Parbat (JWSP-06)
जम्मू क्षेत्र की पहाड़ियों के लिए SKUAST-जम्मू की 2022 की किस्म, रिलीज़-सूची में प्रति पेड़ 90 किलो अखरोट और 53.28% गिरी।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अखरोट
- प्रकार
- कलमी पौध
- सीज़न
- सभी सीज़न
- फल कब से
- कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में
- अपेक्षित उपज
- SKUAST-जम्मू की रिलीज़-सूची में प्रति पेड़ 90 किलो अखरोट और 53.28% गिरी; पेड़ की उम्र नहीं बताई गई
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छी निकासी वाली दोमट मिट्टी, pH लगभग 6.0–7.5। पानी भरी या भारी ज़मीन बिल्कुल नहीं सहता
- रोग-प्रतिरोध
- पर्बत के लिए कोई रोग-सहनशीलता पक्की नहीं (उसी सूची में एंथ्रेक्नोज़-सहनशील प्रविष्टि SJPW-1 है)
- जारी
- SKUAST-जम्मू — 2022 में जारी
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पर्बत (JWSP-06) अखरोट की वह किस्म है जिसे SKUAST-जम्मू ने 2022 में जारी किया। रिलीज़-सूची इसके स्रोत के रूप में डॉ. प्रशांत बख़्शी और ACHR उधेवाला केंद्र का नाम देती है। वह प्रति पेड़ 90 किलो अखरोट और 53.28% गिरी बताती है। पर हमारे पढ़े हिस्से में पेड़ की उम्र, दूरी या यह नहीं लिखा कि अखरोट ताज़े थे या सूखे। इसलिए 90 किलो को सबसे अच्छी हालत का आँकड़ा मानिए। 2023 के एक शोधपत्र ने पर्बत की तुलना उत्तर-पश्चिमी हिमालय के जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के स्थानीय चयनों से की; हम उसका सिर्फ़ सार पढ़ सके। वही रिलीज़-सूची एंथ्रेक्नोज़ सहने और जल्दी पकने की बात पर्बत के आगे नहीं, एक दूसरी प्रविष्टि SJPW-1 के आगे लिखती है। इसलिए पर्बत के लिए रोग-सहनशीलता या पकने का कोई दावा नहीं किया गया है। कलमी पौधा होने से यह बीज वाले पौधे से जल्दी फल देता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
अगर आप जम्मू क्षेत्र की पहाड़ियों में खेती करते हैं और कश्मीर या विदेशी किस्म की जगह SKUAST-जम्मू की किस्म चाहते हैं तो पर्बत (JWSP-06) चुनिए। SKUAST-जम्मू की 2022 की रिलीज़-सूची 90 किलो अखरोट प्रति पेड़ और 53.28% गिरी बताती है। पर हमारे पढ़े हिस्से में पेड़ की उम्र या दूरी नहीं है। इसलिए 90 किलो को सबसे अच्छी हालत का आँकड़ा मानिए। पर्बत को एंथ्रेक्नोज़ सहने वाला या देर से पकने वाला बताने वाला कुछ हमें नहीं मिला; सूची ये गुण किसी दूसरी प्रविष्टि, SJPW-1, के आगे लिखती है। पौधों और पूरे रिलीज़ नोट के लिए SKUAST-जम्मू से पूछिए।
बुवाई और खेती
- दूरीपहाड़ी बाग़ों की पारंपरिक रोपाई में 8 × 8 मी। जगह के हिसाब से दूरी तय करते समय ढलान और सीढ़ीदार खेत का ध्यान रखें
- उर्वरकछोटे पेड़ को संतुलित NPK खुराक दें। फल देने लगें तो खुराक बढ़ाएँ और बसंत की बढ़त से पहले और तुड़ाई के बाद बाँटकर दें (पूरी सारणी फसल गाइड में देखें)
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
मुख्य कीट
- अखरोट का माहू
- कोडलिंग मॉथ
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- SKUAST-जम्मू की किस्म जिसकी उपज (90 किलो प्रति पेड़) और गिरी का हिस्सा (53.28%) छपा है, हालाँकि पेड़ की उम्र नहीं बताई गई।
- इसे जम्मू क्षेत्र के ACHR उधेवाला में बनाया गया, इसलिए यह वहाँ के हालात से आई है, कश्मीर घाटी या विदेशी माल से नहीं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- पर्बत के लिए एंथ्रेक्नोज़ या झुलसा की कोई सहनशीलता पक्की नहीं हुई। किसी भी अखरोट की तरह अखरोट झुलसा के लिए बचाव के तांबे वाले छिड़काव कीजिए।
- यह 2022 की किस्म है, इसलिए लंबे समय के बाग़ी नतीजे और पौधों की उपलब्धता अभी बन रही है। रिलीज़ नोट और पौधों के लिए SKUAST-जम्मू से पूछिए।
उपयुक्त क्षेत्र
SKUAST-जम्मू की जारी किस्म, जम्मू क्षेत्र की पहाड़ियों के लिए। दूसरे इलाक़ों के लिए हमें कोई सिफ़ारिश नहीं मिली।
- जम्मू और कश्मीर
रिलीज़-सूची पर्बत के बारे में क्या कहती है, और क्या नहीं
SKUAST-जम्मू की 2022 की जारी फ़सल-किस्मों की सूची में JWSP-06 अखरोट के रूप में है, जिसका स्रोत डॉ. प्रशांत बख़्शी और ACHR उधेवाला केंद्र बताया गया है, प्रति पेड़ 90 किलो अखरोट और 53.28% गिरी। यही बातें हम पक्की कर सके। सूची के हमारे पढ़े हिस्से में पेड़ की उम्र, दूरी, अखरोट ताज़े थे या सूखे, या यह किन ज़िलों के लिए है, यह नहीं दिया है।
पर्बत को कभी-कभी जो दो गुण दिए जाते हैं, एंथ्रेक्नोज़ से बचाव और देर से पकना, वे उस सूची में पर्बत के आगे नहीं हैं। 'एंथ्रेक्नोज़ के प्रति प्रतिरोधी' SJPW-1 के आगे लिखा है, जो अखरोट की दूसरी प्रविष्टि है। चेक के 127 दिन के मुक़ाबले 90 दिन का पकने का आँकड़ा भी SJPW-1 का है, और वह जल्दी पकने वाला प्रकार बताता है। पर्बत के लिए इनमें से कोई दावा नहीं किया गया है। ख़रीदने से पहले SKUAST-जम्मू से पूरा रिलीज़ नोट माँगिए और तीन बातें लिखित में पूछिए। पहला, 90 किलो के आँकड़े के पीछे पेड़ की उम्र और दूरी। दूसरा, किन ज़िलों में परीक्षण हुआ। तीसरा, इस मौसम में कितने बडिंग वाले पौधे उपलब्ध हैं।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
अखरोट की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| CITH Walnut-6 | वे किसान जो बड़े अखरोट वाला ICAR-CITH का चयन चाहते हैं और पहले उसकी रिलीज़ की स्थिति और पौधों की उपलब्धता पक्की करेंगे | कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में | प्रति पेड़ उपज का कोई आँकड़ा नहीं मिला; बड़ा अखरोट (लगभग 24 ग्राम) | जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड |
| CITH Walnut-8 | कश्मीर घाटी के वे किसान जो छाँटी हुई गिरी के बाज़ार को निशाना बनाते हैं, जहाँ आकार और हल्का रंग दाम तय करते हैं | कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में | अच्छी, जिसमें बड़े अखरोट और बड़ी गिरी पर ज़ोर है | जम्मू और कश्मीर |
| Eureka | हिमाचल प्रदेश के वे किसान जो पास के बाग़ों में स्वस्थ यूरेका के पेड़ देख सकते हैं और स्थानीय रिकॉर्ड से मेल रखना चाहते हैं | 4–5 साल में पहला फलन (कलमी) | हिमाचल प्रदेश दशाओं तले अच्छी | हिमाचल प्रदेश |
| Franquette | हिमाचल प्रदेश के पाले वाले ऊँचे बाग़, जहाँ देर से पत्ते आना फ़सल को बचाता है | कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में; पत्ते और फूल देर से आते हैं | अच्छी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परखी हुई। यहाँ भारत के हिसाब से उपज का पक्का आँकड़ा नहीं है | हिमाचल प्रदेश |
| Hamdan | कश्मीर घाटी के वे किसान जो गिरी का अच्छा हिस्सा देने वाला, आज़माया हुआ स्थानीय कलमी अखरोट चाहते हैं | कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में | ऊँची। SKUAST-कश्मीर के अपने आँकड़ों के अनुसार पूरी उम्र के पेड़ से लगभग 5 किग्रा सूखा छिलके वाला अखरोट | जम्मू और कश्मीर |
| Parbat (JWSP-06)यही पेज | जम्मू क्षेत्र की पहाड़ियों के वे किसान जो छपी उपज और गिरी के आँकड़े वाली SKUAST-जम्मू की नई किस्म चाहते हैं | कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में | SKUAST-जम्मू की रिलीज़-सूची में प्रति पेड़ 90 किलो अखरोट और 53.28% गिरी; पेड़ की उम्र नहीं बताई गई | जम्मू और कश्मीर |
| Sulaiman | कश्मीर घाटी के वे किसान जिन्हें गिरी के हिस्से के आख़िरी अंक से ज़्यादा छिलके वाले अखरोट की उपज की परवाह है | कलमी पौध में पहला फल 4–5 साल में | ऊँची। SKUAST-कश्मीर के अपने आँकड़ों के अनुसार पूरी उम्र के पेड़ से लगभग 5–6 किग्रा सूखा छिलके वाला अखरोट | जम्मू और कश्मीर |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और अखरोट का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके अखरोट के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर अखरोट किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरअखरोट की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में अखरोट का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
अखरोट के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पर्बत का एंथ्रेक्नोज़ से बचाव उसे अखरोट झुलसा से भी बचाता है?
नहीं। एंथ्रेक्नोज़ (अखरोट की पत्ती का धब्बा) फफूँद रोग है, जबकि अखरोट झुलसा पूरी तरह अलग जीव से होने वाला बैक्टीरिया का रोग है। एक के लिए बनाया बचाव दूसरे पर लागू नहीं होता। इसलिए पर्बत की रोपाई को भी किसी दूसरी किस्म की तरह अखरोट झुलसा के लिए वही बचाव का तांबे वाला छिड़काव कार्यक्रम चाहिए।
क्या पर्बत एंथ्रेक्नोज़ सह लेती है?
हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते। हमें मिली SKUAST-जम्मू की 2022 की सूची में 'एंथ्रेक्नोज़ के प्रति प्रतिरोधी' SJPW-1 के आगे लिखा है, जो दूसरा अखरोट चयन है, JWSP-06 के आगे नहीं। 2023 के एक शोधपत्र ने पर्बत की तुलना स्थानीय चयनों से की, पर हम उसका सिर्फ़ सार पढ़ सके। जब तक SKUAST-जम्मू कुछ और न कहे, पर्बत को किसी भी अखरोट की तरह सँभालिए। एंथ्रेक्नोज़ फफूँद से पत्ती का धब्बा है और अखरोट झुलसा बैक्टीरिया का रोग, इसलिए छिड़काव भी अलग हैं।
क्या पर्बत देर से पकने वाली किस्म है जो बसंत के पाले से बच जाती है?
हम ऐसा नहीं कह सकते। हमारी पढ़ी रिलीज़-सूची में पर्बत की पकने की कोई तारीख़ नहीं है। उसमें पकने के जो एकमात्र आँकड़े हैं, चेक के 127 दिन के मुक़ाबले 90 दिन (27 दिन पहले), वे SJPW-1 के हैं और उसे जल्दी पकने वाली बताते हैं। इसलिए देर से पकने से पाले में बचाव का फ़ायदा साबित नहीं है। आपकी जगह पर देर से पाला पड़ता है तो रोपने से पहले केंद्र से पर्बत के कली फूटने और फूल आने की तारीख़ें पूछिए।
क्या पर्बत के एक पेड़ से 90 किलो अखरोट की योजना बना सकता हूँ?
नहीं। सूची प्रति पेड़ 90 किलो अखरोट और 53.28% गिरी बताती है, पर हमारे पढ़े हिस्से में पेड़ की उम्र, दूरी या यह नहीं लिखा कि अखरोट ताज़े थे या सूखे। तुलना के लिए, हमदान और सुलेमान के SKUAST-कश्मीर के अपने आँकड़े पूरे बड़े पेड़ से लगभग 5 से 6 किलो सूखे छिलके वाले अखरोट हैं। वे अलग संस्था और अलग आधार से हैं, इसलिए दोनों बराबर की तुलना नहीं हैं। आमदनी की योजना से पहले केंद्र से बाग़-स्तर के आँकड़े माँगिए।
पर्बत किसने बनाई और पौधों के लिए कहाँ पूछूँ?
SKUAST-जम्मू की सूची इसके स्रोत के रूप में डॉ. प्रशांत बख़्शी और ACHR उधेवाला केंद्र का नाम देती है। हमें कोई सार्वजनिक स्टॉक-सूची, भाव या ऑर्डर का रास्ता नहीं मिला। केंद्र या SKUAST-जम्मू के बाग़वानी विभाग को लिखिए, पूछिए कि इस मौसम में बडिंग वाले पौधे मिलेंगे या नहीं, और रिलीज़ नोट माँगिए ताकि परीक्षण के आँकड़े आप ख़ुद देख सकें।
क्या पर्बत कश्मीर घाटी या हिमाचल प्रदेश में लगा सकता हूँ?
इसे SKUAST-जम्मू ने जारी किया और दूसरे इलाक़ों के लिए हमें कोई सिफ़ारिश नहीं मिली। कश्मीर घाटी के लिए SKUAST-कश्मीर की हमदान और सुलेमान का रिकॉर्ड लंबा है; हिमाचल के लिए फ्रांकेट और यूरेका का। जो भी चुनें, नौणी का लेख 2,500 मीटर से ऊपर व्यावसायिक अखरोट के ख़िलाफ़ चेताता है, क्योंकि बसंत का देर का पाला फ़सल बिगाड़ सकता है।
स्रोत: Comparative morpho-molecular characterization of elite walnut variety Parbat (JWSP-06) with local selections of north-western Himalayan region of J&K — ScienceDirect, Varieties released by SKUAST-Jammu, list of 22 July 2022 (JWSP-06 and SJPW-1 entries; seen as a search extract, the file did not open), Dhiman, Rohiwala and Dev, Chip budding techniques for walnut — Indian Farming 75(6), June 2025 (Dr YS Parmar University, Nauni). संपादकीय नीति.
