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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
शिमला मिर्चरबीखुली-परागितअपडेट किया गया 6 सितंबर 2026

Arka Gaurav

एक ICAR-IIHR चयन, हरी पर्णसमूह वाला अनिश्चित पौधा, मोटी-मांस 3-4 पालि हरे फल जो नारंगी-पीले पकतें, और उल्लेखनीय रूप से बैक्टीरियल विल्ट सहनशील — विल्ट इतिहास वाली ज़मीन पर एक असली फ़ायदा।

सीज़नरबी
पकने की अवधि~150 दिन पूरा चक्र
अपेक्षित उपज~16 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
~150 दिन पूरा चक्र
बीज दर
नर्सरी बुवाई को 400–500 ग्राम/हेक्टेयर (लगभग 160–200 ग्राम/एकड़)
अपेक्षित उपज
~16 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
ICAR-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु द्वारा जारी

इस किस्म के बारे में

अर्का गौरव ICAR-IIHR, बेंगलुरु का एक शिमला मिर्च चयन है, अमेरिकी किस्म गोल्डन डालवंडर से विकसित। हरी-पर्णसमूह वाला अनिश्चित पौधा मोटी-मांस, तीन-से-चार पालि, हरे फल औसत 130–150 ग्राम रखता जो सीधा उठता व नारंगी-पीला पकता है। इसका सबसे क़ीमती गुण बैक्टीरियल विल्ट (Ralstonia solanacearum) की एक सच्ची सहनशीलता है, जो इसे उन खेतों को एक मज़बूत चुनाव बनाता जिनका उस रोग का इतिहास हो जहाँ ज़्यादातर अन्य किस्में जूझतीं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि~150 दिन पूरा चक्र
    उपज क्षमता~16 टन/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधबैक्टीरियल विल्ट सहनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयनर्सरी सितंबर में बोई; दक्षिणी मैदानों में अक्टूबर–नवंबर रोपी जाती
  • बीज दरनर्सरी बुवाई को 400–500 ग्राम/हेक्टेयर (लगभग 160–200 ग्राम/एकड़)
  • दूरीकतारों के बीच 60–75 सेमी, पौधों के बीच 45–60 सेमी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

~150 दिन पूरा चक्र

अपेक्षित उपज

~16 टन/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • बैक्टीरियल विल्ट की सच्ची सहनशीलता — संक्रमित ज़मीन पर क़ीमती
  • विशिष्ट नारंगी-पीला पका रंग
  • सार्वजनिक-क्षेत्र किस्म, दक्षिण में व्यापक अनुशंसित

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आधुनिक निजी F1 हाइब्रिडों से कुछ कम उपज

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश