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त्रिपुराअनुदानसक्रियअपडेट 26 सितंबर 2026

मुख्यमंत्री रबर मिशन

₹16,000–₹20,000 प्रति हेक्टेयर रोपण अनुदान, ATMA से मुफ़्त पौधे, और नई प्रसंस्करण इकाइयाँ — त्रिपुरा के जनजातीय इलाकों में रबर की खेती का विस्तार।

संचालक: जनजातीय कल्याण विभाग, त्रिपुरा सरकार

अनुदान (≤5 हे.)
₹20,000 प्रति हेक्टेयर
अनुदान (5–20 हे.)
₹16,000 प्रति हेक्टेयर
लाभान्वित परिवार
56,400 (पहले 4 साल)
रोपित क्षेत्र
46,086 हेक्टेयर

परिचय

त्रिपुरा केरल के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक रबर उत्पादक है। रबर राज्य की जनजातीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की फसल है — यह त्रिपुरा की पहाड़ियों पर अच्छी उगती है, एक बार लग जाने के बाद ज़्यादा लागत नहीं माँगती, और दो-तीन दशक तक नियमित नक़दी आमदनी देती है। फिर भी काफ़ी उपयुक्त ज़मीन पर रोपण नहीं हुआ था, और पुराने बागानों को दोबारा लगाने की ज़रूरत थी।

मुख्यमंत्री रबर मिशन 2021-22 में जनजातीय कल्याण विभाग के तहत शुरू हुआ। पहले चार सालों में मिशन ने 46,086 हेक्टेयर में नया रबर लगवाया और 56,400 परिवारों तक पहुँचा। यह प्रति हेक्टेयर रोपण अनुदान देता है — 5 हेक्टेयर तक की जोत पर ₹20,000, 5 से 20 हेक्टेयर पर ₹16,000 — और ऑटोमेटेड टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ATMA) गुणवत्ता-प्रमाणित पौधे मुफ़्त देता है। जनजातीय कल्याण विभाग अतिरिक्त मदद भी करता है: शुरुआती सालों में जब पौधे नाज़ुक होते हैं, तब बाड़ का सामान और खाद दी जाती है।

रबर का पकने का समय लंबा है — पहली टैपिंग में करीब छह-सात साल लगते हैं — इसलिए मिशन एक धैर्य वाला बहु-वर्षीय निवेश है। राज्य सरकार मूल समय-सीमा से पाँच साल के विस्तार पर विचार कर रही है। बागान के साथ-साथ दस नई रबर प्रसंस्करण इकाइयाँ भी बनाने की योजना है ताकि कच्ची शीट केरल भेजने के बजाय राज्य में ही मूल्य जुड़े। त्रिपुरा के जनजातीय इलाकों के किसानों के लिए यह मिशन एक बेकार पड़ी पहाड़ी को पच्चीस साल की आमदनी का ज़रिया बना देता है।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • 5 हेक्टेयर तक की जोत पर ₹20,000/हे., 5–20 हेक्टेयर पर ₹16,000/हे. रोपण अनुदान।
  • ATMA से गुणवत्ता-प्रमाणित रबर के पौधे मुफ़्त।
  • जनजातीय कल्याण विभाग से अतिरिक्त मदद: शुरुआती नाज़ुक सालों में बाड़ का सामान और खाद।
  • दस नई रबर प्रसंस्करण इकाइयाँ — स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन और रोज़गार।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • त्रिपुरा का निवासी
  • मुख्य रूप से जनजातीय (ST) किसान, हालाँकि उपयुक्त ज़मीन वाले ग़ैर-जनजातीय किसान भी ब्लॉक स्तरीय आवंटन के अनुसार आवेदन कर सकते हैं
  • रबर बागान के लिए उपयुक्त ज़मीन — पहाड़ी या उतार-चढ़ाव वाली ज़मीन जहाँ पर्याप्त बारिश हो
  • पहली टैपिंग से पहले 6–7 साल के इंतज़ार के लिए तैयार
  • मिशन के तहत 20 हेक्टेयर तक की जोत

शामिल नहीं

  • रबर के लिए अनुपयुक्त ज़मीन (जलजमाव वाले मैदान, भारी चिकनी मिट्टी, पाला पड़ने वाली ऊँचाई)
  • इस मिशन की अनुदान संरचना के तहत 20 हेक्टेयर से ज़्यादा की जोत

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड
  • भूमि रिकॉर्ड (पट्टा / कब्ज़ा प्रमाणपत्र)
  • ST प्रमाणपत्र (जनजातीय आवेदकों के लिए)
  • बैंक पासबुक
  • पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

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    ब्लॉक कल्याण अधिकारी से संपर्क करें

    मिशन जनजातीय कल्याण विभाग के ब्लॉक कल्याण अधिकारियों के ज़रिए चलता है। ब्लॉक कार्यालय जाकर रुचि ज़ाहिर करें और आवेदन पत्र लें।

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    भूमि रिकॉर्ड के साथ आवेदन जमा करें

    आवेदन भरें और ज़मीन के कागज़ात लगाएँ जिनमें उपयुक्त ज़मीन का मालिकाना या कब्ज़ा दिखे। ब्लॉक अधिकारी ज़मीन की उपयुक्तता जाँचता है।

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    पौधे और रोपण सहायता लें

    चयन के बाद ATMA से आपूर्ति किए गए पौधे मुफ़्त मिलते हैं। विभाग बाड़ और खाद का भी इंतज़ाम करता है। रोपण तकनीकी मार्गदर्शन में होता है।

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    रोपण अनुदान का वितरण

    प्रति हेक्टेयर रोपण अनुदान (जोत के हिसाब से ₹20,000 या ₹16,000) रोपण की पुष्टि के बाद किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • पौधों की आपूर्ति में देरी, अनुदान वितरण या चयन विवाद के लिए पहले ब्लॉक कल्याण अधिकारी, फिर ज़िला कलेक्ट्रेट में ज़िला कल्याण अधिकारी से बात करें। आवेदन की रसीद और कोई भी प्राप्ति रखें।
  • विभाग से आगे, CPGRAMS पोर्टल — pgportal.gov.in — पर शिकायत दर्ज करें या त्रिपुरा मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क करें। राज्य में नागरिक शिकायतों के लिए CM हेल्पलाइन भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रबर बागान से कमाई शुरू होने में कितना समय लगता है?

रबर के पेड़ों को टैपिंग लायक होने में करीब छह-सात साल लगते हैं। उसके बाद एक अच्छी तरह से रखा बागान बीस से पच्चीस साल तक लैटेक्स देता है। इंतज़ार लंबा है, लेकिन कमाई का दौर भी उतना ही लंबा।

मुफ़्त पौधे कैसे मिलते हैं — क्या सीधे ATMA से संपर्क करना होगा?

नहीं। पौधे मिशन के ज़रिए आते हैं: ब्लॉक कल्याण अधिकारी से आवेदन मंज़ूर होने के बाद ATMA के पौधे आपको बिना किसी ख़र्च के पहुँचाए जाते हैं। आपको ATMA से अलग से संपर्क नहीं करना पड़ता।

पुराने बागान जिन्हें दोबारा लगाना है — उनके लिए भी मदद मिलेगी?

हाँ। मिशन खाली ज़मीन पर नया रोपण और पुराने, थके बागानों के पुनर्रोपण दोनों कवर करता है। अनुदान दोनों पर लागू होता है। अगर आपके मौजूदा पेड़ अपनी उत्पादक उम्र (आमतौर पर 25-30 साल) पार कर चुके हैं, तो पुनर्रोपण सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

क्या यह सिर्फ़ जनजातीय (ST) किसानों के लिए है?

मिशन जनजातीय कल्याण विभाग चलाता है और प्राथमिकता जनजातीय परिवारों की है। उपयुक्त ज़मीन वाले ग़ैर-जनजातीय किसान ब्लॉक स्तर पर आवंटन और उपलब्धता के अनुसार विचार किए जा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रम का मुख्य ध्यान जनजातीय आजीविका पर है।

प्रसंस्करण इकाइयाँ मेरा रबर ख़रीदेंगी?

मिशन के तहत बनने वाली दस नई प्रसंस्करण इकाइयाँ कच्ची रबर शीट और लैटेक्स की स्थानीय माँग पैदा करेंगी, जिससे किसानों को दूर के ख़रीदारों पर निर्भरता कम होगी। ख़रीद की व्यवस्था हर इकाई के संचालन मॉडल पर निर्भर करेगी, लेकिन मकसद त्रिपुरा के अंदर ही आपूर्ति श्रृंखला छोटी करना है।

क्या रबर की क़तारों के बीच दूसरी फसल उगा सकते हैं?

हाँ। शुरुआती चार-पाँच साल में जब तक रबर का छतरी-ढाँचा नहीं बना होता, पंक्तियों के बीच अनानास, अदरक या हल्दी जैसी छोटी अवधि की फसलें उगाना आम और सही तरीका है। इससे पेड़ बड़े होने तक आमदनी बनी रहती है।

तथ्य 26 सितंबर 2026 को twd.tripura.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.