बलराम — भूमिहीन कृषक ऋण एवं संसाधन संवर्धन मॉडल
भूमिहीन किसानों और बटाईदारों के लिए संयुक्त देयता समूह (JLG) को ₹1.6 लाख तक फसल ऋण — ज़मीन के कागज़ात की ज़रूरत नहीं।
संचालक: कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग, ओडिशा सरकार
- JLG को ऋण
- ₹1.6 लाख तक / सीज़न
- JLG का आकार
- 5–7 भूमिहीन किसान
- लक्ष्य
- 7 लाख किसान, ₹1,040 करोड़ कर्ज़
- शुरुआत
- 3 जुलाई 2020
परिचय
ओडिशा की खेती-योग्य ज़मीन का लगभग एक तिहाई हिस्सा बटाईदार और मौखिक पट्टेदार जोतते हैं, लेकिन इनमें से ज़्यादातर के पास ज़मीन का कोई कागज़ात नहीं होता — इसलिए बैंक से फसल ऋण मिलना लगभग नामुमकिन रहता है। बलराम योजना 3 जुलाई 2020 को खास इसी कमी को पूरा करने के लिए शुरू की गई। यह भारत की पहली राज्य योजना है जो पूरी तरह भूमिहीन किसानों की कर्ज़ ज़रूरतों के हिसाब से बनाई गई है।
तरीका संयुक्त देयता समूह (JLG) का है: पाँच से सात भूमिहीन किसान मिलकर एक समूह बनाते हैं, और यह समूह ही ज़मानत का काम करता है — ज़मीन का पट्टा नहीं। बैंक इस समूह को एक फसल सीज़न में ₹1.6 लाख तक का फसल ऋण देता है। यह योजना NABARD और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सहयोग से बनाई गई। शुरुआत में लक्ष्य 1.4 लाख JLG बनाकर 7 लाख भूमिहीन किसानों को जोड़ना और दो साल में ₹1,040 करोड़ बैंक कर्ज़ पहुँचाना था।
ज़मीनी स्तर पर ग्राम पंचायत के कृषक साथी पात्र बटाईदारों की पहचान करते हैं, JLG बनवाते हैं और समूहों को बैंक से जोड़ते हैं। KALIA डेटाबेस — जिसे ग्राम सभा से सत्यापित किया गया है — किसानों की पहचान का आधार है। राज्य स्तर पर IMAGE और ज़िला स्तर पर ATMA इसे चलाता है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- संयुक्त देयता समूह को हर सीज़न ₹1.6 लाख तक फसल ऋण — बिना ज़मीन गिरवी रखे।
- समूह-आधारित कर्ज़: JLG ही ज़मानत है, इसलिए भूमिहीन किसान पहली बार बैंक कर्ज़ पा सकता है।
- कृषक साथी और ATMA से गाँव स्तर पर प्रशिक्षण और मदद।
- बटाईदारों का औपचारिक क्रेडिट रिकॉर्ड बनता है, जिससे आगे बैंकिंग सेवाएँ आसान हो जाती हैं।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- ओडिशा में खेती करने वाला भूमिहीन किसान, बटाईदार या मौखिक पट्टेदार
- KALIA डेटाबेस या ग्राम सभा से सत्यापित
- 5–7 सदस्यों का संयुक्त देयता समूह (JLG) बनाने या उसमें शामिल होने को तैयार
- किसी भी मौजूदा बैंक ऋण में डिफॉल्टर न हो
शामिल नहीं
- जिन किसानों के पास खेती-योग्य ज़मीन है (वे सामान्य KCC ऋण ले सकते हैं)
- मौजूदा बैंक ऋण में डिफॉल्टर
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- बैंक खाता पासबुक
- KALIA लाभार्थी आईडी (अगर हो)
- बटाईदार / मौखिक पट्टेदार होने का ग्राम सभा सत्यापन
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
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कृषक साथी द्वारा पहचान
ग्राम पंचायत स्तर पर कृषक साथी KALIA डेटाबेस और ग्राम सभा सत्यापन से पात्र भूमिहीन किसानों और बटाईदारों की पहचान करता है।
- 2
JLG गठन
पाँच से सात पात्र किसान मिलकर संयुक्त देयता समूह बनाते हैं। कृषक साथी और ATMA कर्मचारी समूह बनाने और कागज़ात तैयार करने में मदद करते हैं।
- 3
बैंक से जुड़ाव और ऋण मंज़ूरी
JLG को भाग लेने वाली बैंक शाखा से जोड़ा जाता है। बैंक समूह का मूल्यांकन करके प्रति सीज़न ₹1.6 लाख तक का फसल ऋण मंज़ूर करता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- JLG गठन में देरी, बैंक-लिंकेज की समस्या या मंज़ूर ऋण न मिलने पर ब्लॉक कृषि अधिकारी और ज़िला ATMA कार्यालय से बात करें। कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग तक agri.odisha.gov.in पर पहुँचा जा सकता है।
- विभाग से आगे, ओडिशा E-अभियोग (CM शिकायत प्रकोष्ठ) — cmgcodisha.gov.in पर 24×7 उपलब्ध, 24 घंटे में पहली प्रतिक्रिया, शिकायत ट्रैक की जा सकती है। जनसुनानी (janasunani.odisha.gov.in) भी एक और शिकायत माध्यम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इस ऋण के लिए ज़मीन का कागज़ात चाहिए?
नहीं। बलराम योजना का मकसद ही यही है। संयुक्त देयता समूह (JLG) ज़मीन के कागज़ात की जगह ज़मानत का काम करता है। बटाईदार और मौखिक पट्टेदार जिनके पास ज़मीन के कागज़ नहीं हैं — वही इसके मुख्य लाभार्थी हैं।
JLG और SHG में क्या फ़र्क है?
स्वयं सहायता समूह (SHG) पहले बचत करता है फिर उधार लेता है; JLG में पहले बचत की ज़रूरत नहीं। JLG सदस्य एक-दूसरे के ऋण की ज़िम्मेदारी लेते हैं — संयुक्त देयता — इसलिए बैंक समूह को एक इकाई मानकर कर्ज़ देता है।
ऋण पर ब्याज दर कितनी है?
बैंक अपनी मौजूदा फसल ऋण ब्याज दर पर कर्ज़ देता है। पात्र किसानों को केंद्र सरकार की ब्याज छूट का भी फ़ायदा मिलता है — समय पर चुकाने पर प्रभावी दर 4% तक हो सकती है।
क्या KALIA लाभार्थी JLG में शामिल हो सकता है?
हाँ। KALIA डेटाबेस का इस्तेमाल बलराम के पात्र भूमिहीन किसानों की पहचान के लिए ही किया जाता है। KALIA लाभार्थी होना पात्रता में मदद करता है।
एक JLG में कितने सदस्य चाहिए?
कम से कम पाँच। दिशा-निर्देशों के अनुसार एक समूह में सात सदस्य तक हो सकते हैं। सभी सदस्य भूमिहीन किसान या बटाईदार होने चाहिए।
अगर कोई सदस्य कर्ज़ नहीं चुका पाए तो?
JLG के बाकी सदस्य संयुक्त रूप से ज़िम्मेदार हैं — उन्हें कमी पूरी करनी होती है। यह आपसी ज़मानत ही ज़मीन की ज़मानत की जगह लेती है।
क्या यह योजना अभी चल रही है?
हाँ। बलराम जुलाई 2020 में शुरू हुई और जारी है। JLG गठन और बैंक लिंकेज ओडिशा के सभी ज़िलों में कृषक साथी और ATMA के ज़रिए चल रहा है।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को agri.odisha.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
