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हल्दीखरीफ़रोपण सामग्रीअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

IISR Prathibha

असाधारण रूप से उच्च करक्यूमिन और अच्छी कंद-सड़न सहनशीलता के लिए सराही गई उच्च-उपज IISR किस्म। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि225–240 दिन
अपेक्षित उपज300+ क्विंटल/हेक्टेयर (ताज़ा)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
हल्दी
प्रकार
रोपण सामग्री
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
225–240 दिन
अपेक्षित उपज
300+ क्विंटल/हेक्टेयर (ताज़ा)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट

इस किस्म के बारे में

IISR Prathibha को भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR), कोझिकोड, केरल ने खुले-परागित सच्चे-बीज संतति चयन विधि से विकसित किया — हल्दी में यह प्रजनन विधि बहुत कम इस्तेमाल होती है। IISR के हल्दी प्रजनक डॉ बी शशिकुमार ने बताया है कि Prathibha और इसकी सहोदर किस्म Prabha अब तक दुनिया में सच्चे-अंकुर चयन से विकसित एकमात्र हल्दी किस्में हैं, यही बात इस किस्म को केवल उपज-आंकड़ों से आगे ख़ास बनाती है। IISR केरल में स्थित है, फिर भी Prathibha राज्य से बाहर भी काफ़ी उगाई गई है: विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश के एक दर्ज मामले में एक किसान ने 2004 में इसे प्रायोगिक तौर पर लगाना शुरू किया और 2010-11 तक 2.75 एकड़ से लगभग 43 टन ताज़ा कंद प्राप्त किया — यानी लगभग 386 क्विंटल/हेक्टेयर, जो इस पेज की मौजूदा "300+ क्विंटल/हेक्टेयर" रेटिंग का खंडन नहीं बल्कि उसकी पुष्टि करता है, बल्कि उससे आगे भी जाता है। वही स्रोत निज़ामाबाद, आदिलाबाद और रंगारेड्डी को भी आंध्र प्रदेश के अन्य ज़िले बताता है जहाँ यह किस्म उगाई गई है, केरल के मूल आधार के साथ, और कंद-सड़न के प्रति उल्लेखनीय प्रतिरोध की पुष्टि भी करता है — जो इस पेज के मौजूदा रोग-प्रतिरोध विवरण से मेल खाता है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररोपण सामग्री
    अवधि225–240 दिन
    उपज क्षमता300+ क्विंटल/हेक्टेयर (ताज़ा)
    रोग-प्रतिरोधकंद सड़न और पत्ती ब्लॉच सहनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

225–240 दिन

अपेक्षित उपज

300+ क्विंटल/हेक्टेयर (ताज़ा)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • IISR Prathibha की आंध्र प्रदेश (विजयवाड़ा, निज़ामाबाद, आदिलाबाद, रंगारेड्डी ज़िले) में केरल के साथ-साथ सफल खेती दर्ज है — इस पेज में अभी states में केवल केरल है; आंध्र प्रदेश को उचित रूप से जोड़ा जा सकता है।
  • आंध्र प्रदेश के किसान-मामले की उपज (~386 क्विंटल/हेक्टेयर) इस पेज के "300+ क्विंटल/हेक्टेयर" आंकड़े का खंडन नहीं बल्कि उसकी पुष्टि करती है — यह एक सकारात्मक पुष्टि है, कोई विरोधाभास नहीं।
  • इस किस्म के लिए जाँचे गए स्रोतों में करक्यूमिन-मात्रा का आंकड़ा, औपचारिक जारी-वर्ष, या पितृ रेखा का विवरण नहीं मिला; इन्हें गढ़ने के बजाय यहाँ अनकहा छोड़ा गया है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • केरल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IISR Prathibha किसने विकसित की?

भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR), कोझिकोड, केरल ने, खुले-परागित सच्चे-बीज संतति चयन विधि से।

Prathibha की प्रजनन विधि में क्या असामान्य है?

इसे क्लोनल चयन के बजाय सच्चे-अंकुर चयन से विकसित किया गया — IISR प्रजनकों के अनुसार Prathibha और इसकी सहोदर किस्म Prabha इस तरह विकसित दुनिया की एकमात्र हल्दी किस्में हैं।

क्या IISR Prathibha केरल के बाहर भी उगाई जाती है?

हाँ — आंध्र प्रदेश में इसकी खेती दर्ज है, जिसमें विजयवाड़ा, निज़ामाबाद, आदिलाबाद और रंगारेड्डी ज़िले शामिल हैं, केवल केरल का मूल आधार ही नहीं।

खेत में IISR Prathibha ने कितनी उपज दी?

आंध्र प्रदेश के एक दर्ज किसान ने 2010-11 में 2.75 एकड़ से लगभग 43 टन ताज़ा कंद प्राप्त किया — यानी लगभग 386 क्विंटल/हेक्टेयर, जो इस पेज की 300+ क्विंटल/हेक्टेयर रेटिंग से भी अधिक है।

क्या IISR Prathibha कंद-सड़न के प्रति प्रतिरोधी है?

हाँ — स्रोत कंद-सड़न के प्रति उल्लेखनीय प्रतिरोध बताते हैं, जो स्थानीय हल्दी किस्मों के लिए एक बड़ी समस्या है, और यह इस पेज की मौजूदा रोग-प्रतिरोध रेटिंग से मेल खाता है।

स्रोत: IISR Prathibha turmeric variety — ICAR. संपादकीय नीति.