मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
स्ट्रॉबेरीरबीरनर पौधा (टिशू-कल्चर / प्रमाणित)अपडेट किया गया 6 सितंबर 2026

Chandler

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस की एक क्लासिक छोटे-दिन किस्म, चमकीले लाल, शंक्वाकार, मध्यम-कड़े फल व भरोसेमंद फूल के साथ — हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड की पहाड़ियों में लंबे समय से उगाई जाती।

सीज़नरबी
पकने की अवधि~150–170 दिन
अपेक्षित उपजअच्छी, मध्यम-से-ऊँची
उपयुक्त मिट्टीउठी, काली-प्लास्टिक-मल्च क्यारी पर अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
रनर पौधा (टिशू-कल्चर / प्रमाणित)
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
~150–170 दिन
अपेक्षित उपज
अच्छी, मध्यम-से-ऊँची
उपयुक्त मिट्टी
उठी, काली-प्लास्टिक-मल्च क्यारी पर अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट
जारी
कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस द्वारा विकसित (क्रॉस 1977 में बनाया); 1983 में जारी

इस किस्म के बारे में

चांडलर कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस द्वारा विकसित व 1983 में जारी हुई, 1977 के क्रॉस 'डगलस' × Cal 72.361-105 (नामित C55) से; यह पहली बार 1979 में डेविस के पास विश्वविद्यालय के वुल्फ़स्किल प्रायोगिक बाग़ान में फली। एक क्लासिक छोटे-दिन किस्म, यह चमकीले लाल, शंक्वाकार, मध्यम-कड़े फल देती भरोसेमंद, भारी फूल के साथ हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड पहाड़ी खेती की ठंडी, छोटे-दिन दशाओं तले, जहाँ यह दशकों से कैमारोसा जैसी नई किस्मों के साथ उगाई जाती रही है। यह कोई ICAR-विकसित भारतीय किस्म नहीं है — भारतीय किसान इसे एक स्थापित, लंबे समय से भरोसेमंद आयातित किस्म के रूप में इस्तेमाल करते, प्रमाणित पहाड़ी नर्सरियों से प्रवर्धित।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररनर पौधा (टिशू-कल्चर / प्रमाणित)
    अवधि~150–170 दिन
    उपज क्षमताअच्छी, मध्यम-से-ऊँची
    रोग-प्रतिरोधकोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं
    मिट्टीउठी, काली-प्लास्टिक-मल्च क्यारी पर अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • दूरी1–1.2 मीटर चौड़ी उठी क्यारियों पर 30×30 सेमी, काली प्लास्टिक मल्च से होकर
  • उर्वरकक्यारी-तैयारी पर गोबर-खाद व आधारीय P व K; नाइट्रोजन ~3 हफ़्ते व फूल पर बाँटी, पूरी पोटाश फूल पर (पूरी समय-सारणी को फसल-गाइड देखें)

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
जैविक पदार्थ से भरपूर अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट, pH 5.7–6.5

उपज व अवधि

पकने की अवधि

~150–170 दिन

अपेक्षित उपज

अच्छी, मध्यम-से-ऊँची

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • ख़ासकर हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड पहाड़ी खेती में एक बहुत लंबा, सिद्ध ट्रैक-रिकॉर्ड, जहाँ किसान व नर्सरियाँ इसकी ज़रूरतें अच्छी तरह जानतीं।
  • ठंडी, छोटे-दिन पहाड़ी दशाओं तले भरोसेमंद, भारी फूल जिसके लिए यह विकसित हुई।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कोई ICAR-विकसित भारतीय रिलीज़ नहीं — अब लगभग 45 साल पुरानी, व कुछ इलाक़ों में कैमारोसा या विंटर डॉन जैसी नई किस्में इससे ज़्यादा उपज दे सकतीं।
  • स्लेटी फफूँद, रेड स्टील या एन्थ्रेक्नोज़ के प्रति कोई विशेष दर्ज प्रतिरोध नहीं; मानक उठी-क्यारी, ड्रिप-व-मल्च प्रबंधन लागू होता।

उपयुक्त क्षेत्र

एक आयातित अमेरिकी किस्म, कोई ICAR रिलीज़ नहीं, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड की पहाड़ियों में लंबे समय से उगाई जाती व अब भी वहाँ व उत्तरी मैदानों में आम है।

  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • पंजाब
  • हरियाणा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चांडलर एक पुरानी किस्म होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में अब भी क्यों उगाई जाती?

ख़ासकर पहाड़ियों में इसका एक बहुत लंबा, सिद्ध ट्रैक-रिकॉर्ड है — इसका छोटे-दिन प्रजनन ठंडी पहाड़ी सर्दी को अच्छी तरह सूट करता, व स्थानीय किसान व नर्सरियाँ पूरी तरह परिचित हैं कि यह वहाँ कैसे फूलती व फलती, भले नई किस्में भी इसके साथ लगाई जाती हों।

स्रोत: Strawberry Breeding Program Backgrounder: A Historical Timeline — UC Davis, US Plant Patent PP5262 — Strawberry plant 'Chandler'. संपादकीय नीति.