरिकी संघीय नियमावली (यूएस कोड ऑफ़ फ़ेडरल रेगुलेशन्स) 'थॉम्पसन सीडलेस' व 'सुल्ताना' को एक ही मानती है। यह हल्के हरे-पीले रंग की, अंडाकार दानों वाली और सच में बहु-उपयोगी किस्म है — टेबल अंगूर, किशमिश (कैलिफ़ोर्निया की क़रीब 97% किशमिश इसी से बनती है) और, कम आम रूप से, वाइन के लिए भी इस्तेमाल होती है। भारत में यह महाराष्ट्र के पूरे टेबल-अंगूर उद्योग की नींव-किस्म बनी, और प्रगतिशील किसानों ने तब से थॉम्पसन सीडलेस की बेलों से सीधे कई प्राकृतिक 'बड स्पोर्ट' उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) चुने हैं, जो अब स्वयं प्रमुख किस्में हैं, और हर एक अलग-अलग स्रोतों में लगातार दर्ज है: टास-ए-गणेश (1970 में सांगली ज़िले के बोरगाँव में वसंत राव आर्वे द्वारा पहचानी गई — अंडाकार, हरी, बड़ा गुच्छा), सोनाका (1977 में सोलापुर ज़िले के नानज में नानासाहेब काळे द्वारा पहचानी गई — लंबा दाना, बड़ा गुच्छा, ख़ास तौर पर मीठी) और मणिक चमन (1982 में विकसित, लंबे दाने वाली)। थॉम्पसन सीडलेस और ये तीनों उत्परिवर्तन मिलकर भारत के किशमिश उत्पादन का लगभग 1,20,000 टन हर साल देते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररोपण सामग्री
    अवधिजड़ वाली कलम से बनी बेल में साल 2–3 से फल
    उपज क्षमता250–300 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
    रोग-प्रतिरोधगीले मौसम में डाउनी मिल्ड्यू के प्रति संवेदनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

जड़ वाली कलम से बनी बेल में साल 2–3 से फल

अपेक्षित उपज

250–300 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • सच में बहु/त्रि-उपयोगी — टेबल अंगूर, किशमिश (कैलिफ़ोर्निया की क़रीब 97% किशमिश, और भारत के अपने किशमिश उद्योग की भी नींव-किस्म) और वाइन तक — एक सीधे फ़ेच किए गए विकिपीडिया लेख के अनुसार
  • इतना मज़बूत व स्थापित आधार-स्टॉक कि महाराष्ट्र के किसानों ने इससे सीधे तीन अलग-अलग व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण उत्परिवर्तन स्वतंत्र रूप से चुने (टास-ए-गणेश 1970, सोनाका 1977, मणिक चमन 1982) — यह बताता है कि यह बेल कितनी व्यापक रूप से अनुकूलित व आनुवंशिक रूप से स्थिर-फिर-भी-परिवर्तनशील है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • एक विटिस विनिफ़ेरा किस्म होने के नाते थॉम्पसन सीडलेस में डाउनी मिल्ड्यू (प्लाज़्मोपैरा विटिकोला, एक उत्तर अमेरिका मूल का रोगजनक, जिसके साथ विटिस विनिफ़ेरा कभी विकसित नहीं हुई) के प्रति कोई प्राकृतिक प्रतिरोध नहीं है — यह इस रिकॉर्ड के अपने diseaseResistance फ़ील्ड से मेल खाता है; डाउनी-मिल्ड्यू शोध में इसे अक्सर संवेदनशील जाँच-किस्म के रूप में इस्तेमाल किया जाता है
  • संबंधित उत्परिवर्तन (सोनाका, टास-ए-गणेश, मणिक चमन) में भी वही विनिफ़ेरा डाउनी-मिल्ड्यू कमज़ोरी है, इसलिए मानसून के हिसाब से तय छिड़काव कार्यक्रम सिर्फ़ मूल किस्म के लिए नहीं, इन सभी के लिए मानक प्रथा है

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या थॉम्पसन सीडलेस कोई भारत में विकसित की गई किस्म है?

नहीं — यह एशिया माइनर मूल की एक आयातित विटिस विनिफ़ेरा किस्म है (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुल्ताना या सुल्तानिना भी कहलाती है), जो महाराष्ट्र के टेबल-अंगूर उद्योग के आधार-स्टॉक के रूप में लंबे समय से स्थापित है। भारतीय जो है वह किसानों द्वारा थॉम्पसन सीडलेस की बेलों से सीधे चुने गए उत्परिवर्तनों का समूह है — टास-ए-गणेश (1970), सोनाका (1977) व मणिक चमन (1982) — हर एक को महाराष्ट्र के किसी ख़ास ज़िले में किसी नामित किसान ने पहचाना।

थॉम्पसन सीडलेस के लिए डाउनी-मिल्ड्यू छिड़काव इतना ज़रूरी क्यों है?

क्योंकि यह एक विटिस विनिफ़ेरा किस्म है जिसमें प्लाज़्मोपैरा विटिकोला (डाउनी-मिल्ड्यू रोगजनक) के प्रति कोई प्राकृतिक प्रतिरोध नहीं है — यह भूमध्य-सागर/एशिया माइनर क्षेत्र में विकसित हुई, बिना उस फफूँद के संपर्क में आए जो मूलतः उत्तर अमेरिका की है, इसलिए इसमें कोई अंतर्निहित बचाव नहीं है और रोग-शोध में इसे अक्सर संवेदनशील मानक (बेंचमार्क) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

स्रोत: Sultana (grape) — Wikipedia, From the vineyards of Nashik — Millennium Post. संपादकीय नीति.