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फसल बीमा क्लेम: नुकसान के बाद घंटे-दर-घंटे क्या करें

ओले, बाढ़ या बेमौसम बारिश से बीमित फसल खराब हुई? PMFBY क्लेम के कदम जानें: 72 घंटे में सूचना, सर्वे, भुगतान की समय-सीमा और शिकायत का तरीका।

Vaibhav Dhamaसंस्थापक, टेक्निकल किसान9 मिनट का पाठ
A waterlogged farm plot with shallow standing water between patches of grass and clods of mud

रात को ओलावृष्टि हुई और खड़ी फसल बिछ गई। सुबह पहला ख़याल यही आता है कि अब भरपाई कैसे होगी। दूसरा ख़याल यह होना चाहिए कि अभी तारीख़ और समय क्या है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में कई तरह के नुकसान में घड़ी उसी पल चालू हो जाती है जब नुकसान होता है।

इस गाइड में क्लेम उसी क्रम में समझाया गया है जिस क्रम में सब कुछ होता है: पहले यह पहचानें कि आपका नुकसान किस प्रकार का है, फिर पहले 72 घंटे, फिर बीमा कंपनी को क्या करना है, और आख़िर में गड़बड़ हो तो क्या करें। नियम योजना के संशोधित परिचालन दिशानिर्देश (अगस्त 2020 संस्करण, pmfby.gov.in) से लिए गए हैं। कौन-सी फसल, कौन-सी आपदा और कौन-सी तारीख़ लागू होगी, यह आपके राज्य की अधिसूचना तय करती है, इसलिए उसे भी देखें। नामांकन और प्रीमियम की जानकारी के लिए हमारा फसल बीमा योजना पेज देखें।

पहला सवाल: आपका नुकसान किस तरह का है?

PMFBY दो तरह के नुकसान को अलग-अलग ढंग से संभालती है। आगे की हर बात इसी पर टिकी है।

नुकसान का प्रकारउदाहरणक्या सूचना देना ज़रूरी है?आकलन कैसे होता है?
व्यापक (पूरे इलाके का)सूखा, लंबा सूखा दौर, पूरे इलाके में बाढ़, बड़े पैमाने पर कीट-रोगज़रूरी नहींपूरे बीमा-क्षेत्र की उपज के आँकड़े (फसल कटाई प्रयोग)
स्थानीय आपदाओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, बादल फटना, बिजली गिरने से आग — कुछ खेतों मेंहाँ, 72 घंटे मेंसर्वेयर आपके खेत पर आता है
कटाई के बाद का नुकसानकटी फसल खेत में सूखने के लिए पड़ी हो और चक्रवात, चक्रवाती बारिश, बेमौसम बारिश या ओले से खराब हो जाएहाँ, 72 घंटे मेंखेत-स्तर पर आकलन
बुवाई न हो पाना / मौसम के बीच की आपदाकम बारिश से बुवाई न हो पाना; बीच सीज़न में भारी सूखाज़िला समिति और राज्य सरकार संभालती हैअधिसूचित क्षेत्र के आधार पर

इनमें से कुछ कवर राज्य को खुद चालू करने पड़ते हैं। स्थानीय आपदा, कटाई-बाद नुकसान जैसे कवर "अतिरिक्त कवर" हैं और तभी मिलते हैं जब आपके राज्य ने आपकी फसल के लिए उन्हें अधिसूचित किया हो। अपनी पॉलिसी रसीद देखें या कृषि कार्यालय से पूछें।

अगर आपका नुकसान व्यापक है तो किसी को फ़ोन करना ज़रूरी नहीं। बस यह पक्का करें कि आपका प्रीमियम कटा है और नामांकन की जानकारी सही है, क्योंकि भुगतान इलाके की उपज के आँकड़ों से आएगा। अगर नुकसान स्थानीय या कटाई-बाद का है, तो आगे पढ़ें, क्योंकि अगले 72 घंटे सबसे ज़रूरी हैं।

पहले 72 घंटे: पहले सूचना दें, फिर सबूत जुटाएँ

और कुछ करने से पहले नुकसान की सूचना दें। दिशानिर्देशों में क्रॉप इंश्योरेंस ऐप और केंद्रीकृत टोल-फ्री नंबर (हेल्पलाइन 14447) को सूचना देने का पहला तरीका बताया गया है। आप बीमा कंपनी की अपनी टोल-फ्री लाइन, अपनी बैंक शाखा या स्थानीय कृषि विभाग को भी बता सकते हैं। बैंक या अधिकारी को बताने पर उन्हें आपकी सूचना 48 घंटे में बीमा कंपनी तक पहुँचानी होती है, लेकिन सिर्फ़ इसी के भरोसे न रहें। हो सके तो ऐप या हेल्पलाइन से सूचना दें, ताकि आपके नाम, समय और टिकट नंबर के साथ रिकॉर्ड बन जाए।

टिकट नंबर संभालकर रखें। हेल्पलाइन आपकी शिकायत एक अलग टिकट नंबर के साथ दर्ज करती है और SMS से भेजती है। समय पर सूचना देने का यही आपका मुख्य सबूत है।

सूचना में क्या-क्या बताना है। दिशानिर्देशों के अनुसार:

  • आपका नाम और मोबाइल नंबर
  • प्रभावित हर खेत का खसरा/सर्वे नंबर, बीमित फसल और प्रभावित क्षेत्रफल
  • पोर्टल से मिला आपका PMFBY आवेदन नंबर
  • ऋणी किसान: अपना KCC खाता नंबर। गैर-ऋणी किसान: नामांकन के समय बताया गया बचत खाता

अगर सारी जानकारी हाथ में नहीं है तो आधी भरी सूचना अभी दे दें। दिशानिर्देश आधा भरा फ़ॉर्म पहले भेजने और पूरी जानकारी वाला फ़ॉर्म नुकसान के 7 दिन के अंदर भेजने की छूट देते हैं।

फ़ोटो और नोट रखें। ऐप से लोकेशन के साथ फ़ोटो ली जा सकती है। फ़ोन से सूचना दें तब भी खेत के अलग-अलग कोनों से, खराब पौधों की पास से और खड़े पानी की तारीख़ वाली फ़ोटो खींच लें। बीमा कंपनी मौसम विभाग के आँकड़े, स्थानीय अख़बार की ख़बर और राजस्व या कृषि विभाग की रिपोर्ट से भी मिलान करती है, इसलिए उसी तूफ़ान की स्थानीय ख़बर की कटिंग काम आती है।

खेत अभी साफ़ न करें। सर्वेयर को नुकसान देखना होता है। जब तक सर्वे न हो जाए, खराब हिस्से में जुताई, दोबारा बुवाई या कटाई न करें, जब तक आगे और नुकसान का सचमुच ख़तरा न हो। कुछ करना ही पड़े तो पहले फ़ोटो खींच लें।

प्रीमियम पहले से कटा होना चाहिए। सिर्फ़ उन्हीं किसानों को मदद मिलती है जिनका प्रीमियम घटना से पहले कट चुका हो। बीमा कंपनी या बैंक इसे पोर्टल या बैंक से जाँचते हैं, आमतौर पर दो दिन के भीतर।

तीसरे दिन के बाद: बीमा कंपनी को क्या करना है

स्थानीय आपदा के लिए दिशानिर्देश की समय-सारणी साफ़ है। सीधे क्रम में:

चरणकौन करेगासमय-सीमा
सूचना आगे भेजना (अगर बैंक/अधिकारी को दी हो)बैंक, PACS या कृषि कार्यालयसूचना मिलने के 48 घंटे में
नुकसान आँकने वाले की नियुक्तिबीमा कंपनीसूचना के 48 घंटे में
प्रभावित क्षेत्र का प्रतिशत निकालनाज़िला स्तरीय संयुक्त समितिआकलनकर्ता की नियुक्ति के 10 दिन में
आपके खेत का अलग से आकलन (जब प्रभावित क्षेत्र कुल बोए क्षेत्र के 25% से कम हो)बीमा कंपनी और ब्लॉक कृषि अधिकारीआकलनकर्ता की नियुक्ति के 10 दिन में
बैंक से आपके विवरण की जाँचबीमा कंपनीआपकी सूचना के 7 दिन में
आकलन रिपोर्ट तैयार कर क्लेम अपलोड करनाबीमा कंपनीसर्वे के 7 दिन में
क्लेम की राशि बैंक खाते मेंबीमा कंपनीआकलन रिपोर्ट के 15 दिन में

भुगतान की एक शर्त है: बीमा कंपनी को राज्य और केंद्र की प्रीमियम सब्सिडी की कम से कम पहली किस्त मिल चुकी हो। यह भी याद रखें कि 15 दिन आकलन रिपोर्ट के बाद गिने जाते हैं, आपकी सूचना के बाद नहीं। सारे चरण जोड़ने पर एक साफ़-सुथरे क्लेम में भी लगभग एक महीना या उससे ज़्यादा लग सकता है। इससे जल्दी की उम्मीद न रखें।

अगर आपके इलाके के बहुत से किसान प्रभावित हों? अगर प्रभावित क्षेत्र कुल बोए क्षेत्र के 25% से ज़्यादा हो, तो क्लेम मौसम और दूसरे संकेतकों पर आधारित क्षेत्र-आधारित तरीके से तय होता है। साथ ही, अगर आपके बीमा-क्षेत्र की उपज-आधारित राशि स्थानीय नुकसान आकलन से ज़्यादा बनती है, तो दोनों में से ज़्यादा राशि मिलती है।

कितना पैसा मिलेगा? प्रति एकड़ कोई तय राशि नहीं होती। यह आपकी फसल की बीमित राशि, आकलन में निकले नुकसान के प्रतिशत और आपके बीमित क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। घबराने से पहले पॉलिसी रसीद से अपनी बीमित राशि देख लें।

जब क्लेम में गड़बड़ हो

ज़्यादातर दिक़्क़तें चार तरह की होती हैं। हर एक में क्या करें:

"आपका प्रीमियम नहीं दिख रहा।" pmfby.gov.in पर रसीद नंबर से आवेदन की स्थिति देखें। अगर बैंक ने पैसा काटा है पर बीमा कंपनी के पास कुछ नहीं दिखता, तो बैंक की स्टेटमेंट लेकर शाखा प्रबंधक और ज़िला कृषि अधिकारी के पास जाएँ। दिशानिर्देशों के अनुसार बीमा कंपनी के कहने पर बैंक को 48 घंटे में प्रीमियम भुगतान की पुष्टि देनी होती है।

"आपने समय पर सूचना नहीं दी।" फिर भी सूचना दें। अपने ब्लॉक या ज़िला कृषि अधिकारी से कहें कि जिस दिन आपको नुकसान का पता चला वह तारीख़ और उस दिन का मौसम या ख़बर का रिकॉर्ड दर्ज करें। देर से सूचना एक जोखिम है, पक्की अस्वीकृति नहीं, लेकिन नतीजे का भरोसा न बाँधें।

"सर्वेयर आया ही नहीं।" टिकट नंबर के साथ 14447 पर फ़ोन करें और बताएँ कि 48 घंटे की नियुक्ति-सीमा निकल चुकी है। उसी दिन ज़िला कृषि अधिकारी को लिखित में दें और उसकी कॉपी रखें।

"राशि बहुत कम है या क्लेम अस्वीकार हो गया।" लिखित कारण और अपने खेत का आकलन विवरण माँगें। रिपोर्ट में दर्ज खसरा नंबर और क्षेत्रफल को अपने काग़ज़ों से मिलाएँ, क्योंकि गलत खेत-संख्या से बहुत सी गलतियाँ होती हैं।

शिकायत की सीढ़ी

दिशानिर्देशों ने शिकायत की एक सीढ़ी बनाई है, और हर पायदान की समय-सीमा है:

  1. हेल्पलाइन 14447 या पोर्टल। शिकायत का अलग टिकट नंबर बनता है और समाधान के अनुमानित समय का SMS आता है।
  2. तहसील/ज़िले का शिकायत अधिकारी (आमतौर पर कृषि या बागवानी अधिकारी)। उन्हें 7 दिन में शिकायत दर्ज कर जवाब देना होता है।
  3. ज़िला स्तरीय शिकायत निवारण समिति, जिसके अध्यक्ष ज़िला कलेक्टर होते हैं और जिसमें बैंक, नाबार्ड, बीमा कंपनी, किसान और कृषि विभाग के सदस्य होते हैं। यह 15 दिन में मामला निपटाती है। अगर समिति 7 दिन में आपकी शिकायत पर चर्चा ही न करे, तो आप सीधे राज्य स्तर पर जा सकते हैं।
  4. राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति, ज़िला समिति के फ़ैसले के 15 दिन के अंदर। ₹25 लाख से बड़े या कई ज़िलों को प्रभावित करने वाले मामले सीधे यहाँ भी जा सकते हैं।

हर शिकायत काग़ज़ पर भी लिखें, तारीख़ डालें और पावती लें।

उपज-आधारित क्लेम में देरी पर जुर्माना

कटाई प्रयोग के आँकड़ों से तय होने वाले खड़ी फसल के नुकसान के लिए दिशानिर्देश कहते हैं कि स्वीकार किए गए क्लेम तय अंतिम तारीख़ तक चुकाने होंगे, वरना राज्य द्वारा उपज के आँकड़े पोर्टल पर डालने के 30 दिन बाद से बकाया स्वीकृत क्लेम पर बीमा कंपनी को साल के 12% की दर से दंड-ब्याज देना होगा (बशर्ते राज्य अपनी प्रीमियम सब्सिडी जारी कर चुका हो)। ब्याज की गणना राज्य करता है और बीमा कंपनी को बताता है। यह नियम उपज-आधारित क्लेम के लिए है, खेत-स्तर के स्थानीय क्लेम के लिए नहीं, इसलिए इसे गलत जगह न बोलें।

काग़ज़ों के साथ रखने वाली एक पन्ने की सूची

  • पॉलिसी रसीद और आवेदन नंबर फ़ोन में सुरक्षित
  • बीमित खसरा नंबर और बीमित राशि लिखी हुई
  • हेल्पलाइन 14447 कॉन्टैक्ट में सेव
  • सीज़न शुरू होने से पहले क्रॉप इंश्योरेंस ऐप इंस्टॉल और लॉगिन
  • नुकसान होते ही 72 घंटे में सूचना दें, टिकट नंबर लिख लें
  • तारीख़ वाली फ़ोटो और हो सके तो अख़बार की कटिंग
  • सर्वे होने तक खराब हिस्से को साफ़ न करें
  • एक हफ़्ते में कुछ न हो तो दोबारा फ़ोन करें और ज़िला कृषि अधिकारी को लिखें

PMFBY के नियम, कवर और तारीख़ें राज्य और सीज़न के हिसाब से अधिसूचित होते हैं, और ऊपर की जानकारी केंद्र के प्रकाशित दिशानिर्देशों पर आधारित है। इसे मार्गदर्शन समझें, आधिकारिक अधिसूचना का विकल्प नहीं। क्लेम में मदद के लिए साफ़ काग़ज़ बहुत काम आते हैं, इसलिए भारत में भूमि रिकॉर्ड को समझें और फार्म रिकॉर्ड कीपिंग भी पढ़ें।

PMFBYफसल बीमाफसल नुकसान क्लेमसरकारी योजनाएँ
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Frequently asked questions

PMFBY में फसल नुकसान की सूचना कितने घंटे में देनी होती है?

स्थानीय आपदा (ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, बादल फटना, आसमानी बिजली से आग) और कटाई के बाद के नुकसान में घटना के 72 घंटे के भीतर सूचना देनी होती है। पूरे इलाके में फैले सूखे जैसे नुकसान के लिए अलग से सूचना देना ज़रूरी नहीं है।

नुकसान की सूचना कहाँ दे सकते हैं?

सरकारी दिशानिर्देशों में क्रॉप इंश्योरेंस ऐप और टोल-फ्री हेल्पलाइन (14447) को पहला तरीका बताया गया है। आप बीमा कंपनी, अपनी बैंक शाखा या स्थानीय कृषि विभाग को भी बता सकते हैं; बैंक या अधिकारी को यह सूचना 48 घंटे में बीमा कंपनी तक पहुँचानी होती है।

अगर 72 घंटे में सूचना देना भूल गया तो क्या क्लेम मिलेगा?

स्थानीय और कटाई-बाद के नुकसान में क्लेम सूचना पर टिका होता है, इसलिए देर से सूचना देने पर क्लेम खतरे में पड़ जाता है। फिर भी नुकसान दिखते ही सूचना दें, घटना का सबूत रखें और ज़िला कृषि अधिकारी से शिकायत दर्ज करवाएँ।

स्थानीय नुकसान का क्लेम मिलने में कितना समय लगता है?

दिशानिर्देश की समय-सारणी में बीमा कंपनी को नुकसान आँकने वाला नियुक्त करने के लिए 48 घंटे, उसके बाद 10 दिन में आकलन और आकलन रिपोर्ट के 15 दिन में भुगतान की समय-सीमा है, बशर्ते सरकार की प्रीमियम सब्सिडी की पहली किस्त मिल चुकी हो।

क्लेम अटक जाए तो शिकायत कहाँ करें?

पहले हेल्पलाइन 14447 या ज़िले के शिकायत अधिकारी से संपर्क करें, जिन्हें 7 दिन में जवाब देना होता है। संतुष्ट न हों तो कलेक्टर की अध्यक्षता वाली ज़िला स्तरीय शिकायत निवारण समिति और फिर राज्य स्तरीय समिति में जाएँ।

लेखक

Vaibhav Dhama

संस्थापक, टेक्निकल किसान

वैभव धामा टेक्निकल किसान के संस्थापक हैं। वे बागपत, उत्तर प्रदेश से लिखते हैं — आईसीएआर और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की सलाह, सरकारी योजना अधिसूचनाओं और लाइव मंडी भाव के आधार पर।

  • बागपत, उत्तर प्रदेश से लिखते हैं
  • पेशे से सॉफ़्टवेयर डेवलपर (BTech, 2021)
  • कृषि विशेषज्ञ नहीं — अपने KVK से पुष्टि करें
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