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रोगMarasmius pulcherrima / M. equicrinusसमीक्षा 26 सितंबर 2026

थ्रेड ब्लाइट (धागा झुलसा)

मानसून में फफूँद के बारीक काले रेशमी धागे जायफल छत्र में फैलते, पत्तियाँ झुलसाते व गिराते हैं। हवा-संचार के लिए छँटाई व गीले मौसम में ताम्र छिड़काव मुख्य बचाव।

कारक
Marasmius pulcherrima / M. equicrinus
प्रसार
छत्र में काले रेशमी धागों (राइज़ोमॉर्फ) से
अनुकूल स्थिति
मानसूनी बारिश, घना बिना छाँटा छत्र
मुख्य बचाव
छँटाई, मलबा हटाना, ताम्र छिड़काव

परिचय

थ्रेड ब्लाइट Marasmius pulcherrima व M. equicrinus फफूँद से होती, जो छत्र में बारीक, गहरे, रेशमी धागों (राइज़ोमॉर्फ) के रूप में फैलती — शाखाओं के बीच तने काले धागे या घोड़े के बाल जैसे दिखते। ये धागे पत्तों व तनों को छूकर झुलसन करते — प्रभावित ऊतक मरता, पत्तियाँ सूखकर गिरती। गंभीर हमले में छत्र का बड़ा हिस्सा पत्ती-रहित हो सकता।

रोग मानसून महीनों में सबसे सक्रिय जब लगातार बारिश छत्र गीला रखती व नमी ऊँची। घने, बिना छाँटे पेड़ सबसे कमज़ोर क्योंकि धागे छत्र में शारीरिक संपर्क से फैलते। फफूँद सूखे मौसम में ज़मीन या छत्र में फँसे मृत पत्तों-टहनियों पर ज़िंदा रहती। प्रबंधन का केंद्र है छँटाई से छत्र खोलना, गिरा संक्रमित मलबा हटाकर जलाना, और गीले मौसम में निवारक ताम्र छिड़काव।

कैसे पहचानें

  • तनों, शाखाओं व पत्तों के नीचे बारीक, गहरे (काले या गहरे भूरे), रेशमी धागे दिखते — शाखाओं के बीच घोड़े के बाल या बारीक काली डोरी जैसे।
  • जहाँ भी धागे पत्ती छूते, ऊतक मरता: अनियमित भूरे-काले झुलसे धब्बे दिखते जो सूख जाते।
  • प्रभावित पत्तियाँ सूखकर गिरती, अक्सर धागों से जुड़ी — गंभीर मामलों में मृत पत्तों की लटकती चटाइयाँ बनती।
  • धागे छत्र के हिस्सों में ढीला, अनियमित जाल बना सकते।
  • गंभीर हमले में छत्र का बड़ा हिस्सा पत्ती-रहित, पेड़ कमज़ोर व अगले मौसम की उपज कम।

क्यों होता है

  • मैरास्मियस फफूँद राइज़ोमॉर्फ (धागे-जैसी संरचनाएँ) बनाती जो शाखा-से-शाखा, पत्ती-से-पत्ती शारीरिक संपर्क से छत्र में फैलती।
  • मानसून का लगातार गीला मौसम इन फफूँदों को सक्रिय बढ़ने की नमी देता।
  • घने, ओवरलैपिंग छत्र नमी फँसाते व धागों के फैलने के संपर्क-बिंदु देते।
  • ज़मीन या छत्र में फँसे मृत पत्ते-टहनियाँ सूखे मौसम में फफूँद को बनाए रखते।

कैसे प्रबंधित करें

  • मानसून से पहले ओवरलैपिंग शाखाएँ अच्छी तरह छाँटें — हवा-संचार सुधारें व फफूँद को फैलने के संपर्क कम करें। यह सबसे ज़रूरी ढाँचागत उपाय।
  • गिरे संक्रमित पत्ते व छत्र में फँसा मलबा जमा कर जलाएँ। इकट्ठा न होने दें।
  • मानसून में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.25% या 1% बोर्डो मिश्रण छिड़कें — TNAU गीले मौसम में वृक्ष-मसाला फ़सलों के लिए यही सलाह देता। मौजूदा सिफ़ारिश अपने KVK से पक्की करें।
  • भीड़ से बचें — सही दूरी (जायफल के लिए 8 × 8 मी) बनाएँ और बहुत पास उगे अनचाहे पेड़ हटाएँ।

सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें

हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।

विचार करने योग्य किस्में

नामी बीज किस्में जिनकी इस समस्या के प्रति प्रतिरोधकता या संवेदनशीलता उनके अपने किस्म पेज पर बताई गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या थ्रेड ब्लाइट सिर्फ़ जायफल को लगती है?

नहीं। मैरास्मियस प्रजातियों से थ्रेड ब्लाइट चाय, कोको, रबर व कई फल-पेड़ों सहित कई उष्णकटिबंधीय वृक्ष फ़सलों पर दर्ज। प्रबंधन का तरीक़ा — हवा-संचार के लिए छँटाई व मानसून में ताम्र छिड़काव — फ़सलों में समान।

क्या थ्रेड ब्लाइट के हमले के बाद पेड़ ठीक होगा?

हाँ, अगर हमला प्रबंधित हो। मानसून बाद नई बढ़वार शुरू होने पर पेड़ फिर पत्तीदार होगा। संक्रमण-स्रोत (मृत मलबा, ओवरलैपिंग शाखाएँ) हटाना व गीले मौसम में छिड़काव बार-बार हमला रोकता। गंभीर पत्ती-गिरावट अगले मौसम की उपज घटा सकती पर आम तौर पर परिपक्व जायफल पेड़ नहीं मारती।

लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.