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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
स्ट्रॉबेरीरबीरनर पौधा (टिशू-कल्चर / प्रमाणित)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Nabila

इटली के कंसोर्ज़ियो इटालियानो विवाइस्ती (CIV) ने वेंटाना × अपनी एक छँटाई से भूमध्यसागरीय और कम ठंड वाली जगहों के लिए बनाई। महाबलेश्वर (2016) में इसने 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर) और सबसे ज़्यादा TSS, 12.46%, दिया। पेटेंट में इटली में 30 ग्राम का फल और 850–900 ग्राम प्रति पौधा दर्ज है।

सीज़नरबी
पकने की अवधिलगभग 150–170 दिन
अपेक्षित उपजमहाबलेश्वर, 2016 में 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर); इतालवी पेटेंट में 850–900 ग्राम प्रति पौधा।
उपयुक्त मिट्टीउठी हुई, काली प्लास्टिक मल्च वाली क्यारी पर अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
रनर पौधा (टिशू-कल्चर / प्रमाणित)
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
लगभग 150–170 दिन
अपेक्षित उपज
महाबलेश्वर, 2016 में 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर); इतालवी पेटेंट में 850–900 ग्राम प्रति पौधा।
उपयुक्त मिट्टी
जैविक पदार्थ से भरपूर, अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी, pH 5.7–6.5
रोग-प्रतिरोध
कोई खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं
जारी
इटली की कॉन्सोर्ज़ियो इटालियानो विवाइस्टी (CIV) ने बनाई; पहली बार 2004 में बढ़ाई गई

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

नबीला को इटली के कंसोर्ज़ियो इटालियानो विवाइस्ती (CIV) ने वेंटाना और अपनी एक छँटाई Q6Q8-26 के नियंत्रित क्रॉस से बनाया। इसे 2005 से 2010 तक यूरोप के भूमध्यसागरीय और कम ठंड वाले इलाक़ों में परखा गया। पेटेंट में बड़ा, शंकु आकार का फल बताया गया है, 58 मिमी लंबा और 47 मिमी चौड़ा, औसत वज़न 30 ग्राम, कड़ा गूदा और 7 °ब्रिक्स। मुख्य फसल के बाद यह दोबारा फल नहीं देती। बिक्री लायक़ पैदावार लगभग 850–900 ग्राम प्रति पौधा थी, और बतीपाल्या में तुड़ाई मार्च के पहले हफ़्ते से मई के आख़िरी हफ़्ते तक चली। भारत में सबसे अच्छा रिकॉर्ड 2016 का महाबलेश्वर परीक्षण है: 19.64 ग्राम के 37.28 फल, 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर), TSS 12.46%, चार किस्मों में सबसे ज़्यादा। ओडिशा या छत्तीसगढ़ में नबीला का कोई छपा परीक्षण हमें नहीं मिला।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

महाबलेश्वर के आसपास या ऐसे हालात में खेती करते हैं और मीठा फल चाहिए, तो नबीला चुनिए। 2016 के परीक्षण में चार किस्मों में इसका TSS सबसे ज़्यादा, 12.46%, रहा। इसने 735 ग्राम प्रति पौधा दिया, जबकि कैमारोसा ने 540 ग्राम। पेटेंट के 30 ग्राम फल के भरोसे इसे मत चुनिए: भारत में फल 19.64 ग्राम का रहा। प्रति पौधा ज़्यादा फल (39.20) और बिहार में परखी हुई रोपाई की खिड़की (15 अक्टूबर) चाहिए तो विंटर डॉन लीजिए। सीस्केप तभी लीजिए जब नर्सरी दे, क्योंकि उसने वहाँ 840 ग्राम प्रति पौधा दिया।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयमहाबलेश्वर के परीक्षण में पौधे नवंबर 2016 में उठी क्यारियों पर 30 × 30 सेमी पर, फ़र्टिगेशन के साथ लगाए गए।
  • दूरी30×30 सेमी, 1–1.2 मी चौड़ी उठी क्यारियों पर काली प्लास्टिक मल्च के आर-पार
  • उर्वरकक्यारी बनाते समय गोबर की खाद के साथ फॉस्फोरस और पोटाश की आधार खुराक। नाइट्रोजन लगभग 3 हफ़्ते पर और फूल आने पर बाँटकर दें, और पूरा पोटाश फूल आने पर (पूरी सारणी फसल गाइड में देखें)

कीट और रोग संबंधी बातें

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • महाबलेश्वर में चार किस्मों में सबसे ज़्यादा TSS: 12.46%, जबकि कैमारोसा का 9.80%।
  • वहाँ 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर), कैमारोसा (540 ग्राम) से काफ़ी आगे।
  • प्रजनक के पेटेंट में बड़ा, शंकु आकार का, कड़ा फल (इटली में औसत 30 ग्राम)।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • भारत में फल इतालवी आँकड़े से छोटा रहा: महाबलेश्वर में 19.64 ग्राम, जबकि पेटेंट में 30 ग्राम।
  • महाबलेश्वर में चार में सबसे देर तक तुड़ाई, रोपाई के 77.80 दिन तक।
  • हमें इसका सिर्फ़ एक भारतीय परीक्षण मिला। पहले छोटी क्यारी लगाइए। हर साल प्रमाणित रनर ख़रीदिए।

उपयुक्त क्षेत्र

इटली की लाई हुई किस्म है, ICAR की जारी की हुई नहीं। महाबलेश्वर में उगाई जाती है, और पुरानी अमेरिकी किस्मों के विकल्प के रूप में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के परीक्षणों में बढ़ती जा रही है।

  • महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़

इतालवी आँकड़े और भारतीय आँकड़े: भारतीय वाले इस्तेमाल कीजिए

नबीला के साथ इटली के प्रजनक का पेटेंट आता है। पेटेंट में 30 ग्राम का फल, 58 × 47 मिमी, और बतीपाल्या में मार्च से मई की तुड़ाई के साथ लगभग 850–900 ग्राम प्रति पौधा बताया गया है। भारत में नर्सरी के पर्चे अक्सर यही आँकड़े दोहराते हैं।

2016 का महाबलेश्वर परीक्षण बताता है कि यहाँ क्या उम्मीद रखें: 19.64 ग्राम का फल, 37.28 फल और 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर), और TSS 12.46%, चार किस्मों में सबसे ज़्यादा। यह अच्छा नतीजा है, पर फल इतालवी आकार का दो-तिहाई है, और तुड़ाई रोपाई के 77.80 दिन तक चली।

दाम और मज़दूरी का हिसाब भारतीय आँकड़ों पर बाँधिए। पहले साल छोटी क्यारी लगाइए, फल तौलिए, और जो नज़दीकी किस्म आप पहले से उगाते हैं उससे तुलना कीजिए।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह धावक (रनर) से बढ़ाई जाती है — वे फैलने वाली शाखाएँ, जो ज़मीन छूकर वहीं जड़ पकड़ लेती हैं। स्वस्थ मातृ पौधों से अपने पौधे तैयार किए जा सकते हैं, पर रनर के साथ विषाणु और क्राउन रॉट आगे चले जाते हैं, इसलिए ज़्यादातर किसान हर एक-दो साल में नए प्रमाणित रनर ख़रीदते हैं, अपने ही पौधों से लगातार चलाते नहीं रहते।

दूसरी किस्मों से तुलना

स्ट्रॉबेरी की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Camarosaपहाड़ों और ठंडे मैदानों के किसानों के लिए कड़ा, गहरा लाल फल, जो वहाँ लगाया जाता है जहाँ इसका रिकॉर्ड अच्छा है, यह मानकर नहीं कि वह सबसे ज़्यादा उपज देगालगभग 150–170 दिनमेघालय में 245.2 ग्राम प्रति पौधा, महाबलेश्वर में 540 ग्राम (21.65 टन प्रति हेक्टेयर)। नतीजे जगह के साथ बदलते हैं।महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली
Chandlerपहाड़ों और ठंडे मैदानों की परखी हुई स्ट्रॉबेरी, जो जल्दी फल के लिए नहीं बल्कि हिमाचल और असम के परीक्षणों में अपने रिकॉर्ड के लिए चुनी जाती हैलगभग 150–170 दिनहिमाचल के मध्यम पहाड़ों में 35.10 और 40.08 टन प्रति हेक्टेयर (2012, 2013); असम के पहाड़ों में 186.8 ग्राम प्रति पौधा।हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा
Festivalबिहार के मैदानों और पहाड़ों के लिए बड़े फल और ज़्यादा पैदावार वाली स्ट्रॉबेरी, जो फल के आकार और पैदावार के लिए चुनी जाती है, मिठास के लिए नहींलगभग 150–170 दिनसबौर, बिहार में 355.04 ग्राम प्रति पौधा; सुपौल, बिहार में 15.26 टन प्रति हेक्टेयर; हिमाचल के मध्यम पहाड़ों में 29.76 और 35.24 टन प्रति हेक्टेयर; असम के पहाड़ों में 169.0 ग्राम प्रति पौधा।महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़
Nabilaयही पेजमहाबलेश्वर जैसे हालात के लिए मीठा, बड़े फल वाला फल, जो TSS और प्रति पौधा वज़न के लिए चुना जाता है, और जिसका भारतीय परीक्षण-रिकॉर्ड पतला हैलगभग 150–170 दिनमहाबलेश्वर, 2016 में 735 ग्राम प्रति पौधा (29.42 टन प्रति हेक्टेयर); इतालवी पेटेंट में 850–900 ग्राम प्रति पौधा।महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़
Sweet Charlieमीठी, जल्दी फूलने वाली स्ट्रॉबेरी, जो स्वाद पर बेची जाती है, और जो TSS और फलों की गिनती के लिए लगाई जाती है, सबसे भारी क्यारी के लिए नहींलगभग 140–160 दिनअसम के पहाड़ों में 182.4 ग्राम प्रति पौधा (चैंडलर के बराबर); सबौर, बिहार में 22.48 फल प्रति पौधा। फल छोटे हैं।महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली
Winter Dawnज़ोरदार, जल्दी लगाने वाली किस्म: महाराष्ट्र और बिहार के लिए ज़्यादा फल देने वाली सर्दी की स्ट्रॉबेरी, जो प्रति पौधा फलों की संख्या और जल्दी शुरुआत के लिए चुनी जाती हैलगभग 150–170 दिनमहाबलेश्वर, 2016 में 820 ग्राम प्रति पौधा (32.97 टन प्रति हेक्टेयर), 21.00 ग्राम के 39.20 फलमहाराष्ट्र

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और स्ट्रॉबेरी का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

स्ट्रॉबेरी के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नबीला भारत में उगाई जाने वाली ज़्यादातर दूसरी किस्मों की तरह अमेरिकी किस्म है?

नहीं। नबीला को इटली में कॉन्सोर्ज़ियो इटालियानो विवाइस्टी (CIV) ने 'वेंटाना' और CIV के एक प्रजनन चयन के क्रॉस से बनाया, जिसे पहली बार 2004 में बढ़ाया गया। यह भारत में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली उन थोड़ी-सी स्ट्रॉबेरी किस्मों में है जिनका मूल अमेरिकी की जगह यूरोपीय है। इसे खास तौर पर भूमध्य सागर जैसे और कम ठंड वाले इलाकों के लिए चुना गया।

नबीला कितनी मीठी है?

महाबलेश्वर में 2016 में नबीला का TSS चार किस्मों में सबसे ज़्यादा, 12.46%, था, जबकि विंटर डॉन का 11.10%, सीस्केप का 10.44% और कैमारोसा का 9.80%। प्रजनक का पेटेंट इटली में 7 °ब्रिक्स देता है, यानी आँकड़ा जगह, मौसम और पकने पर निर्भर है। सबसे मीठे फल के लिए पूरे रंग वाले फल तोड़िए।

क्या नबीला अमेरिकी किस्म है?

नहीं। नबीला को इटली में कंसोर्ज़ियो इटालियानो विवाइस्ती (CIV) ने वेंटाना × अपनी छँटाई Q6Q8-26 से बनाया और यूरोप के भूमध्यसागरीय और कम ठंड वाले इलाक़ों में परखा। कैमारोसा और चैंडलर कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय की हैं, और फ़ेस्टिवल, स्वीट चार्ली और विंटर डॉन फ़्लोरिडा विश्वविद्यालय की। पेटेंट नबीला को जल्दी वाली और मुख्य फसल के बाद दोबारा फल न देने वाली बताता है।

भारत में नबीला का फल कितना बड़ा होता है?

महाबलेश्वर में फल का वज़न 19.64 ग्राम था, सीस्केप (24.40 ग्राम) और विंटर डॉन (21.00 ग्राम) से पीछे, पर कैमारोसा (17.00 ग्राम) से आगे। इतालवी पेटेंट औसत 30 ग्राम और 58 × 47 मिमी देता है। इतालवी आकार की उम्मीद मत रखिए। दाम का हिसाब भारतीय आँकड़े पर बाँधिए।

क्या नबीला को ओडिशा या छत्तीसगढ़ में परखा गया है?

किसी भी राज्य में नबीला का कोई छपा परीक्षण हमें नहीं मिला। हमें मिला भारतीय परीक्षण महाबलेश्वर का (2016) है। बिहार के परीक्षणों में फ़ेस्टिवल, स्वीट चार्ली और विंटर डॉन परखी गईं। पूर्वी भारत में खेती करते हैं तो नबीला की एक छोटी क्यारी उस किस्म के पास लगाइए जिसका वहाँ रिकॉर्ड है और दोनों तौलिए।

स्रोत: US Patent US20120210476P1 — Strawberry plant named 'NABILA', The Rania and Nabila varieties — Mazzoni Group, Performance of strawberry cultivars under Mahabaleshwar conditions — J. Pharmacognosy & Phytochemistry 7(4), 2018. संपादकीय नीति.