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नींबूसभी सीज़नरोपण सामग्रीअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Vikram (Kagzi lime)

ग्राफ़्टेड, बीज से नहीं। मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी से संबद्ध — एमपीकेवी राहुरी व पीडीकेवी अकोला इसे अपने खट्टे-नींबू परीक्षणों में तुलनात्मक क्लोन के रूप में परखते हैं, उद्गम संस्थान के रूप में नहीं (नीचे देखें)। आम कागज़ी नींबू का चुना हुआ रूप — बिना चयन वाले बीजू पेड़ से भारी, ज़्यादा एक-समान फसल।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिग्राफ़्टेड पौधे में साल 3–4 से फल
अपेक्षित उपज120–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
नींबू
प्रकार
रोपण सामग्री
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
ग्राफ़्टेड पौधे में साल 3–4 से फल
अपेक्षित उपज
120–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
शोध में यह लगातार मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी (अब वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ) से एक बेहतर कागज़ी नींबू चयन के रूप में जुड़ी मिली है। सटीक साल तय करने के लिए कोई मूल जारी-अधिसूचना सीधे फ़ेच नहीं की जा सकी, पर किसी भी स्रोत ने एमपीकेवी राहुरी या पीडीकेवी अकोला को उद्गम संस्थान के रूप में श्रेय नहीं दिया — दोनों इसके बजाय विक्रम को अपने खट्टे-नींबू किस्म परीक्षणों में तुलनात्मक/जाँच क्लोन के रूप में परखते हैं।

इस किस्म के बारे में

विक्रम को महाराष्ट्र भर में उन चुनिंदा, बेहतर कागज़ी (खट्टे) नींबू क्लोनों में गिना जाता है — प्रमालिनी, साई शरबती/साई सरबती, पीकेएम-1 व बालाजी के साथ — जिन्होंने धीरे-धीरे व्यावसायिक बाग़ों में बिना-चयन वाले बीजू कागज़ी पेड़ों की जगह ली है। खोज-परिणाम इसकी उत्पत्ति सबसे ज़्यादा मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी (अब वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ) से जोड़ते हैं, हालाँकि महाराष्ट्र के अन्य कृषि विश्वविद्यालय — महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (एमपीकेवी), राहुरी और डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ (पीडीकेवी), अकोला — अपने ख़ुद के खट्टे-नींबू किस्म परीक्षणों में इसे तुलनात्मक क्लोन के रूप में नियमित रूप से शामिल करते हैं, अपनी ख़ुद की किस्म के रूप में नहीं। अकोला परिस्थितियों में हुए, सीधे फ़ेच किए गए एक हस्त बहार-मौसम परीक्षण ने विक्रम को सात अन्य नामित क्लोनों (पीडीकेवी लाइम, कागज़ी व साई शरबती सहित) के मुक़ाबले परखा और इसे 25.0 किलो/पौधा उपज के साथ दूसरा सबसे ज़्यादा उपज देने वाला क्लोन दर्ज किया — पीडीकेवी लाइम की 29.73 किलो/पौधा के बाद — साथ में 3.5 सेमी फल-व्यास, 47.4% रस-मात्रा, 8.67 बीज/फल, 1.77 मिमी छिलका-मोटाई, टीएसएस 7.67° ब्रिक्स, अम्लता 7.53% और 28.17 मिग्रा/100 मिली एस्कॉर्बिक अम्ल। एक अलग प्रकाशित मूल्यांकन — जिसे सीधे फ़ेच नहीं किया गया पर जो खोज-परिणामों में बार-बार सामने आया — इसके बजाय विक्रम को अपने परखे गए क्लोन समूह में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला बताता है — सबसे ज़्यादा उपज 18.84 टन/हेक्टेयर, सबसे कम अम्लता (6.91%) और सबसे लंबी भंडारण अवधि (19.84 दिन) — जो अकोला परीक्षण से काफ़ी अलग क्रम है। किसी एक को चुनने के बजाय, यहाँ दोनों दर्ज किए गए हैं: यह अंतर सबसे ज़्यादा संभावना अलग-अलग परीक्षण स्थान, मौसम या तुलना-समूह की वजह से है, न कि किसी अध्ययन की तथ्यात्मक ग़लती की वजह से।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररोपण सामग्री
    अवधिग्राफ़्टेड पौधे में साल 3–4 से फल
    उपज क्षमता120–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
    रोग-प्रतिरोधसिट्रस कैंकर के प्रति संवेदनशील — गीले साल में छिड़काव कार्यक्रम ज़रूरी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

ग्राफ़्टेड पौधे में साल 3–4 से फल

अपेक्षित उपज

120–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • अकोला-क्षेत्र के एक सीधे फ़ेच किए गए हस्त बहार परीक्षण में, आठ परखे गए कागज़ी-नींबू क्लोनों में दूसरा सबसे ज़्यादा उपज देने वाला (25.0 किलो/पौधा), साथ में अच्छी रस-मात्रा (47.4%) व टीएसएस (7.67° ब्रिक्स)
  • एक अलग प्रकाशित मूल्यांकन (सिर्फ़ खोज-परिणामों से समर्थित, सीधे फ़ेच नहीं किया गया) विक्रम को अपने परखे गए क्लोन समूह में सबसे बेहतर सर्वांगीण प्रदर्शन देने वाला बताता है — सबसे ज़्यादा उपज, सबसे कम अम्लता, सबसे लंबी भंडारण अवधि — जो बताता है कि यह वाक़ई एक प्रतिस्पर्धी, सक्रिय रूप से अनुशंसित कागज़ी नींबू चयन है, भले ही सटीक आँकड़े परीक्षण-दर-परीक्षण बदलते हों
  • महाराष्ट्र के कई विश्वविद्यालय किस्म-परीक्षणों में नियमित रूप से बेंचमार्क/तुलनात्मक क्लोन के रूप में इस्तेमाल होती है, जो बेहतर कागज़ी नींबुओं में इसकी स्थापित पहचान दिखाता है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • किसी भी स्रोत ने एमपीकेवी राहुरी या पीडीकेवी अकोला को विक्रम के मूल्यांकन-संस्थान से ज़्यादा कुछ नहीं बताया — दोनों इसे अपने खट्टे-नींबू किस्म परीक्षणों में तुलनात्मक/जाँच क्लोन के रूप में परखते हैं। सबूत सबसे लगातार वास्तविक उत्पत्ति को मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी (अब वीएनएमकेवी) से जोड़ते हैं, हालाँकि सटीक साल की पुष्टि के लिए कोई मूल जारी-अधिसूचना सीधे फ़ेच नहीं की जा सकी
  • शोध-चरणों में मिले दोनों परीक्षण विक्रम के सटीक क्रम व आँकड़ों पर काफ़ी अलग राय रखते हैं (25.0 किलो/पौधा व दूसरा स्थान बनाम 18.84 टन/हेक्टेयर व पहला स्थान) — यह संभवतः अलग-अलग परीक्षण स्थान/मौसम की वजह से है, न कि किसी अध्ययन की ग़लती की वजह से
  • इस रिकॉर्ड का अपना diseaseResistance फ़ील्ड सिट्रस कैंकर के प्रति संवेदनशीलता बताता है; मिले किसी भी परीक्षण में विक्रम पर किस्म-विशेष कैंकर आँकड़ा नहीं मिला, इसलिए मौजूदा चेतावनी न पुष्टि हुई, न खंडित

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • आंध्र प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या विक्रम एक साधारण कागज़ी (खट्टा) नींबू है, या एक बेहतर चयन?

यह एक बेहतर कागज़ी-नींबू क्लोन है, जिसे महाराष्ट्र के विश्वविद्यालय परीक्षणों में पीडीकेवी लाइम, साई शरबती व पीकेएम-1 जैसे अन्य नामित चयनों के साथ परखा गया है — यह वह बिना-चयन वाला बीजू कागज़ी पेड़ नहीं है जिससे ज़्यादातर पुराने बाग़ शुरू हुए थे।

विक्रम को असल में किस संस्थान ने जारी किया?

एमपीकेवी राहुरी नहीं। सबूत लगातार विक्रम को मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी (अब वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ) से जोड़ते हैं। एमपीकेवी राहुरी व पीडीकेवी अकोला विक्रम के साथ काम करते ज़रूर हैं, पर बतौर मूल्यांकन-संस्थान — अपने खट्टे-नींबू परीक्षणों में इसे तुलनात्मक/जाँच क्लोन के रूप में परखते हुए, न कि इसके विकासकर्ता के रूप में।

स्रोत: Performance of Acid Lime Varieties for Hasta Bahar under Akola Conditions — Longdom. संपादकीय नीति.