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पंजाबअनुदानसक्रियअपडेट 8 अक्टूबर 2026

बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज सब्सिडी (पंजाब)

PAU-सिफ़ारिश बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज पर 33% सब्सिडी, हर किसान को 5 एकड़ या 10 पैकेट तक, ताकि कपास पट्टी में कपास लौटे।

संचालक: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब सरकार

सब्सिडी
बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज पर 33%
प्रति-किसान सीमा
5 एकड़ / 10 पैकेट तक
आवंटन
~₹20 करोड़ (2025)
शर्त
सिर्फ़ PAU-सिफ़ारिश हाइब्रिड

त्वरित सारांश

इस पेज की मुख्य बातें लगभग दो मिनट में — पढ़ें या सुनें।

त्वरित सारांश

यह पंजाब की राज्य सब्सिडी है जो बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज की क़ीमत एक-तिहाई घटा देती है, और सीधे दक्षिण-पश्चिमी कपास पट्टी के लिए है जहाँ किसानों के धान की ओर जाने से कपास का रकबा घट रहा था। राज्य की चिंता दो तरफ़ है: धान भूजल सोख रहा है, और घटता कपास रकबा उसके इर्द-गिर्द बनी पूरी जिनिंग-कपड़ा श्रृंखला को कमज़ोर करता है। इसलिए सरकार बीज की लागत का हिस्सा चुकाकर कपास को फिर आकर्षक बनाती है।

सब्सिडी बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज पर 33% है — पर सिर्फ़ उन हाइब्रिड पर जो पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना सिफ़ारिश करता है, बाज़ार का कोई भी पैकेट नहीं। यह शर्त जानबूझकर है: पड़ोसी राज्यों से आया सस्ता, ग़ैर-सिफ़ारिशी या नक़ली बीज कपास किसानों को पहले नुक़सान दे चुका है, इसलिए राज्य अपना पैसा जाँचे-परखे बीजों से जोड़ता है। लाभ हर किसान के लिए सीमित है — 5 एकड़ तक, या 10 पैकेट — ताकि कुछ बड़े खेतों के बजाय कई छोटे किसानों तक फैले।

किसान PAU-सिफ़ारिश बीज मंज़ूर चैनल से ख़रीदता है, असली ख़रीद बिल संभालता है, और सब्सिडी उस मौसम की विभागीय प्रक्रिया के अनुसार समायोजित या स्थानांतरित होती है। चूँकि योजना कपास बुवाई की खिड़की से जुड़ी है, नियम और सिफ़ारिशी हाइब्रिड की सूची हर साल नई जारी होती है — ख़रीदने से पहले मौजूदा मौसम की अधिसूचना और सिफ़ारिशी-किस्म सूची अपने ब्लॉक / मुख्य कृषि अधिकारी से जाँच लें।

परिचय

पंजाब ने बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज सब्सिडी की घोषणा अप्रैल 2025 में फसल-विविधीकरण की अपनी मुहिम के हिस्से के रूप में की। राज्य बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज की लागत का 33% वहन करेगा, पर सिर्फ़ उन हाइब्रिड के लिए जो पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना सिफ़ारिश करता है। कृषि मंत्री ने आवंटन क़रीब ₹20 करोड़ बताया, और विभाग ने उस साल राज्य का कपास रकबा कम-से-कम 1.25 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा।

लाभ हर किसान के लिए अधिकतम पाँच एकड़, या कपास बीज के दस पैकेट (हर पैकेट क़रीब 475 ग्राम) तक सीमित है — यह जानबूझकर रखी गई सीमा है ताकि पैसा मालवा कपास पट्टी के कई छोटे किसानों तक पहुँचे, न कि कुछ बड़े खेतों तक। किसानों से असली ख़रीद बिल संभालने को कहा गया है, और विभाग को निर्देश दिया गया कि बिक्री की निगरानी व जाँच करे ताकि पड़ोसी राज्यों से आ रहा नक़ली बीज रुके।

यह योजना एक बड़ी विविधीकरण कोशिश के भीतर है जो रकबे को पानी-खपाऊ धान से हटाना चाहती है — उसी बजट चक्र में मक्का और सीधी बुवाई वाले धान (DSR) के लिए भी प्रोत्साहन थे। चूँकि यह कपास बुवाई के मौसम से जुड़ी है, दर, प्रति-किसान सीमा और PAU-सिफ़ारिश हाइब्रिड की सूची हर साल नए सिरे से जारी होती है, इसलिए मौजूदा शर्तें मौसम की आधिकारिक अधिसूचना से पक्की कर लें।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • खरीफ़ कपास फसल के लिए बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज की लागत पर 33% छूट।
  • PAU, लुधियाना-सिफ़ारिश हाइब्रिड पर लागू — जाँचे-परखे बीज, कोई भी पैकेट नहीं।
  • पानी की तंगी वाली मालवा पट्टी में कपास लौटाने की इनपुट लागत घटाता है।
  • प्रति-किसान सीमा (5 एकड़ / 10 पैकेट) लाभ को कई छोटे किसानों तक फैलाती है।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • पंजाब का कपास किसान, मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी कपास पट्टी
  • PAU, लुधियाना-सिफ़ारिश बीटी कॉटन हाइब्रिड ख़रीद रहा हो
  • 5 एकड़ / 10 पैकेट की प्रति-किसान सीमा के भीतर
  • असली बीज ख़रीद बिल संभाले हुए

शामिल नहीं

  • PAU-सिफ़ारिश सूची से बाहर के कपास हाइब्रिड
  • 5 एकड़ / 10 पैकेट की प्रति-किसान सीमा से ज़्यादा ख़रीद

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड
  • भूमि रिकॉर्ड (कपास रकबा)
  • असली बीज ख़रीद बिल
  • बैंक पासबुक

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

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    मौसम की सिफ़ारिशी-किस्म सूची जाँचें

    इस मौसम PAU कौन-से बीटी कॉटन हाइब्रिड सिफ़ारिश करता है और मौजूदा सब्सिडी शर्तें — अपने ब्लॉक / मुख्य कृषि अधिकारी से पक्की करें।

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    मंज़ूर चैनल से ख़रीदें और बिल रखें

    PAU-सिफ़ारिश बीज ख़रीदें और असली ख़रीद बिल संभालें — सब्सिडी के लिए यह ज़रूरी है।

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    विभागीय प्रक्रिया से सब्सिडी लें

    33% सब्सिडी उस मौसम की विभागीय अधिसूचना के अनुसार समायोजित या स्थानांतरित होती है, 5 एकड़ / 10 पैकेट सीमा के भीतर।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • सही ख़रीद के बाद सब्सिडी समायोजित या न मिलने पर, या अगर आपको PAU-ग़ैर-सिफ़ारिशी बीज बेचा गया हो — अपने ब्लॉक कृषि अधिकारी और ज़िले के मुख्य कृषि अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब (agri.punjab.gov.in) के पास बात रखें। असली बिल और किस्म का नाम संभालकर रखें।
  • विभाग से आगे, पंजाब का एकीकृत शिकायत रास्ता इस्तेमाल करें — Connect Punjab (connect.punjab.gov.in), एकल हेल्पलाइन 1100, m-Sewa ऐप, या कोई भी सेवा केंद्र, जो सभी विभागों को कवर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सब्सिडी कितनी है?

बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज की लागत का 33%, अप्रैल 2025 में क़रीब ₹20 करोड़ आवंटन के साथ घोषित। प्रति-पैकेट सही राशि उस मौसम के बीज दाम पर निर्भर करती है।

क्या कोई भी बीटी कॉटन बीज ख़रीदकर सब्सिडी मिलेगी?

नहीं। सब्सिडी सिर्फ़ पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा सिफ़ारिश बीटी कॉटन हाइब्रिड पर लागू है। यह पड़ोसी राज्यों से आ रहे सस्ते, ग़ैर-परखे या नक़ली बीज को रोकने के लिए है।

कितना दावा कर सकता हूँ, कोई सीमा है?

हाँ — हर किसान को पाँच एकड़, या दस पैकेट बीज (हर पैकेट क़रीब 475 ग्राम) तक। सीमा का मकसद है लाभ कई छोटे किसानों तक फैलाना।

पंजाब कपास बीज पर सब्सिडी क्यों दे रहा है?

दक्षिण-पश्चिमी पट्टी में कपास फिर बढ़ाने और रकबे को पानी-खपाऊ धान से हटाने के लिए। विभाग ने 2025 में कपास रकबा कम-से-कम 1.25 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा।

क्या ख़रीद बिल संभालना ज़रूरी है?

हाँ। किसानों से बीज का असली ख़रीद बिल संभालने को कहा गया है — इसी से दावे की पुष्टि होती है और यह ट्रैक होता है कि सिफ़ारिशी बीज ख़रीदा गया।

इस साल की शर्तें कहाँ पक्की करूँ?

अपने ब्लॉक या मुख्य कृषि अधिकारी से। दर, सीमा और PAU-सिफ़ारिश हाइब्रिड सूची हर कपास मौसम नए सिरे से जारी होती है।

तथ्य 8 अक्टूबर 2026 को agri.punjab.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.